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एक सोशल मीडिया पोस्ट में जेएनयू से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर 'मीठे कॉकरोच' कहकर संबोधित किया गया है, जिसमें उनके प्रति तीखी उपहासपूर्ण भावना व्यक्त की गई है। पोस्ट के माध्यम से इन पर तंज कसा गया है कि उन्हें आजादी मुबारक हो और वे हंसते-मुस्कुराते रहें। लेखक ने अपनी बात को आगे बढ़ाने के लिए पाठकों से इस पोस्ट को फॉलो करने का आग्रह भी किया है, जिससे इसका संदेश प्रसारित हो सके।
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एक सोशल मीडिया पोस्ट में जेएनयू से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर 'मीठे कॉकरोच' कहकर संबोधित किया गया है, जिसमें उनके प्रति तीखी उपहासपूर्ण भावना व्यक्त की गई है। पोस्ट के माध्यम से इन पर तंज कसा गया है कि उन्हें आजादी मुबारक हो और वे हंसते-मुस्कुराते रहें। लेखक ने अपनी बात को आगे बढ़ाने के लिए पाठकों से इस पोस्ट को फॉलो करने का आग्रह भी किया है, जिससे इसका संदेश प्रसारित हो सके।
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- एक सोशल मीडिया पोस्ट में जेएनयू से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर 'मीठे कॉकरोच' कहकर संबोधित किया गया है, जिसमें उनके प्रति तीखी उपहासपूर्ण भावना व्यक्त की गई है। पोस्ट के माध्यम से इन पर तंज कसा गया है कि उन्हें आजादी मुबारक हो और वे हंसते-मुस्कुराते रहें। लेखक ने अपनी बात को आगे बढ़ाने के लिए पाठकों से इस पोस्ट को फॉलो करने का आग्रह भी किया है, जिससे इसका संदेश प्रसारित हो सके।1
- भांडेर तहसील के ग्राम खिरिया फैंजुल्ला के ग्रामीणों ने सरकारी ठेकेदारों पर बिजली के तार और खंभे चोरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में थाना प्रभारी भांडेर को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनके आवेदन के अनुसार, यह घटना 6 और 7 जून 2026 की दरमियानी रात को हुई, जब गांव से संबंधित खिरिया फैंजुल्ला की तरफ गई विद्युत लाइन के खंभे और तार काट दिए गए। इसकी सूचना विद्युत विभाग और ग्रामीणों को दी गई। ग्रामीणों ने अपने आवेदन में बताया है कि जब इस बारे में ठेकेदारों से पूछा गया, तो उन्होंने शाम तैडोत के जीतू दांगी के कहने पर धर्मेंद्र भदोरिया ठेकेदार द्वारा खंभे और तारों को उखाड़ने की बात कही। इस घटना के बाद से गांव में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे किसानों की फसलें खराब हो रही हैं और ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी ठेकेदारों की मनमानी से किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। समस्त ग्रामवासियों ने 07.06.26 को दिए गए इस आवेदन के माध्यम से प्रशासन से इस मामले में उचित और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है, तो वे एक उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे।1
- खलीलपुरा गांव में एक किसान की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इस मामले में, पीड़ित किसान ने टहरौली तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने संबंधित अधिकारियों से न्याय की मांग की है।1
- जालौन के कोंच तहसील क्षेत्र के जरा गांव निवासी किसान रामकिशोर पुरोहित ने रविवार सुबह लगभग 10:30 बजे उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) से शिकायत कर अपने बाग और पौधों को छुट्टा मवेशियों से बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। किसान का कहना है कि गांव के कुछ पशुपालक अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं, जिसके कारण उनकी वर्षों की मेहनत से तैयार किया जा रहा बाग लगातार नुकसान झेल रहा है। रामकिशोर पुरोहित ने एसडीएम को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी की प्रेरणा से अपनी लगभग 30 बीघा भूमि पर एक विशाल बाग विकसित किया है। इस बाग में करीब 3500 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें 2700 महोगनी, 350 सागौन के साथ-साथ दशहरी, अम्बिका, अनामिका, मियाँजाकी, कस्तूरी आम, अमरूद, ताइवानी पिंक अमरूद, सेव, बादाम, चीकू, अनार, आंवला, नींबू, किन्नू, कटहल और जामुन जैसे कई प्रकार के फलदार पौधे शामिल हैं। किसान के अनुसार, आगामी जून-जुलाई माह में आंवला, नींबू, सीताफल, आलूबुखारा और चंदन के पौधे भी लगाए जाने की योजना है। हालांकि, गांव में छुट्टा घूम रहे पशु उनके खेत और बाग में घुसकर पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे कई महोगनी के पौधे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इस क्षति से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उनके प्रयास को भी धक्का लगा है। पुरोहित ने यह भी बताया कि इस समस्या को लेकर वह पहले भी थाना दिवस में तीन बार शिकायत पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पशुपालकों को अपने पशु बांधकर रखने के निर्देश दिए जाएं तथा छुट्टा मवेशियों पर प्रभावी रोक लगाई जाए, ताकि उनके बाग और पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। किसान ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों पौधों पर संकट गहरा सकता है और उनकी वर्षों की मेहनत बर्बाद हो सकती है। इस मामले को लेकर क्षेत्र के अन्य किसानों में भी चिंता का माहौल है, क्योंकि छुट्टा पशुओं की समस्या ग्रामीण इलाकों में खेती और बागवानी के लिए लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।1
- पीतांबरा मंदिर में 'मोडी' द्वारा ठुमके लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना पर सवाल उठाते हुए, पोस्ट में लोगों से पूछा गया है कि 'ऐसी मोडी' के बारे में उनकी क्या राय है।1
- दतिया से एक चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है, जो विकास के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़ा करती है। जानकारी के अनुसार, दतिया के जिला अस्पताल में नौ माह की एक गर्भवती महिला को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो पाया। इस घटना ने क्षेत्र में कथित तौर पर विकास की उड़ान भरती जमीनी हकीकत की पोल खोल दी है।1
- मंडला क्षेत्र में इन दिनों खेती का मौसम अपने चरम पर है, लेकिन खेतों में हरियाली लाने वाले किसान आज खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बम्हनी बंजर क्षेत्र के किसानों ने गंभीर आरोप लगाया है कि उन्हें खाद वितरण केंद्रों के बाहर सुबह से शाम तक बैठाए रखा जाता है, लेकिन जरूरत के समय उन्हें खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती है। किसानों ने बताया कि उन्हें ₹1450 की कीमत वाली खाद की बोरी ₹2100 में दी जा रही है। इस स्थिति के कारण किसान बेहद बेहाल हैं और इस पूरी व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।1
- झांसी जनपद की तहसील टहरौली क्षेत्र के ग्राम भसनेह में शनिवार रात्रि एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात लगभग 9 बजे राहगीरों ने गुरसरांय पुलिस को सूचना दी कि भसनेह स्थित वाटर प्लांट के पास एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही गुरसरांय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मृतक की पहचान कराने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। शव की पहचान न हो पाने के कारण पुलिस आसपास के क्षेत्रों से भी जानकारी जुटा रही है। इस घटना की सूचना फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल शव मिलने के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी जांच आगे बढ़ा रही है और जल्द ही मृतक की पहचान तथा मौत के कारणों का खुलासा करने की बात कह रही है।1