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वाराणसी में वैध भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रोके जाने का आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार, निर्माण में बाधा पहुँचाने के लिए महिलाओं को आगे किया जा रहा है।
जनता न्यूज टीवी
वाराणसी में वैध भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रोके जाने का आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार, निर्माण में बाधा पहुँचाने के लिए महिलाओं को आगे किया जा रहा है।
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- आज वाराणसी नगर निगम में मीट का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने नगर निगम के आदेश को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह 'हल्लाबोल' निगम द्वारा मीट की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश के विरोध में किया गया।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के धौरहरा-हरिहरपुर में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिवस पर श्री श्री योगी रामानंद दास जी महाराज ने महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में समस्त मानवता का भविष्य सनातन धर्म में ही सुरक्षित है और सनातन को समाप्त करने का कोई भी प्रयास समाज के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। योगी रामानंद दास जी महाराज ने सनातन के मूल भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसकी आत्मा 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना में निहित है, जिसका अर्थ है सभी के मंगल की कामना करना। उन्होंने बताया कि शक्ति, सत्य और शाश्वत तत्व की उपासना ही जीवन को सार्थक बनाती है। महाराज जी के अनुसार, जो व्यक्ति आनंद की उपासना करता है, वह समाज के लिए समस्या नहीं बल्कि समाधान प्रस्तुत करता है। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संसार में आनंद की नहीं, बल्कि दुःख की उपासना हो रही है, जिसके कारण चारों ओर अशांति और तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर महंत रामलोचन दास जी महाराज, महंत गणेश दास जी महाराज, रामदास जी महाराज, महंत रामरूप दास जी महाराज, महंत सियाराम दास जी महाराज, काशी के महामंडलेश्वर श्री भगवान दास जी महाराज, राजस्थान के श्री श्रमण दास जी महाराज, श्री गोविंद दास जी महाराज, रामेश्वर दास जी महाराज और श्री राघव दास जी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।1
- श्री श्री योगी रामानंद दास ने सनातन धर्म के महत्व और आनंद की उपासना पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि सनातन ही सभी के भविष्य का आधार है, और जीवन की समस्याओं का समाधान आनंद की उपासना में ही निहित है।1
- सुबह बनारस के अस्सी घाट पर कबीर के जीवन पर आधारित एक नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक का शीर्षक "कबीरा खड़ा बाजार में" है और इसके लेखक भीष्म साहनी हैं। इस प्रस्तुति के बाद, ₹10,000 की इनामी राशि की घोषणा की गई, साथ ही कलाकारों को अन्य स्थानों पर भी इस नाटक के मंचन के लिए आमंत्रित किया गया है।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के तरयां गांव निवासी कल्पनाथ शर्मा ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है कि कुछ प्रभावशाली लोग उनकी वैध जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को जबरन रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ये लोग आर्थिक, राजनैतिक और प्रशासनिक दबाव का उपयोग कर रहे हैं और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं। पीड़ित कल्पनाथ शर्मा का कहना है कि उनकी भूमि पर किसी भी न्यायालय द्वारा कोई रोक नहीं लगाई गई है, इसके बावजूद उनके काम का लगातार विरोध किया जा रहा है।1
- वाराणसी में वैध भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रोके जाने का आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार, निर्माण में बाधा पहुँचाने के लिए महिलाओं को आगे किया जा रहा है।1
- चंदौली के डीडीयू नगर में अतिक्रमण हटाओ अभियान और संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। शहर के व्यापारी, दुकानदार और आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि प्रशासन की आगे की रणनीति क्या है, लेकिन अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई भी स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। न तो यह बताया जा रहा है कि किन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होगी और न ही यह स्पष्ट किया जा रहा है कि किन नियमों के आधार पर नोटिस या अभियान चलाया जाएगा। इस अनिश्चितता के चलते लोगों के बीच तरह-तरह की आशंकाएं और चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या डीडीयू नगर में फिर से बुलडोजर चलेगा, क्या व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर दोबारा कार्रवाई होगी, और क्या सभी के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे या अभियान केवल चुनिंदा जगहों पर ही चलेगा। प्रशासन जब तक आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक किसी भी संभावित कार्रवाई को लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा सकती हैं। ऐसे समय में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ नियमों और प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी जनता के सामने रखे, ताकि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति न बने।1
- श्री श्री योगी रामानंद दास ने एक संदेश में कहा है कि सनातन ही सभी के भविष्य का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन की सभी समस्याओं का वास्तविक समाधान केवल आनंद की उपासना में ही निहित है।1