logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

केंद्र सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (ई20) की नीति को ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है। हालांकि, देश भर में ई20 पेट्रोल को लेकर अनेक आशंकाएं और सवाल जुड़े हुए हैं, क्योंकि इस विषय पर तथ्याधारित चर्चा कम और भ्रम अधिक दिखाई देता है। सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर व्यक्त की जाती है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का वाहनों के इंजन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर उन लाखों वाहन मालिकों के मन में जिनकी गाड़ियां ई20 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण को ध्यान में रखकर नहीं बनी थीं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने वाहन के इंजन, फ्यूल पाइप, रबर सील या अन्य पुर्जों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित है, तो उसकी चिंता को पूरी तरह निराधार नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर, यह भी एक तथ्य है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन कोई नई या प्रयोगात्मक व्यवस्था नहीं है, बल्कि ब्राजील, अमेरिका सहित अनेक देशों में इसका उपयोग वर्षों से हो रहा है। भारत में भी यह नीति लंबे अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध विस्तार के बाद लागू की जा रही है, इसलिए केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर प्रसारित अधूरी जानकारियों के आधार पर इसके खिलाफ माहौल बनाना भी उचित नहीं है। असल समस्या इथेनॉल से अधिक जानकारी के अभाव की है। सरकार द्वारा नई नीति लागू करने पर उससे जुड़े लाभ, सीमाएं और तकनीकी पहलुओं की स्पष्ट जानकारी भी जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि शंकाएं और भ्रम पैदा न हों। इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि जब देश की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में पुराने वाहन चल रहे हैं, तो क्या उनके मालिकों को कोई विकल्प उपलब्ध होना चाहिए। इसका उत्तर है—हां। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पेट्रोल पंप पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ-साथ बिना इथेनॉल अथवा कम इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल भी उपलब्ध हो, जिससे उपभोक्ता अपनी गाड़ी की आवश्यकता और निर्माता के निर्देशों के अनुसार स्वयं ईंधन का चयन कर सके। जब वाहन खरीदने, उसका रखरखाव करने और संभावित जोखिम उठाने की जिम्मेदारी वाहन मालिक की है, तो उसे ईंधन चयन का अधिकार भी मिलना चाहिए; किसी नई नीति को सफल बनाने का सबसे अच्छा तरीका उसे थोपना नहीं, बल्कि जानकारी और विकल्प देना होता है। निस्संदेह, इथेनॉल मिश्रण से देश को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलने जैसे कई लाभ मिल सकते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी इसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन इन संभावित लाभों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की व्यावहारिक चिंताओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। आज आवश्यकता न तो अंध समर्थन की है और न ही अंध विरोध की, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों, पारदर्शी जानकारी और व्यावहारिक समाधान की है। यदि सरकार इस नीति को जनहितकारी बनाना चाहती है तो उसे जनता का विश्वास जीतना होगा, और विश्वास तब पैदा होता है जब लोगों को सही जानकारी के साथ उचित विकल्प भी उपलब्ध हों। ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी राह उपभोक्ताओं की आशंकाओं को नजरअंदाज करके नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर ही तय की जा सकती है, और इथेनॉल नीति की सफलता भी इसी बात पर निर्भर करेगी कि सरकार लोगों को केवल नया ईंधन ही नहीं, बल्कि भरोसा और विकल्प भी उपलब्ध कराती है या नहीं।

7 hrs ago
user_भूषण शर्मा
भूषण शर्मा
नूरपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
7 hrs ago
94702933-7958-46d6-b64c-ad3b2fe949a1

