उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दोना निर्माण फैक्ट्री से सामने आई तस्वीरों और खुलासों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक मजदूरों को कथित बंधन और गंभीर प्रताड़ना की स्थिति से मुक्त कराया गया है, जिनकी हालत देखकर अधिकारियों तक के रोंगटे खड़े हो गए। इस पूरे अभियान का नेतृत्व मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय वर्मा ने किया, जो स्वयं मौके पर पहुंचे और मजदूरों की स्थिति को 'बेहद गंभीर और संवेदनशील' मामला बताया। उन्होंने छापेमारी के दौरान बरामद किए गए कथित प्रताड़ना उपकरणों की भी मौके पर जांच की। एसएसपी संजय वर्मा के निर्देशन में पुलिस टीम ने पीड़ित मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर आरोप है कि उसने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से मजदूरों को ₹12,000 मासिक वेतन और बेहतर रोजगार का झांसा देकर बुलाया था, लेकिन फैक्ट्री पहुँचने के बाद इन मजदूरों की जिंदगी कैदखाने में बदल गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और काम खत्म होने के बाद उन्हें फैक्ट्री परिसर में बने कमरों में बंद कर दिया जाता था, जहाँ से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। मजदूरों का आरोप है कि जरा सी गलती या विरोध पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। मुक्त कराए गए कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं; किसी के हाथ-पैर सूजे हुए थे तो किसी की पीठ और शरीर पर पुराने जख्मों के निशान दिखाई दिए। कई मजदूर इतने भयभीत थे कि शुरुआत में वे खुलकर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें दिनभर की कड़ी मेहनत के बदले केवल एक बार भोजन दिया जाता था, जिसमें अक्सर चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च ही मिलती थी। पर्याप्त भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को ऐसे उपकरण भी मिले हैं, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि उनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने के लिए किया जाता था। बरामद सामग्री को जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है, और एसएसपी संजय वर्मा ने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक साक्ष्य को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है: पुलिस को आशंका है कि कथित प्रताड़ना और अमानवीय परिस्थितियों के चलते तीन मजदूरों की मौत हुई है। इनमें से एक मृतक की पहचान कर ली गई है, जबकि अन्य मामलों की भी गहन जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या इनमें किसी आपराधिक साजिश की भूमिका रही। एसएसपी संजय वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। एसएसपी ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का है, बल्कि मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दोना निर्माण फैक्ट्री से सामने आई तस्वीरों और खुलासों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक मजदूरों को कथित बंधन और गंभीर प्रताड़ना की स्थिति से मुक्त कराया गया है, जिनकी हालत देखकर अधिकारियों तक के रोंगटे खड़े हो गए। इस पूरे अभियान का नेतृत्व मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय वर्मा ने किया, जो स्वयं मौके पर पहुंचे और मजदूरों की स्थिति को 'बेहद गंभीर और संवेदनशील' मामला बताया। उन्होंने छापेमारी के दौरान बरामद किए गए कथित प्रताड़ना उपकरणों की भी मौके पर जांच की। एसएसपी संजय वर्मा के निर्देशन में पुलिस टीम ने पीड़ित मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर आरोप है कि उसने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से मजदूरों को ₹12,000 मासिक वेतन और बेहतर रोजगार का झांसा देकर बुलाया था, लेकिन फैक्ट्री पहुँचने के बाद इन मजदूरों की जिंदगी कैदखाने में बदल गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और काम खत्म होने के बाद उन्हें फैक्ट्री परिसर में बने कमरों में बंद कर दिया जाता था, जहाँ से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। मजदूरों का आरोप है कि जरा सी गलती या विरोध पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। मुक्त कराए गए कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं; किसी के हाथ-पैर सूजे हुए थे तो किसी की पीठ और शरीर पर पुराने जख्मों के निशान दिखाई दिए। कई मजदूर इतने भयभीत थे कि शुरुआत में वे खुलकर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें दिनभर की कड़ी मेहनत के बदले केवल एक बार भोजन दिया जाता था, जिसमें अक्सर चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च ही मिलती थी। पर्याप्त भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को ऐसे उपकरण भी मिले हैं, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि उनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने के लिए किया जाता था। बरामद सामग्री को जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है, और एसएसपी संजय वर्मा ने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक साक्ष्य को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है: पुलिस को आशंका है कि कथित प्रताड़ना और अमानवीय परिस्थितियों के चलते तीन मजदूरों की मौत हुई है। इनमें से एक मृतक की पहचान कर ली गई है, जबकि अन्य मामलों की भी गहन जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या इनमें किसी आपराधिक साजिश की भूमिका रही। एसएसपी संजय वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। एसएसपी ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का है, बल्कि मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आने की संभावना है।
- इटावा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹15 लाख नकद भी बरामद किए हैं।1
