अशोकनगर जिला न्यायालय ने 10 वर्षीय मूकबधिर दिव्यांग बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन दोषियों को उनके शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. के. निमामा ने अजय कुशवाह, जगदीश कुशवाह और भगवत कुशवाह को दोषी करार देते हुए उन पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला घटना के लगभग आठ माह के भीतर सुनाया गया है। वर्ष 2025 में हुई इस घटना के अनुसार, आरोपी पीड़िता को जबरन मक्का के खेत में ले गए थे, जहाँ उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आसपास के लोगों के मौके पर पहुँचने के बाद आरोपी पीड़िता को घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। बालिका मूकबधिर होने के कारण उसके बयान साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की सहायता से दर्ज किए गए। पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता की आयु व दिव्यांगता से जुड़े प्रमाण जुटाकर 38 दिनों के भीतर विवेचना पूरी की और न्यायालय में चालान पेश किया। मामले में प्रभावी पैरवी के चलते 9 जुलाई को अदालत ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया। इस कार्यवाही में जिला अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव, उप निरीक्षक आशुतोष गुप्ता, उप निरीक्षक पुनीत दीक्षित, एएसआई भोलाराम रघुवंशी, आरक्षक शिवराम और आरक्षक नीरज सक्सेना की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
अशोकनगर जिला न्यायालय ने 10 वर्षीय मूकबधिर दिव्यांग बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन दोषियों को उनके शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. के. निमामा ने अजय कुशवाह, जगदीश कुशवाह और भगवत कुशवाह को दोषी करार देते हुए उन पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला घटना के लगभग आठ माह के भीतर सुनाया गया है। वर्ष 2025 में हुई इस घटना के अनुसार, आरोपी पीड़िता को जबरन मक्का के खेत में ले गए थे, जहाँ उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आसपास के लोगों के मौके पर पहुँचने के बाद आरोपी पीड़िता को घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। बालिका मूकबधिर होने के कारण उसके बयान साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की सहायता से दर्ज किए गए। पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता की आयु व दिव्यांगता से जुड़े प्रमाण जुटाकर 38 दिनों के भीतर विवेचना पूरी की और न्यायालय में चालान पेश किया। मामले में प्रभावी पैरवी के चलते 9 जुलाई को अदालत ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया। इस कार्यवाही में जिला अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव, उप निरीक्षक आशुतोष गुप्ता, उप निरीक्षक पुनीत दीक्षित, एएसआई भोलाराम रघुवंशी, आरक्षक शिवराम और आरक्षक नीरज सक्सेना की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
- दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और चल रहे आंदोलन को तत्काल समाप्त करने की अपील की है। डॉ. मिश्रा ने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि "यह पार्टी का निर्णय है, इस पर बवाल नहीं होना चाहिए।" उन्होंने आग्रह किया कि भाजपा का हर कार्यकर्ता संगठन के फैसले का सम्मान करे और किसी भी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन न करे। गौरतलब है कि भाजपा द्वारा दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित करने के बाद डॉ. मिश्रा के समर्थकों ने ग्वालियर-झांसी हाईवे पर प्रदर्शन किया था, जिससे तनाव की स्थिति बन गई। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। समर्थकों के इस विरोध के चलते दतिया की सियासत पूरी तरह गरमाई हुई है, जिसके बीच डॉ. मिश्रा की यह अपील आई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी हित को सर्वोपरि रखने और अनुशासन बनाए रखने का विशेष आग्रह किया है।1
- विपक्ष को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' करार देते हुए इसे लोकतंत्र के लिए एक अशुभ संकेत बताया गया है। राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि विपक्षी दलों के नेता या तो भाजपा में शामिल हो रहे हैं या तृणमूल कांग्रेस के साथ जा रहे हैं, जिसके चलते कालीघाट में केवल कुछ ही विपक्षी नेता शेष बचे हैं। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास की बयार बहने का दावा किया गया है। आज डानकुनी में 'लक्सकोजी' की नई फैक्ट्री का उद्घाटन हुआ, साथ ही पाइपलाइन में अमूल जैसी अन्य कंपनियों के भी आने की बात कही गई है। इस दौरान यह भी संदेश दिया गया है कि पिछले कई वर्षों में राज्य में कोई विकास नहीं हुआ, इसलिए अब नई सरकार को काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए। राजनीतिक हलकों में शमिक भट्टाचार्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि उनके प्रति नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन यह भी सच है कि उन्हीं के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद भाजपा में शामिल हुए हैं। वहीं, अभिषेक बनर्जी के वॉइस सैंपल और अदालत के रुख को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं, साथ ही वॉइस सैंपल देने जाने के दौरान हुई घटनाओं पर भी आपत्ति जताई गई है।1
- विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित पीतल मिल चौराहा के पास एक बंद पड़ी दुकान में सटोरिए ने बाकायदा सट्टे की दुकान खोल रखी है। यहाँ खुलेआम सट्टा चल रहा है और इसके लिए बाकायदा कर्मचारी रखे गए हैं जो शिफ्ट-बाय-शिफ्ट में काम करते हैं। इस खुलेआम चल रहे सट्टे के कारोबार की खबर सिविल लाइन पुलिस को भी है, लेकिन जब भी पुलिस दबिश देने जाती है, उसके पहले ही सट्टा खेलने और खिलाने वाले गायब हो जाते हैं। सट्टा खिलाने वाला मास्टरमाइंड अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है।2
