logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

कच्ची पटरी के पास खेत में सिर कटी एक महिला का शव मिलने से हडकंप मच गया बुलंदशहर में नरसेना की कच्ची पटरी के पास खेत में एक महिला का शव मिला है, जिसका सिर गायब है । महिला की बाजू पर “बबली” नाम लिखा मिला है। पुलिस पहचान और हत्या के कारणों की जांच में जुटी है। यूपी आये दिन हो रही ऐसी हत्याएं सामने आ रही है?

11 hrs ago
user_JAI HIND MEDIA
JAI HIND MEDIA
Newspaper publisher Bulandshahr, Uttar Pradesh•
11 hrs ago
60552ef4-0ed7-414d-b6f9-05a4e9ddb316

कच्ची पटरी के पास खेत में सिर कटी एक महिला का शव मिलने से हडकंप मच गया बुलंदशहर में नरसेना की कच्ची पटरी के पास खेत में एक महिला का शव मिला है, जिसका सिर गायब है । महिला की बाजू पर “बबली” नाम लिखा मिला है। पुलिस पहचान और हत्या के कारणों की जांच में जुटी है। यूपी आये दिन हो रही ऐसी हत्याएं सामने आ रही है?

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • Post by Mehboob ALi
    1
    Post by Mehboob  ALi
    user_Mehboob  ALi
    Mehboob ALi
    Reporter बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • Post by Lokendra Raj Singh
    5
    Post by Lokendra Raj Singh
    user_Lokendra Raj Singh
    Lokendra Raj Singh
    Video Creator बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • बुलंदशहर में नरसेना की कच्ची पटरी के पास खेत में एक महिला का शव मिला है, जिसका सिर गायब है । महिला की बाजू पर “बबली” नाम लिखा मिला है। पुलिस पहचान और हत्या के कारणों की जांच में जुटी है। यूपी आये दिन हो रही ऐसी हत्याएं सामने आ रही है?
    2
    बुलंदशहर में नरसेना की कच्ची पटरी के पास खेत में एक महिला का शव मिला है, जिसका सिर गायब है । 
महिला की बाजू पर “बबली” नाम लिखा मिला है। पुलिस पहचान और हत्या के कारणों की जांच में जुटी है।
यूपी आये दिन हो रही ऐसी हत्याएं  सामने आ रही है?
    user_JAI HIND MEDIA
    JAI HIND MEDIA
    Newspaper publisher Bulandshahr, Uttar Pradesh•
    11 hrs ago
  • लेकिन बनारस में कुछ और ही चल रहा है। यहां के छात्र नाले से गैस निकालने की कोशिश कर विरोध करने पहुंचे। खाली सिलेंडर के साथ चूल्हे पर चाय बनाने की कोशिश किया। यह विरोध वाराणसी पुलिस को नागवार गुजरा और मौके पर पहुंची पुलिस ने सड़क बाधित करने की बात कह विरोध करने वाले छात्रों को खदेड़ा और विरोध की सामग्रियों को हटाया। अब सवाल यही है कि जनता से जुड़े मुद्दों का विरोध पूरे देश में शांतिपूर्वक चल रहा है, तो बनारस में इतना पैनिक होने की क्या जरूरत है? ​#varanasi #banaras #UPPolice #kashi ...
    1
    लेकिन बनारस में कुछ और ही चल रहा है। यहां के छात्र नाले से गैस निकालने की कोशिश कर विरोध करने पहुंचे। खाली सिलेंडर के साथ चूल्हे पर चाय बनाने की कोशिश किया। यह विरोध वाराणसी पुलिस को नागवार गुजरा और मौके पर पहुंची पुलिस ने सड़क बाधित करने की बात कह विरोध करने वाले छात्रों को खदेड़ा और विरोध की सामग्रियों को हटाया। अब सवाल यही है कि जनता से जुड़े मुद्दों का विरोध पूरे देश में शांतिपूर्वक चल रहा है, तो बनारस में इतना पैनिक होने की क्या जरूरत है?
​#varanasi #banaras #UPPolice #kashi ...