केंद्र सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (ई20) की नीति को ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है। हालांकि, देश भर में ई20 पेट्रोल को लेकर अनेक आशंकाएं और सवाल जुड़े हुए हैं, क्योंकि इस विषय पर तथ्याधारित चर्चा कम और भ्रम अधिक दिखाई देता है। सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर व्यक्त की जाती है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का वाहनों के इंजन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर उन लाखों वाहन मालिकों के मन में जिनकी गाड़ियां ई20 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण को ध्यान में रखकर नहीं बनी थीं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने वाहन के इंजन, फ्यूल पाइप, रबर सील या अन्य पुर्जों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित है, तो उसकी चिंता को पूरी तरह निराधार नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर, यह भी एक तथ्य है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन कोई नई या प्रयोगात्मक व्यवस्था नहीं है, बल्कि ब्राजील, अमेरिका सहित अनेक देशों में इसका उपयोग वर्षों से हो रहा है। भारत में भी यह नीति लंबे अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध विस्तार के बाद लागू की जा रही है, इसलिए केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर प्रसारित अधूरी जानकारियों के आधार पर इसके खिलाफ माहौल बनाना भी उचित नहीं है। असल समस्या इथेनॉल से अधिक जानकारी के अभाव की है। सरकार द्वारा नई नीति लागू करने पर उससे जुड़े लाभ, सीमाएं और तकनीकी पहलुओं की स्पष्ट जानकारी भी जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि शंकाएं और भ्रम पैदा न हों। इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि जब देश की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में पुराने वाहन चल रहे हैं, तो क्या उनके मालिकों को कोई विकल्प उपलब्ध होना चाहिए। इसका उत्तर है—हां। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पेट्रोल पंप पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ-साथ बिना इथेनॉल अथवा कम इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल भी उपलब्ध हो, जिससे उपभोक्ता अपनी गाड़ी की आवश्यकता और निर्माता के निर्देशों के अनुसार स्वयं ईंधन का चयन कर सके। जब वाहन खरीदने, उसका रखरखाव करने और संभावित जोखिम उठाने की जिम्मेदारी वाहन मालिक की है, तो उसे ईंधन चयन का अधिकार भी मिलना चाहिए; किसी नई नीति को सफल बनाने का सबसे अच्छा तरीका उसे थोपना नहीं, बल्कि जानकारी और विकल्प देना होता है। निस्संदेह, इथेनॉल मिश्रण से देश को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलने जैसे कई लाभ मिल सकते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी इसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन इन संभावित लाभों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की व्यावहारिक चिंताओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। आज आवश्यकता न तो अंध समर्थन की है और न ही अंध विरोध की, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों, पारदर्शी जानकारी और व्यावहारिक समाधान की है। यदि सरकार इस नीति को जनहितकारी बनाना चाहती है तो उसे जनता का विश्वास जीतना होगा, और विश्वास तब पैदा होता है जब लोगों को सही जानकारी के साथ उचित विकल्प भी उपलब्ध हों। ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी राह उपभोक्ताओं की आशंकाओं को नजरअंदाज करके नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर ही तय की जा सकती है, और इथेनॉल नीति की सफलता भी इसी बात पर निर्भर करेगी कि सरकार लोगों को केवल नया ईंधन ही नहीं, बल्कि भरोसा और विकल्प भी उपलब्ध कराती है या नहीं।

More news from हिमाचल प्रदेश and nearby areas
  • नूरपुर में एक प्रेसवार्ता के दौरान नूरपुर फोरलेन संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा ने पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के तहत अधिग्रहित भूमि का मुआवजा अधिकांश प्रभावितों को फैक्टर-1 के आधार पर दिया गया है, जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें फैक्टर-2 के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। शर्मा ने आरोप लगाया कि एक "पिक एंड चूज" नीति के तहत कुछ चुनिंदा लोगों को ही फैक्टर-2 का लाभ मिला है, जबकि अधिकांश प्रभावित अब भी फैक्टर-1 के आधार पर मिले आधे-अधूरे मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना था कि अपर्याप्त मुआवजे के कारण प्रभावित परिवार पुनर्वास और पुनर्स्थापन करने में असमर्थ हैं। सुदर्शन शर्मा ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मांग की है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को शीघ्र निर्देश जारी किए जाएं ताकि सभी पात्र प्रभावितों को फैक्टर-2 के आधार पर भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मिल सके। उन्होंने जोर दिया कि पिछले पांच वर्षों से लंबित इस मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
    1
    नूरपुर में एक प्रेसवार्ता के दौरान नूरपुर फोरलेन संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा ने पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के तहत अधिग्रहित भूमि का मुआवजा अधिकांश प्रभावितों को फैक्टर-1 के आधार पर दिया गया है, जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें फैक्टर-2 के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए।

