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बुधवार दोपहर करीब 12 बजे संत समाज, पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ग्वालियर-भिंड-इटावा मार्ग के निर्माण कार्य की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार न होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अपर कलेक्टर से मार्ग निर्माण की डीपीआर तैयार किए जाने की वर्तमान स्थिति और इसकी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सड़क निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर, उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने की अपील की।
भिंड खबरें
बुधवार दोपहर करीब 12 बजे संत समाज, पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ग्वालियर-भिंड-इटावा मार्ग के निर्माण कार्य की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार न होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अपर कलेक्टर से मार्ग निर्माण की डीपीआर तैयार किए जाने की वर्तमान स्थिति और इसकी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सड़क निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर, उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने की अपील की।
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- भिंड के कलेक्ट्रेट कार्यालय सभागार में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर ने जनसामान्य की शिकायतों को सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित, समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत भिंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर ने भी आवेदकों की समस्याओं पर सुनवाई की। कार्यक्रम में कुल 84 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर संबंधितों को कार्यवाही के निर्देश जारी किए गए। जनसुनवाई के दौरान ग्राम भारौली का पुरा निवासी रामबहादुर पुत्र हरदयाल ने ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर कलेक्टर ने तत्काल कार्यवाही करते हुए सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए, जिसके फलस्वरूप आवेदक श्री रामबहादुर को ट्राइसाइकिल तुरंत उपलब्ध कराई गई। कलेक्टर ने जनसुनवाई कार्यक्रम में गंभीर बीमारी से संबंधित इलाज, विद्युत बिलों में सुधार, हैंडपंपों के संधारण, पेंशन, सड़क दुर्घटना सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं, बीपीएल राशन कार्ड और जमीन पर कब्जा से संबंधित आवेदनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आवेदकों को की गई कार्यवाही से अवगत कराया जाए।1
- वरिष्ठ समाजसेवी और छात्र-छात्राओं को लगातार मार्गदर्शन देने वाले "हेल्प गुरु" प्रमोद राजावत ने जन जागरण के उद्देश्य से एक फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस मॉक ड्रिल का मुख्य लक्ष्य लोगों को यह बताना था कि आग लगने पर क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए और फायर उपकरणों का सही ढंग से कैसे इस्तेमाल किया जाए।1
- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी विजिलेंस मेरठ की टीम ने मंडी सचिव नहर सिंह को ₹1 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से पूरे मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, मंडी सचिव नहर सिंह पर आरोप है कि वह मंडी में कारोबार करने वाले आढ़तियों से हर महीने ₹20 हजार की अवैध वसूली करता था। कथित रूप से रिश्वतखोरी और दबाव बनाकर धन उगाही की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं, जिससे परेशान होकर आढ़ती अतुल गुप्ता ने एंटी विजिलेंस मेरठ से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद, विजिलेंस टीम ने एक सुनियोजित जाल बिछाया। जैसे ही नहर सिंह ने शिकायतकर्ता से ₹1 लाख की रिश्वत ली, मौके पर पहले से तैनात टीम ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी नहर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है, साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध वसूली के नेटवर्क में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल तो नहीं था। इस कार्रवाई के बाद मंडी क्षेत्र के व्यापारियों और आढ़तियों में इस पर खूब चर्चा हो रही है। विजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों में आगे भी इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।1