    user_Bulandshahr Times News
    Bulandshahr Times News
    Local News Reporter बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • "मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था। आज — मैं ख़ुद कह रही हूं — उसे जान से मार दो।" एक मां को — यह कभी नहीं कहना चाहिए। लेकिन निर्मला राणा ने कहा और सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत भी दे दी। आज 11 मार्च 2026 भारत के इतिहास में पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत सबसे दर्दनाक और सबसे मानवीय फैसला। कहानी शुरू होती है-20 अगस्त 2013। राखी का दिन। चंडीगढ़। एक लड़का। 19 साल का। पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र। बी टेक सिविल इंजीनियरिंग। टॉपर। होनहार। सपनों से भरा। सुबह —बहन से राखी बंधवाई थी। और शाम को -पीजी के चौथी मंजिल की बालकनी से — गिर गया। धड़ाम। खून। फटा हुआ सिर। एमरजेंसी सर्जरी। आईसीयू। वेटिंलेटर। डॉक्टर बाहर निकले- अशोक राणा — हरीश के पिता — खड़े हो गए। निर्मला — हाथ जोड़े — आगे बढ़ी। डॉक्टर ने कहा — "बेटा बच गया है।" एक पल के लिए — दोनों की साँस रुक गई। फिर — राहत की सांस ली। लेकिन डॉक्टर ने आगे कहा — "...लेकिन ट्राउमैटिक ब्रेन इंजरी है। क्वाड्रीप्लेजिया है। 100% अपंगता। परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में है मतलब —जिंदा तो है — लेकिन — कभी होश में नहीं आएगा।" उस पल — निर्मला के हाथ से — दीवार का सहारा छूट गया। और वो — ज़मीन पर — बैठ गई। क्योंकि — वो समझ गई थी — कि जिस बेटे को उसने खोया — वो कभी वापस नहीं आएगा। अब ज़रा समझिए —परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट क्या होता है कल्पना कीजिए — आपका बेटा — आपके सामने लेटा है। आंखें खुली हैं। कभी-कभी पलकें झपकती हैं। लेकिन — वो आपको देख नहीं सकता। आपकी आवाज़ सुन नहीं सकता। आपको पहचान नहीं सकता। उसका दिमाग — काम नहीं कर रहा। उसका शरीर — सिर्फ़ सांस ले रहा है। वो — ज़िंदा लाश है। और सबसे दर्दनाक — वो न ज़िंदा है — न मुर्दा। वो — एक ऐसी जगह में फंसा है — जहां से — न वापस आ सकता है — न आगे जा सकता है। --- 13 साल। 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे। कल्पना कीजिए — आप रोज़ सुबह उठते हो। और अपने बेटे के पास जाते हो। वो — बिस्तर पर लेटा है। फीडिंग ट्यूब नाक में लगी है। ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब गले में है। शरीर पर —बेडसोर्स — गहरे घाव — जो कभी ठीक नहीं होते। --- आप — उसके शरीर को पलटते हो। ताकि और घाव न बनें। आप — उसे साफ़ करते हो। डायपर बदलते हो। आप — फीडिंग ट्यूब से खाना डालते हो। एक या दो दिन नहीं। महीना-2 महीना नहीं, साल-2 साल भी नहीं। 13 साल, 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे। और वो — कुछ नहीं बोलता। कुछ नहीं महसूस करता। कुछ नहीं समझता। और आप — हर रोज़ — यही सोचते हो — "क्या मेरा बेटा — कहीं अंदर — फंसा हुआ है? क्या वो — मुझे पुकार रहा है? क्या वो — कह रहा है — मुझे छोड़ दो?" लेकिन — आपको कोई जवाब नहीं मिलता। --- अब ज़रा — माँ के दर्द को समझिए निर्मला राणा — 13 साल से — रोज़ — अपने बेटे को मरते हुए देख रही है। वो रोज़ सुबह — हरीश के कमरे में जाती है। पहले — खिड़की खोलती है। ताकि रोशनी आए। फिर — हरीश के चेहरे को देखती है। कभी-कभी — उसकी पलकें झपकती हैं। और निर्मला को — एक पल के लिए — लगता है — "शायद आज — वो आँख खोल दे।" लेकिन — वो कभी नहीं खोलता। --- फिर — निर्मला उससे बातें करती है। मौसम के बारे में। परिवार के बारे में। आने वाले मेहमानों के बारे में। --- कभी-कभी —गुस्सा होकर डांटती भी है — "तुमने खाना ठीक से नहीं खाया।" ताकि एक पल के लिए — वो भूल सके — कि बेटा सुन नहीं सकता। निर्मला कहती हैं — "मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था। हर किक पर — मैं ख़ुश होती थी। जब वो पैदा हुआ — मैंने उसे गोद में लिया था। वह जीवन का सबसे सुखद दिन था मुझे याद है —जब बड़ा हुआ, वो शीशे के सामने खड़ा होकर — अपनी बाजुओं को मोड़ कर दिखाता था। पंजाब यूनिवर्सिटी में था। आईआईटी जाना चाहता था। और आज — वो बिस्तर पर — पत्थर की तरह — पड़ा है। मैं ही कह रही हूं — उसे मुक्त कर दो। और जब निर्मला यह कहती है — तो — आपकी रूह कांप जाती है। क्योंकि — एक माँ — कभी अपने बेटे की मौत नहीं मांगती। लेकिन — जब ज़िंदगी — मौत से भी बदतर हो जाए — तो मौत — राहत बन जाती है। अशोक राणा — हरीश के पिता। हर रोज़ — वो हरीश के पास बैठते हैं। उसके हाथ पकड़ते हैं। और धीरे से कहते हैं — 'तुम बहुत बहादुर बच्चा है' और हरीश —कभी कभी पलकें भी झपकाता है। लेकिन — वो सुनता है या नहीं — कोई नहीं जानता। अशोक ने कहा — उसके सपने थे। योजनाएं थीं। वो आईआईटी जाना चाहता था। आईएएस बनना चाहता था। और आज — वो बिस्तर पर पड़ा है। 13 साल से। हमने सब कुछ किया। घर गिरवी रखा। जमीन बेची। ज़ेवर बेचे। लाखों रुपये ख़र्च किए। लेकिन — कुछ नहीं हुआ। और अब — हम अदालत में गए — हम छोड़ना नहीं चाहते थे — लेकिन — हम संभाल भी नहीं पा रहे थे।" और यह वाक्य — "We were forced into court not because we wanted to let go, but because we could no longer hold on।" यह — सिर्फ़ एक वाक्य नहीं है। यह — एक पिता की चीख़ है। आशीष — हरीश का छोटा भाई। जब हरीश का हादसा हुआ — आशीष 14 साल का था। आज — वो 27 साल का है। लेकिन — उसकी अपनी ज़िंदगी — पॉज पर है। हर 2 घंटे — भाई को पलटना। ताकि और घाव न बनें। हर दिन — साफ़ करना। डायपर बदलना। ट्यूब से खाना डालना। जुलाई 2024 — जब पिता ने वो किया — जो कोई नहीं करना चाहता अशोक राणा — दिल्ली हाईकोर्ट गए। याचिका दायर की। "हमारे बेटे को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) की अनुमति दी जाए।" कोर्ट ने कहा — "नहीं। फीडिंग ट्यूब लाइफ सपोर्ट नहीं है। यह हटाना — एक्टिव यूथेनेसिया होगा — जो अवैध है।" निर्मला — कोर्ट के बाहर — रोती रही। अगस्त 2024 — सुप्रीम कोर्ट का पहला दरवाज़ा सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच। उन्होंने भी — मना कर दिया। लेकिन — कहा — "यूपी सरकार— इस परिवार की मदद करो।" फिजियोथेरेपी। नर्सिंग केयर। मुफ्त दवा की व्यवस्था करे। लेकिन — हरीश ठीक नहीं हुआ। क्योंकि — जो ठीक हो ही नहीं सकता — उसे मदद से कैसे ठीक करोगे? नवंबर 2024 —सीजेआई चंद्रचूड़ का आख़िरी दिन रिटायरमेंट का दिन। और उन्होंने — एक ख़ास निर्देश दिया — "यूपी सरकार— हरीश के सारे मेडिकल खर्च वहन करो। यह परिवार टूट चुका है।" दिसंबर 2025 - जनवरी 2026 — अब न्यायाधीश इस मामले को दिल से सुनने लगे जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच। 11 दिसंबर — "प्राइमरी मेडिकल बोर्ड बनाओ।" 18 दिसंबर — "एम्स से सेकेंडरी बोर्ड चाहिए।" एम्स की रिपोर्ट आई। जजों ने पढ़ी। और जस्टिस पारदीवाला ने कहा — 'हम इस बच्चे को इस हाल में नहीं रख सकते।' 13 जनवरी 2026। जजों ने — खुद — मां बाप से मिलना चाहा। उनसे पूछा — "आप सच में यह चाहते हो?" और निर्मला — रोते हुए — बोली — "हां। मैं चाहती हूं — मेरा बेटा मुक्त हो।" जजों की आंखों में — नमी आ गई। क्योंकि — वो सिर्फ़ जज नहीं थे। वो — पिता थे। इंसान थे। 15 जनवरी। अंतिम सुनवाई बहस हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया। और फिर — लगभग 2 महीने का इंतज़ार। 11 मार्च 2026। सुबह 10:30 बजे। जब इतिहास बना। सुप्रीम कोर्ट। खचाखच भरा कोर्ट रूम। जस्टिस पारदीवाला ने फैसला पढ़ना शुरू किया। शेक्सपीयर ने कहा था— "To be, or not to be — that is the question।" फिर —हेनरी वार्ड बीचर का वह कोट— "ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछते कि वह जीवन स्वीकार करता है या नहीं। लेकिन — जब जीवन — जीवन नहीं रहता — तो क्या — मृत्यु का अधिकार नहीं होना चाहिए?" और जस्टिस ने कहा — "हरीश राणा को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाती है।" कोर्ट रूम में — सन्नाटा। अशोक और निर्मला — एक-दूसरे को देखा। और — रो पड़े। कोर्ट ने क्या लिखा — जो हर मां-बाप के दिल में उतर गया जस्टिस ने लिखा — "हरीश राणा, जिसकी