बिहार के गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत रंगूनगर गांव में गुरुवार की शाम करीब 6 बजे खेलते समय एक खुले बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय मासूम पियूष मांझी को करीब 6 घंटे चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। घटना की खबर मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और परिजन बदहवास हो गए थे। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और देर रात तक चले अथक प्रयास के बाद मासूम को सुरक्षित बचा लिया गया। बच्चे के सकुशल बाहर आते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इस बेहद संकरे बोरवेल से बच्चे को बाहर निकालने में NDRF और SDRF के जवानों ने अद्भुत साहस, धैर्य और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। वहीं, तीन वर्षीय पियूष मांझी ने भी घंटों तक अंदर फंसे रहने के बावजूद असाधारण हिम्मत दिखाई और अपना हौसला नहीं खोया। फिलहाल पियूष को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर है। इस सफल रेस्क्यू अभियान की पूरे इलाके में खूब सराहना हो रही है और लोगों का कहना है कि जवानों ने न केवल एक बच्चे को बचाया, बल्कि एक मां की ममता, पिता की उम्मीद और पूरे परिवार की खुशियां लौटा दी हैं। इस बीच, रेस्क्यू के दौरान स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फतेहपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौके पर जो ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा गया था, वह पूरी तरह से खाली था। लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, हालांकि इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि यदि लापरवाही सामने आती है, तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और नल-जल योजना के संवेदक सहित सभी जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने खुले बोरवेल को लेकर भी सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
बिहार के गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत रंगूनगर गांव में गुरुवार की शाम करीब 6 बजे खेलते समय एक खुले बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय मासूम पियूष मांझी को करीब 6 घंटे चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। घटना की खबर मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और परिजन बदहवास हो गए थे। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और देर रात तक चले अथक प्रयास के बाद मासूम को सुरक्षित बचा लिया गया। बच्चे के सकुशल बाहर आते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इस बेहद संकरे बोरवेल से बच्चे को बाहर निकालने में NDRF और SDRF के जवानों ने अद्भुत साहस, धैर्य और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। वहीं, तीन वर्षीय पियूष मांझी ने भी घंटों तक अंदर फंसे रहने के बावजूद असाधारण हिम्मत दिखाई और अपना हौसला नहीं खोया। फिलहाल पियूष को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर है। इस सफल रेस्क्यू अभियान की पूरे इलाके में खूब सराहना हो रही है और लोगों का कहना है कि जवानों ने न केवल एक बच्चे को बचाया, बल्कि एक मां की ममता, पिता की उम्मीद और पूरे परिवार की खुशियां लौटा दी हैं। इस बीच, रेस्क्यू के दौरान स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फतेहपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौके पर जो ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा गया था, वह पूरी तरह से खाली था। लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, हालांकि इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि यदि लापरवाही सामने आती है, तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और नल-जल योजना के संवेदक सहित सभी जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने खुले बोरवेल को लेकर भी सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
- बिहार के गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत रंगूनगर गांव में गुरुवार की शाम करीब 6 बजे खेलते समय एक खुले बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय मासूम पियूष मांझी को करीब 6 घंटे चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। घटना की खबर मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और परिजन बदहवास हो गए थे। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और देर रात तक चले अथक प्रयास के बाद मासूम को सुरक्षित बचा लिया गया। बच्चे के सकुशल बाहर आते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इस बेहद संकरे बोरवेल से बच्चे को बाहर निकालने में NDRF और SDRF के जवानों ने अद्भुत साहस, धैर्य और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। वहीं, तीन वर्षीय पियूष मांझी ने भी घंटों तक अंदर फंसे रहने के बावजूद असाधारण हिम्मत दिखाई और अपना हौसला नहीं खोया। फिलहाल पियूष को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर है। इस सफल रेस्क्यू अभियान की पूरे इलाके में खूब सराहना हो रही है और लोगों का कहना है कि जवानों ने न केवल एक बच्चे को बचाया, बल्कि एक मां की ममता, पिता की उम्मीद और पूरे परिवार की खुशियां लौटा दी हैं। इस बीच, रेस्क्यू के दौरान स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फतेहपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौके पर जो ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा गया था, वह पूरी तरह से खाली था। लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, हालांकि इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि यदि लापरवाही सामने आती है, तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और नल-जल योजना के संवेदक सहित सभी जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने खुले बोरवेल को लेकर भी सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।1
