27 सितंबर 19सौ 51 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। 27 सितंबर 1951—भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख। इसी दिन स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता और प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डाॅक्टर भीम राव अम्बेडकर ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अपना इस्तीफा दिया था। लेकिन सवाल यह है कि —बाबा साहब ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा क्यों दिया ? इसका जवाब खुद उनके इस्तीफा-पत्र और उसके बाद में संसद में दिए गए उनके बयानों से मिलता है। बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में लिखा कि वे काफी समय से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बारे में सोच रहे थे। उन्हें केवल एक उम्मीद ने रोके रखा था—कि मौजूदा संसद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हिंदू कोड बिल पारित हो जाएगा। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने बिल को छोटा करके केवल विवाह और तलाक से संबंधित हिस्से तक सीमित करने पर भी सहमति दी, ताकि कम-से-कम इतना काम तो पूरा हो सके। लेकिन जब विवाह और तलाक वाला हिस्सा भी आगे नहीं बढ़ पाया, तो बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने लिखा कि उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने का कोई उद्देश्य दिखाई नहीं देता। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसी दिन जवाब में लिखा कि वे हिंदू कोड बिल पारित न हो पाने और यहां तक कि उसके विवाह एवं तलाक वाले हिस्से को भी टाल दिए जाने से डाॅक्टर अम्बेडकर की निराशा को समझते हैं। इसके बाद 11 अक्टूबर 1951 को संसद में डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने इस्तीफे के कारणों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि हिंदू कोड बिल को पहले ही काफी सीमित कर दिया गया था। इसके बावजूद जब उस हिस्से को भी छोड़ दिया गया, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि दूसरे विधेयकों को हिंदू कोड बिल से प्राथमिकता दी गई। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। बाद में यह चर्चा होने लगी कि अम्बेडकर ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण इस्तीफा दिया था। लेकिन 12 अक्टूबर 1951 के अपने स्पष्टीकरण में डाॅक्टर अम्बेडकर ने इस बात को स्पष्ट रूप से नकारा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी बीमारी का उल्लेख प्रधानमंत्री को पहले दिए गए पत्र में किया था, लेकिन 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में बीमारी को इस्तीफे का कारण नहीं बताया था। इसलिए ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जाता है कि बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर के इस्तीफे का तत्काल और प्रमुख राजनीतिक-संसदीय कारण हिंदू कोड बिल को आगे न बढ़ा पाना था। इसके साथ सरकार के कामकाज और अन्य नीतिगत मुद्दों को लेकर उनकी कुछ असहमतियां भी थीं। 27 सितंबर 1951 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....
27 सितंबर 19सौ 51 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। 27 सितंबर 1951—भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख। इसी दिन स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता और प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डाॅक्टर भीम राव अम्बेडकर ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अपना इस्तीफा दिया था। लेकिन सवाल यह है कि —बाबा साहब ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा क्यों दिया ? इसका जवाब खुद उनके इस्तीफा-पत्र और उसके बाद में संसद में दिए गए उनके बयानों से मिलता है। बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में लिखा कि वे काफी समय से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बारे में सोच रहे थे। उन्हें केवल एक उम्मीद ने रोके रखा था—कि मौजूदा संसद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हिंदू कोड बिल पारित हो जाएगा। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने बिल को छोटा करके केवल विवाह और तलाक से संबंधित हिस्से तक सीमित करने पर भी सहमति दी, ताकि कम-से-कम इतना काम तो पूरा हो सके। लेकिन जब विवाह और तलाक वाला हिस्सा भी आगे नहीं बढ़ पाया, तो बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने लिखा कि उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने का कोई उद्देश्य दिखाई नहीं देता। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसी दिन जवाब में लिखा कि वे हिंदू कोड बिल पारित न हो पाने और यहां तक कि उसके विवाह एवं तलाक वाले हिस्से को भी टाल दिए जाने से डाॅक्टर अम्बेडकर की निराशा को समझते हैं। इसके बाद 11 अक्टूबर 1951 को संसद में डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने इस्तीफे के कारणों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि हिंदू कोड बिल को पहले ही काफी सीमित कर दिया गया था। इसके बावजूद जब उस हिस्से को भी छोड़ दिया गया, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि दूसरे विधेयकों को हिंदू कोड बिल से प्राथमिकता दी गई। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। बाद में यह चर्चा होने लगी कि अम्बेडकर ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण इस्तीफा दिया था। लेकिन 12 अक्टूबर 1951 के अपने स्पष्टीकरण में डाॅक्टर अम्बेडकर ने इस बात को स्पष्ट रूप से नकारा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी बीमारी का उल्लेख प्रधानमंत्री को पहले दिए गए पत्र में किया था, लेकिन 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में बीमारी को इस्तीफे का कारण नहीं बताया था। इसलिए ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जाता है कि बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर के इस्तीफे का तत्काल और प्रमुख राजनीतिक-संसदीय कारण हिंदू कोड बिल को आगे न बढ़ा पाना था। इसके साथ सरकार के कामकाज और अन्य नीतिगत मुद्दों को लेकर उनकी कुछ असहमतियां भी थीं। 27 सितंबर 1951 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....