उम्र 32 साल है, जो एक युवा था, तेजस्वी बच्चा था। उसके परिवार ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा। किसी को प्यार करना, उसका ख्याल रखना है— बहुत से बहुत बुरे वक्त में भी।" यह वाक्य — हर मां-बाप की कहानी है। क्योंकि — प्यार — सिर्फ़ ख़ुशियों में नहीं होता। प्यार — अंधेरे में भी होता है। निर्मला और अशोक ने — 13 साल — बिना किसी उम्मीद के — अपने बेटे को संभाला। यही है — असली प्यार। अब — क्या होगा? कोर्ट ने निर्देश दिया — ✅ एम्स पैलियाटिव केयर यूनिट में भर्ती करो ✅ धीरे-धीरे— खाना खिलाने वाला ट्यूब हटाओ ✅ क्लिनिकली एडमिनिस्टर्ड न्यूट्रिशन बंद करो ✅ सम्मान से — प्राकृतिक मौत आने दो ✅ 30-दिन की पुनर्विचार अवधि — माफ मतलब — बिना देरी के — यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह पहला केस क्यों है? 2011 — अरुणा शानबाग मामला — पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी बनाया। 2018 — कॉमन कॉज मामला — विस्तृत दिशानिर्देश बनाए। लेकिन — आज — पहली बार — इन दिशानिर्देशों को लागू किया गया। यह — भारत का पहला स्वीकृत पैसिव यूथेनेशिया मामला है। हरीश की मौत — कत्ल नहीं। हरीश की मौत — मुक्ति है। अब — दर्शनशास्त्र की बात संविधान के अनुच्छेद 21 में — "गरिमा के साथ जीने का अधिकार" है। और कोर्ट ने कहा — "अगर जीवन में सम्मान है — तो मृत्यु में भी सम्मान होना चाहिए।" विक्टर फ्रैंकल — नाजी कैंप से बचे — उन्होंने लिखा था — "मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है सिवाय एक चीज़ के: मानवीय स्वतंत्रता का अंतिम अधिकार — अपनी मनोवृत्ति चुनने का।" और हरीश के मामले में — उसके माँ-बाप ने — उसकी तरफ़ से — यह आज़ादी चुनी। अब — आपसे सवाल कल्पना कीजिए — यह आपके साथ हो। आपका बेटा। आपकी बेटी। 13 साल — बिस्तर पर। न होश। न हलचल। न उम्मीद। आप क्या करते? 13 साल इंतजार करते? या — यह फैसला ले पाते — कि — उसे मुक्त कर दो? यह — सबसे कठिन फ़ैसला है। क्योंकि — एक तरफ़ — ज़िंदगी की उम्मीद है। दूसरी तरफ — मौत की राहत है। और बीच में — एक इंसान — फँसा हुआ है। निर्मला का आख़िरी संदेश "मैं चाहती हूँ — कि कोई और माँ — यह दर्द न झेले। 13 साल अदालत में नहीं लड़ना चाहिए। क्योंकि — हर दिन — एक सज़ा है। हर रात — एक यातना है। और जब आप जानते हो — कि कोई उम्मीद नहीं — तो — क्यों न — उसे शांति से जाने दो?" सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा "पैसिव यूथेनेसिया पर — ठोस क़ानून बनाओ। हर परिवार — 13 साल नहीं लड़ सकता।" अंत में यह सिर्फ एक लिगल केस नहीं है। यह — एक परिवार का 13 साल का दर्द है। यह — एक मां की चीख है। यह — एक बेटे की मुक्ति है। "ओम शांति। हरीश को मुक्ति मिले।" 🙏 यह पोस्ट हर वो इंसान — जो सोचता है कि "सम्मान से मरने का अधिकार" एक बहस है —उन तक पहुंचे। 🙏💔🕊️ अगला पोस्ट 'एक बदनसीब होनहार, जो सीएम-गवर्नर से मिल कर भी हाल न बता सका।' Copy paste #HarishRana #RightToDieWithDignity #PassiveEuthanasia #SupremeCourtIndia #FirstEuthanasiaCase #NirmalaRana #13YearsOfPain #Article21 #LivingWill #EndOfLifeCare #AIIMS #GhaziabadCase #MothersLove #HistoricVerdict #SupremeCourtJudgment #PersistentVegetativeState #Quadriplegia #LegalLandmark #IndianLaw #HumanRights #Passive_Euthanasia #Supreme_Court #Article21 #AIIMS #HarishRana #RightToDieWithDignity #PassiveEuthanasia #SupremeCourtIndia #FirstEuthanasiaCase #NirmalaRana #13YearsOfPain#LivingWill #EndOfLifeCare #GhaziabadCase #MothersLove #HistoricVerdict #PersistentVegetativeState #Quadriplegia #HumanRights #JusticePardiwala #CommonCause
    1
    "मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था। आज — मैं ख़ुद कह रही हूं — उसे जान से मार दो।"
एक मां को — यह कभी नहीं कहना चाहिए। लेकिन निर्मला राणा ने कहा और सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत भी दे दी। 
आज 11 मार्च 2026 
