logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

चंबा : धामग्रा स्कूल में शिक्षक न होने पर ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार। चंबा : धामग्रा स्कूल में शिक्षक न होने पर ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा के तहत ग्राम पंचायत कोहल्डी के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक पाठशाला धामग्रा में पिछले एक साल से शिक्षक की नियुक्ति न होने के कारण ग्रामीणों ने उपायुक्त से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में स्थायी शिक्षक न होने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विभाग की ओर से कभी-कभार केवल एक या दो दिन के लिए डेपुटेशन पर शिक्षक भेजे जाते हैं, जिससे नियमित शिक्षण व्यवस्था नहीं बन पा रही। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्कूल में स्थायी शिक्षक की तैनाती करने की मांग की ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और स्कूल का संचालन सुचारू रूप से हो सके। बाइट स्थानीय निवासी।

7 hrs ago
user_Mohd Ashiq
Mohd Ashiq
Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
7 hrs ago

चंबा : धामग्रा स्कूल में शिक्षक न होने पर ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार। चंबा : धामग्रा स्कूल में शिक्षक न होने पर ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा के तहत ग्राम पंचायत कोहल्डी के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक पाठशाला धामग्रा में पिछले एक साल से शिक्षक की नियुक्ति न होने के कारण ग्रामीणों ने उपायुक्त से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में स्थायी शिक्षक न होने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विभाग की ओर से कभी-कभार केवल एक या दो दिन के लिए डेपुटेशन पर शिक्षक भेजे जाते हैं, जिससे नियमित शिक्षण व्यवस्था नहीं बन पा रही। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्कूल में स्थायी शिक्षक की तैनाती करने की मांग की ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और स्कूल का संचालन सुचारू रूप से हो सके। बाइट स्थानीय निवासी।

More news from Himachal Pradesh and nearby areas
  • चंबा: सनसनीखेज वारदात: लोथल में पति-पत्नी की मौत, पुलिस जांच में जुटी। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश चंबा । भरमौर विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील धरवाला के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोथल के गांव लोथल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या करने के बाद स्वयं आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सरवन कुमार पुत्र तानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जो काफी बढ़ गया। इसी दौरान महिला की मौत हो गई और बाद में व्यक्ति ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार अक्सर हिंसक रहता था और वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
    2
    चंबा: सनसनीखेज वारदात: लोथल में पति-पत्नी की मौत, पुलिस जांच में जुटी।
मोहम्मद आशिक 
चंबा हिमाचल प्रदेश
चंबा । भरमौर विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील धरवाला के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोथल के गांव लोथल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या करने के बाद स्वयं आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सरवन कुमार पुत्र तानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जो काफी बढ़ गया। इसी दौरान महिला की मौत हो गई और बाद में व्यक्ति ने भी फांसी लगाकर जान दे दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार अक्सर हिंसक रहता था और वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    19 min ago
  • धीमान टूर & ट्रैवलर Delhi 9816896161
    1
    धीमान टूर & ट्रैवलर
Delhi
9816896161
    user_Dhiman Taxi
    Dhiman Taxi
    नूरपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    2 hrs ago