शर्मा ने आरोप लगाया कि एक "पिक एंड चूज" नीति के तहत कुछ चुनिंदा लोगों को ही फैक्टर-2 का लाभ मिला है, जबकि अधिकांश प्रभावित अब भी फैक्टर-1 के आधार पर मिले आधे-अधूरे मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना था कि अपर्याप्त मुआवजे के कारण प्रभावित परिवार पुनर्वास और पुनर्स्थापन करने में असमर्थ हैं।

सुदर्शन शर्मा ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मांग की है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को शीघ्र निर्देश जारी किए जाएं ताकि सभी पात्र प्रभावितों को फैक्टर-2 के आधार पर भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मिल सके। उन्होंने जोर दिया कि पिछले पांच वर्षों से लंबित इस मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
    user_भूषण शर्मा
    भूषण शर्मा
    नूरपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    21 hrs ago
  • ग्राम पंचायत चमबी के तहत आने वाले अकेरा और अच्छेड गांवों के लिए बिछाई गई पानी की पाइपलाइन की हालत बेहद खराब है। जानकारी के अनुसार, यह पाइपलाइन कई स्थानों से टूटी हुई है और उसे अस्थायी रूप से प्लास्टिक के लिफाफों का इस्तेमाल करके जोड़ा गया है।
    1
    ग्राम पंचायत चमबी के तहत आने वाले अकेरा और अच्छेड गांवों के लिए बिछाई गई पानी की पाइपलाइन की हालत बेहद खराब है। जानकारी के अनुसार, यह पाइपलाइन कई स्थानों से टूटी हुई है और उसे अस्थायी रूप से प्लास्टिक के लिफाफों का इस्तेमाल करके जोड़ा गया है।
    user_Abdul rheman
    Abdul rheman
    चौराह, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    8 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश के सलोनी में शिक्षकों की भारी कमी के कारण स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे पर एक विशाल आक्रोश रैली निकाली गई, जहाँ लोगों का गुस्सा हिमाचल सरकार और प्रशासन के खिलाफ साफ झलका। शिक्षकों की कमी के विरोध में SMC के प्रधान और उप प्रधान अनशन पर बैठे हैं। आज उनके अनशन का तीसरा दिन है, बावजूद इसके सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रदर्शनकारी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या हिमाचल सरकार सोई हुई है और क्या प्रशासन भी उदासीन हो गया है।
    1
    हिमाचल प्रदेश के सलोनी में शिक्षकों की भारी कमी के कारण स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे पर एक विशाल आक्रोश रैली निकाली गई, जहाँ लोगों का गुस्सा हिमाचल सरकार और प्रशासन के खिलाफ साफ झलका।

शिक्षकों की कमी के विरोध में SMC के प्रधान और उप प्रधान अनशन पर बैठे हैं। आज उनके अनशन का तीसरा दिन है, बावजूद इसके सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रदर्शनकारी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या हिमाचल सरकार सोई हुई है और क्या प्रशासन भी उदासीन हो गया है।
    user_Madan Singh
    Madan Singh
    चौराह, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    22 hrs ago
  • शनिवार को लाखों रुपये की लागत से बनी एक पेयजल स्कीम के भवन और परिसर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें स्कीम के परिसर की हालत बेहद दयनीय दिखाई दे रही थी। मीडिया द्वारा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो गोलवां-बतराहन पंचायत की सीमा पर स्थित दरैड पेयजल स्कीम का निकला। इस संबंध में, विभागीय एसडीओ अमित रंधावां से शनिवार शाम करीब चार बजे फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस स्कीम के लिए टेंडर लगा दिया गया है और इसे जल्द ही शुरू करके लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी।
    1
    शनिवार को लाखों रुपये की लागत से बनी एक पेयजल स्कीम के भवन और परिसर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें स्कीम के परिसर की हालत बेहद दयनीय दिखाई दे रही थी। मीडिया द्वारा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो गोलवां-बतराहन पंचायत की सीमा पर स्थित दरैड पेयजल स्कीम का निकला।