भारत के इतिहास में पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत 
सबसे दर्दनाक और सबसे मानवीय फैसला।
कहानी शुरू होती है-20 अगस्त 2013। राखी का दिन। चंडीगढ़।
एक लड़का। 19 साल का। पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र।
बी टेक सिविल इंजीनियरिंग। टॉपर। होनहार। सपनों से भरा।
सुबह —बहन से राखी बंधवाई थी। 
और शाम को -पीजी के चौथी मंजिल की बालकनी से — गिर गया।
धड़ाम। खून। फटा हुआ सिर।
एमरजेंसी सर्जरी। आईसीयू। वेटिंलेटर।
डॉक्टर बाहर निकले-
अशोक राणा — हरीश के पिता — खड़े हो गए।
निर्मला — हाथ जोड़े — आगे बढ़ी।
डॉक्टर ने कहा —
"बेटा बच गया है।"
एक पल के लिए — दोनों की साँस रुक गई।
फिर — राहत की सांस ली।
लेकिन डॉक्टर ने आगे कहा —
"...लेकिन ट्राउमैटिक ब्रेन इंजरी है। 
क्वाड्रीप्लेजिया है। 100% अपंगता।
परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में है
मतलब —जिंदा तो है —
लेकिन — कभी होश में नहीं आएगा।"
उस पल —
निर्मला के हाथ से —
दीवार का सहारा छूट गया।
और वो —
ज़मीन पर —
बैठ गई।
क्योंकि —
वो समझ गई थी —
कि जिस बेटे को उसने खोया —
वो कभी वापस नहीं आएगा।
अब ज़रा समझिए —परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट क्या होता है
कल्पना कीजिए —
आपका बेटा — आपके सामने लेटा है।
आंखें खुली हैं। कभी-कभी पलकें झपकती हैं।
लेकिन —
वो आपको देख नहीं सकता।
आपकी आवाज़ सुन नहीं सकता।
आपको पहचान नहीं सकता।
उसका दिमाग — काम नहीं कर रहा।
उसका शरीर — सिर्फ़ सांस ले रहा है।
वो — ज़िंदा लाश है।
और सबसे दर्दनाक —
वो न ज़िंदा है — न मुर्दा।
वो — एक ऐसी जगह में फंसा है —
जहां से —
न वापस आ सकता है — न आगे जा सकता है।
---
13 साल। 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे।
कल्पना कीजिए —
आप रोज़ सुबह उठते हो।
और अपने बेटे के पास जाते हो।
वो — बिस्तर पर लेटा है।
फीडिंग ट्यूब नाक में लगी है। ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब गले में है।
शरीर पर —बेडसोर्स — गहरे घाव — जो कभी ठीक नहीं होते।
---
आप — उसके शरीर को पलटते हो। ताकि और घाव न बनें।
आप — उसे साफ़ करते हो। डायपर बदलते हो।
आप — फीडिंग ट्यूब से खाना डालते हो।
एक या दो दिन नहीं। महीना-2 महीना नहीं, साल-2 साल भी नहीं। 
13 साल, 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे। 
और वो —
कुछ नहीं बोलता।
कुछ नहीं महसूस करता।
कुछ नहीं समझता।
और आप —
हर रोज़ —
यही सोचते हो —
"क्या मेरा बेटा — कहीं अंदर — फंसा हुआ है?
क्या वो — मुझे पुकार रहा है?
क्या वो — कह रहा है — मुझे छोड़ दो?"
लेकिन —
आपको कोई जवाब नहीं मिलता।
---
अब ज़रा — माँ के दर्द को समझिए
निर्मला राणा —
13 साल से —
रोज़ — अपने बेटे को मरते हुए देख रही है।
वो रोज़ सुबह —
हरीश के कमरे में जाती है।
पहले — खिड़की खोलती है। ताकि रोशनी आए।
फिर — हरीश के चेहरे को देखती है।
कभी-कभी — उसकी पलकें झपकती हैं।
और निर्मला को — एक पल के लिए — लगता है —
"शायद आज — वो आँख खोल दे।"
लेकिन —
वो कभी नहीं खोलता।
---
फिर — निर्मला उससे बातें करती है।
मौसम के बारे में। परिवार के बारे में। आने वाले मेहमानों के बारे में।
---
कभी-कभी —गुस्सा होकर डांटती भी है —
"तुमने खाना ठीक से नहीं खाया।"
ताकि एक पल के लिए — वो भूल सके — कि बेटा सुन नहीं सकता।
निर्मला कहती हैं —
"मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था।
हर किक पर — मैं ख़ुश होती थी।
जब वो पैदा हुआ — मैंने उसे गोद में लिया था।
वह जीवन का सबसे सुखद दिन था
मुझे याद है —जब बड़ा हुआ, वो शीशे के सामने खड़ा होकर — अपनी बाजुओं को मोड़ कर दिखाता था।
पंजाब यूनिवर्सिटी में था। आईआईटी जाना चाहता था।
और आज —
वो बिस्तर पर — पत्थर की तरह — पड़ा है।
मैं ही कह रही हूं —
उसे मुक्त कर दो।
और जब निर्मला यह कहती है —
तो —
आपकी रूह कांप जाती है।
क्योंकि —
एक माँ — कभी अपने बेटे की मौत नहीं मांगती।
लेकिन —
जब ज़िंदगी — मौत से भी बदतर हो जाए —
तो मौत — राहत बन जाती है।
अशोक राणा —
हरीश के पिता।
हर रोज़ —
वो हरीश के पास बैठते हैं।
