मथुरा जिले के बरका गांव से धानौता, रूपनगर, फूलगडी, शेरनगर, मझोई, बढ़ा, शहजादपुर होते हुए शेरगढ़ रोड का निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत कराया गया था। यह मार्ग बृज चौरासी कोस की परिक्रमा का रास्ता भी है, और आरोप है कि इसके निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी श्री चंदप्रकाश ने ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए सड़क को तोड़कर मानकों के अनुरूप फिर से बनाने का निर्देश दिया है। भाजपा नेता और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य आर पी सिंह ने जिलाधिकारी श्री चंदप्रकाश मथुरा और माननीय मुख्यमंत्री पोर्टल पर लिखित में इस घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच की गई, जिसमें वास्तव में घटिया सामग्री का उपयोग पाया गया। सरकार और प्रशासन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के मामलों पर बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) के नियमों के अनुसार, सड़क निर्माण के बाद 5 वर्ष का 'दोष दायित्व काल' (Defect Liability Period) होता है। यदि इस अवधि में जांच में सामग्री खराब मिलती है या सड़क टूटती है, तो ठेकेदार को अपने खर्च पर सड़क को तोड़कर दोबारा सही मानकों के साथ बनाना होता है, और सरकार इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करती। PMGSY में सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए त्रि-स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली भी लागू है। इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य आर पी सिंह की लोगों में खूब चर्चा और सराहना की जा रही है। देवेन्द्र, पवन ठाकुर, मोहनसिंह डाक्टर, वीरी सिंह, नरेश और अन्य लोगों ने उनकी इस पहल की तारीफ की है, क्योंकि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास योजना में बड़ी गड़बड़ी के इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच में घटिया सामग्री का इस्तेमाल साबित होने के बाद सड़क को तोड़कर पुनः बनाया जाएगा।
मथुरा जिले के बरका गांव से धानौता, रूपनगर, फूलगडी, शेरनगर, मझोई, बढ़ा, शहजादपुर होते हुए शेरगढ़ रोड का निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत कराया गया था। यह मार्ग बृज चौरासी कोस की परिक्रमा का रास्ता भी है, और आरोप है कि इसके निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी श्री चंदप्रकाश ने ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए सड़क को तोड़कर मानकों के अनुरूप फिर
से बनाने का निर्देश दिया है। भाजपा नेता और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य आर पी सिंह ने जिलाधिकारी श्री चंदप्रकाश मथुरा और माननीय मुख्यमंत्री पोर्टल पर लिखित में इस घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच की गई, जिसमें वास्तव में घटिया सामग्री का उपयोग पाया गया। सरकार और प्रशासन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के मामलों पर बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय
ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) के नियमों के अनुसार, सड़क निर्माण के बाद 5 वर्ष का 'दोष दायित्व काल' (Defect Liability Period) होता है। यदि इस अवधि में जांच में सामग्री खराब मिलती है या सड़क टूटती है, तो ठेकेदार को अपने खर्च पर सड़क को तोड़कर दोबारा सही मानकों के साथ बनाना होता है, और सरकार इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करती। PMGSY में सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए त्रि-स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली भी लागू है। इस भ्रष्टाचार के खिलाफ
आवाज उठाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य आर पी सिंह की लोगों में खूब चर्चा और सराहना की जा रही है। देवेन्द्र, पवन ठाकुर, मोहनसिंह डाक्टर, वीरी सिंह, नरेश और अन्य लोगों ने उनकी इस पहल की तारीफ की है, क्योंकि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास योजना में बड़ी गड़बड़ी के इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच में घटिया सामग्री का इस्तेमाल साबित होने के बाद सड़क को तोड़कर पुनः बनाया जाएगा।
- मथुरा के छाता तहसील मुख्यालय पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिला अधिकारी (डीएम) चंद्र प्रकाश और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने जनता की शिकायतें सुनीं। इस दौरान कुल 60 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर एक भी शिकायत का निस्तारण नहीं हो पाया। अधिकारियों ने हालांकि यह दावा किया है कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज सभी पुरानी शिकायतों का समय पर निस्तारण कर दिया गया है। इस बार छाता तहसील के कामर गांव से सबसे अधिक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं। समाधान दिवस में यह गंभीर मामला सामने आया कि कई फरियादी एक ही समस्या को लेकर पांच से सात बार तक चक्कर काट चुके थे, फिर भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए, प्रशासन ने मामलों की जांच और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक एडीएम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। डीएम चंद्र प्रकाश ने शिकायत निस्तारण में लापरवाही बरतने और टालमटोल करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि लापरवाही के आरोप में एक लेखपाल और एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, इस लापरवाही में शामिल उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनके खिलाफ शासन को लिखा जा रहा है। जिलाधिकारी ने मीडिया के माध्यम से सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश देते हुए अपील की है कि सरकार ने उन्हें आम जनता की समस्याओं का समय से और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के लिए तैनात किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि छाता तहसील में कुछ शिकायतें अधिक हैं, जिनकी विस्तृत जांच कराई जाएगी, और कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।4
