दिल्ली के स्वतंत्र विचारक और समाजसेवी विजय प्रधान ने, जिन्हें 'दिल्ली का शेर' भी कहा जा रहा है, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टर संजय वर्मा के माध्यम से 'आज की सच्ची खबर' में बताया गया कि विजय प्रधान पिछले लगभग दो महीनों से बिहार में रहकर राज्य के विकास और गरीबों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। इसी कड़ी में, उन्होंने पावापुरी से लेकर पीएमसीएच पटना तक विभिन्न अस्पतालों का जायजा लिया, मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं को सुना, और स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को उजागर कर सुधार की मुहिम शुरू करने का दावा किया है। विजय प्रधान ने आरोप लगाया कि आजादी के 79 वर्षों बाद भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सकी है, जिसके कारण गरीब लोग इलाज के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त आधुनिक अस्पतालों और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके साथ ही, अस्पतालों की सीमित संख्या, डॉक्टरों का असहयोगात्मक व्यवहार, तथा आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। प्रधान ने बताया कि अधिकांश मरीजों को दवाइयां और जांच सेवाएं अस्पताल के बाहर से लेनी पड़ती हैं। उन्होंने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। विजय प्रधान के अनुसार, यदि बिहार के 40 सांसद और 243 विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति गंभीरता से कार्य करते, तो स्थिति कहीं बेहतर हो सकती थी। उन्होंने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के आधुनिकीकरण, प्रत्येक जिले में बेहतर अस्पतालों की स्थापना और गरीबों को सुलभ तथा गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रधान ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की इस मुहिम को राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुँचाया जाएगा।
दिल्ली के स्वतंत्र विचारक और समाजसेवी विजय प्रधान ने, जिन्हें 'दिल्ली का शेर' भी कहा जा रहा है, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टर संजय वर्मा के माध्यम से 'आज की सच्ची खबर' में बताया गया कि विजय प्रधान पिछले लगभग दो महीनों से बिहार में रहकर राज्य के विकास और गरीबों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। इसी कड़ी में, उन्होंने पावापुरी से लेकर पीएमसीएच पटना तक विभिन्न अस्पतालों का जायजा लिया, मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं को सुना, और स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को उजागर कर सुधार की मुहिम शुरू करने का दावा किया है। विजय प्रधान ने आरोप लगाया कि आजादी के 79 वर्षों बाद भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सकी है, जिसके कारण गरीब लोग इलाज के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त आधुनिक अस्पतालों और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके साथ ही, अस्पतालों की सीमित संख्या, डॉक्टरों का असहयोगात्मक व्यवहार, तथा आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। प्रधान ने बताया कि अधिकांश मरीजों को दवाइयां और जांच सेवाएं अस्पताल के बाहर से लेनी पड़ती हैं। उन्होंने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। विजय प्रधान के अनुसार, यदि बिहार के 40 सांसद और 243 विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति गंभीरता से कार्य करते, तो स्थिति कहीं बेहतर हो सकती थी। उन्होंने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के आधुनिकीकरण, प्रत्येक जिले में बेहतर अस्पतालों की स्थापना और गरीबों को सुलभ तथा गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रधान ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की इस मुहिम को राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुँचाया जाएगा।
- नवादा शहर में मुहर्रम पर्व के अवसर पर रविवार को मुस्लिम रोड स्थित कसाई मोहल्ला से ताजिया निर्माण के लिए मिट्टी लाने हेतु एक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और उन्होंने पारंपरिक तरीके से मुहर्रम की रस्मों का पालन किया। जुलूस कसाई मोहल्ला से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए निर्धारित स्थल तक पहुँचा, जहाँ से ताजिया बनाने के लिए मिट्टी लाई गई। इस दौरान युवाओं और बुजुर्गों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। जुलूस के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहे। प्रशासन ने लोगों से आपसी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुहर्रम का पर्व मनाने की अपील की। शहर के विभिन्न इलाकों में मुहर्रम को लेकर धार्मिक गतिविधियाँ जारी हैं और ताजिया निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है।1
- ललित शर्मा नामक व्यक्ति पर मुस्लिम महिलाओं का गर्भ चीरकर उनके बच्चों को मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। इस आरोप के सामने आने के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह एक आतंकी सोच नहीं है और क्या इससे अधिक घिनौना व्यक्ति कोई हो सकता है। इस मामले में देश के महिला आयोग और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, कि ऐसे व्यक्ति को अब तक जेल में क्यों नहीं डाला गया है। पोस्ट में यह स्पष्ट मांग की गई है कि सभ्य समाज में ऐसी हिंसक और नफरत भरी मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि कानून और संविधान से बड़ा कोई नहीं है। प्रशासन और पुलिस से आग्रह किया गया है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए और समाज में शांति बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। आगे यह भी सवाल किया गया है कि जो लोग सरेआम नफरत और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ रहे हैं, क्या उनके लिए डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर साहब द्वारा लिखी गई कानून की किताबों का कोई महत्व नहीं है। यह चिंता भी व्यक्त की गई है कि क्या भारत में अब कोई ऐसा IAS, IPS या पुलिस अधिकारी नहीं बचा है जो इन जैसे गुंडों को हवालात की हवा खिलाकर देश में शांति बनाए रख सके।1
