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कौन-कौन खाए हैं कांदा? कमेंट करके बताइए! #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #tanda
AAM JANATA
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- ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में सोमवार को तीन दिवसीय स्काउट्स एवं गाइड्स विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। शिविर के पहले ही दिन योग्य छात्र-छात्राओं का जोश और अनुशासन देखने लायक था। यह विशेष कैंप अगले तीन दिनों तक स्कूल कैंपस में चलेगा। इसके बाद विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास के लिए तय शेड्यूल के मुताबिक हर महीने 2 दिन इसका नियमित आयोजन किया जाएगा। शिविर में मुख्य ट्रेनर के तौर पर हरिओम जी बच्चों को स्काउटिंग के नियम, प्राथमिक उपचार, अनुशासन और सेवा भावना की बारीकियां सिखा रहे हैं। वहीं उनका साथ देने के लिए विद्यालय की पीटी टीचर निक्की आर्या भी मैदान पर सक्रिय रहकर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ पर विद्यालय के निदेशक ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स केवल एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक अनुशासित कला है। यह बच्चों में आत्मनिर्भरता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और देश सेवा का जज्बा पैदा करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पूरी लगन से सीखने के लिए प्रेरित किया। शिविर के पहले दिन बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।1
- *चकला में ग्रामसभा रद्द: दाले उरांव और रामचंद्र उरांव के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों का प्रदर्शन* *हिंडालको पर बिना ग्राम सभा खनन का आरोप, चकला पंचायत में ग्रामीणों का प्रदर्शन* *लातेहार/चंदवा* ओरिसा एलॉय स्टील की *चितरपुर (रिवाइज्ड) कोल माइंस* के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सोमवार को ग्रामीणों और कंपनी के बीच सहमति की प्रक्रिया होनी थी। इसके लिए *चितरपुर और बरवा टोली समेत आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण* पहुंचे। हालांकि, ग्रामीणों के पहुंचने के बावजूद कंपनी और जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों का नेतृत्व चितरपुर के *दाले उरांव और बरवा टोली के रामचंद्र उरांव* ने किया। ग्रामीणों ने चकला पंचायत की मुखिया से सवाल किया कि जब जमीन अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों की सहमति की प्रक्रिया निर्धारित थी, तो कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार, मुखिया ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सभा की कार्यवाही को रद्द कर दिया। सभा स्थल पर ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि *किसी भी कंपनी के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े।* ग्रामीणों ने क्षेत्र में कंपनियों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे अवैध कार्यों का भी विरोध करने और उनके खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। *‘कंपनी काम निकलने के बाद पहचानती तक नहीं’* ग्रामीण नेता *रामचंद्र उरांव* ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनियां ग्रामीणों को सिर्फ अपने हित के लिए इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, “कंपनी सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाने का काम करती है। काम निकल जाने के बाद लोगों को पहचानती तक नहीं है। मुझे कंपनी में नौकरी मिली है, लेकिन आज कोई पहचान नहीं है। अगर भविष्य में कोई विकट परिस्थिति आती है तो कंपनी हमें पहचानने से भी इंकार कर सकती है।” ग्रामीणों ने कहा कि जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, जंगल और भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए जमीन अधिग्रहण के किसी भी प्रयास का विरोध जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण से पहले उनकी सहमति, अधिकार और हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सोमवार को प्रस्तावित प्रक्रिया के दौरान कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की अनुपस्थिति ने ग्रामीणों के बीच नाराजगी को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में भी वे एकजुट होकर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। *हिंडालको की ओर से यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है कि ग्राम सभा हुई है या नहीं।*4
- जल-जंगल-जमीन के लिए चकला में फूटा जन-आक्रोश, कोयला कंपनी के खिलाफ आदिवासियों ने फूंका बगावत का बिगुल जल-जंगल-जमीन के लिए चकला में फूटा जन-आक्रोश, कोयला कंपनी के खिलाफ आदिवासियों ने फूंका बगावत का बिगुल लातेहार संवाददाता चंदवा (लातेहार)। कोल ब्लॉक के नाम पर आदिवासी अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। सोमवार को चकला में प्रस्तावित ग्राम सभा के विरोध में यही हुंकार सुनाई दी। प्रशासन ने ओडिशा एलायंस स्टील प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित हिंडालको कोल ब्लॉक की रिवाइज्ड माइंस के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर चकला गांव में ग्राम सभा का आदेश जारी किया था। ग्रामीणों को भनक लगी कि सभा रद्द कर दी गई है और उन्हें सूचना तक नहीं दी गई, तो आक्रोश फूट पड़ा। चकला, बरवाटोली, भुकुटोला समेत दर्जन भर प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीण पंचायत भवन के सामने जमा हो गए। हाथों में तख्तियां और जुबां पर जल-जंगल-जमीन हमारा है, कंपनी वापस जाओ और ओडिशा एलायंस मुर्दाबाद के नारे गूंज उठे। मुखिया पूनम रंजिता एक्का ने कहा कि हिंडालको सहित कंपनियां बिना ग्राम सभा की सहमति के काम कर रही हैं, जो पेसा कानून और ग्राम सभा के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों ने दो टूक कहा, जमीन केवल टुकड़ा नहीं, हमारी रोजी-रोटी, पहचान और पीढ़ियों का भविष्य है, इसे नहीं देंगे। विरोध को देखते हुए कंपनी प्रतिनिधि और भू-अर्जन पदाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि बिना सहमति अधिग्रहण हुआ तो आंदोलन तेज होगा। हालांकि खबर लिखे जाने तक ग्राम सभा के विषय में कंपनी की तरफ से स्पष्ट नहीं हुआ है।3
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