उसके हाथ पकड़ते हैं।
और धीरे से कहते हैं —
'तुम बहुत बहादुर बच्चा है'
और हरीश —कभी कभी पलकें भी झपकाता है।
लेकिन — वो सुनता है या नहीं — कोई नहीं जानता।
अशोक ने कहा —
उसके सपने थे। योजनाएं थीं।
वो आईआईटी जाना चाहता था। आईएएस बनना चाहता था।
और आज —
वो बिस्तर पर पड़ा है।
13 साल से।
हमने सब कुछ किया।
घर गिरवी रखा। जमीन बेची। ज़ेवर बेचे।
लाखों रुपये ख़र्च किए।
लेकिन —
कुछ नहीं हुआ।
और अब —
हम अदालत में गए —
हम छोड़ना नहीं चाहते थे —
लेकिन — हम संभाल भी नहीं पा रहे थे।"
और यह वाक्य —
"We were forced into court not because we wanted to let go, but because we could no longer hold on।"
यह — सिर्फ़ एक वाक्य नहीं है।
यह — एक पिता की चीख़ है।
आशीष — हरीश का छोटा भाई।
जब हरीश का हादसा हुआ — आशीष 14 साल का था।
आज — वो 27 साल का है।
लेकिन — उसकी अपनी ज़िंदगी — पॉज पर है।
हर 2 घंटे — भाई को पलटना। ताकि और घाव न बनें।
हर दिन — साफ़ करना। डायपर बदलना। ट्यूब से खाना डालना।
जुलाई 2024 — जब पिता ने वो किया — जो कोई नहीं करना चाहता
अशोक राणा — दिल्ली हाईकोर्ट गए।
याचिका दायर की।
"हमारे बेटे को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) की अनुमति दी जाए।"
कोर्ट ने कहा — "नहीं। फीडिंग ट्यूब लाइफ सपोर्ट नहीं है। यह हटाना — एक्टिव यूथेनेसिया होगा — जो अवैध है।"
निर्मला — कोर्ट के बाहर — रोती रही।
अगस्त 2024 — सुप्रीम कोर्ट का पहला दरवाज़ा
सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच। उन्होंने भी — मना कर दिया।
लेकिन — कहा — "यूपी सरकार— इस परिवार की मदद करो।"
फिजियोथेरेपी। नर्सिंग केयर। मुफ्त दवा की व्यवस्था करे।
लेकिन — हरीश ठीक नहीं हुआ।
क्योंकि — जो ठीक हो ही नहीं सकता — उसे मदद से कैसे ठीक करोगे?
नवंबर 2024 —सीजेआई चंद्रचूड़ का आख़िरी दिन
रिटायरमेंट का दिन।
और उन्होंने — एक ख़ास निर्देश दिया —
"यूपी सरकार— हरीश के सारे मेडिकल खर्च वहन करो। यह परिवार टूट चुका है।"
दिसंबर 2025 - जनवरी 2026 — अब न्यायाधीश इस मामले को  दिल से सुनने लगे
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच।
11 दिसंबर — "प्राइमरी मेडिकल बोर्ड बनाओ।"
18 दिसंबर — "एम्स से सेकेंडरी बोर्ड चाहिए।"
एम्स की रिपोर्ट आई।
जजों ने पढ़ी।
और जस्टिस पारदीवाला ने कहा —
'हम इस बच्चे को इस हाल में नहीं रख सकते।'
13 जनवरी 2026।
जजों ने — खुद — मां बाप से मिलना चाहा।
उनसे पूछा — "आप सच में यह चाहते हो?"
और निर्मला — रोते हुए — बोली —
"हां। मैं चाहती हूं — मेरा बेटा मुक्त हो।"
जजों की आंखों में — नमी आ गई।
क्योंकि — वो सिर्फ़ जज नहीं थे। वो — पिता थे। इंसान थे।
15 जनवरी। अंतिम सुनवाई बहस हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया।
और फिर — लगभग 2 महीने का इंतज़ार।
11 मार्च 2026। सुबह 10:30 बजे। जब इतिहास बना।
सुप्रीम कोर्ट। खचाखच भरा कोर्ट रूम।
जस्टिस पारदीवाला ने फैसला पढ़ना शुरू किया।
शेक्सपीयर ने कहा था—
"To be, or not to be — that is the question।"
फिर —हेनरी वार्ड बीचर का वह कोट—
"ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछते कि वह जीवन स्वीकार करता है या नहीं।
लेकिन — जब जीवन — जीवन नहीं रहता — तो क्या — मृत्यु का अधिकार नहीं होना चाहिए?"
और जस्टिस ने कहा —
"हरीश राणा को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाती है।"
कोर्ट रूम में — सन्नाटा।
अशोक और निर्मला — एक-दूसरे को देखा। और — रो पड़े।
कोर्ट ने क्या लिखा — जो हर मां-बाप के दिल में उतर गया
जस्टिस ने लिखा —
"हरीश राणा, जिसकी उम्र 32 साल है, जो एक युवा था, तेजस्वी बच्चा था।
उसके परिवार ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।
किसी को प्यार करना, उसका ख्याल रखना है— बहुत से बहुत बुरे वक्त में भी।"
यह वाक्य — हर मां-बाप की कहानी है।
क्योंकि — प्यार — सिर्फ़ ख़ुशियों में नहीं होता।
प्यार — अंधेरे में भी होता है।
निर्मला और अशोक ने — 13 साल — बिना किसी उम्मीद के — अपने बेटे को संभाला।
यही है — असली प्यार।
अब — क्या होगा?
