सोनबरसा टांडा कला प्राथमिक विद्यालय में एक ही कमरे में पढ़ते दो कक्षाओं के बच्चे। जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली टांडाकला। चहनिया विकास खंड के सोनबरसा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कमरों की भारी कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय में जगह का अभाव होने के कारण एक ही क्लासरूम में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे शिक्षकों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है, वहीं बच्चों का ध्यान भी पढ़ाई पर ठीक से नहीं लग पा रहा है। ग्राम प्रधान राधिका देवी के प्रतिनिधि आनंद सोनकर ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व कायाकल्प योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से विद्यालय का जीर्णोद्धार कराया गया था। लेकिन कायाकल्प कार्य पूरा होने के महज एक-दो महीने बाद ही विद्यालय के कुछ कमरों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद से विद्यालय में कमरों की कमी बनी हुई है। कमरों को ध्वस्त किए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक नए क्लासरूम का निर्माण शुरू नहीं कराया जा सका है। विद्यालय प्रशासन और ग्राम पंचायत प्रतिनिधि की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। कमरों की कमी के कारण विद्यालय में एक ही कमरे में दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। इससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही बच्चों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय में जल्द से जल्द नए क्लासरूम का निर्माण कराने की मांग की है।
सोनबरसा टांडा कला प्राथमिक विद्यालय में एक ही कमरे में पढ़ते दो कक्षाओं के बच्चे। जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली टांडाकला। चहनिया विकास खंड के सोनबरसा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कमरों की भारी कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय में जगह का अभाव होने के कारण एक ही क्लासरूम में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे शिक्षकों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है, वहीं बच्चों का ध्यान भी पढ़ाई पर ठीक से नहीं लग पा रहा है। ग्राम प्रधान राधिका देवी के प्रतिनिधि आनंद सोनकर ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व कायाकल्प योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से विद्यालय का जीर्णोद्धार कराया गया था। लेकिन कायाकल्प कार्य पूरा होने के महज एक-दो महीने बाद ही विद्यालय के कुछ कमरों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद से विद्यालय में कमरों की कमी बनी हुई है। कमरों को ध्वस्त किए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक नए क्लासरूम का निर्माण शुरू नहीं कराया जा सका है। विद्यालय प्रशासन और ग्राम पंचायत प्रतिनिधि की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। कमरों की कमी के कारण विद्यालय में एक ही कमरे में दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। इससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही बच्चों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय में जल्द से जल्द नए क्लासरूम का निर्माण कराने की मांग की है।
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- भावुक माहौल में थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह को दी गई विदाई जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली चहनिया (चंदौली)। बलुआ थाना परिसर में मंगलवार को थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह के स्थानांतरण पर भावभीनी विदाई समारोह आयोजित किया गया। करीब छह माह के कार्यकाल में अपनी कार्यशैली और कानून-व्यवस्था को लेकर अलग पहचान बनाने वाले थानाध्यक्ष के स्थानांतरण की खबर से पुलिसकर्मियों के साथ ही क्षेत्रीय लोगों में भी मायूसी देखने को मिली। विदाई समारोह के दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं। अरुण प्रताप सिंह के नेतृत्व में बलुआ थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। उनकी