महाकुम्भ 2025: आजमगढ़ के 1042 पुलिसकर्मी 'महाकुम्भ सेवा मेडल' से एसएसपी ने किया सम्मानित आजमगढ़। प्रयागराज में आयोजित विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम 'महाकुम्भ 2025' के सकुशल और सफल आयोजन के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों के सम्मान का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी क्रम में आज जनपद आजमगढ़ के पुलिस लाइन सभागार में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की घोषणा के अनुपालन में, महाकुम्भ ड्यूटी में अपना अभूतपूर्व योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को 'महाकुम्भ सेवा मेडल' एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। एसएसपी ने बढ़ाया जवानों का उत्साह जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. अनिल कुमार ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने अपने हाथों से पुलिस बल के जवानों और अधिकारियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया। सम्मान की मुख्य बातें: कुल सम्मानित संख्या: 1042 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी। प्रमुख अधिकारी: जनपद के एसपी ट्रैफिक सहित कई राजपत्रित अधिकारियों को भी इस सेवा पदक से नवाजा गया। उपस्थिति: समारोह में जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार का आधिकारिक वक्तव्य समारोह के दौरान मीडिया और पुलिस बल को संबोधित करते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा: "महाकुम्भ जैसे वैश्विक आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती थी। हमारे जनपद से गए 1042 जांबाज साथियों ने दिन-रात सेवा भाव से ड्यूटी की, जिसका परिणाम आज इस सम्मान के रूप में सामने है। यह मेडल न केवल उनके समर्पण का प्रतीक है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है।" सेवा और समर्पण का सम्मान प्रयागराज महाकुम्भ में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में आजमगढ़ पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शासन द्वारा प्रदान किए गए इस सम्मान से पुलिसकर्मियों के मनोबल में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। सभागार में मेडल पाकर पुलिसकर्मियों के चेहरे गर्व से खिले नजर आए।
महाकुम्भ 2025: आजमगढ़ के 1042 पुलिसकर्मी 'महाकुम्भ सेवा मेडल' से एसएसपी ने किया सम्मानित आजमगढ़। प्रयागराज में आयोजित विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम 'महाकुम्भ 2025' के सकुशल और सफल आयोजन के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों के सम्मान का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी क्रम में आज जनपद आजमगढ़ के पुलिस लाइन सभागार में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की घोषणा के अनुपालन में, महाकुम्भ ड्यूटी में अपना अभूतपूर्व योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को 'महाकुम्भ सेवा मेडल' एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। एसएसपी ने बढ़ाया जवानों का उत्साह जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. अनिल कुमार ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने अपने हाथों से पुलिस बल के जवानों और अधिकारियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया। सम्मान की मुख्य बातें: कुल सम्मानित संख्या: 1042 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी। प्रमुख अधिकारी: जनपद के एसपी ट्रैफिक सहित कई राजपत्रित अधिकारियों को भी इस सेवा पदक से नवाजा गया। उपस्थिति: समारोह में जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार का आधिकारिक वक्तव्य समारोह के दौरान मीडिया और पुलिस बल को संबोधित करते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा: "महाकुम्भ जैसे वैश्विक आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती थी। हमारे जनपद से गए 1042 जांबाज साथियों ने दिन-रात सेवा भाव से ड्यूटी की, जिसका परिणाम आज इस सम्मान के रूप में सामने है। यह मेडल न केवल उनके समर्पण का प्रतीक है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है।" सेवा और समर्पण का सम्मान प्रयागराज महाकुम्भ में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में आजमगढ़ पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शासन द्वारा प्रदान किए गए इस सम्मान से पुलिसकर्मियों के मनोबल में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। सभागार में मेडल पाकर पुलिसकर्मियों के चेहरे गर्व से खिले नजर आए।