- इटावा जनपद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया एक विवादित व्यक्ति को समर्थन देने के कारण सवालों के घेरे में आ गए हैं, जिससे जनता में रोष व्याप्त है। सैफई निवासी इस व्यक्ति पर महिलाओं के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करने और समाज के विभिन्न वर्गों का अपमान करने के आरोप लगते रहे हैं। यूट्यूबर रिचा तिवारी और पत्रकार आशीष बाजपेई से जुड़े विवादों में भी इस व्यक्ति का नाम सुर्खियों में रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा महिला सम्मान और सामाजिक न्याय की बात करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला सम्मान और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने वाले जनप्रतिनिधियों को ऐसी विवादित छवि वाले व्यक्तियों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में गहरी नाराजगी और रोष का माहौल है। जनता की मांग है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने समर्थन और सार्वजनिक संदेशों के प्रति अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए, ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।1
- भिण्ड जिले के इंडस्ट्रियल एरिया मालनपुर में सोनू धाकड़ और उनकी पत्नी पूजा धाकड़ ने काजू प्रोसेसिंग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने "सोनाधिका एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड" की स्थापना कर अफ्रीका से कच्चा माल आयात किया, जिसे अपनी यूनिट में प्रोसेस और पैक करके अंतर्राष्ट्रीय तथा स्थानीय बाजारों में सफलतापूर्वक पहुंचाया जा रहा है। उनकी तैयार पैकिंग यूएई तक निर्यात होती है, वहीं घरेलू स्तर पर ग्वालियर और आगरा में भी काजू की मांग पूरी की जा रही है। पर्यावरण और संसाधन उपयोग की व्यावहारिक सोच के तहत, दंपति ने प्रोसेसिंग के बाद बचे काजू के छिलकों से तेल निकालने का भी व्यवस्थित प्रबंध किया है। इस नवोन्मेषी कदम ने न केवल अपशिष्ट को मूल्यवान कच्चे माल में बदला, बल्कि अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार किया। उनकी इकाई में प्रत्यक्ष रूप से 50-60 लोगों को रोजगार मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और कई परिवारों के जीवन स्तर में सुधार दिख रहा है। सोनू और पूजा की इस यात्रा में राज्य सरकार की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। उन्हें राज्य सरकार की एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत उद्योग विकास अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात नेटवर्क को मजबूत करने में सहायता मिली। आज मंगलवार शाम 4 बजे, दंपति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया, जिनके समर्थन से यह छोटा उद्योग बड़ी सफलता की ओर अग्रसर हो पाया है। सोनाधिका एक्सपोर्ट्स की यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि सही योजना, नवोन्मेष और समुदाय के लिए प्रतिबद्धता मिलकर छोटे उद्यमों को बड़े मुकाम तक पहुंचा सकती है। स्थानीय कौशल के विकास, निर्यातमुखी सोच और सरकारी सहयोग ने मिलकर सोनू और पूजा धाकड़ के सपने को साकार किया है।1
- भिंड में कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे कलेक्ट्रेट कक्ष में जनसुनवाई आयोजित की। इस दौरान उन्होंने आम जनता की शिकायतें सुनीं और उनके त्वरित, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर ने भी आवेदकों की समस्याओं पर सुनवाई की। कुल 84 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश भेजे गए। एक विशेष मामले में, ग्राम भारौली का पुरा निवासी रामबहादुर पुत्र श्री हरदयाल ने ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर श्री रामबहादुर को ट्राइसाइकिल उपलब्ध करवाई। कलेक्टर ने गंभीर बीमारी के इलाज, विद्युत बिलों में सुधार, हैण्डपंपों के संधारण, पेंशन, सड़क दुर्घटना सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं, बीपीएल राशन कार्ड और जमीन पर कब्जे से संबंधित आवेदनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, आवेदकों को की गई कार्रवाई से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दोना निर्माण फैक्ट्री से सामने आई तस्वीरों और खुलासों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक मजदूरों को कथित बंधन और गंभीर प्रताड़ना की स्थिति से मुक्त कराया गया है, जिनकी हालत देखकर अधिकारियों तक के रोंगटे खड़े हो गए। इस पूरे अभियान का नेतृत्व मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय वर्मा ने किया, जो स्वयं मौके पर पहुंचे और मजदूरों की स्थिति को 'बेहद गंभीर और संवेदनशील' मामला बताया। उन्होंने छापेमारी के दौरान बरामद किए गए कथित प्रताड़ना उपकरणों की भी मौके पर जांच की। एसएसपी संजय वर्मा के निर्देशन में पुलिस टीम ने पीड़ित मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर आरोप है कि उसने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से मजदूरों को ₹12,000 