इस संबंध में, विभागीय एसडीओ अमित रंधावां से शनिवार शाम करीब चार बजे फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस स्कीम के लिए टेंडर लगा दिया गया है और इसे जल्द ही शुरू करके लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी।
    user_Surinder Minhas
    Surinder Minhas
    फतेहपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    21 hrs ago
  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बढेड़ा में एक जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 600 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया।
    1
    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बढेड़ा में एक जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 600 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया।
    user_247 superfast ks
    247 superfast ks
    ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    49 min ago
  • जनजातीय उपमंडल पांगी की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर भाजपा मंडल पांगी और भाजपा समर्थित पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष सतीश कुमार राणा के नेतृत्व में पंचायत समिति सदस्यों, प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आवासीय आयुक्त पांगी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें क्षेत्र की उपेक्षा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है। इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पाँच दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो घाटी के जनप्रतिनिधि क्रमिक भूख हड़ताल और अनशन शुरू करेंगे। ज्ञापन में कहा गया है कि पांगी प्रदेश का एक अति दुर्गम जनजातीय क्षेत्र है, जहाँ भौगोलिक विषमताओं के कारण लोगों को पहले से ही अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, प्रदेश सरकार द्वारा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जनजातीय विकास से जुड़े बजट में कटौती की जा रही है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र के स्कूलों और महाविद्यालयों में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को समाप्त किए जाने से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही, विभिन्न विभागों में सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं, जिससे आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। प्रतिनिधियों ने पंचायत चुनावों के बाद नव-निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार न दिए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क है कि प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों को 18 अक्टूबर तक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पांगी घाटी में सरकारी विकास कार्यों का अधिकांश समय अप्रैल से अक्टूबर के बीच होता है, ऐसे में नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिकारों से वंचित रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभावनाओं के विपरीत है। इसके अतिरिक्त, पिछले दो महीनों से बनी विद्युत आपूर्ति की समस्या का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों के अनुसार, घाटी के कई गाँव लंबे समय से अनियमित बिजली आपूर्ति या अंधेरे की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के समक्ष रखी गई अन्य मांगों में राशन गोदामों की नियमित सफाई सुनिश्चित करना, लोक निर्माण विभाग द्वारा किए गए टेंडरों एवं खर्च की गई धनराशि का विवरण सार्वजनिक करना, विभिन्न विभागों द्वारा पिछले दो वर्षों में खर्च किए गए बजट की जानकारी उपलब्ध कराना, तथा बीएसएनएल और जियो नेटवर्क सेवाओं में सुधार करना शामिल है। ज्ञापन के अंत में, जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पाँच दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो पांगी घाटी के समस्त जनप्रतिनिधि सामूहिक रूप से क्रमिक भूख हड़ताल और अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले किसी भी हालात की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रदेश सरकार की होगी।
    1
    जनजातीय उपमंडल पांगी की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर भाजपा मंडल पांगी और भाजपा समर्थित पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष सतीश कुमार राणा के नेतृत्व में पंचायत समिति सदस्यों, प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आवासीय आयुक्त पांगी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें क्षेत्र की उपेक्षा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है। इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पाँच दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो घाटी के जनप्रतिनिधि क्रमिक भूख हड़ताल और अनशन शुरू करेंगे।