कोर्ट ने निर्देश दिया —
✅ एम्स पैलियाटिव केयर यूनिट में भर्ती करो
✅ धीरे-धीरे— खाना खिलाने वाला ट्यूब हटाओ
✅ क्लिनिकली एडमिनिस्टर्ड न्यूट्रिशन बंद करो
✅ सम्मान से — प्राकृतिक मौत आने दो
✅ 30-दिन की पुनर्विचार अवधि — माफ
मतलब — बिना देरी के — यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
यह पहला केस क्यों है?
2011 — अरुणा शानबाग मामला — पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी बनाया।
2018 — कॉमन कॉज मामला — विस्तृत दिशानिर्देश बनाए।
लेकिन — आज — पहली बार — इन दिशानिर्देशों को लागू किया गया।
यह — भारत का पहला स्वीकृत पैसिव यूथेनेशिया मामला है।
हरीश की मौत — कत्ल नहीं।
हरीश की मौत — मुक्ति है।
अब — दर्शनशास्त्र की बात
संविधान के अनुच्छेद 21 में — "गरिमा के साथ जीने का अधिकार" है।
और कोर्ट ने कहा —
"अगर जीवन में सम्मान है — तो मृत्यु में भी सम्मान होना चाहिए।"
विक्टर फ्रैंकल — नाजी कैंप से बचे — उन्होंने लिखा था —
"मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है सिवाय एक चीज़ के:
मानवीय स्वतंत्रता का अंतिम अधिकार — अपनी मनोवृत्ति चुनने का।"
और हरीश के मामले में — उसके माँ-बाप ने — उसकी तरफ़ से — यह आज़ादी चुनी।
अब — आपसे सवाल
कल्पना कीजिए — यह आपके साथ हो।
आपका बेटा। आपकी बेटी।
13 साल — बिस्तर पर। न होश। न हलचल। न उम्मीद।
आप क्या करते?
13 साल इंतजार करते?
या — यह फैसला ले पाते — कि — उसे मुक्त कर दो?
यह — सबसे कठिन फ़ैसला है।
क्योंकि — एक तरफ़ — ज़िंदगी की उम्मीद है।
दूसरी तरफ — मौत की राहत है।
और बीच में — एक इंसान — फँसा हुआ है।
निर्मला का आख़िरी संदेश
"मैं चाहती हूँ — कि कोई और माँ — यह दर्द न झेले।
13 साल अदालत में नहीं लड़ना चाहिए।
क्योंकि — हर दिन — एक सज़ा है। हर रात — एक यातना है।
और जब आप जानते हो — कि कोई उम्मीद नहीं —
तो — क्यों न — उसे शांति से जाने दो?"
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा
"पैसिव यूथेनेसिया पर — ठोस क़ानून बनाओ।
हर परिवार — 13 साल नहीं लड़ सकता।"
अंत में
यह सिर्फ एक लिगल केस नहीं है।
यह — एक परिवार का 13 साल का दर्द है।
यह — एक मां की चीख है।
यह — एक बेटे की मुक्ति है।
"ओम शांति। हरीश को मुक्ति मिले।" 🙏
यह पोस्ट हर वो इंसान — जो सोचता है कि "सम्मान से मरने का अधिकार" एक बहस है —उन तक पहुंचे। 
🙏💔🕊️
अगला पोस्ट 'एक बदनसीब होनहार, जो सीएम-गवर्नर से मिल कर भी हाल न बता सका।' 
Copy paste 
#HarishRana #RightToDieWithDignity #PassiveEuthanasia #SupremeCourtIndia #FirstEuthanasiaCase #NirmalaRana #13YearsOfPain #Article21 #LivingWill #EndOfLifeCare #AIIMS #GhaziabadCase #MothersLove #HistoricVerdict #SupremeCourtJudgment #PersistentVegetativeState #Quadriplegia #LegalLandmark #IndianLaw #HumanRights
#Passive_Euthanasia #Supreme_Court #Article21 #AIIMS #HarishRana #RightToDieWithDignity #PassiveEuthanasia #SupremeCourtIndia #FirstEuthanasiaCase #NirmalaRana #13YearsOfPain#LivingWill #EndOfLifeCare #GhaziabadCase #MothersLove #HistoricVerdict #PersistentVegetativeState #Quadriplegia #HumanRights #JusticePardiwala #CommonCause
    user_Qtv.Uttarpradesh news channel
    Qtv.Uttarpradesh news channel
    News बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • बुलंदशहर में जिला सांकृतिक एवं औद्योगिक प्रदर्शनी का हुआ भव्य उद्घाटन। राज्यमंत्री अरुण सक्सेना ने कहा कि इस तरह के मेले लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ सरकार की योजनाओं की जानकारी भी देते हैं। गैस की किल्लत पर उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि लोगों को परेशानी न हो और दुकानदारों से कहा गया है कि गैस की ब्लैक मार्केटिंग न करें और जरूरतमंदों की मदद करें। खुर्जा पॉटरी उद्योग पर गैस की वजह से पड़ रहे प्रभाव पर उन्होंने कहा कि उद्योगों को गैस के अलावा लकड़ी या कोयले जैसे अन्य ईंधन इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है, ताकि उद्योगों पर कोई प्रभाव न पड़े।
    1
    बुलंदशहर में जिला सांकृतिक एवं औद्योगिक प्रदर्शनी का हुआ भव्य उद्घाटन।
राज्यमंत्री अरुण सक्सेना ने  कहा कि इस तरह के मेले लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ सरकार की योजनाओं की जानकारी भी देते हैं।
