महाभारत को केवल एक युद्ध की गाथा न मानकर, मानव चेतना, नैतिकता और न्याय के द्वंद्व का एक जीवंत दस्तावेज़ माना जाता है, जिसमें दानवीर कर्ण एक जटिल और प्रभावशाली चरित्र के रूप में उभरते हैं। लेखक रोहित कुमार कनौजिया के अनुसार, अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कर्ण के साथ अन्याय हुआ, क्या उन्हें हमेशा पराया समझा गया, और क्या भगवान श्रीकृष्ण यह जानते थे कि उन्हें अधर्म के मार्ग से हटाए बिना हराना असंभव था। कर्ण का पूरा जीवन जन्म के समय त्याग दिए जाने से लेकर, सूतपुत्र कहकर अपमानित होने तक, 'परायेपन' के अंतहीन संघर्ष की कहानी है। समाज ने योग्यता से अधिक जाति और कुल को महत्त्व दिया, जिस कारण कर्ण ने द्रौपदी के स्वयंवर और रंगभूमि दोनों में स्वयं को पराया महसूस किया। इसी 'परायेपन' की टीस और दुर्योधन द्वारा दिए गए सम्मान ने कर्ण को उनका परम मित्र बना दिया, जिसके कारण उन्होंने दुर्योधन के गलत होने के बावजूद मित्रता का धर्म निभाया। यहीं से नीति और अनीति का वह ताना-बाना शुरू हुआ जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध की दिशा तय की। भगवान श्रीकृष्ण, जिन्हें धर्म का साक्षात स्वरूप माना जाता है, भली-भांति जानते थे कि कर्ण एक अजेय योद्धा हैं, जिनके पास अद्भुत धनुर्विद्या के साथ-साथ कवच-कुंडल और दानवीर स्वभाव भी था। श्रीकृष्ण का कर्ण को हराने या उनके वध की पृष्ठभूमि तैयार करने के पीछे कोई व्यक्तिगत शत्रुता नहीं थी, बल्कि 'महाधर्म' की स्थापना उनका लक्ष्य था। कृष्ण जानते थे कि कवच-कुंडल के रहते और अर्जुन से मानसिक रूप से श्रेष्ठ महसूस करते हुए कर्ण को हराना असंभव है। इसलिए इंद्र द्वारा कवच-कुंडल मांगना और रथ का पहिया धंसने के समय अर्जुन को बाण चलाने का निर्देश देना, उनकी योजना का हिस्सा था। श्रीकृष्ण ने युद्ध से पहले कर्ण को उनका वास्तविक परिचय देकर पांडवों के पक्ष में आने का निमंत्रण भी दिया था, लेकिन कर्ण ने अपने 'परायेपन' के दिनों में साथ देने वाले दुर्योधन को धोखा देने से इनकार कर दिया। कर्ण की यही निष्ठा उनकी महानता और पतन दोनों का कारण बनी। संपादकीय दृष्टिकोण से देखें तो कर्ण का यह कहना सही था कि उन्हें अपनों से ही परायापन मिला, लेकिन भगवान कृष्ण का दृष्टिकोण भी गलत नहीं था, क्योंकि उनका लक्ष्य किसी व्यक्ति विशेष को हराना नहीं, बल्कि अधर्म के स्तंभों को गिराना था। चूँकि कर्ण अधर्म (दुर्योधन) के पक्ष में ढाल बनकर खड़े थे, इसलिए उस ढाल को तोड़ना कृष्ण के लिए अनिवार्य हो गया था। रोहित कुमार कनौजिया निष्कर्ष निकालते हैं कि कर्ण इतिहास के वह महानायक हैं जो अपनी गलतियों और मजबूरियों के बावजूद सहानुभूति जगाते हैं। उनकी पराजय वास्तव में योग्यता की कमी नहीं, बल्कि उनकी नियति और गलत पक्ष के चुनाव का परिणाम थी, और उन्हें हराने के लिए स्वयं भगवान को भी अपनी नीतियों की पराकाष्ठा पर जाना पड़ा।
महाभारत को केवल एक युद्ध की गाथा न मानकर, मानव चेतना, नैतिकता और न्याय के द्वंद्व का एक जीवंत दस्तावेज़ माना जाता है, जिसमें दानवीर कर्ण एक जटिल और प्रभावशाली चरित्र के रूप में उभरते हैं। लेखक रोहित कुमार कनौजिया के अनुसार, अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कर्ण के साथ अन्याय हुआ, क्या उन्हें हमेशा पराया समझा गया, और क्या भगवान श्रीकृष्ण यह जानते थे कि उन्हें अधर्म के मार्ग से हटाए बिना हराना असंभव था। कर्ण का पूरा जीवन जन्म के समय त्याग दिए जाने से लेकर, सूतपुत्र कहकर अपमानित होने तक, 'परायेपन' के अंतहीन संघर्ष की कहानी है। समाज ने योग्यता से अधिक जाति और कुल को महत्त्व दिया, जिस कारण कर्ण ने द्रौपदी के स्वयंवर और रंगभूमि दोनों में स्वयं को पराया महसूस किया। इसी 'परायेपन' की टीस और दुर्योधन द्वारा दिए गए सम्मान ने कर्ण को उनका परम मित्र बना दिया, जिसके कारण उन्होंने दुर्योधन के गलत होने के बावजूद मित्रता का धर्म निभाया। यहीं से नीति और अनीति का वह ताना-बाना शुरू हुआ जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध की दिशा तय की। भगवान श्रीकृष्ण, जिन्हें धर्म का