ज्ञापन में कहा गया है कि पांगी प्रदेश का एक अति दुर्गम जनजातीय क्षेत्र है, जहाँ भौगोलिक विषमताओं के कारण लोगों को पहले से ही अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, प्रदेश सरकार द्वारा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जनजातीय विकास से जुड़े बजट में कटौती की जा रही है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र के स्कूलों और महाविद्यालयों में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को समाप्त किए जाने से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही, विभिन्न विभागों में सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं, जिससे आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।

प्रतिनिधियों ने पंचायत चुनावों के बाद नव-निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार न दिए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क है कि प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों को 18 अक्टूबर तक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पांगी घाटी में सरकारी विकास कार्यों का अधिकांश समय अप्रैल से अक्टूबर के बीच होता है, ऐसे में नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिकारों से वंचित रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभावनाओं के विपरीत है। इसके अतिरिक्त, पिछले दो महीनों से बनी विद्युत आपूर्ति की समस्या का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों के अनुसार, घाटी के कई गाँव लंबे समय से अनियमित बिजली आपूर्ति या अंधेरे की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार के समक्ष रखी गई अन्य मांगों में राशन गोदामों की नियमित सफाई सुनिश्चित करना, लोक निर्माण विभाग द्वारा किए गए टेंडरों एवं खर्च की गई धनराशि का विवरण सार्वजनिक करना, विभिन्न विभागों द्वारा पिछले दो वर्षों में खर्च किए गए बजट की जानकारी उपलब्ध कराना, तथा बीएसएनएल और जियो नेटवर्क सेवाओं में सुधार करना शामिल है। ज्ञापन के अंत में, जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पाँच दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो पांगी घाटी के समस्त जनप्रतिनिधि सामूहिक रूप से क्रमिक भूख हड़ताल और अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले किसी भी हालात की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रदेश सरकार की होगी।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    किताब की दुकान पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    9 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (HPTU) में स्थायी वाइस चांसलर (कुलपति) का पद पिछले एक वर्ष से खाली होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्रशासनिक और शैक्षणिक पद होता है, और एक साल से स्थायी वाइस चांसलर न होने के कारण विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा और शैक्षणिक माहौल पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे नीतिगत और बड़े फैसले भी लटके हुए हैं। शर्मा ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते यह प्रमुख संस्थान वर्तमान में गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहा है। इस स्थिति से विश्वविद्यालय परिसर और इससे संबद्ध कॉलेजों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है, क्योंकि स्थायी मुखिया के अभाव में परीक्षा, परिणाम और नए शैक्षणिक सत्र की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट गहरा गया है। नवीन शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार मुख्यमंत्री के अपने ही गृह जिले के इतने बड़े तकनीकी संस्थान में एक साल के भीतर एक वाइस चांसलर नियुक्त नहीं कर सकती, वह पूरे प्रदेश में युवाओं को रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही तकनीकी शिक्षा बेपटरी हो चुकी है।
    1
    हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (HPTU) में स्थायी वाइस चांसलर (कुलपति) का पद पिछले एक वर्ष से खाली होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्रशासनिक और शैक्षणिक पद होता है, और एक साल से स्थायी वाइस चांसलर न होने के कारण विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा और शैक्षणिक माहौल पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे नीतिगत और बड़े फैसले भी लटके हुए हैं।

शर्मा ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते यह प्रमुख संस्थान वर्तमान में गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहा है। इस स्थिति से विश्वविद्यालय परिसर और इससे संबद्ध कॉलेजों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है, क्योंकि स्थायी मुखिया के अभाव में परीक्षा, परिणाम और नए शैक्षणिक सत्र की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट गहरा गया है।

