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मथुरा व्यूरो रिपोर्ट मथुरा जनपद के शेरगढ़ स्थित प्राचीन श्री खेलन वन बिहारी मंदिर जिसे बलराम कुंड आश्रम के नाम से भी जाना जाता है।
द कहर न्यूज़ एजेंसी
मथुरा व्यूरो रिपोर्ट मथुरा जनपद के शेरगढ़ स्थित प्राचीन श्री खेलन वन बिहारी मंदिर जिसे बलराम कुंड आश्रम के नाम से भी जाना जाता है।
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- ब्रज की पवित्र धरती… आस्था का केंद्र… और उसी आस्था की आड़ में अगर कानून को खुली चुनौती दी जाए तो सवाल उठना लाज़मी है। क्या राधाकुंड में नियम सिर्फ़ आम लोगों के लिए हैं? और क्या प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासन बेबस हो जाता है? मामला गोवर्धन के कस्बा राधाकुंड स्थित घाट वाले मंदिर—रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी—का है। यहां बिना राधाकुंड नगर पंचायत की अनुमति और बिना नक्शा पास कराए निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। जब इस बारे में नगर पंचायत से जानकारी ली गई तो अधिशासी अधिकारी ने साफ कहा—निर्माण के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। यानि निर्माण अवैध है। नगर पंचायत के कर्मचारियों ने आनन-फानन में नोटिस तैयार कर महंत केशव दास, शिष्य अनंत दास, को थमाने की कोशिश की। लेकिन जानकारी के मुताबिक महंत केशव दास ने नोटिस लेने से ही मना कर दिया। सवाल यह है—अगर निर्माण वैध है तो नोटिस से परहेज क्यों? यह पहली बार नहीं है जब महंत केशव दास विवादों में आए हों। इससे पहले “भक्ति निवास आश्रम” के नाम पर राधाकुंड परिक्रमा मार्ग में अवैध निर्माण का मामला सामने आया था। जिस भूमि—खसरा नंबर 20, 30, 41—पर आश्रम बनाया गया, उस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे आदेश भी दिया गया था। इसके बावजूद निर्माण जारी रहा। आख़िर किसके भरोसे? 12 अक्टूबर 2015 को मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) ने उस बिल्डिंग को सील किया था। बाद में 17 सितंबर 2017 को महंत केशव दास ने प्राधिकरण को शपथ पत्र दिया कि वे स्वयं अवैध निर्माण हटा देंगे। लेकिन खबर लिखे जाने तक वह निर्माण जस का तस खड़ा है। तो फिर सवाल सीधा है—MVDA की कार्रवाई कागजों तक सीमित क्यों रह जाती है? सीलिंग के बाद भी निर्माण कैसे कायम है? शपथ पत्र के बाद भी तोड़फोड़ क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो भी शिकायत करने की कोशिश करता है, उसे या तो झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाता है या आर्थिक दबाव डालकर चुप करा दिया जाता है। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ अवैध निर्माण का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। अब निगाहें टिकी हैं लक्ष्मी एन. पर, जो वर्तमान में MVDA की सचिव हैं और पूरे मथुरा जिले में ताबड़तोड़ कार्रवाई के लिए जानी जाती हैं। क्या राधाकुंड में भी वैसी ही सख्ती देखने को मिलेगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? ब्रज की पवित्रता सिर्फ भजन और आस्था से नहीं बचती—वह कानून के पालन से भी सुरक्षित रहती है। अब देखना यह है कि राधाकुंड में कानून की जीत होती है… या प्रभाव की। क्योंकि सवाल सिर्फ एक मंदिर का नहीं—पूरे सिस्टम की साख का है।1
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