Shuru
Apke Nagar Ki App…
5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लगो करने को लेकर यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन का धरना #झारखण्ड
NEWS INDIAN 724
5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लगो करने को लेकर यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन का धरना #झारखण्ड
More news from Garhwa and nearby areas
- 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लगो करने को लेकर यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन का धरना #झारखण्ड1
- Post by Men of jharkhand1
- ला मय तेरी गीता पढ़ लू , तु पढ़ ले मेरी कुरान,, 77 वे गण तंत्र दिवस पर कौमी एकता , का प्रतीक भाषण, देखे वीडियो में1
- मानवीय संवेदना की मिसाल बनी केतार पुलिस बेटी की मौत के बाद गरीब परिवार के श्राद्ध कर्म में बढ़ाया मदद का हाथ. Hemant Kumar ki report केतार पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ कानून की रखवाली ही नहीं, बल्कि इंसानियत की भी सच्ची प्रहरी है। थाना क्षेत्र के ताली गांव निवासी अत्यंत गरीब सुबोध राम की पुत्री सोनी कुमारी के निधन के बाद केतार पुलिस ने मंगलवार को परिवार को श्राद्ध कर्म के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की है। बताया जाता है कि सोनी कुमारी की मौत बेंगलुरु में हुई, जहां वह सिलाई का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। अचानक आई इस दुखद घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पिता सुबोध राम के लिए अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म करना भी चुनौती बन गया था। इस कठिन घड़ी में केतार थाना प्रभारी अरुण कुमार रवानी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सुबोध राम को थाना बुलाया और उन्हें सहयोग राशि प्रदान की। थाना प्रभारी की इस सराहनीय पहल की पूरे क्षेत्र में जमकर प्रशंसा हो रही है। केतार पुलिस के इस कदम से यह साफ संदेश गया है कि पुलिस सिर्फ कानून की रक्षक नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के दुःख में खड़ी रहने वाली सच्ची सहायक भी है।1
- Post by The Update Abtak1
- सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का रोने वाला वीडियो वायरल. पत्नी को फोन कर बोले- योगी जी का अपमान हमसे बर्दाश्त नहीं हुआ! #UGC_RollBack #NarendraModi #AmitShah #myyogiadityanath #lucknow1
- मारने के नियत से लकड़ी कटवाया फिर घर का दीवार फट गया गढ़वा जिला चेतना का मामला है गढ़वा थाने में हुई मामला दर्ज1
- RIMS RANCHI: आज रांची स्थित रिम्स अस्पताल के डी-2 वार्ड में एक अत्यंत दर्दनाक और भावुक कर देने वाली स्थिति देखने को मिली। एक गरीब मुस्लिम महिला, जिनकी हालत बेहद नाजुक थी, उन्हें गंभीर अवस्था में भर्ती तो किया गया था, लेकिन लंबे समय तक बेड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।महिला की बिगड़ती हालत देखकर उनके भाई मुझसे मिले और रोते हुए बताया कि यदि आज इलाज नहीं हुआ तो उनकी बहन शायद कल तक जीवित नहीं बच पाएगी। यह सुनकर मैं भीतर से बेहद आहत और भावुक हो गया। ऐसी स्थिति में चुप रहना मेरे लिए संभव नहीं था।मैंने तुरंत नर्सिंग स्टाफ से बात की और मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेड उपलब्ध कराने की जोरदार मांग की। इस दौरान बहस भी हुई, लेकिन मैंने साफ शब्दों में कहा कि इलाज और जीवन से बड़ा कोई नियम नहीं होता। इसके बाद वहां मौजूद वार्ड इंचार्ज को भी पूरी स्थिति समझाई और मानवता के आधार पर तत्काल निर्णय लेने को कहा।अंततः उस गरीब महिला को बेड उपलब्ध कराया गया और इलाज शुरू हो सका। आज यह स्पष्ट हुआ कि इंसान की जान के आगे न धर्म होता है, न जाति, न अमीरी-गरीबी—सिर्फ मानवता होती है।मैं मानता हूँ कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी एक चुनौती है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता और इंसानियत सबसे पहले होनी चाहिए। एक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी होने के नाते, जरूरतमंद की आवाज़ बनना मेरा कर्तव्य है, और मैं आगे भी हर पीड़ित के लिए इसी तरह खड़ा रहूँगा।1