साक्षात स्वरूप माना जाता है, भली-भांति जानते थे कि कर्ण एक अजेय योद्धा हैं, जिनके पास अद्भुत धनुर्विद्या के साथ-साथ कवच-कुंडल और दानवीर स्वभाव भी था। श्रीकृष्ण का कर्ण को हराने या उनके वध की पृष्ठभूमि तैयार करने के पीछे कोई व्यक्तिगत शत्रुता नहीं थी, बल्कि 'महाधर्म' की स्थापना उनका लक्ष्य था। कृष्ण जानते थे कि कवच-कुंडल के रहते और अर्जुन से मानसिक रूप से श्रेष्ठ महसूस करते हुए कर्ण को हराना असंभव है। इसलिए इंद्र द्वारा कवच-कुंडल मांगना और रथ का पहिया धंसने के समय अर्जुन को बाण चलाने का निर्देश देना, उनकी योजना का हिस्सा था। श्रीकृष्ण ने युद्ध से पहले कर्ण को उनका वास्तविक परिचय देकर पांडवों के पक्ष में आने का निमंत्रण भी दिया था, लेकिन कर्ण ने अपने 'परायेपन' के दिनों में साथ देने वाले दुर्योधन को धोखा देने से इनकार कर दिया। कर्ण की यही निष्ठा उनकी महानता और पतन दोनों का कारण बनी। संपादकीय दृष्टिकोण से देखें तो कर्ण का यह कहना सही था कि उन्हें अपनों से ही परायापन मिला, लेकिन भगवान कृष्ण का दृष्टिकोण भी गलत नहीं था, क्योंकि उनका लक्ष्य किसी व्यक्ति विशेष को हराना नहीं, बल्कि अधर्म के स्तंभों को गिराना था। चूँकि कर्ण अधर्म (दुर्योधन) के पक्ष में ढाल बनकर खड़े थे, इसलिए उस ढाल को तोड़ना कृष्ण के लिए अनिवार्य हो गया था। रोहित कुमार कनौजिया निष्कर्ष निकालते हैं कि कर्ण इतिहास के वह महानायक हैं जो अपनी गलतियों और मजबूरियों के बावजूद सहानुभूति जगाते हैं। उनकी पराजय वास्तव में योग्यता की कमी नहीं, बल्कि उनकी नियति और गलत पक्ष के चुनाव का परिणाम थी, और उन्हें हराने के लिए स्वयं भगवान को भी अपनी नीतियों की पराकाष्ठा पर जाना पड़ा।
- उन्नाव में योग दिवस के अवसर पर एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जहाँ 'योग अपनाएं, निरोग रहें' का संदेश हर थाना परिसर में गूंजा। इस मेगा सेलिब्रेशन में हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। यह एक विशेष रिपोर्ट श्याम जी गुप्ता और तहसील संवाददाता मुकेश तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक हैरान कर देने वाली घटना में एक महिला के ऊपर से पूरी आम्रपाली एक्सप्रेस ट्रेन गुजर गई, लेकिन वह चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बच गई। घटना उन्नाव जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर शनिवार रात करीब 12:10 बजे हुई, जब महिला ट्रेन में चढ़ते समय फिसलकर पटरियों के बीच गिर गई और ट्रेन के 21 डिब्बे उसके ऊपर से गुजर गए, जिससे उसे केवल कान में मामूली खरोंच आई। मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के कोरबा के आम्रपाली गांव की रहने वाली 48 वर्षीय रामशिला अपने पति गंगाराम, बेटे सागर और भाई जय के साथ कई महीनों से उन्नाव में रह रही थीं और अचलगंज में एक ईंट भट्ठे पर काम करती थीं। बेटे सागर ने बताया कि शनिवार रात वे लोग अपने गांव वापस जा रहे थे और आम्रपाली एक्सप्रेस का टिकट लिया था। उनके अनुसार, प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने के बाद वह और उनके पिताजी सामान लेकर ट्रेन में चढ़ गए, जबकि उनकी मां रामशिला आखिर में चढ़ रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह ट्रेन व प्लेटफॉर्म के बीच पटरियों पर जा गिरीं। सागर के मुताबिक, उनकी मां गिरते समय चीखीं, जिस पर वह और उनके पिताजी बचाने के लिए ट्रेन से नीचे उतरे, लेकिन तब तक ट्रेन चल पड़ी थी। बेटे ने कहा कि यह गनीमत रही कि उनकी मां पटरियों के बिल्कुल बीचोबीच लेटी हुई थीं, जिससे ट्रेन की सभी 21 बोगियां उनके ऊपर से गुजर गईं और भगवान ने उन्हें बचा लिया। ट्रेन के गुजरने के बाद GRP-RPF के कर्मियों ने महिला को उठाया और तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि महिला पूरी तरह सुरक्षित और होश में है, उसे केवल कान में मामूली चोट लगी है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस हादसे के बाद रामशिला काफी देर तक सहमी हुई नजर आईं और अस्पताल में भी अपने पति का हाथ पकड़े रहीं, जिन्हें वह दिलासा देते रहे कि उसे कुछ नहीं हुआ है।3
- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को सराहा कि सीएम योगी ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान चंपत राय को अपने से दूर रखा। शंकराचार्य जी महाराज ने इस कदम को 'बहुत अच्छा' बताते हुए इसकी सराहना की।1
- लखनऊ के महिंगवा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की जान चली गई है। शनिवार रात एक अज्ञात वाहन की टक्कर से युवक उछलकर झाड़ियों में जा गिरा था। यह जानकारी मिली है कि हादसे के बाद युवक का शव 12 घंटे से भी अधिक समय तक झाड़ियों में पड़ा रहा। मृतक की पहचान महिंगवा के बेनीपुर निवासी राहुल मिश्रा के रूप में हुई है। वहीं, घटना को अंजाम देने के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया था।1
- उत्तर प्रदेश सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री एवं उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड के उपाध्यक्ष, माननीय विश्वनाथ जी ने 21 जून 2026 को लखनऊ के मलिहाबाद स्थित गोशा लालपुर का दौरा किया, जहाँ पहुँचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरे का मुख्य आकर्षण मलिहाबाद के विश्व प्रसिद्ध आमों की एक भव्य दावत रही, जिसका मंत्री जी ने बागों के बीच बैठकर भरपूर आनंद लिया। आमों का स्वाद लेने के बाद मंत्री विश्वनाथ जी काफी प्रफुल्लित दिखे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि, "मलिहाबाद के आमों की मिठास पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इस बाग की पावन मिट्टी में बैठकर इन आमों को खाने का अनुभव ही अलग है। यहाँ के आमों की मिठास में हमारे मेहनती किसानों का पसीना और मलिहाबाद की असली संस्कृति रची-बसी है।" इस आयोजन में भारतीय संविधान सम्मान समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष बौद्धमती विमला देवी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं, जिन्होंने मलिहाबाद के आमों की गुणवत्ता की सराहना की और क्षेत्र की प्रगति के लिए निरंतर प्रयासों पर जोर दिया। गोशा लालपुर में आयोजित इस शानदार आम पार्टी की मेजबानी विधायक प्रतिनिधि मेवालाल द्वारा की गई। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप देने और अतिथियों की सेवा में सतीश कुमार सिंह ने विशेष सक्रियता दिखाई। उनकी देखरेख में संपन्न हुए इस मिलन समारोह ने न केवल उपस्थित अतिथियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि क्षेत्रवासियों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे की मिठास को भी और गहरा कर दिया। इस अवसर पर सौरभ कांत यादव (कोटेदार) समेत क्षेत्र के अनेक सम्मानित प्रबुद्ध जन और बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मलिहाबाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह भाटी और चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा का कड़ा पहरा रखा, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ। मलिहाबाद के गोशा लालपुर में हुआ यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता के प्रति एक शानदार मिसाल बनकर सामने आया है।1
- लखनऊ जिले के माल थाना क्षेत्र अंतर्गत पतौना चौराहे पर रविवार को एक घर के पास लगे बिजली ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। आग की तेज लपटों ने पास खड़ी एक मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही इलाके में अफरातफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने बाल्टी तथा पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर दमकल विभाग और बिजली विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड की वजह से यह हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह बिजली सप्लाई गोपारामऊ पावर हाउस द्वारा की जाती है, और उनकी टीम ने भी मौके पर जाकर जांच पड़ताल की है। फिलहाल ट्रांसफार्मर की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए बिजली बाधित रही। हालांकि, जांच के बाद सप्लाई पूरी तरह से सामान्य बताई जा रही है और मौके पर शांति व्यवस्था बनी हुई है।1