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एक सोशल मीडिया पोस्ट की छवि सामने आई है, जिसमें स्क्रीन पर उपयोगकर्ताओं की टिप्पणियां प्रदर्शित हैं। ये टिप्पणियां सनातन धर्म और उससे संबंधित राजनीतिक विचारों पर चर्चा से जुड़ी हुई हैं। यह मूल पोस्ट दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्थित प्रतीत होता है।
Reporter Shahnawaz
एक सोशल मीडिया पोस्ट की छवि सामने आई है, जिसमें स्क्रीन पर उपयोगकर्ताओं की टिप्पणियां प्रदर्शित हैं। ये टिप्पणियां सनातन धर्म और उससे संबंधित राजनीतिक विचारों पर चर्चा से जुड़ी हुई हैं। यह मूल पोस्ट दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्थित प्रतीत होता है।
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- पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का देर रात एक संदेश सामने आया है। इस संदेश में जल्दी ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के होने की बात कही गई है।1
- सोनम वांगचुक ने दो केंद्रीय मंत्रियों और अपनी पत्नी की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद अब कल का दिन इस आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे आंदोलन की आगे की दिशा और लाइन-लेंथ तय होगी।1
- पेपर लीक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में दोषियों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी।1
- आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।1
- लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।1