गैस की किल्लत पर उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि लोगों को परेशानी न हो और दुकानदारों से कहा गया है कि गैस की ब्लैक मार्केटिंग न करें और जरूरतमंदों की मदद करें।
खुर्जा पॉटरी उद्योग पर गैस की वजह से पड़ रहे प्रभाव पर उन्होंने कहा कि उद्योगों को गैस के अलावा लकड़ी या कोयले जैसे अन्य ईंधन इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है, ताकि उद्योगों पर कोई प्रभाव न पड़े।
    user_Upkar chauhan Reporter
    Upkar chauhan Reporter
    Singer खुर्जा, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर जिला न्यायालय परिसर आज जंग के मैदान में तब्दील हो गया। यहाँ वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी झड़प हो गई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप धारण कर लिया। क्या है पूरा मामला? प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि वकीलों के एक बड़े समूह ने पुलिसकर्मियों पर धावा बोल दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वकील पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ कर पीट रहे हैं और उन्हें कोर्ट परिसर से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल न्यायालय जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हंगामे के दौरान वकीलों ने जमकर नारेबाजी की और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। घटना के बाद कोर्ट परिसर में भारी तनाव व्याप्त है। पुलिस की कार्रवाई अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विवाद की मुख्य वजह क्या थी, लेकिन पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँच चुके हैं। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुट गई है। रिपोर्टर: पंकज कुमार NCR समाचार, ग्रेटर नोएडा
    1
    ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर जिला न्यायालय परिसर आज जंग के मैदान में तब्दील हो गया। यहाँ वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी झड़प हो गई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप धारण कर लिया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि वकीलों के एक बड़े समूह ने पुलिसकर्मियों पर धावा बोल दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वकील पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ कर पीट रहे हैं और उन्हें कोर्ट परिसर से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
न्यायालय जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हंगामे के दौरान वकीलों ने जमकर नारेबाजी की और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। घटना के बाद कोर्ट परिसर में भारी तनाव व्याप्त है।
पुलिस की कार्रवाई
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विवाद की मुख्य वजह क्या थी, लेकिन पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँच चुके हैं। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुट गई है।
रिपोर्टर: पंकज कुमार
NCR समाचार, ग्रेटर नोएडा
    user_PANKAJ KUMAR
    PANKAJ KUMAR
    Journalist गौतम बुद्ध नगर, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बुलंदशहर:- खानपुर कस्बे की मैन बाजार स्थित प्रेम ज्वेलर्स नामक सर्राफ की दुकान से सोने की धातु की गले की चैन का डब्बा चोरी दुकान मालिक के अनुसार आज दोपहर करीब 3 बजे ग्राहक बनकर आये थे एक महिला और पुरुष महिला और पुरुष ने सोने की धातु से बना पूरा डब्बा किया साफ, सर्राफ के अनुसार उसमे थी करीब 150 ग्राम सोने की धातु की गले की चैन सीसीटीवी कैमरे मे कैद हुई चोरी की पूरी घटना घटना के बाद पुलिस प्रशाशन मौके पर मौजूद बुलंदशहर के क़स्बा खानपुर मे मैन बाज़ार नगर पंचायत ऑफिस के पास सर्राफ की दुकान की घटना
    1
    बुलंदशहर:- 
खानपुर कस्बे की मैन बाजार स्थित प्रेम ज्वेलर्स नामक सर्राफ की दुकान से सोने की धातु की गले की चैन  का डब्बा चोरी 
दुकान मालिक के अनुसार आज दोपहर करीब 3 बजे ग्राहक बनकर आये थे एक महिला और पुरुष 
महिला और पुरुष ने सोने की धातु से बना पूरा डब्बा किया साफ, सर्राफ के अनुसार उसमे थी करीब 150 ग्राम सोने की धातु की गले की चैन 
सीसीटीवी कैमरे मे कैद हुई चोरी की पूरी घटना 
घटना के बाद पुलिस प्रशाशन मौके पर मौजूद
बुलंदशहर के क़स्बा खानपुर मे मैन बाज़ार नगर पंचायत ऑफिस के पास सर्राफ की दुकान की घटना
    user_Mehboob  ALi
    Mehboob ALi
    Reporter बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.