बरेली- अलंकार अग्निहोत्री का गंभीर आरोप इस्तीफे के बाद मचा बवाल#ugc#bareilly#lucknownews#news#short अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के पीछे उन्होंने UGC के नए नियमों और हालिया प्रशासनिक घटनाओं को कारण बताया, जिन्हें उन्होंने अन्यायपूर्ण और भेदभाव को बढ़ाने वाला करार दिया। उनका इस्तीफा सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और खास तौर पर ब्राह्मण संगठनों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिए और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने उनके बयानों और आचरण को अनुशासनहीन मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई कर दी और विभागीय जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने उनके कुछ आरोपों को निराधार बताया है, जबकि समर्थक इसे सच बोलने की सजा बता रहे हैं। कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि UGC नियमों, प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक-राजनीतिक संतुलन पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
बरेली- अलंकार अग्निहोत्री का गंभीर आरोप इस्तीफे के बाद मचा बवाल#ugc#bareilly#lucknownews#news#short अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के पीछे उन्होंने UGC के नए नियमों और हालिया प्रशासनिक घटनाओं को कारण बताया, जिन्हें उन्होंने अन्यायपूर्ण और भेदभाव को बढ़ाने वाला करार दिया। उनका इस्तीफा सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और खास तौर पर ब्राह्मण संगठनों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिए और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने उनके बयानों और आचरण को अनुशासनहीन मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई कर दी और विभागीय जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने उनके कुछ आरोपों को निराधार बताया है, जबकि समर्थक इसे सच बोलने की सजा बता रहे हैं। कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि UGC नियमों, प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक-राजनीतिक संतुलन पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
- खादी के सामने खाकी नतमस्तक1
- अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के पीछे उन्होंने UGC के नए नियमों और हालिया प्रशासनिक घटनाओं को कारण बताया, जिन्हें उन्होंने अन्यायपूर्ण और भेदभाव को बढ़ाने वाला करार दिया। उनका इस्तीफा सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और खास तौर पर ब्राह्मण संगठनों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिए और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने उनके बयानों और आचरण को अनुशासनहीन मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई कर दी और विभागीय जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने उनके कुछ आरोपों को निराधार बताया है, जबकि समर्थक इसे सच बोलने की सजा बता रहे हैं। कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि UGC नियमों, प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक-राजनीतिक संतुलन पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।1
- Post by चन्द्र प्रकाश सिंह4
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- Post by Ajay yadav1
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