- मथुरा जनपद के कोसीकलां में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश आयुक्त और जिलाधिकारी मथुरा के निर्देशों पर एक बड़ी कार्रवाई की गई है। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय जतिन कुमार सिंह के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, मथुरा की टीम ने छाता तहसील के गोपाल बाग स्थित कल्लू डेयरी पर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान डेयरी परिसर में पनीर का निर्माण अत्यंत अस्वास्थ्यप्रद और अस्वच्छ परिस्थितियों में हो रहा था, जबकि भंडारण वाले दूध में मक्खियां पाई गईं। जाँच टीम ने कल्लू डेयरी से पनीर के दो नमूने, मिश्रित दूध का एक नमूना, घी का एक नमूना और क्रीम का एक नमूना सहित कुल पाँच नमूने संग्रहित कर प्रयोगशाला में जाँच के लिए भेजे। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लगभग 1200 किलोग्राम दूषित पनीर, जिसकी कीमत 3,36,000 रुपये बताई गई, और 3000 लीटर मिश्रित दूध, जिसका मूल्य 2,10,000 रुपये था, को गड्ढा खुदवाकर विनष्ट कर दिया गया। इसके साथ ही, डेयरी का खाद्य अनुज्ञप्ति तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और परिसर को सील करते हुए निर्माण कार्य बंद करा दिया गया है। उक्त के अतिरिक्त, आरएसडी डेयरी कोसीकलां पर भी कार्रवाई करते हुए पनीर का एक नमूना संग्रहित किया गया। इस पूरी कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राम नरेश सिंह, जितेंद्र सिंह, अरुण राणा, धर्मेंद्र सिंह और मोहर सिंह टीम में मौजूद रहे। विभाग ने यह भी बताया है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के विरुद्ध उनका यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।1
- मथुरा के छाता तहसील मुख्यालय पर शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिला अधिकारी (डीएम) चंद्र प्रकाश और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने जनता की शिकायतें सुनीं। इस दौरान कुल 60 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर एक भी शिकायत का निस्तारण नहीं हो सका। वहीं, अधिकारियों ने दावा किया है कि आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर प्राप्त सभी पुरानी शिकायतों का निस्तारण समय से कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, छाता तहसील के कामर गांव से सबसे अधिक प्रार्थना पत्र आए हैं। समाधान दिवस में यह गंभीर मामला सामने आया कि कई फरियादी एक ही समस्या को लेकर पाँच से सात बार तक चक्कर काट चुके हैं, फिर भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मामलों की जाँच और त्वरित कार्रवाई के लिए एक एडीएम (ADM) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और टालमटोल बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम चंद्र प्रकाश ने बताया कि "लापरवाही बरतने के आरोप में कल ही यहाँ के एक लेखपाल और एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को मेरे द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।" उन्होंने आगे बताया कि इस लापरवाही में शामिल उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है और उनके खिलाफ भी शासन को लिखा जा रहा है। जिलाधिकारी ने मीडिया के माध्यम से सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त संदेश देते हुए अपील की है कि सरकार ने उन्हें आम जनता की समस्याओं का समय से और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के लिए तैनात किया है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि छाता तहसील में कुछ शिकायतें ज्यादा हैं, जिनकी विस्तृत जाँच कराई जाएगी और कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में भरत भाई नामक एक जांबाज व्यक्ति की हत्या पर गहरा आक्रोश और दुख व्यक्त किया गया है, जिसमें समाज की असंवेदनशीलता और उदासीनता को इस त्रासदी का मूल कारण बताया गया है। पोस्ट लेखक ने इसे एक 'कड़वा सच' बताते हुए कहा कि भरत भाई ने अकेले ही 'सिस्टम' से संघर्ष किया, लेकिन जब तक वे जीवित थे, किसी ने उनका खुलकर साथ नहीं दिया और लोग केवल तमाशा देखते रहे। यह आरोप लगाया गया है कि यदि समाज उनके साथ खड़ा होता, तो शायद उनकी हत्या नहीं होती और वे आज भी जीवित होते, क्योंकि 'भरत तिवारी हत्या कांड एक अनसुलझी पहेली' बना हुआ है। पोस्ट में समाज की इस 'घटिया कमी' पर जोर दिया गया है कि लोग किसी जांबाज के अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच समाज के लिए लड़ने के दौरान मुंह फेर लेते हैं, लेकिन जैसे ही वह व्यक्ति 'शहीद' हो जाता है या दुनिया से चला जाता है, तो लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है। उस समय राजनेता, नेता और पूरा समाज समर्थन में आ जाता है। मृत्योपरांत जुटने वाले इस हुजूम को व्यर्थ बताते हुए, पोस्ट में सभी से हाथ जोड़कर विनती की गई है कि जो लोग आज समाज के लिए निस्वार्थ भाव से लड़ रहे हैं, उनके 'जिंदा रहते' उनके साथ खड़े हों और उनका हौसला बनें, न कि उनकी मृत्यु के बाद पीठ पीछे रोएं। यह संदेश 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ समाप्त होता है।1
- मथुरा जनपद के कोसीकला स्थित ग्राम बठेन में जमीन के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले। इस हिंसक झड़प में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- मथुरा के नरी सेमरी फ्लाईओवर पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई। यह हादसा तब हुआ जब वृंदावन से ईंट खाली कर अपने घर लौट रहे एक ट्रैक्टर को एक तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुखद घटना में विशम्भरा गाँव के निवासी विष्णु और अंसार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। दुर्घटना के बाद ट्रक ड्राइवर मौके से फरार हो गया। छाता पुलिस इस पूरे मामले की गहन जाँच कर रही है।1