- 27 सितंबर 19सौ 51 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। 27 सितंबर 1951—भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख। इसी दिन स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता और प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डाॅक्टर भीम राव अम्बेडकर ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अपना इस्तीफा दिया था। लेकिन सवाल यह है कि —बाबा साहब ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा क्यों दिया ? इसका जवाब खुद उनके इस्तीफा-पत्र और उसके बाद में संसद में दिए गए उनके बयानों से मिलता है। बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में लिखा कि वे काफी समय से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बारे में सोच रहे थे। उन्हें केवल एक उम्मीद ने रोके रखा था—कि मौजूदा संसद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हिंदू कोड बिल पारित हो जाएगा। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने बिल को छोटा करके केवल विवाह और तलाक से संबंधित हिस्से तक सीमित करने पर भी सहमति दी, ताकि कम-से-कम इतना काम तो पूरा हो सके। लेकिन जब विवाह और तलाक वाला हिस्सा भी आगे नहीं बढ़ पाया, तो बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने लिखा कि उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने का कोई उद्देश्य दिखाई नहीं देता। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसी दिन जवाब में लिखा कि वे हिंदू कोड बिल पारित न हो पाने और यहां तक कि उसके विवाह एवं तलाक वाले हिस्से को भी टाल दिए जाने से डाॅक्टर अम्बेडकर की निराशा को समझते हैं। इसके बाद 11 अक्टूबर 1951 को संसद में डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने इस्तीफे के कारणों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि हिंदू कोड बिल को पहले ही काफी सीमित कर दिया गया था। इसके बावजूद जब उस हिस्से को भी छोड़ दिया गया, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि दूसरे विधेयकों को हिंदू कोड बिल से प्राथमिकता दी गई। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। बाद में यह चर्चा होने लगी कि अम्बेडकर ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण इस्तीफा दिया था। लेकिन 12 अक्टूबर 1951 के अपने स्पष्टीकरण में डाॅक्टर अम्बेडकर ने इस बात को स्पष्ट रूप से नकारा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी बीमारी का उल्लेख प्रधानमंत्री को पहले दिए गए पत्र में किया था, लेकिन 27 सितंबर के इस्तीफा-पत्र में बीमारी को इस्तीफे का कारण नहीं बताया था। इसलिए ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जाता है कि बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर के इस्तीफे का तत्काल और प्रमुख राजनीतिक-संसदीय कारण हिंदू कोड बिल को आगे न बढ़ा पाना था। इसके साथ सरकार के कामकाज और अन्य नीतिगत मुद्दों को लेकर उनकी कुछ असहमतियां भी थीं। 27 सितंबर 1951 का यह इस्तीफा भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बन गया। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....1
- जनपद के दोहरीघाट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली [ग्राम पंचायत चकउथ] 40 साल पुराना पंचायत भवन तेज बारिश के कारण जमींदोज हो गया है। इस घटना के बाद स्थानीय ग्राम प्रधान गोपी कुमार और प्रधान प्रतिनिधि विजय कुमार बागी ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया है ## 🚨 मऊ क्रांति ग्राउंड रिपोर्ट: तेज बारिश से ढहा चकउथ का 40 साल पुराना पंचायत भवन; प्रधान प्रतिनिधि विजय बागी बोले— 'दलित बस्ती होने के कारण नेताओं ने फेर ली नजर' मऊ (विशेष ब्यूरो): जनपद मऊ के दोहरीघाट विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चकउथ से विकास के दावों की पोल खोलती हुई एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश के चलते ग्राम सभा का करीब 40 वर्ष पुराना जर्जर पंचायत भवन भरभरा कर जमींदोज हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त भवन के भीतर कोई मौजूद नहीं था, वरना एक बड़ा प्रशासनिक हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद ग्राम प्रधान गोपी कुमार और प्रधान प्रतिनिधि विजय कुमार बागी ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए क्षेत्र के सांसदों, विधायकों और जिला पंचायत के पुराने नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ## 📌 नेताओं ने हमेशा की अनदेखी, चुनावी वादे निकले खोखले घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जुझारू प्रधान प्रतिनिधि विजय कुमार बागी का दर्द छलक उठा। उन्होंने बेहद आक्रोशित लहजे में कहा, "क्षेत्र में चुनाव आते ही नेताओं का तांता लग जाता है। इस क्षेत्र में बहुत से ग्राम प्रधान बने, विधायक, सांसद और जिला पंचायत सदस्य आए और चले गए, लेकिन आज तक किसी भी बड़े जनप्रतिनिधि की नजर इस अत्यंत महत्वपूर्ण पंचायत भवन पर नहीं पड़ी। इस भवन की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन सबने इसे नजरअंदाज कर दिया।" ## 🛑 'दलित बस्ती होने के कारण लोग आने से कतराते हैं' — बड़ा आरोप प्रधान प्रतिनिधि विजय कुमार बागी ने सीधे तौर पर समाज और राजनीति के ठेकेदारों की मानसिकता पर प्रहार करते हुए एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि लोग हमारी ग्राम सभा में आना ही नहीं चाहते हैं। हमारे गांव को हमेशा उपेक्षा की नजर से देखा गया क्योंकि मेरा गांव एक दलित बस्ती है। नेताओं और अधिकारियों के लिए यह सिर्फ एक वोट बैंक का जरिया है, यही वजह है कि आज 40 साल पुरानी सरकारी इमारत बारिश के पानी में बह गई, लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।" ## 💼 वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल रहमान इदरीसी ने की तुरंत नए भवन की मांग इस पूरी घटना पर ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्टिंग कर रहे 'राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत' के उत्तर प्रदेश प्रचार मंत्री एवं 'मऊ क्रांति' के विशेष जिला संवाददाता पत्रकार अब्दुल रहमान इदरीसी ने जिला प्रशासन और शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। अब्दुल रहमान इदरीसी ने अपनी विशेष रिपोर्ट में कहा कि डिजिटल मंच "बहुजन की आवाज अब्दुल रहमान के साथ" हमेशा शोषितों और वंचितों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा। उन्होंने मऊ के जिलाधिकारी (DM) से मांग की है कि चकउथ ग्राम सभा की इस दलित बस्ती की उपेक्षा को तुरंत बंद किया जाए और गिरे हुए भवन के स्थान पर तत्काल प्रभाव से एक आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त 'नए पंचायत भवन' के निर्माण की स्वीकृति दी जाए ताकि ग्रामीणों को सरकारी कार्यों के लिए भटकना न पड़े। ------------------------------ मुख्य ग्राउंड रिपोर्टर: अब्दुल रहमान इदरीसी (प्रचार मंत्री - उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत एवं जिला संवाददाता - मऊ क्रांति) आधिकारिक डिजिटल आवाज: "बहुजन की आवाज अब्दुल रहमान के साथ" (फेसबुक पेज) ------------------------------ #Hashtags For #Social #Media: #MauNews #DohriGhat #Chakauth #PanchayatBhawan #GramPradhan #DalitBasti #UpravaNews #MauKranti #Samachar #BreakingNews #UttarPradeshGovernment #BahujanKiAwaaz #AdministrativeNegligence #RainDamage ------------------------------3
- मऊ पहुंचे अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद पहुंचे मऊ पत्रकारों के कई सवालों का दिया बेवाकी से जवाब1