  • किलाड़ (पांगी घाटी): जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में बुधवार को पंगवाल समुदाय का प्रमुख लोकपर्व ‘जुकारू’ एवं ‘पड़ीद’ पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। अमावस्या की रात्रि को ‘सिल्ल’ के रूप में जुकारू उत्सव की शुरुआत होती है, जबकि अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की प्रथम तिथि को पड़ीद मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है। सूर्य अर्घ्य से होता है पड़ीद का शुभारंभ पड़ीद के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। इसके बाद छोटे सदस्य घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। चरण स्पर्श से पहले ‘जेवरा’ के फूल एक-दूसरे को भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है। जेवरा गेहूं या मक्की के दानों से तैयार की गई कोमल कलियां होती हैं, जिन्हें जुकारू से लगभग 10–15 दिन पूर्व विशेष विधि से उगाया जाता है। घर का मुखिया ‘राजावली’ के समक्ष माथा टेककर प्रार्थना करता है कि समस्त नकारात्मक शक्तियां नाग लोक को प्रस्थान करें और धरती पर सुख-शांति बनी रहे। पितरों की पूजा और सूर्य अर्घ्य के बाद पशुधन को भी पकवान खिलाकर जुकारू किया जाता है। घर लौटते समय शुभ वचन कहे जाते हैं, जिनका उत्तर गृहलक्ष्मी ‘शगुन’ के रूप में देती हैं। पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव पर्व के अवसर पर पूरा परिवार एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर गले मिलता है। घर में तैयार घी मंडे और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, गृहस्वामिनी को छोड़कर, भोजपत्र में पकवान सजाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के घर ‘जुकारू भेंट’ लेकर जाते हैं। जेवरा के फूल अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मेजबान परिवार अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पकवानों, मांस और स्थानीय पेय से करता है। किलाड़ में रात दो बजे से परंपरा पांगी मुख्यालय किलाड़ में पड़ीद उत्सव की शुरुआत रात दो बजे से ही हो जाती है। प्रातःकाल लोग समीपवर्ती प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और नाग देवता को जुकारू भेंट अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में पूजा के बाद चौकी किलाड़ स्थित ऐतिहासिक राजकोठी में जाकर राजा को भी जुकारू भेंट किया जाता है। यह परंपरा राजतंत्र काल से चली आ रही है। मान्यता है कि पूर्व समय में धरवास और किरयूनी क्षेत्र के लोग भी इस अवसर पर किलाड़ पहुंचते थे, किंतु एक बार भारी हिमपात के कारण वे शामिल नहीं हो सके। तब से किलाड़ के लोगों ने इस परंपरा को अपने स्तर पर निरंतर बनाए रखा है। जेवरा फूल का विशेष महत्व जुकारू पर्व में ‘जेवरा’ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के तीसरे दिन मिट्टी में भेड़-बकरियों के बारीक गोबर को मिलाकर उसमें गेहूं और मक्की के बीज डाले जाते हैं। लगभग 10–12 दिनों में तैयार हुई इन कलियों का उपयोग 12 दिनों तक फूल के रूप में किया जाता है। स्थानीय पुजारी जयराम के अनुसार, जेवरा की कलियां जितनी अच्छी और शीघ्र तैयार होती हैं, उसे आने वाले वर्ष में अच्छी फसल का संकेत माना जाता है। पड़ीद के दिन सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। पौराणिक और लोकमान्यताएं जुकारू पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महादानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया कि माघ और फाल्गुन मास की विशेष अमावस्याओं पर पृथ्वी पर उनकी पूजा होगी। पांगी का जुकारू पर्व इसी मान्यता से जुड़ा माना जाता है। एक अन्य लोककथा के अनुसार, क्षेत्र में राणा और ठाकुरों के बीच लंबे समय तक संघर्ष रहता था। आपसी वैमनस्य को समाप्त करने और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कुछ विशेष दिन आपसी मिलन के लिए निर्धारित किए गए, जिन्हें बाद में ‘जुकारू’ नाम दिया गया। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कड़ाके की सर्दियों में सामाजिक संपर्क सीमित होने के कारण, विशेषकर विवाहित बेटियों को मायके आने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पर्व प्रारंभ हुआ। आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक जुकारू और पड़ीद केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पंगवाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पितरों की श्रद्धा, देव पूजन, पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव की यह परंपरा आज भी पांगी घाटी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे। #पांगीघाटी #किलाड़ #जुकारू #पड़ीद #पंगवालसमुदाय #जनजातीयसंस्कृति #हिमाचलप्रदेश #हिमाचलकीसंस्कृति #लोकपर्व #पारंपरिकत्योहार #देवसंस्कृति #सूर्यअर्घ्य #पितृसमर्पण #संस्कृतिकीझलक #IncredibleHimachal लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
    1