नवीन शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार मुख्यमंत्री के अपने ही गृह जिले के इतने बड़े तकनीकी संस्थान में एक साल के भीतर एक वाइस चांसलर नियुक्त नहीं कर सकती, वह पूरे प्रदेश में युवाओं को रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही तकनीकी शिक्षा बेपटरी हो चुकी है।
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    22 hrs ago
  • नूरपुर सीआईए को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है, जहाँ उन्होंने थाना डमटाल क्षेत्र से 154 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की है। इस कार्रवाई में अंतर्राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े दो युवकों को भी पकड़ा गया है। एसपी नूरपुर कुलभूषण वर्मा ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सीआईए नूरपुर की टीम कंडवाल, लोधवा, भदरोया और डमटाल क्षेत्रों में गश्त एवं नाकाबंदी कर रही थी। इसी दौरान उन्हें विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली कि दो युवक मोटरसाइकिल (नंबर JK08L-4514, हीरो स्प्लेंडर) पर चिट्टा/हेरोइन लेकर हिलटॉप दुर्गा माता मंदिर, डमटाल के पास किसी व्यक्ति को बेचने के इरादे से खड़े हैं। सूचना के आधार पर, पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में मौके पर दबिश दी और मोटरसाइकिल की तलाशी के दौरान उसकी सीट के नीचे छिपाकर रखे गए 154 ग्राम चिट्टा/हेरोइन को बरामद किया। इस मामले में पारस (25 वर्ष), पुत्र कुलविंदर सिंह, निवासी गीता भवन, मोहल्ला इस्लामाबाद, जिला गुरदासपुर, पंजाब, और विजय कुमार (28 वर्ष), पुत्र शिंगारा राम, निवासी गांव वाहमणी, डाकघर बहरामपुर, जिला गुरदासपुर, पंजाब के विरुद्ध थाना डमटाल में एफआईआर नंबर 106/2026, धारा 21, 25, 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। कुलभूषण वर्मा ने आगे बताया कि पुलिस द्वारा बरामद मादक पदार्थ के स्रोत, उसकी सप्लाई चैन तथा इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान के लिए गहन जांच की जा रही है। नूरपुर पुलिस समाज को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आम जनता से अपील की गई है कि वे नशे से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हेल्पलाइन नंबर 112 पर दें, जहाँ उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।
    1
    नूरपुर सीआईए को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है, जहाँ उन्होंने थाना डमटाल क्षेत्र से 154 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की है। इस कार्रवाई में अंतर्राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े दो युवकों को भी पकड़ा गया है।

एसपी नूरपुर कुलभूषण वर्मा ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सीआईए नूरपुर की टीम कंडवाल, लोधवा, भदरोया और डमटाल क्षेत्रों में गश्त एवं नाकाबंदी कर रही थी। इसी दौरान उन्हें विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली कि दो युवक मोटरसाइकिल (नंबर JK08L-4514, हीरो स्प्लेंडर) पर चिट्टा/हेरोइन लेकर हिलटॉप दुर्गा माता मंदिर, डमटाल के पास किसी व्यक्ति को बेचने के इरादे से खड़े हैं। सूचना के आधार पर, पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में मौके पर दबिश दी और मोटरसाइकिल की तलाशी के दौरान उसकी सीट के नीचे छिपाकर रखे गए 154 ग्राम चिट्टा/हेरोइन को बरामद किया। इस मामले में पारस (25 वर्ष), पुत्र कुलविंदर सिंह, निवासी गीता भवन, मोहल्ला इस्लामाबाद, जिला गुरदासपुर, पंजाब, और विजय कुमार (28 वर्ष), पुत्र शिंगारा राम, निवासी गांव वाहमणी, डाकघर बहरामपुर, जिला गुरदासपुर, पंजाब के विरुद्ध थाना डमटाल में एफआईआर नंबर 106/2026, धारा 21, 25, 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है।

कुलभूषण वर्मा ने आगे बताया कि पुलिस द्वारा बरामद मादक पदार्थ के स्रोत, उसकी सप्लाई चैन तथा इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान के लिए गहन जांच की जा रही है। नूरपुर पुलिस समाज को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आम जनता से अपील की गई है कि वे नशे से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हेल्पलाइन नंबर 112 पर दें, जहाँ उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।
    user_भूषण शर्मा
    भूषण शर्मा
    नूरपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    21 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.