- सेवा ही संकल्प अभियान के तहत मधुबन एवं घोसी विधानसभा क्षेत्र में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित सेवा ही संकल्प अभियान के अंतर्गत संस्कृति विभाग में पंजीकृत नुक्कड़ नाटक टीमों द्वारा जनपद के विधानसभा क्षेत्र मधुबन एवं घोसी के विभिन्न स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, उपलब्धियों एवं विकास कार्यों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक कलाकारों द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्षों तथा राज्य सरकार के साढ़े 9 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को प्रभावी एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं जनहितकारी कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई तथा पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने संवाद, गीत एवं अभिनय के जरिए सरकार की उपलब्धियों को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया। कार्यक्रमों में स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया तथा प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। सेवा ही संकल्प अभियान के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाते हुए जनजागरूकता को बढ़ावा देना है।1
- अहिकौरा गांव में अमित मौर्य जी कि माता जी कि श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भीड़ ,तेरही भोज का किया बहिष्कार1
- वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में विराट स्वरूप का दर्शन व श्रीराम जन्म चारो भाई एक साथ दिव्य आरती के साथ आज का प्रसंग समाप्त वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में विराट स्वरूप का दर्शन व श्रीराम जन्म चारो भाई एक साथ दिव्य आरती के साथ आज का प्रसंग समाप्त1
- 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल क्यों है? इस हड़ताल का ऐलान UFBU ने क्यों किया है और बैंक कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं? इस वीडियो में आसान भाषा में जानिए 5-Day Banking, Performance Linked Incentive (PLI), पेंशन और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर बैंक यूनियनों की मांगें। #️⃣ Hashtags #BankStrike #BankStrike2026 #UFBU #BankEmployees #5DayBanking #BankNews1
- सेवा ही संकल्प अभियान के तहत मधुबन एवं घोसी विधानसभा क्षेत्र में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित मऊ । सेवा ही संकल्प अभियान के अंतर्गत संस्कृति विभाग में पंजीकृत नुक्कड़ नाटक टीमों द्वारा जनपद के विधानसभा क्षेत्र मधुबन एवं घोसी के विभिन्न स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, उपलब्धियों एवं विकास कार्यों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक कलाकारों द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्षों तथा राज्य सरकार के साढ़े 9 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को प्रभावी एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं जनहितकारी कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई तथा पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने संवाद, गीत एवं अभिनय के जरिए सरकार की उपलब्धियों को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया। कार्यक्रमों में स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया तथा प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। सेवा ही संकल्प अभियान के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाते हुए जनजागरूकता को बढ़ावा देना है।4
- *लखनऊ: जानकीपुरम प्रथम वार्ड के मड़ियांव गांव में घरों में घुसा बारिश का पानी, लोग परेशान* लखनऊ के जानकीपुरम प्रथम वार्ड स्थित मड़ियांव गांव में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हल्की बारिश में ही नालियां चोक होने से पानी घरों के अंदर तक भर गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण हर बरसात में यही स्थिति बनती है। इस वार्ड की पार्षद निशा तिवारी हैं। लोगों ने नगर निगम से जल्द सफाई कराने की मांग की है। *लखनऊ: जानकीपुरम प्रथम वार्ड के मड़ियांव गांव में घरों में घुसा बारिश का पानी, लोग परेशान* लखनऊ के जानकीपुरम प्रथम वार्ड स्थित मड़ियांव गांव में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हल्की बारिश में ही नालियां चोक होने से पानी घरों के अंदर तक भर गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण हर बरसात में यही स्थिति बनती है। इस वार्ड की पार्षद निशा तिवारी हैं। लोगों ने नगर निगम से जल्द सफाई कराने की मांग की है।1