    किलाड़ (पांगी घाटी): जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में बुधवार को पंगवाल समुदाय का प्रमुख लोकपर्व ‘जुकारू’ एवं ‘पड़ीद’ पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। अमावस्या की रात्रि को ‘सिल्ल’ के रूप में जुकारू उत्सव की शुरुआत होती है, जबकि अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की प्रथम तिथि को पड़ीद मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है।
सूर्य अर्घ्य से होता है पड़ीद का शुभारंभ
पड़ीद के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। इसके बाद छोटे सदस्य घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। चरण स्पर्श से पहले ‘जेवरा’ के फूल एक-दूसरे को भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है। जेवरा गेहूं या मक्की के दानों से तैयार की गई कोमल कलियां होती हैं, जिन्हें जुकारू से लगभग 10–15 दिन पूर्व विशेष विधि से उगाया जाता है।
घर का मुखिया ‘राजावली’ के समक्ष माथा टेककर प्रार्थना करता है कि समस्त नकारात्मक शक्तियां नाग लोक को प्रस्थान करें और धरती पर सुख-शांति बनी रहे। पितरों की पूजा और सूर्य अर्घ्य के बाद पशुधन को भी पकवान खिलाकर जुकारू किया जाता है। घर लौटते समय शुभ वचन कहे जाते हैं, जिनका उत्तर गृहलक्ष्मी ‘शगुन’ के रूप में देती हैं।
पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव
पर्व के अवसर पर पूरा परिवार एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर गले मिलता है। घर में तैयार घी मंडे और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, गृहस्वामिनी को छोड़कर, भोजपत्र में पकवान सजाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के घर ‘जुकारू भेंट’ लेकर जाते हैं। जेवरा के फूल अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मेजबान परिवार अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पकवानों, मांस और स्थानीय पेय से करता है।
किलाड़ में रात दो बजे से परंपरा
पांगी मुख्यालय किलाड़ में पड़ीद उत्सव की शुरुआत रात दो बजे से ही हो जाती है। प्रातःकाल लोग समीपवर्ती प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और नाग देवता को जुकारू भेंट अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में पूजा के बाद चौकी किलाड़ स्थित ऐतिहासिक राजकोठी में जाकर राजा को भी जुकारू भेंट किया जाता है। यह परंपरा राजतंत्र काल से चली आ रही है।
मान्यता है कि पूर्व समय में धरवास और किरयूनी क्षेत्र के लोग भी इस अवसर पर किलाड़ पहुंचते थे, किंतु एक बार भारी हिमपात के कारण वे शामिल नहीं हो सके। तब से किलाड़ के लोगों ने इस परंपरा को अपने स्तर पर निरंतर बनाए रखा है।
जेवरा फूल का विशेष महत्व
जुकारू पर्व में ‘जेवरा’ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के तीसरे दिन मिट्टी में भेड़-बकरियों के बारीक गोबर को मिलाकर उसमें गेहूं और मक्की के बीज डाले जाते हैं। लगभग 10–12 दिनों में तैयार हुई इन कलियों का उपयोग 12 दिनों तक फूल के रूप में किया जाता है।
स्थानीय पुजारी जयराम के अनुसार, जेवरा की कलियां जितनी अच्छी और शीघ्र तैयार होती हैं, उसे आने वाले वर्ष में अच्छी फसल का संकेत माना जाता है। पड़ीद के दिन सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
पौराणिक और लोकमान्यताएं
जुकारू पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महादानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया कि माघ और फाल्गुन मास की विशेष अमावस्याओं पर पृथ्वी पर उनकी पूजा होगी। पांगी का जुकारू पर्व इसी मान्यता से जुड़ा माना जाता है।
एक अन्य लोककथा के अनुसार, क्षेत्र में राणा और ठाकुरों के बीच लंबे समय तक संघर्ष रहता था। आपसी वैमनस्य को समाप्त करने और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कुछ विशेष दिन आपसी मिलन के लिए निर्धारित किए गए, जिन्हें बाद में ‘जुकारू’ नाम दिया गया।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कड़ाके की सर्दियों में सामाजिक संपर्क सीमित होने के कारण, विशेषकर विवाहित बेटियों को मायके आने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पर्व प्रारंभ हुआ।
आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक
जुकारू और पड़ीद केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पंगवाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पितरों की श्रद्धा, देव पूजन, पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव की यह परंपरा आज भी पांगी घाटी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।
लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे। 
#पांगीघाटी #किलाड़ #जुकारू #पड़ीद #पंगवालसमुदाय
#जनजातीयसंस्कृति #हिमाचलप्रदेश #हिमाचलकीसंस्कृति
#लोकपर्व #पारंपरिकत्योहार #देवसंस्कृति #सूर्यअर्घ्य
#पितृसमर्पण #संस्कृतिकीझलक #IncredibleHimachal
लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Book Shop पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हिम संदेश जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी इन दिनों पूर्णतः हिमाच्छादित है। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़, शांत वातावरण और ठंडी हवाओं के बीच जब लोक संस्कृति की मधुर गूंज सुनाई देती है, तो यह संकेत होता है पांगी के ऐतिहासिक और पारंपरिक ‘सिहल–जुकारू’ पर्व का। यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पंगवाला समाज की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और सामूहिक एकता का जीवंत प्रतीक है। फागुन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व तीन प्रमुख चरणों सिलह, पड़ीद और मांगल में संपन्न होता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है, जितनी पूर्वजों के समय में निभाई जाती थी। तैयारियों में झलकती है लोक संस्कृति की छटा। ‘सिहल–जुकारू’ की तैयारियां कई दिन पूर्व आरंभ हो जाती हैं। घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है, दीवारों पर पारंपरिक लोक शैली में चित्रांकन और लिखावट की जाती है। यह लिखावट केवल सजावट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम है। घरों में विशेष पकवान ‘मंण्डे’ बनाए जाते हैं, साथ ही अन्य पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाते हुए बच्चों को इनकी महत्ता समझाते हैं, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। ‘सिलह’ : आस्था और अनुशासन का दिन। पहले दिन ‘सिलह’ मनाया जाता है। इस दिन घरों में बलिराज के चित्र बनाए जाते हैं और रात्रि में उनकी विधिवत पूजा की जाती है। दिन में बनाए गए सभी पकवान तथा एक दीपक राजा बलि के चित्र के समक्ष अर्पित किए जाते हैं। इस दिन चरखा कातना बंद कर दिया जाता है और सभी लोग संयम और श्रद्धा के साथ दिन व्यतीत करते हैं। लोक मान्यता के अनुसार इस दिन अनुशासन और शुद्धता का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद के पोते राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी। तब भगवान विष्णु को वामन अवतार धारण करना पड़ा। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दी, जिससे प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वर्ष में एक दिन पृथ्वी लोक में उनकी पूजा की जाएगी। इसी विश्वास के साथ पांगी घाटी के लोग आज भी राजा बलि की पूजा-अर्चना करते हैं। ‘पड़ीद’ : सम्मान, संस्कार और सामाजिक एकता दूसरा दिन ‘पड़ीद’ का होता है। प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर लोग स्नान करते हैं और राजा बलि के समक्ष नतमस्तक होते हैं। घर के छोटे सदस्य बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा पारिवारिक मूल्यों और सम्मान की भावना को सुदृढ़ करती है। पनघट से जल लाकर अर्पित किया जाता है और जल देवता की पूजा की जाती है। घर का मुखिया ‘चूर’ (हल चलाने के औजार) की पूजा करता है, जो कृषि प्रधान जीवनशैली का प्रतीक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति और कृषि से जुड़ा उत्सव भी है। ‘जुकारू’ : मिलन, प्रेम और भाईचारे का उत्सव। ‘पड़ीद’ की सुबह से ही ‘जुकारू’ आरंभ हो जाता है। ‘जुकारू’ शब्द का अर्थ है—बड़ों का आदर और परस्पर सम्मान। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण महीनों तक लोग अपने घरों में सीमित रहते हैं। जब मौसम कुछ अनुकूल होता है, तो इस पर्व के माध्यम से लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। लोग एक-दूसरे से मिलते समय ‘तकड़ा थिया न’ कहकर कुशल-क्षेम पूछते हैं और विदा लेते समय ‘मठे-मठे विश’ कहते हैं। सबसे पहले बड़े भाई या परिवार के वरिष्ठ सदस्य के घर जाकर सम्मान प्रकट करने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। यह दिन सामाजिक मेल-मिलाप, आपसी मनमुटाव दूर करने और रिश्तों को सुदृढ़ करने का अवसर भी होता है। सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण आवश्यक। ‘सिहल–जुकारू’ पर्व पांगी घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। आधुनिकता के इस दौर में भी जिस प्रकार स्थानीय लोग अपनी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए हैं, वह सराहनीय है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोककथाओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का संदेश देने वाला महोत्सव है। पांगी न्यूज 24 की ओर से पांगी की आन, बान और शान को संजोने वाले इस पावन पर्व ‘सिहल–जुकारू’ की समस्त पांगीवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह त्योहार हमारी संस्कृति, परंपराओं और भाईचारे की अद्भुत मिसाल बना रहे और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखे — यही कामना है।
