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ये भारत में किसी को Job नहीं करने देगा #cosmeticstrading #BeautyCare #cosmetics #reelsviralシfb #tranding
Reporter Ravinder
ये भारत में किसी को Job नहीं करने देगा #cosmeticstrading #BeautyCare #cosmetics #reelsviralシfb #tranding
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- ..बलरामपुर जिले में आज 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में एक विशाल पदयात्रा का आयोजन किया गया। प्रतापपुर से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के नेतृत्व में निकली इस रैली में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्र सरकार का आभार जताया। बीओ01...हाथों में बैनर और उत्साह से भरी ये महिलाएं नारी शक्ति की नई तस्वीर पेश कर रही हैं। दरअसल, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लागू होने से अब राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू होगा। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। पदयात्रा के दौरान विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर भी किए। महिलाओं का मानना है कि इस कदम से उन्हें नीति निर्धारण और देश के विकास में अपनी उचित भूमिका निभाने का बेहतर अवसर मिलेगा। बाइट 1 शकुंतला सिंह पोर्ते प्रतापपुर विधायक 2 अर्पणा दीक्षित बीडीसी1
- एंकर -बलरामपुर जिले में आज नारी शक्ति वंदन महिला आरक्षण विधेयक2026 के समर्थन में पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित की गई थी इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई यह पदयात्रा प्रतापपुर बीजेपी विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के नेतृत्व में निकल गई, मुख्य रूप से कार्यक्रम में शामिल भाजपा विधायक सहित स्थानीय महिलाओं महिला आरक्षण विधेयक को ऐतिहासिक विधेयक बताया है। विओ01,, दरअसल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने के बाद महिलाएं और अधिक सशक्त होंगी महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर मिलेंगे साथ ही राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी इसी उद्देश्य के साथ यह अधिनियम लाया गया है जिससे महिलाओं को लोकसभा राज्य सभा और विधानसभा में अपनी उचित भागीदारी का बेहतर अवसर मिलेगा इस विधेयक के लागू होने से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण होगी, जिससे महिलाएं काफी खुश और उत्साहित है। वाइट01- शकुंतला सिंह पोर्ते विधायक प्रतापपुर,( क्रीम कलर की साड़ी पहने) (विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने कहा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में यह रैली निकल गई है, उन्होंने कहा देश के विकास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक कदम है, इससे महिलाओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत होगी, लोकसभा विधानसभा में महिलाएं ३३ प्रतिशत आरक्षण के साथ सहभागिता निभाते दिखेंगे निश्चित तौर पर यह महत्वपूर्ण कदम है, इस अधिनियम से महिलाएं खुश और उत्साहित हैं)। वाइट02- अर्पणा दीक्षित जनपद सदस्य (साड़ी से सर ढके हुए)। (जनपद सदस्य दीक्षित ने भारत की लोकतंत्र में एक नए युग का आगाज बताया है उन्होंने यह भी कहा है कि, यह अधिनियम भारत के नारियों के लिए एक सम्मान है, महिलाएं अब देश की भूमिका पर अपनी सहभागिता निभाएंगे)। वाओ... नारी शक्ति वंदन बैनर पदयात्रा वहां पर लगे, मंच पर बैठे हुए, विधायक के द्वारा कार्यक्रम को मंच से संबोधन करते हुए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन पर हस्ताक्षर करते हुए।1
- बलरामपुर/ नारी शक्ति वंदन अधिनियम मोदी सरकार द्वारा संकल्प से सिद्धि तक की एक ऐतिहासिक यात्रा है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2026 की परिसीमन प्रक्रिया के तहत महिलाओं को नया और सशक्त अधिकार मिलेगा, जिससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भी मजबूत होगा। इस अधिनियम के जरिए भारत एक सशक्त लोकतंत्र के नए अध्याय में प्रवेश करेगा, जहाँ महिलाएं राजनीति में और समाज में अपनी भूमिका को और प्रभावशाली तरीके से निभा सकेंगी। उक्त बातें नारी शक्ति वंदन पद यात्रा में प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते ने संबोधित