कार्यशैली से जहां आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई, वहीं अपराधियों में पुलिस का भय बना रहा। क्षेत्रीय लोगों ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया। विदाई समारोह में खंडवारी ग्राम पंचायत प्रशासक सतीश गुप्ता, समाजसेवी डा. अजय सिंह और गुड्डू गिरी ने थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। वहीं बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, व्यापारी, क्षेत्रीय ग्रामीण और गणमान्य लोग मौजूद रहे। बलुआ थाना की पूरी पुलिस टीम की ओर से भी थानाध्यक्ष को माल्यार्पण कर भावभीनी विदाई दी गई। इस दौरान पुलिसकर्मी भी भावुक नजर आए। लंबे समय तक उनके साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों ने उनके कार्यकाल और नेतृत्व को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बिताया गया समय हमेशा याद रहेगा। इस अवसर पर सतीश गुप्ता, धर्मेंद्र यादव, डा. अजय सिंह, अनिल यादव, निखिल त्रिपाठी, मुनीर अहमद, विनीत गुप्ता, गुड्डू गिरी, चंदन दुबे, चंद्रभान मौर्य, अरुण यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।1
- अलीगढ़ के एसएसपी नीरज कुमार जादौन का कांवड़ यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वीडियो में एसएसपी कंधे पर कांवड़ लेकर जाते और पत्नी के साथ खेरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते नजर आ रहे हैं, कांवड़ यात्रा के दौरान का बताया जा रहा यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है1
- कलम की तेज धार से | अयोध्या "वफादारी की आखिरी सांस तक लड़ाई" घर बचाने के लिए कोबरा से भिड़ी जोया, सर्प को मारकर खुद शहीद अयोध्या। कैंट थाना क्षेत्र - गद्दोपुर रात के सन्नाटे में घर की चौखट पर वफादारी की एक जंग लड़ी गई। एक तरफ मौत बनकर आया जहरीला कोबरा, दूसरी तरफ थी पालतू डॉग जोया। नतीजा सर्प मारा गया, पर जोया भी शहीद हो गई। क्या हुआ उस रात गद्दोपुर निवासी वेदांत ट्रेडर्स के मालिक प्रवीण त्रिपाठी बीती रात घर पर नहीं थे। घर की रखवाली का जिम्मा था उनकी पालतू डॉग जोया के पास। देर रात घर में एक भयानक सर्प घुसने लगा। जोया ने खतरे को भांपते ही एक पल की देर नहीं की। वो सीधे सर्प पर टूट पड़ी। काफी देर तक चली जंग। कोबरा ने जोया को डस लिया। जहर शरीर में उतरा। लेकिन जोया पीछे नहीं हटी। आखिरी दम तक लड़ती रही और आखिरकार सर्प को मार गिराया। सुबह जब परिवार लौटा तो देखा - फर्श पर मरा हुआ सर्प पड़ा था और उसके बगल में जोया भी दम तोड़ चुकी थी। ये पहली बार नहीं था परिवार के अनुसार जोया पहले भी 2 बार घर में घुसे सर्पों को मारकर अपनी वफादारी साबित कर चुकी थी। इस बार उसने अपनी जान देकर वो फर्ज निभाया। घटना के बाद से पूरे गद्दोपुर इलाके में चर्चा है। प्रवीण त्रिपाठी का परिवार जोया की मौत से बेहद दुखी है। कलम की तेज धार इंसान ने उसे "कुत्ता" कहा। उसने फर्ज निभाकर "इंसानियत" दिखा दी। 1. वफादारी का मतलब मालिक घर पर नहीं था। ताला नहीं था। सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। था तो सिर्फ जोया। और उसने साबित कर दिया कि वफादारी तनख्वाह से नहीं, दिल से आती है। 2. हम और वो हम 10 हजार की सिक्योरिटी कैमरा लगाते हैं। जोया ने बिना कैमरे, बिना ट्रेनिंग, बिना छुट्टी के 24 घंटे ड्यूटी की। और आखिरी सांस तक लड़ी। 3. कड़वा सच गली के कुत्ते को हम पत्थर मारते हैं। पर जब जहर वाला सांप घर में घुसेगा तो सबसे पहले वही भौंकेगा। वो हमारी रखवाली करता है, हम उसका अपमान। प्रवीण त्रिपाठी के लिए जोया सिर्फ पालतू नहीं, परिवार थी। और परिवार के लिए जान देना - यही सबसे बड़ा धर्म है। सीख के 3 शब्द 1. जागरूकता बरसात में सांप घर में घुसते हैं। घर के आसपास झाड़ियां साफ रखें। 2. सम्मान गली के आवारा कुत्तों को मारें नहीं। वो आपकी अनदेखी सुरक्षा करते हैं। 3. कृतज्ञता जोया जैसी वफादारी को सलाम। एक पुष्प अर्पित कीजिए। अंतिम पंक्ति इंसान 2 दिन की नौकरी के लिए वफादारी बेच देता है। और जोया ने मौत को गले लगाकर वफादारी की मिसाल लिख दी। शत-शत नमन जोया। तू कुत्ता नहीं, घर की रक्षक थी।3
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