- नवादा जिले के रजौली अनुमंडल के कर्बला नगर में मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही इमामबाड़े अगरबत्ती, गुलाब पानी और इत्र की खुशबू से महक उठे हैं। इस खास अवसर पर इमामबाड़ा के पास लोग डंके बजाते हुए देखे जा रहे हैं, जो मोहर्रम के आयोजनों की शुरुआत का संकेत है। आने वाले दिनों में मोहर्रम से जुड़े विभिन्न अनुष्ठान होंगे। मोहर्रम के पांचवें दिन, यानी 21 जून 2026 रविवार को, इमामबाड़ा पर मिट्टी की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद 23 जून 2026 मंगलवार को पैकारों की टोली 'या अली या हुसैन, कर्बला दूर है, जाना जरूर है' के नारे लगाते हुए नज़र आएगी। मोहर्रम के दसवें दिन, जो 26 जून 2026 शुक्रवार को पड़ेगा, डंके-बाजे के साथ ताजिया का जुलूस निकाला जाएगा। इसी रात को, नम आँखों से कर्बला पर ताजिया को पहलाम किया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मोहर्रम में नवमी और दशमी को रोज़ा रखना खास अहमियत रखता है।1
- पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने नालंदा में एक पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान, उन्होंने पीड़ित परिवार के पैर पर अपना सिर रखा और कहा कि 'ये लोग भगवान हैं'।2
- हिसुआ में खुलेआम गुंडागर्दी और दबंगई का माहौल बनता जा रहा है, जहाँ एक वायरल वीडियो के अनुसार, हिसुआ थाना क्षेत्र में एक महिला के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की गई और पूरे परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। इस गंभीर मामले में भी प्रशासन मौन बना हुआ है। पीड़ितों को न्याय न मिलने और अपराधियों पर कानूनी कार्रवाई न होने से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का मनोबल और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा उन्हें सुरक्षा एवं न्याय प्रदान करने की गुहार लगाई है।1
- नालंदा जिले के राजगीर में दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सांसद पप्पू यादव ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया, साथ ही बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत करते हुए पप्पू यादव ने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त की, जिन्हें उन्होंने चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के परिवारों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी गहरी चिंता जताई। सांसद ने राजगीर हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पप्पू यादव के इस दौरे के बाद मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।1
- दिल्ली के स्वतंत्र विचारक और समाजसेवी विजय प्रधान ने, जिन्हें 'दिल्ली का शेर' भी कहा जा रहा है, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टर संजय वर्मा के माध्यम से 'आज की सच्ची खबर' में बताया गया कि विजय प्रधान पिछले लगभग दो महीनों से बिहार में रहकर राज्य के विकास और गरीबों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। इसी कड़ी में, उन्होंने पावापुरी से लेकर पीएमसीएच पटना तक विभिन्न अस्पतालों का जायजा लिया, मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं को सुना, और स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को उजागर कर सुधार की मुहिम शुरू करने का दावा किया है। विजय प्रधान ने आरोप लगाया कि आजादी के 79 वर्षों बाद भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सकी है, जिसके कारण गरीब लोग इलाज के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त आधुनिक अस्पतालों और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके साथ ही, अस्पतालों की सीमित संख्या, डॉक्टरों का असहयोगात्मक व्यवहार, तथा आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। प्रधान ने बताया कि अधिकांश मरीजों को दवाइयां और जांच सेवाएं अस्पताल के बाहर से लेनी पड़ती हैं। उन्होंने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। विजय प्रधान के अनुसार, यदि बिहार के 40 सांसद और 243 विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति गंभीरता से कार्य करते, तो स्थिति कहीं बेहतर हो सकती थी। उन्होंने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के आधुनिकीकरण, प्रत्येक जिले में बेहतर अस्पतालों की स्थापना और गरीबों को सुलभ तथा गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रधान ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की इस मुहिम को राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुँचाया जाएगा।1
- महाराष्ट्र के परभणी में स्थित एक हनुमान मंदिर में पूजा के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ मंदिर की छत अचानक गिर गई। इस दुखद घटना में पाँच लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु मलबे में दबकर घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया। प्रशासन ने घटना का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है, साथ ही इस हादसे के कारणों की गहन जाँच भी की जा रही है। इस हृदयविदारक घटना पर ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है।1