- भिंड शहर के सर्किट हाउस में आईआरएस अधिकारी एवं रक्षा मंत्रालय में पदस्थ निदेशक अभिषेक चौहान ने अपनी पुस्तक 'उड़ चल अपने देश' पर एक प्रेसवार्ता आयोजित की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से पुस्तक की विषय-वस्तु और उसके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। अभिषेक चौहान ने बताया कि उनकी यह पुस्तक लोगों को अपनी जड़ों और मातृभूमि से जुड़े रहने का गहरा संदेश देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग रोजगार, व्यवसाय या अन्य कारणों से अपने मूल क्षेत्र से दूर रह रहे हैं, लेकिन उनकी पुस्तक यह विचार प्रस्तुत करती है कि दूर रहकर भी अपने गांव, शहर और क्षेत्र के विकास एवं सेवा से जुड़ा रहना संभव है। इसी सोच को उनकी कृति में प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। पुस्तक में पर्यावरणीय संकट, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को एक कथा के माध्यम से जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य यह बताना है कि यदि लोग अपनी जन्मभूमि और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं तो अनेक सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान संभव है। 'उड़ चल अपने देश' में भविष्य में पर्यावरण की बदहाली और उससे उत्पन्न होने वाले अस्तित्व के संकट को पलायन जैसी सामाजिक समस्या से जोड़कर दिखाया गया है। इसके समाधान के रूप में, घाटी की समृद्धि और विकास के लिए कथा के पात्रों को सच्चे प्रहरी के रूप में चित्रित किया गया है। अभिषेक चौहान ने बताया कि यह पुस्तक विशेष रूप से ब्रज, बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों पर आधारित है। चूंकि वे स्वयं चंबल अंचल के मूल निवासी हैं, इसलिए इस क्षेत्र की समस्याओं, संभावनाओं और यहां के लोगों के जीवन को पुस्तक में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ लेखन में उनकी गहरी रुचि रही है, और इस पुस्तक को लिखने का उनका मुख्य उद्देश्य लोगों में अपने क्षेत्र, समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करना है। इस प्रेसवार्ता में कई साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी भी मौजूद थे।1
- भिंड में स्वर्गीय भरत तिवारी की दुखद मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करने, उनकी दिवंगत आत्मा की शांति और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से क्षेत्र के समस्त नागरिक एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालेंगे। यह कैंडल मार्च 24 जून 2026 (बुधवार) को शाम 7:00 बजे लोहिया चौक से शुरू होकर अशोक स्तंभ तहसील प्रांगण तक जाएगा।1
- मध्य प्रदेश के ग्राम जमुहा में लगभग 20 वर्षों से एक शासकीय रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटा दिया गया है। यह रास्ता, जो लगभग 200 मीटर लंबा और 66 फीट चौड़ा था तथा एक धार्मिक स्थल तक पहुँच प्रदान करता था, ग्राम के ही संतोष कुमार, झुंण्डी लाल, रामकुमार और अरविंद कुमार द्वारा नष्ट कर खेती के लिए उपयोग किया जा रहा था। यह मामला SDM लहार विजय सिंह यादव के संज्ञान में आने पर उन्होंने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। SDM ने चार पटवारियों का एक दल बनाकर विवादित भूमि सर्वे नंबर 1057 के विधिवत सीमांकन का निर्देश दिया। तहसीलदार दीपक शुक्ला के निर्देशन में राजस्व दल ने ग्राम जमुहा पहुंचकर भूमि का सीमांकन किया। सीमांकन के बाद मंगलवार को SDM के निर्देश पर राजस्व और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और शासकीय मुरम रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व मौजा पटवारी रविंद्र सिंह कुशवाहा, पटवारी योगेंद्र अनिल और पुलिस बल मौजूद रहे। इस अतिक्रमण को हटाने और सड़क निर्माण के बाद अब ग्रामीण बिना किसी बाधा के मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुँच सकेंगे।2
- इटावा में 4 UP NCC कैंप का समापन हो गया। इस दौरान यह भी बताया गया कि एनसीसी में A, B और C कार्ड का अपना अलग-अलग महत्व होता है।1
- उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम बलैयापुर में स्थित एक सार्वजनिक तालाब पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। गांव के नगला कन्हई निवासी जयवीर सिंह ने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर इस मामले की जांच तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के ही कुछ दबंगों द्वारा गाटा संख्या 122, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब/जलाशय भूमि के रूप में दर्ज है, उसके एक हिस्से पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस अवैध निर्माण से तालाब का मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है, जिससे पर्यावरण और ग्राम समाज के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। जयवीर सिंह ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी बताया है कि उन्होंने इससे पहले स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन और शासन के शिकायत पोर्टलों पर भी इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण उन्होंने उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। अपने अनुरोध में, जयवीर सिंह ने न्यायालयों द्वारा तालाबों और जलाशयों की भूमि के संरक्षण को लेकर जारी किए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, यदि अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाए तो उसे तुरंत हटाने, और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम से मौके का निरीक्षण कर तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का आग्रह किया है, क्योंकि सार्वजनिक उपयोग की भूमि और जल स्रोतों का संरक्षण जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।1
- बुधवार दोपहर करीब 12 बजे संत समाज, पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ग्वालियर-भिंड-इटावा मार्ग के निर्माण कार्य की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार न होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अपर कलेक्टर से मार्ग निर्माण की डीपीआर तैयार किए जाने की वर्तमान स्थिति और इसकी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सड़क निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर, उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने की अपील की।1
- जसवंतनगर के कचौरा बाईपास पर दुर्गापुरा गांव के सामने सोमवार को एक तेज रफ्तार कार की टक्कर से चार वर्षीय मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। कचौरा घाट बाईपास निवासी धर्मेंद्र कुमार का चार वर्षीय पुत्र सुखदेव दुर्गापुरा गांव के सामने सड़क पार कर रहा था, तभी कचौरा घाट की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मासूम करीब 20 फीट दूर सड़क पर जा गिरा। सीएचसी जसवंतनगर में डॉ. विकास अग्निहोत्री ने बताया कि बच्चे के सिर में गंभीर चोट आई है और वह बेहोशी की अवस्था में है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि रेफर कार्ड बनने के बाद 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन सीएचसी से लगभग एक किलोमीटर दूर बने प्वाइंट से अस्पताल पहुंचने में एंबुलेंस को आधे घंटे से अधिक समय लग गया। इस देरी पर परिजनों में गहरी नाराजगी है, और उनका कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस सेवा की यह कार्यप्रणाली गंभीर सवाल खड़े करती है।1