मासिक वेतन और बेहतर रोजगार का झांसा देकर बुलाया था, लेकिन फैक्ट्री पहुँचने के बाद इन मजदूरों की जिंदगी कैदखाने में बदल गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और काम खत्म होने के बाद उन्हें फैक्ट्री परिसर में बने कमरों में बंद कर दिया जाता था, जहाँ से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। मजदूरों का आरोप है कि जरा सी गलती या विरोध पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। मुक्त कराए गए कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं; किसी के हाथ-पैर सूजे हुए थे तो किसी की पीठ और शरीर पर पुराने जख्मों के निशान दिखाई दिए। कई मजदूर इतने भयभीत थे कि शुरुआत में वे खुलकर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें दिनभर की कड़ी मेहनत के बदले केवल एक बार भोजन दिया जाता था, जिसमें अक्सर चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च ही मिलती थी। पर्याप्त भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को ऐसे उपकरण भी मिले हैं, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि उनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने के लिए किया जाता था। बरामद सामग्री को जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है, और एसएसपी संजय वर्मा ने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक साक्ष्य को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है: पुलिस को आशंका है कि कथित प्रताड़ना और अमानवीय परिस्थितियों के चलते तीन मजदूरों की मौत हुई है। इनमें से एक मृतक की पहचान कर ली गई है, जबकि अन्य मामलों की भी गहन जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या इनमें किसी आपराधिक साजिश की भूमिका रही। एसएसपी संजय वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। एसएसपी ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का है, बल्कि मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आने की संभावना है।1
- इटावा के चकरनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गौहानी गांव में मुख्य मार्ग पर गंभीर जलभराव की समस्या सामने आई है, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। रनिंया-पाली संपर्क मार्ग से ग्राम पंचायत के प्रवेश द्वार पर गंदा पानी जमा होने के कारण यह स्थिति बनी है। इस जलभराव के दोनों ओर सड़क किनारे रखे विद्युत परिवर्तन (ट्रांसफार्मर) लगातार खतरे का संकेत दे रहे हैं। विद्युत विभाग के एक जानकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि यदि समय रहते इस पानी का निकास नहीं किया गया तो विभाग को दोनों डीपियों के कनेक्शन काटने पड़ेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि बरसात के मौसम में पानी में करंट उतरने या किसी शरारती तत्व द्वारा जानबूझकर करंट प्रवाहित करने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यह कदम दर्जनों उपभोक्ताओं को इस भयंकर गर्मी में बिजली कटौती की परेशानी झेलने पर मजबूर करेगा। विद्युत विभाग के कर्मचारी भी संभावित बड़े हादसे की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपने विभाग को अवगत करा रहे हैं। ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर खबरें चलने के बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर समस्या पर 'कुंडली मारे बैठे' हैं और 'उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही'। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अधिकारी 'आंखों पर गांधारी पट्टी बांधे' बैठे हैं और समाचार पत्रों में खबर प्रकाशन के बाद भी उन्हें 'मानो सांप सूंघ गया' है, उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बरसात शुरू होने वाली है और पानी के निकास के अभाव में यह जलभराव एक बड़े तालाब का रूप ले लेगा, जिससे लोगों और वाहनों का वहां से गुजरना अत्यंत खतरनाक हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई हादसा हुआ तो वर्तमान सरकार में 'बाबा' के रहते अधिकारी कैसे 'नपेंगे', यह समय ही बताएगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी इटावा, मुख्य विकास अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इटावा से अपील की है कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कराकर समस्या का तत्काल निस्तारण कराएं, क्योंकि तहसील प्रशासन स्तर के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक चुनौती दी है कि यदि इस जलभराव के कारण कोई घटना घटती है, तो इसका सीधा मुकदमा उन लोगों के खिलाफ दर्ज कराया जाएगा जिन्होंने पानी को रोका है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।4