कल्पकथा स्थापना माह विशेष भेंटवार्ता कार्यक्रम दो पीढ़ियों से आलोकित हुआ। शामली उप्र से रमेश चंद्रा गौतम एवं उनकी दस वर्षीय बिटिया लावण्या सिंह गौतम सम्मानित। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी ने बताया कि नवाचार से सुसज्जित साहित्यिक साक्षात्कार कल्प भेंटवार्ता में कल्पकथा स्थापना माह विशेष कार्यक्रम का दूसरा अंक पिता पुत्री के नाम रहा।। डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे के संयोजन के प्रेरक संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ विचारक साहित्यकार श्री रमेश चंद्रा गौतम के प्रबुद्ध चिंतन और संस्कृत साहित्य को समर्पित हुआ। कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में दस वर्षीय कक्षा चार की विद्यार्थी बिटिया लावण्या सिंह गौतम ने अपनी बाल प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। चार चरणों क्रमशः व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न, और चटपटे प्रश्न अटपटे उत्तर, के विशिष्ठ आयोजन के अंत में वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत का गायन किया गया। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।
कल्पकथा स्थापना माह विशेष भेंटवार्ता कार्यक्रम दो पीढ़ियों से आलोकित हुआ। शामली उप्र से रमेश चंद्रा गौतम एवं उनकी दस वर्षीय बिटिया लावण्या सिंह गौतम सम्मानित। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी ने बताया कि नवाचार से सुसज्जित साहित्यिक साक्षात्कार कल्प भेंटवार्ता में कल्पकथा स्थापना माह विशेष कार्यक्रम का दूसरा अंक पिता पुत्री के नाम रहा।। डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे के संयोजन के प्रेरक संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ विचारक साहित्यकार श्री रमेश चंद्रा गौतम के प्रबुद्ध चिंतन और संस्कृत साहित्य को समर्पित हुआ। कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में दस वर्षीय कक्षा चार की विद्यार्थी बिटिया लावण्या सिंह गौतम ने अपनी बाल प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। चार चरणों क्रमशः व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न, और चटपटे प्रश्न अटपटे उत्तर, के विशिष्ठ आयोजन के अंत में वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत का गायन किया गया। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।
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- Post by Rubal1
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- खाकी और खाऊ विभाग के 'संरक्षण' में मिट्टी के सौदागरों का तांडव बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन बस्ती जिले में धरातल की हकीकत इसके ठीक उलट है। यहाँ नियम-कानून कागजों में सिमट कर रह गए हैं और 'मिट्टी के काले कारोबार' ने माफियाओं की जेबें तो भरी ही हैं, साथ ही सिस्टम की साख को भी मटियामेट कर दिया है। दुबौला और गनेशपुर: मिलीभगत की 'मिट्टी' से सने हाथ जिले के दुबौला पुलिस चौकी क्षेत्र के बेलालपुर और वॉल्टरगंज थाना अंतर्गत गनेशपुर कटरा खुर्द अवैध खनन के नए केंद्र बन चुके हैं। आरोप है कि दुबौला चौकी प्रभारी विवेकानंद तिवारी और संबंधित क्षेत्रों के पुलिसकर्मियों की सीधी सरपरस्ती में यह खेल रात-दिन फल-फूल रहा है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो जिला प्रशासन का खौफ है और न ही किसी दंडात्मक कार्रवाई का। 'विटामिन एम' के खेल में राजस्व की लूट खनन अधिकारी और पुलिस की यह जुगलबंदी सीधे तौर पर सरकारी राजस्व पर डाका डाल रही है। सूत्रों की मानें तो 'विटामिन एम' (मनी पावर) के प्रभाव में आकर जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखें मूंद चुके हैं। यदा-कदा होने वाली छापामारी केवल 'दिखावा' और खानापूर्ति बनकर रह गई है, ताकि उच्चाधिकारियों को कागजी रिपोर्ट सौंपी जा सके। हकीकत में, खनन माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि कार्रवाई से पहले ही उन्हें सूचना मिल जाती है। जर्जर सड़कें और सिसकती सुरक्षा मिट्टी से लदी ओवरलोड गाड़ियां जिले की सड़कों को काल के गाल में धकेल रही हैं। ओवरलोडिंग के कारण सड़कें जगह-जगह से धंस गई हैं और आए दिन हादसे हो रहे हैं। बेखौफ दौड़ते इन डंपरों और ट्रैक्टरों ने आम जनता का सड़कों पर चलना दूभर कर दिया है। अंतिम सवाल: कब टूटेगा यह तिलस्म? बस्ती की जनता पूछ रही है कि आखिर यह अवैध कारोबार कब थमेगा? क्या जिला प्रशासन के पास इन सफेदपोश और वर्दीधारी मददगारों पर लगाम कसने की हिम्मत है? अगर समय रहते खनन माफियाओं का यह सिंडिकेट नहीं तोड़ा गया, तो बस्ती की धरती न केवल खोखली होगी, बल्कि शासन-प्रशासन पर से जनता का बचा-कुचा भरोसा भी उठ जाएगा। सुनील दूबे की रिपोर्ट1