    1
    हिम संदेश 
जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी इन दिनों पूर्णतः हिमाच्छादित है। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़, शांत वातावरण और ठंडी हवाओं के बीच जब लोक संस्कृति की मधुर गूंज सुनाई देती है, तो यह संकेत होता है पांगी के ऐतिहासिक और पारंपरिक ‘सिहल–जुकारू’ पर्व का। यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पंगवाला समाज की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और सामूहिक एकता का जीवंत प्रतीक है।
फागुन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व तीन प्रमुख चरणों सिलह, पड़ीद और मांगल में संपन्न होता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है, जितनी पूर्वजों के समय में निभाई जाती थी।
तैयारियों में झलकती है लोक संस्कृति की छटा।
‘सिहल–जुकारू’ की तैयारियां कई दिन पूर्व आरंभ हो जाती हैं। घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है, दीवारों पर पारंपरिक लोक शैली में चित्रांकन और लिखावट की जाती है। यह लिखावट केवल सजावट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम है।
घरों में विशेष पकवान ‘मंण्डे’ बनाए जाते हैं, साथ ही अन्य पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाते हुए बच्चों को इनकी महत्ता समझाते हैं, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
‘सिलह’ : आस्था और अनुशासन का दिन।
पहले दिन ‘सिलह’ मनाया जाता है। इस दिन घरों में बलिराज के चित्र बनाए जाते हैं और रात्रि में उनकी विधिवत पूजा की जाती है। दिन में बनाए गए सभी पकवान तथा एक दीपक राजा बलि के चित्र के समक्ष अर्पित किए जाते हैं।
इस दिन चरखा कातना बंद कर दिया जाता है और सभी लोग संयम और श्रद्धा के साथ दिन व्यतीत करते हैं। लोक मान्यता के अनुसार इस दिन अनुशासन और शुद्धता का विशेष महत्व है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद के पोते राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी। तब भगवान विष्णु को वामन अवतार धारण करना पड़ा। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दी, जिससे प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वर्ष में एक दिन पृथ्वी लोक में उनकी पूजा की जाएगी। इसी विश्वास के साथ पांगी घाटी के लोग आज भी राजा बलि की पूजा-अर्चना करते हैं।
‘पड़ीद’ : सम्मान, संस्कार और सामाजिक एकता
दूसरा दिन ‘पड़ीद’ का होता है। प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर लोग स्नान करते हैं और राजा बलि के समक्ष नतमस्तक होते हैं। घर के छोटे सदस्य बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा पारिवारिक मूल्यों और सम्मान की भावना को सुदृढ़ करती है।
पनघट से जल लाकर अर्पित किया जाता है और जल देवता की पूजा की जाती है। घर का मुखिया ‘चूर’ (हल चलाने के औजार) की पूजा करता है, जो कृषि प्रधान जीवनशैली का प्रतीक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति और कृषि से जुड़ा उत्सव भी है।
‘जुकारू’ : मिलन, प्रेम और भाईचारे का उत्सव।
‘पड़ीद’ की सुबह से ही ‘जुकारू’ आरंभ हो जाता है। ‘जुकारू’ शब्द का अर्थ है—बड़ों का आदर और परस्पर सम्मान। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण महीनों तक लोग अपने घरों में सीमित रहते हैं। जब मौसम कुछ अनुकूल होता है, तो इस पर्व के माध्यम से लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और शुभकामनाएं देते हैं।
लोग एक-दूसरे से मिलते समय ‘तकड़ा थिया न’ कहकर कुशल-क्षेम पूछते हैं और विदा लेते समय ‘मठे-मठे विश’ कहते हैं। सबसे पहले बड़े भाई या परिवार के वरिष्ठ सदस्य के घर जाकर सम्मान प्रकट करने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
यह दिन सामाजिक मेल-मिलाप, आपसी मनमुटाव दूर करने और रिश्तों को सुदृढ़ करने का अवसर भी होता है।
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण आवश्यक।