- सागर जिले के बीना में मिशन कंपाउंड की दान भूमि को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। इस मामले में ईसाई समाज ने तहसीलदार डॉ अम्बर पंथी और एसडीओपी अंजय सनकत को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अंकिता किंग और उनके साथ आए कुछ लोगों ने दान भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की। इसके अलावा, बाहरी लोगों को बुलाकर भूमि पर तार फेंसिंग कराई गई, जिससे वहां विवाद की स्थिति बन गई। ईसाई समाज के अनुसार, सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू में किया। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। दूसरी तरफ, दूसरे पक्ष की अंकिता किंग ने ईसाई समाज के इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि शैलेन्द्र एडविन के पास संस्था द्वारा संबंधित प्लॉट आवंटित किए जाने का कोई भी वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मिशन कंपाउंड में बनी दुकान अवैध है और उसके पास खाली पड़ी जमीन पर भी अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भी प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर असल सच्चाई सामने लाई जाए। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों के बाद अब यह पूरा मामला प्रशासन के पास पहुंच चुका है। तहसीलदार और पुलिस प्रशासन द्वारा सौंपी गई शिकायतों की जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जमीन पर असल में किसका वैध हक है और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र के लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।4
- नरोत्तम मिश्रा भोपाल पहुंच गए हैं। भोपाल पहुंचने के बाद उन्होंने दतिया फोन किया और वहां मौजूद अपने कार्यकर्ताओं को फोन पर समझाते हुए बातचीत की।1
- गुना के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत झागर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कक्षा 9 में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव, समस्त स्टाफ और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव की उपस्थिति में निशुल्क साइकिलें बांटी गईं। विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए निशुल्क साइकिल वितरण का यह कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि शासन की छात्र हितैषी योजनाओं का लाभ समय पर मिलने से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल आने की सलाह देते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर छात्र अपना भविष्य संवारें। समारोह के दौरान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव और स्कूल स्टाफ ने भी उपस्थित अभिभावकों से अपने बच्चों को रोजाना स्कूल भेजने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विद्यार्थियों के हित में निशुल्क साइकिल के साथ-साथ छात्रवृत्ति और मुफ्त पुस्तकों के वितरण जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस वितरण समारोह में स्कूल स्टाफ के साथ-साथ बड़ी संख्या में अभिभावक भी शामिल हुए।1
- राजस्थान के बारां जिले की छबड़ा तहसील में तेलनी ग्राम पंचायत के निकट प्रकृति के बीच स्थित ऐतिहासिक कोटड़ा मेघनाथ का किला आज सरकारी उपेक्षा के चलते महज खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। छबड़ा कस्बे से करीब 20 किलोमीटर दूर हिंगलोट और नियामतपुर बाँधों के बीच पहाड़ी पर बना यह दुर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जंगलों से होकर जाने वाले दुर्गम रास्तों के बीच स्थित इस मौन गवाह को इतिहास की किताबों में भले ही जगह नहीं मिल सकी हो, लेकिन यह स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज भी जीवित है। स्थानीय जनश्रुतियों और इसकी स्थापत्य शैली के अनुसार, इस किले का निर्माण संभवतः 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच खींची चौहानों द्वारा कराया गया था। यह किला गागरोन दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बड़े-बड़े पत्थरों को चूने से जोड़कर बने इस किले के मुख्य दुर्ग क्षेत्र, आवासीय व मंदिर परिसर और गुप्त सुरंगों व जल स्रोतों के अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह किला खींची चौहानों की संकटकालीन राजधानी और सैन्य छावनी था, जहां से आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जाती थी। इसके साथ ही, अंग्रेजी शासनकाल में भी इस किले से कर वसूला जाता था। यहाँ हनुमान जी के मंदिर के साथ-साथ राजस्थान का एकमात्र मेघनाथ मंदिर भी स्थित है, जहां हर चतुर्दशी को विशेष पूजा की जाती है और मान्यता है कि यहाँ आने से हर समस्या का समाधान हो जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक क्षरण और देखरेख के अभाव में इस किले की दीवारें गिर चुकी हैं। इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए सेवानिवृत्त व्याख्याता और भूगोलवेत्ता एस.एल. नागर ने छबड़ा तहसील की प्राचीन विरासतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। लेखक व अध्यापक अरविंद गुर्जर का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राजस्थान पर्यटन विभाग को इस किले का अध्ययन कर इसे संरक्षित करना चाहिए और पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं और इतिहास प्रेमियों से भी इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।4
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभूति खंड क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें काले कोट पहने एक व्यक्ति और एक पुलिसकर्मी के बीच कथित तौर पर हाथापाई होती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पोस्टों में काले कोट वाले इस व्यक्ति को वकील बताया जा रहा है। वायरल दावों के मुताबिक, यह पूरा विवाद एक बस और कार के बीच हुई कथित मामूली टक्कर के बाद शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि जब पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले जाने की तैयारी कर रही थी, तभी उनके बीच बहस बढ़ गई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। वीडियो में कथित तौर पर वकील पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ते और धक्का-मुक्की करते दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया। सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इस घटना के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता विभूति खंड थाने पहुंचे और वहां विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, इन सभी वायरल दावों और वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्यों की अभी तक कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। किसी भी आधिकारिक पुलिस बयान या विश्वसनीय दस्तावेज़ से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को वायरल और अपुष्ट जानकारी के रूप में ही देखा जा रहा है। जांच पूरी होने और पुलिस का आधिकारिक बयान आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।1