- बिहार में बोरवेल में गिरे एक मासूम बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद एनडीआरएफ (NDRF) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पूरी टीम ने अटूट धैर्य, तकनीकी विशेषज्ञता और आपसी समन्वय के साथ इस पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनडीआरएफ अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि बच्चे की सुरक्षा ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी और रेस्क्यू के दौरान हर कदम पूरी सावधानी के साथ उठाया गया था। इस बेहद संवेदनशील और सफल अभियान के पूरा होने के बाद एनडीआरएफ ने जिला प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अपना महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है।1
- गया जिले के नीमचक बथानी प्रखंड अंतर्गत ग्राम नीमथु में बिजली का करंट लगने से हुई अत्यंत दुखद घटना में दो लोगों की जान चली गई। इस हादसे में दिवंगत हुए रविंद्र कुमार (पिता – स्व० अमीरक यादव) और दिवंगत सागर कुमार (पिता – अमित राजवंशी) के शोकाकुल परिजनों से क्षेत्र संख्या 11 के जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सह युवा जदयू प्रदेश महासचिव मोहम्मद औरंगज़ेब ने मुलाकात की। मोहम्मद औरंगज़ेब ने शोकाकुल परिवारों से मिलकर अपनी गहरी शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। दुःख की इस विकट घड़ी में पीड़ित परिवारों को ढाढस बंधाते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी की संवेदनाएँ उनके साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।3
- बिहार में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 को लेकर नगर निगम बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक निगम सभागार में संपन्न हो गई है। इस बैठक की अध्यक्षता महापौर द्वारा की गई। इस बार मेले के आयोजन को विशेष बनाने के लिए इसमें पूरी तरह से हाईटेक व्यवस्था की जाएगी।1
- गया में इस्कॉन द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा एवं सुदर्शन की भव्य रथयात्रा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। इस भव्य रथयात्रा का शुभारंभ बिहार विधानसभा के माननीय अध्यक्ष ने किया। इस धार्मिक उत्सव के अवसर पर अनुप केड़िया, कौशलेंद्र प्रताप एवं डॉ. रंजीत प्रकाश विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक बिजली की सजावट से सुसज्जित रथ पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का विधिवत स्वागत कर उन्हें विराजमान कराया गया, जिसके बाद उन्हें छप्पन भोग अर्पित कर भव्य आरती संपन्न की गई। रथयात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस्कॉन गया के मंदिर अध्यक्ष ने बताया कि यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला की स्मृति में मनाया जाता है, जब श्रीमती राधारानी एवं वृंदावन की गोपियों ने कुरुक्षेत्र से भगवान श्रीकृष्ण को पुनः वृंदावन लाने की भावपूर्ण अभिलाषा के साथ उनके रथ को खींचा था। यह रथयात्रा इस्कॉन मंदिर से प्रारंभ होकर जयप्रकाश झरना, काशीनाथ मोड़, सिविल लाइंस, जी.बी. रोड, गोल पत्थर, टेकारी रोड, बाटा मोड़, स्वराजपुरी रोड, काशीनाथ मोड़, महारानी बस स्टैंड तथा गेवाल बिगहा होते हुए पुनः इस्कॉन मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया तथा हरिनाम संकीर्तन और जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। रथयात्रा के मंदिर वापस लौटने पर भगवान को पुनः छप्पन भोग अर्पित किया गया और भव्य आरती की गई। इसके उपरांत महाप्रसाद के रूप में चावल, छोले एवं हलवे का वितरण किया गया, जिसे लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण कर भगवान श्रीजगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पूरे भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं नगरवासियों की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे पूरी गया नगरी भक्तिरस और आध्यात्मिक उल्लास में सराबोर हो उठी।3
- बिहार के नवादा में एक शादी समारोह के दौरान हुए झगड़े में दो लोगों की मौत हो गई है। इस विवाद में दो लोगों की जान जाने के बाद वहां मौजूद लोग हाय-हाय कर रोने लगे हैं।1
- बिहार के गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत रंगूनगर गांव में गुरुवार की शाम करीब 6 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब तीन वर्षीय पीयूष मांझी खेलते-खेलते एक खुले बोरवेल में गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जुट गए। सूचना मिलने के तुरंत बाद जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। देर रात तक करीब 6 घंटे तक लगातार चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जवानों ने कड़ी मशक्कत कर मासूम पीयूष को बोरवेल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्चे के सकुशल बाहर आते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। इस बेहद संकरे बोरवेल में चलाए गए रेस्क्यू अभियान के दौरान एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अद्भुत साहस, धैर्य और तकनीकी सूझबूझ का परिचय दिया। वहीं, तीन वर्षीय पीयूष मांझी ने भी असाधारण बहादुरी दिखाई और घंटों तक बोरवेल में फंसे रहने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। फिलहाल पीयूष को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और उसकी शारीरिक स्थिति स्थिर बताई जा रही है। पूरे इलाके में इस सफल रेस्क्यू अभियान और जवानों के हौसले की जमकर सराहना हो रही है। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच में लापरवाही पाए जाने पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और नल-जल योजना के संवेदक समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, रेस्क्यू के दौरान ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने आरोप लगाया कि फतेहपुर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मौके पर जो ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा गया था, वह पूरी तरह से खाली था। ग्रामीणों ने इसे विभाग की बड़ी संवेदनहीनता और लापरवाही करार देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- बिहार के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत रंगूनगर में एक तीन साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया है।1