‘सिहल–जुकारू’ पर्व पांगी घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। आधुनिकता के इस दौर में भी जिस प्रकार स्थानीय लोग अपनी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए हैं, वह सराहनीय है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोककथाओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का संदेश देने वाला महोत्सव है।
पांगी न्यूज 24 की ओर से पांगी की आन, बान और शान को संजोने वाले इस पावन पर्व ‘सिहल–जुकारू’ की समस्त पांगीवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह त्योहार हमारी संस्कृति, परंपराओं और भाईचारे की अद्भुत मिसाल बना रहे और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखे — यही कामना है।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager Pangi, Chamba•
    9 hrs ago
  • जोगिंदर नगर के सत्यम बरवाल ने अपनी पहली कोशिश में ही JEE Mains की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। सत्यम ने JEE Mains की परीक्षा में 99.08 प्रतिशत अंक प्राप्त किये हैं। सत्यम के माता-पिता दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। सत्यम ने बातचीत में बताया कि वे रोजाना लगभग 18 घंटे की पढ़ाई करते रहे जिसका रिजल्ट आज सबके सामने आया है। वहीं, सत्यम दसवीं के परीक्षा परिणाम में भी प्रदेश भर में 10वें स्थान पर रहे थे। सत्यम ने कहा कि मेहनत, अनुशासन व लगन से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
    1
    जोगिंदर नगर के सत्यम बरवाल ने अपनी पहली कोशिश में ही JEE Mains की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। सत्यम ने JEE Mains की परीक्षा में 99.08 प्रतिशत  अंक प्राप्त किये हैं। सत्यम के माता-पिता दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। सत्यम ने बातचीत में  बताया कि वे रोजाना लगभग 18 घंटे की पढ़ाई करते रहे जिसका रिजल्ट आज सबके सामने आया है। वहीं, सत्यम दसवीं के परीक्षा परिणाम में भी प्रदेश भर में 10वें स्थान पर रहे थे। सत्यम ने कहा कि मेहनत, अनुशासन व लगन से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
    user_Ankit Kumar
    Ankit Kumar
    Local News Reporter जोगिंदरनगर, मंडी, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
  • सुजानपुर सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय होली महोत्सव की तैयारीया शुरू हो गई है यहां मैदान में सजने वाली दुकानदारी के लिए मार्किंग का कार्य सुजानपुर प्रशासन ने शुरू करवाया है बताते चले कि मैदान के भीतर दुकानदारी सजाने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं जिसमें खान-पान की दुकानों के साथ-साथ अन्य फूड स्टॉल कहां लगाए जाएंगे रोजमर्रा की वस्तुएं कहां पर बिक्री होगी अन्य उत्पाद कहां बेचे जाएंगे इसके साथ-साथ दुकानों के मध्य और दुकानदारी के बीच आने-जाने के लिए रास्ता जितना निर्धारित किया गया है उसे हिसाब से यह मार्किंग करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर आपातकाल की स्थिति के दौरान रोगी वाहन दमकल वाहन की बड़ी और छोटी गाड़ियां कूड़ा करकट उठाने वाली गाड़ियां आसानी से प्रवेश कर सके जिस रास्ते से यह गाड़ियां आनी है उन रास्तों की व्यवस्था सही हो उनके मध्य किसी भी तरह की दुकानदारी को ना सजाया जाए किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो तमाम बातों को ध्यान में रखकर तमाम कार्रवाई करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर झूले कहां लगाए जाएंगे डोम बाजार कहां सजेगा अन्य क्राफ्ट मेले कहां लगाए जाएंगे विभागीय प्रदर्शनी कहां लगेगी सांस्कृतिक कार्यक्रम कहां पर होंगे अन्य क्राकरी बाजार कहां सजेगा पुरानी संस्कृति के तहत बिकने वाले मिट्टी के उत्पाद कहां पर बिक्री होंगे तमाम स्थान मार्क करवाए जा रहे हैं पार्किंग स्थल का एरिया कहां से कहां तक होगा यहां वाहन किस तरफ से आएंगे और किस तरफ से बाहर जाएंगे इसको लेकर भी व्यवस्था करवाई जा रही है मेले के दौरान हर तरफ मोबाइल टॉयलेट स्थापित करवाने की व्यवस्था करवाई जा रही है यह सभी टॉयलेट सीवरेज के साथ कनेक्ट होंगे तमाम बातों को लेकर तैयारियां शुरू की गई है। उधर मेला ग्राउंड की दुकानदारी के लिए प्लाट बेचने का कार्य भी शुरू हो गया है उपमंडल कार्यालय के रूम नंबर 105 में जिस व्यक्ति ने मेला ग्राउंड की बोली को अपने नाम किया है उनके कर्मी वहां पर बैठकर प्लाट आवंटन का कार्य कर रहे हैं
    1
    सुजानपुर
सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय होली महोत्सव की तैयारीया शुरू हो गई है यहां मैदान में सजने वाली दुकानदारी के लिए मार्किंग का कार्य सुजानपुर प्रशासन ने शुरू करवाया है बताते चले कि मैदान के भीतर दुकानदारी सजाने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं जिसमें खान-पान की दुकानों के साथ-साथ अन्य फूड स्टॉल कहां लगाए जाएंगे रोजमर्रा की वस्तुएं कहां पर बिक्री होगी अन्य उत्पाद कहां बेचे जाएंगे इसके साथ-साथ दुकानों के मध्य और दुकानदारी के बीच आने-जाने के लिए रास्ता जितना निर्धारित किया गया है उसे हिसाब से यह मार्किंग करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर आपातकाल की स्थिति के दौरान रोगी वाहन दमकल वाहन की बड़ी और छोटी गाड़ियां कूड़ा करकट उठाने वाली गाड़ियां आसानी से प्रवेश कर सके जिस रास्ते से यह गाड़ियां आनी है उन रास्तों की व्यवस्था सही हो उनके मध्य किसी भी तरह की दुकानदारी को ना सजाया जाए किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो तमाम बातों को ध्यान में रखकर तमाम कार्रवाई करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर झूले कहां लगाए जाएंगे डोम बाजार कहां सजेगा अन्य क्राफ्ट मेले कहां लगाए जाएंगे विभागीय प्रदर्शनी कहां लगेगी सांस्कृतिक कार्यक्रम कहां पर होंगे अन्य क्राकरी बाजार कहां सजेगा पुरानी संस्कृति के तहत बिकने वाले मिट्टी के उत्पाद कहां पर बिक्री होंगे तमाम स्थान मार्क करवाए जा रहे हैं पार्किंग स्थल का एरिया कहां से कहां तक होगा यहां वाहन किस तरफ से आएंगे और किस तरफ से बाहर जाएंगे इसको लेकर भी व्यवस्था करवाई जा रही है मेले के दौरान हर तरफ मोबाइल टॉयलेट स्थापित करवाने की व्यवस्था करवाई जा रही है यह सभी टॉयलेट सीवरेज के साथ कनेक्ट होंगे तमाम बातों को लेकर तैयारियां शुरू की गई है।
उधर मेला ग्राउंड की दुकानदारी के लिए प्लाट बेचने का कार्य भी शुरू हो गया है उपमंडल कार्यालय के रूम नंबर 105 में जिस व्यक्ति ने मेला ग्राउंड की बोली को अपने नाम किया है उनके कर्मी वहां पर बैठकर प्लाट आवंटन का कार्य कर रहे हैं
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Till The End News
    1
    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    10 hrs ago
  • चंबा: बोर्ड परीक्षा को लेकर डीसी मुकेश रेप्सवाल ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं, उज्ज्वल भविष्य की कामना। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा में बोर्ड परीक्षाओं के शुभारंभ को लेकर उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं, जिसमें मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। उपायुक्त ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे परीक्षा के दौरान तनावमुक्त रहकर सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें और समय का सही प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं शिक्षक भी बच्चों का मनोबल बढ़ाएं ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें। डीसी मुकेश रेप्सवाल ने सभी परीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा परीक्षा संचालन को शांतिपूर्ण एवं सुचारू ढंग से संपन्न करवाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि ईमानदारी और लगन से किया गया प्रयास ही सफलता की कुंजी है। बाइट डीसी चंबा मुकेश रेप्सवाल।
    1
    चंबा: बोर्ड परीक्षा को लेकर डीसी मुकेश रेप्सवाल ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं, उज्ज्वल भविष्य की कामना।
मोहम्मद आशिक
चंबा हिमाचल प्रदेश 
जिला चंबा में बोर्ड परीक्षाओं के शुभारंभ को लेकर उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं, जिसमें मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उपायुक्त ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे परीक्षा के दौरान तनावमुक्त रहकर सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें और समय का सही प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं शिक्षक भी बच्चों का मनोबल बढ़ाएं ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
डीसी मुकेश रेप्सवाल ने सभी परीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा परीक्षा संचालन को शांतिपूर्ण एवं सुचारू ढंग से संपन्न करवाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि ईमानदारी और लगन से किया गया प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
बाइट डीसी चंबा मुकेश रेप्सवाल।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    6 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.