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आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।

3 hrs ago
user_Raaz
Raaz
Delhi Cantonment, New Delhi•
3 hrs ago

आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।

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  • पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।
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    पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा।

इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा।

दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।
    user_Vishal Sharma journalist
    Vishal Sharma journalist
    Media company Chanakya Puri, New Delhi•
    44 min ago
  • अनशन के नाम पर पूरी तरह से झूठा ढोंग किया गया है। असलियत यह है कि अनशन पर बैठा यह ढोंगी बाबा आराम से लेटकर सब कुछ खा-पी रहा है।
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    अनशन के नाम पर पूरी तरह से झूठा ढोंग किया गया है। असलियत यह है कि अनशन पर बैठा यह ढोंगी बाबा आराम से लेटकर सब कुछ खा-पी रहा है।
    user_Ravi Kashyap
    Ravi Kashyap
    Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।
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    आंदोलन के दिन एक छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ, जिसे लेकर वह बेहद आक्रोश में नज़र आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा का यह बेहद गुस्से और आक्रोश से भरा रूप देखने को मिला है।
    user_Raaz
    Raaz
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
  • चयनित छवि में मौजूद पाठ में वर्तमान भारतीय सरकार, देश के लोकतंत्र और पुलिस की कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए राजनीतिक टिप्पणी की गई है। इस पूरी टिप्पणी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया गया है।
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    चयनित छवि में मौजूद पाठ में वर्तमान भारतीय सरकार, देश के लोकतंत्र और पुलिस की कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए राजनीतिक टिप्पणी की गई है। इस पूरी टिप्पणी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया गया है।
    user_Reporter Shahnawaz
    Reporter Shahnawaz
    Local News Reporter Karol Bagh, Central Delhi•
    5 hrs ago
  • सालारपुर की गली नंबर 10 में अब तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क न बनी होने के कारण इस गली से होकर आने-जाने वाले लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते की खस्ताहाली की वजह से राहगीरों को आवाजाही करने में काफी असुविधा हो रही है।
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    सालारपुर की गली नंबर 10 में अब तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क न बनी होने के कारण इस गली से होकर आने-जाने वाले लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते की खस्ताहाली की वजह से राहगीरों को आवाजाही करने में काफी असुविधा हो रही है।
    user_Afshar Raja
    Afshar Raja
    Taxi Driver कोतवाली, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • कांठ के बेगमपुर में लंबे समय से मुख्य रास्ते का निर्माण न होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान काशीराम से कई बार शिकायत करने और मांग उठाने के बावजूद आज तक रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा की वजह से गांव के लोगों को हर दिन आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, क्योंकि मुख्य रास्ते पर कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी जमा हो जाता है। जलभराव के चलते लोगों के घरों की दीवारों पर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले कीड़े दिखाई देने लगते हैं। गांव के कई परिवारों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलकर कई लोग गिर चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। इस बदहाली के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, काम पर जाने वाले लोगों और बुजुर्गों व मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अन्य वाहन भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन इस मामले में उनकी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तुरंत संज्ञान लेकर रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष उग्र प्रदर्शन करने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूर होंगे।
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    कांठ के बेगमपुर में लंबे समय से मुख्य रास्ते का निर्माण न होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान काशीराम से कई बार शिकायत करने और मांग उठाने के बावजूद आज तक रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा की वजह से गांव के लोगों को हर दिन आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, क्योंकि मुख्य रास्ते पर कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी जमा हो जाता है। जलभराव के चलते लोगों के घरों की दीवारों पर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले कीड़े दिखाई देने लगते हैं। गांव के कई परिवारों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलकर कई लोग गिर चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। इस बदहाली के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, काम पर जाने वाले लोगों और बुजुर्गों व मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अन्य वाहन भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते हैं।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन इस मामले में उनकी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तुरंत संज्ञान लेकर रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष उग्र प्रदर्शन करने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूर होंगे।
    user_BEBAAK NEWS ONLINE
    BEBAAK NEWS ONLINE
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    7 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।
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    लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है।

मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।
    user_AIB Hindi
    AIB Hindi
    Media house चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
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