करते हुए कही। नारी शक्ति वंदन पद यात्रा पुराना बस स्टैंड से शहर के मुख्य मार्ग होते हुए, हाई स्कूल ग्राउंड में पहुंची। जहां कार्यक्रम की समापन की गई। उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधानसभा प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुषमा मिंज के अध्यक्षता में कार्यक्रम की गई । इस कार्यक्रम में ,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गोपाल कृष्ण मिश्रा, जिला महामंत्री भानुप्रकाश दीक्षित,सुमित्रा चेरवा, नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी, वरिष्ठ भाजपा नेता जितेंद्र श्रीवास्तव, पार्षद गौतम सिंह जिला मीडिया सह प्रभारी अजय यादव, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मंगलम पांडे,राजू गुप्ता,श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता सुविदा आयाम, गायत्री प्रजापति , अर्पण दीक्षित, अनीता मरकाम ,सुनैना गुप्ता,अंजू लकड़ा, किरण पासवान, अंजू कुशवाहा, सहित सभी महिलाएं उपस्थित थे।4
- Post by Yusuf Khan1
- dil tuta @@1
- Post by Sunil singh1
- चिनियां थाना क्षेत्र के बेता गांव में बुधवार की रात 7:00 बजे बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी। डंडई मुख्यालय निवासी 50 वर्षीय सफदर अंसारी एक भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफदर अंसारी रोज की तरह अपनी सीडी डीलक्स मोटरसाइकिल से गांव-गांव घूमकर सब्जी बेचने के बाद घर लौट रहे थे। इसी दौरान बेता गांव स्थित पुलिया पर अचानक उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना खतरनाक था कि मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए। हालांकि गनीमत रही कि बाइक और सफदर अंसारी अलग-अलग गिर पड़े, जिससे एक और बड़ी अनहोनी टल गई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस ने घायल को तत्काल चिनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिलती, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।1
- वाह रे सिस्टम! अन्नदाता बना 'फुटबॉल', अपनी ही फसल का पैसा पाने के लिए कलेक्ट्रेट में घिस रही चप्पलें छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला में सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता किसानों के खेतों से होकर गुजरता है। सरकारें मंचों से चीख-चीख कर कहती हैं कि हम 'दाने-दाने का मोल' देंगे, लेकिन बलरामपुर की जमीनी हकीकत इन दावों के मुंह पर तमाचा मार रही है। यहां के विजयनगर का एक किसान अपनी ही मेहनत की गाढ़ी कमाई पाने के लिए पिछले कई महीनों से 'सरकारी फुटबॉल' बना हुआ है। विभागों का 'पासिंग द पार्सल' खेल विजयनगर निवासी इस पीड़ित किसान का गुनाह बस इतना है कि उसने शासन के भरोसे अपनी जमीन का धान बेचा था। खाद्य विभाग के पास जाओ तो वो बैंक का रास्ता दिखाते हैं। बैंक जाओ तो वो हाथ खड़े कर देते हैं। और जब कलेक्टर की चौखट पर गुहार लगाओ, तो साहेब कहते है कृषि विभाग जाओ और आवेदन दो हैरानी की बात है कि डिजिटल इंडिया और पारदर्शी व्यवस्था के दौर में एक किसान को अपनी ही फसल के पैसे के लिए अपराधी की तरह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर क्यों धकेला जा रहा है? किसका कलेजा फटेगा किसान की व्यथा केवल पैसों तक सीमित नहीं है। घर में लोग बीमार पड़े हैं, इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, और घर की आर्थिक कमर टूट चुकी है। पीड़ित किसान की आंखों की नमी बता रही है कि सिस्टम की संवेदनहीनता ने उसे कितना लाचार कर दिया है। सवाल यह है कि क्या फाइलों में डूबे अधिकारियों को किसान की बेबसी दिखाई नहीं देती या फिर उन्हें सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी से मतलब है सत्ता के वादे बनाम जमीनी हकीकत सरकार चाहे कितने भी विज्ञापनों में अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन जब तक बलरामपुर जैसे जिलों में किसान अपनी हक की राशि के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा है, तब तक ये सारे दावे खोखले हैं। अधिकारियों का यह अड़ियल रवैया सरकार की छवि पर कालिख पोतने का काम कर रहा है। आखिर कब तक किसान अपने हक की भीख मांगता रहेगा? क्या प्रशासन को किसी अनहोनी का इंतजार है, या फिर इस बार भी फाइलों के नीचे किसान की उम्मीदों को दबा दिया जाएगा1