- आजमगढ़, 24 मार्च 2026। पुलिस कर्मियों को गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस लाइन सभागार में एचआईवी/एड्स विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन ने की। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग एवं दिशा यूनिट, मऊ से आए विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एचआईवी/एड्स के संक्रमण के कारणों, लक्षणों तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान बताया गया कि सही जानकारी और जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति में समय पर जांच कराना आवश्यक है, ताकि उपचार समय रहते शुरू किया जा सके। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस कर्मी अक्सर तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं, ऐसे में उनके लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी कर्मियों से अपील की कि वे इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का लाभ उठाएं और स्वयं के साथ-साथ समाज को भी जागरूक करें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पुलिस कर्मियों के प्रश्नों का विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। इस पहल की विभाग में सराहना की जा रही है, क्योंकि यह न केवल कर्मियों के स्वास्थ्य संरक्षण में सहायक है, बल्कि समाज में भी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।1
- महिला अपनी ही जमीन पर हक पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर बाराबंकी जनपद के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में जमीन कब्जेदारी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपनी ही जमीन पर हक पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमीन उनके नाम खतौनी में दर्ज होने के बावजूद दबंग विपक्षियों ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है और प्रशासन से शिकायत के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मामला जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के छुल्हा गांव का है। पीड़िता सरोज कश्यप का कहना है कि उनकी कृषि भूमि उनके नाम दर्ज है, लेकिन हाज़िहार गांव के कुछ लोगों ने उस पर जबरन कब्जा कर लिया है। पीड़िता के अनुसार, जब भी वह अपनी जमीन पर खेती करने या कब्जा हटाने की बात करती हैं, तो विपक्षी पक्ष उग्र हो जाता है और गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो जाता है। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि विपक्षियों ने उनकी जमीन पर जबरन फसल भी बो दी है। जब उनकी बेटी खेत पर खेती करने पहुंची तो विपक्षी महिलाएं भी मौके पर पहुंच गईं और विवाद बढ़ गया। पीड़िता का यह भी कहना है कि विपक्षी पक्ष की महिलाएं—पत्नी और बेटियां—डंडा लेकर मौके पर पहुंच जाती हैं और डराने-धमकाने का प्रयास करती हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह पूरा घटनाक्रम साफ तौर पर देखा जा सकता है। पीड़िता का कहना है कि इस मामले में पहले भी दोनों पक्षों के बीच सुलह हुआ था, जिसमें यह तय हुआ था कि आगे केवल वही पक्ष खेती करेगा, जिसके नाम जमीन कागजों में दर्ज है। लेकिन सुलह के बावजूद विपक्षियों ने समझौते को दरकिनार करते हुए फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। पीड़ित परिवार के मुताबिक राम सिंह, हंसराज, बृजेश, राम सिंह और सावित्री समेत कुछ लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा भी दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए कई बार प्रशासन और अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। एक ओर प्रदेश सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन के कागज और खतौनी में नाम होने के बावजूद वह अपनी ही जमीन से वंचित हैं। वहीं, इस पूरे मामले पर थाना अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है, मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। न्याय न मिलने से हताश पीड़िता ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तो वह अपने खेत के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।2
- आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में अपराधियों और गौ-तस्करों के खिलाफ लगातार जारी कार्रवाई के दावों के बीच एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मेंहनाजपुर थाना क्षेत्र के झिंझपुर सरैया गांव के सिवान में बीती रात गौ-तस्करों ने कथित तौर पर चार प्रतिबंधित गायों को काट डाला। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी गुस्सा व्याप्त है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना का विवरण प्राप्त जानकारी के अनुसार, झिंझपुर सरैया गांव के ग्रामीण जब सुबह नित्य क्रिया के लिए सिवान (खेतों) की तरफ निकले, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। खेतों में भारी संख्या में प्रतिबंधित पशुओं के अवशेष बिखरे पड़े थे। ग्रामीणों का दावा है कि वहां करीब 4 गायों के अवशेष थे। घटना की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल घटना की सूचना पाकर थानाध्यक्ष मेंहनाजपुर दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उपस्थित लोगों के अनुसार: पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा केवल एक गाय के काटे जाने की बात कही गई, जबकि मौके पर अवशेष ज्यादा थे। आरोप है कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों के मोबाइल से घटना के वीडियो और फोटो पुलिस द्वारा जबरन डिलीट कराए गए। इस घटना से ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि क्षेत्र में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं, जबकि पूर्व में भी ग्रामीणों ने खुद सक्रिय होकर तस्करों को पकड़ा था। आधिकारिक बयान इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ लालगंज ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि: "मेरे और थाना प्रभारी द्वारा मौके का मुआयना किया गया है। जो भी अवशेष मिले हैं, उनकी नियमानुसार सैंपलिंग कराई जा रही है ताकि फॉरेंसिक जांच हो सके। अवशेषों को गड्ढा खुदवाकर मिट्टी में दफन कर दिया गया है। इस मामले में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं।" क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति झिंझपुर सरैया गांव में इस घटना के बाद से तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। ग्रामीण पुलिस की गश्त और सतर्कता पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस मुस्तैद होती, तो गांव के इतने करीब अपराधी इस तरह की वारदात को अंजाम देकर फरार होने में सफल नहीं होते। अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।1
- Post by Nafe khan 👨🔧👩🔧1
- Post by SONI DEVI1
- मऊ। जिला गंगा समिति, मऊ द्वारा गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत रामवचन सिंह महिला महाविद्यालय, बगली पिजड़ा में श्रमदान, वर्षा जल संचयन हेतु स्थित तालाब के पुनरोद्धार तथा गंगा लोकगीत आधारित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत छात्राओं ने गंगा लोकगीतों के माध्यम से नदियों की सुरक्षा, स्वच्छता तथा उनकी निर्मलता एवं अविरलता का संदेश दिया। साथ ही श्रमदान करते हुए लगभग 80 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमेश कुमार एवं जिला परियोजना अधिकारी डॉ. हेमंत यादव द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर लोकगीत एवं पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। लोकगायिका मंजू चौहान ने अपने गीतों के माध्यम से विभिन्न नदियों के संरक्षण का संदेश देते हुए छात्राओं में स्वच्छता एवं गंगा सहित अन्य नदियों के प्रति प्रेम एवं जागरूकता उत्पन्न की। छात्रा अर्चना सिंह चौहान, आकांक्षा चौहान, मीनाक्षी द्विवेदी, स्नेहा कनौजिया आदि ने मनोहारी लोकगीतों की प्रस्तुति दी। वहीं पूनम चौहान, काजल वर्मा सहित अन्य छात्राओं ने पर्यावरण एवं नदी संरक्षण विषय पर आकर्षक पोस्टर बनाकर जागरूकता का संदेश दिया। इसके पश्चात जल स्रोतों के संरक्षण के अंतर्गत सभी छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर स्थित तालाब में फैली गंदगी की सफाई कर उसे स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रविंद्र कुमार पांडे ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के डॉ. पवन कुमार सिंह, डॉ. दीपक पाराशर एवं डॉ. शिवनाथ प्रसाद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में प्राचार्य डॉ. रमेश कुमार ने कविता के माध्यम से नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। डॉ. हेमंत यादव ने उपस्थित सभी लोगों को गंगा स्वच्छता की शपथ दिलाई तथा आह्वान किया कि हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि अपने देश की नदियों की निर्मलता एवं अविरलता की पुनर्स्थापना हेतु निरंतर प्रयास करेंगे।4
- अयोध्या देवकाली बाई पास पेट्रोल डीजल के लिए उमड़ी भीड़ व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पुलिसकर्मी तैनात1
- तस्वीर में दिख रहा यह नवजात… इंसानियत को झकझोर देने वाला सच उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक नवजात शिशु को गन्ने के खेत में झोले में छोड़ दिया गया। मासूम के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे सुरक्षित अपने साथ ले आए। सोचने वाली बात है कि जिस बच्चे के लिए नौ महीने का इंतजार होता है, वही इस तरह असुरक्षित हाल में कैसे छोड़ दिया जाता है। यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, इस अंधेरे के बीच एक उम्मीद की किरण भी दिखी—वे ग्रामीण, जिन्होंने बिना देर किए उस मासूम की जान बचाई। ऐसे लोग ही इंसानियत को जिंदा रखते हैं। जरूरत है कि हम समाज के रूप में अधिक संवेदनशील बनें और ऐसी परिस्थितियों को समझते हुए सही मदद और जागरूकता बढ़ाएं, ताकि कोई भी मासूम इस तरह असहाय न छोड़ा जाए।1