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लोकेशन, सीलखेड़ा रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह मीना मो,8103318646 सीहोर जिले के जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सील खेडा के जुगराजपुरा से सील खेडा तक सड़क निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी एवं माननीय विधायक सुदेश राय जी के नेतृत्व में सीहोर जिले के जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले सील खेडा पंचायत को जुगराजपुरा और सील खेडा को सड़क निर्माण की सौगात मिली है सील खेडा के सरपंच हेमराज मीना और ग्रामीण एवं जुगराजपुरा के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जी एवं सीहोर विधायक श्रीमान सुदेश राय जी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से रिपोर्टर देवेंद्र सिंह मीना की विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह मीना
लोकेशन, सीलखेड़ा रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह मीना मो,8103318646 सीहोर जिले के जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सील खेडा के जुगराजपुरा से सील खेडा तक सड़क निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी एवं माननीय विधायक सुदेश राय जी के नेतृत्व में सीहोर जिले के जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले सील खेडा पंचायत को जुगराजपुरा और सील खेडा को सड़क निर्माण की सौगात मिली है सील खेडा के सरपंच हेमराज मीना और ग्रामीण एवं जुगराजपुरा के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जी एवं सीहोर विधायक श्रीमान सुदेश राय जी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से रिपोर्टर देवेंद्र सिंह मीना की विशेष रिपोर्ट
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- भोपाल की शाही मोती मस्जिद में रुयाते हिलाल कमेटी की अहम बैठक के बाद रमज़ान का चांद देखे जाने की तस्दीक हो गई है। शहर काज़ी सैय्यद मुश्ताक अली नदवी ने एलान किया कि आज (बुधवार) से पहली तरावीह अदा की जाएगी, जबकि गुरुवार को रमज़ान का पहला रोज़ा रखा जाएगा। शहरभर की मस्जिदों में इबादत की तैयारियां मुकम्मल हैं। सभी को रमज़ान की दिली मुबारकबाद—दुआओं में याद रखें।1
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- महान आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण का जन्म १८ फरवरी १८३६ को पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर गाँव में हुआ था। रामकृष्ण परमहंस (१८३६-१८८६) एक सिद्ध संत थे, जिनके जीवन में माँ काली के प्रति अगाध प्रेम और भक्ति को मुख्य चमत्कार माना जाता है। उन्होंने काली को एक जीवित हकीकत के रूप में अनुभव किया, जो उनके सामने आती थीं, नाचती थीं और उनके हाथों से खाती थीं। उनके जीवन की सबसे बड़ी साधना 'समाधि' और सभी धर्मों (हिंदू, इस्लाम, ईसाई) में समानता का दर्शन था। रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़े प्रमुख चमत्कार और अनुभव: बाल्यावस्था में समाधि: छः-सात साल की उम्र में, एक बार आकाश में काले बादलों के बीच सफेद सारसों को देखते हुए वे इतने मुग्ध हो गए कि उन्हें अपनी सुध-बुध नहीं रही और वे अचेत होकर गिर पड़े। काली माँ के साथ साक्षात संवाद: दक्षिणेश्वर में वे माँ काली के विग्रह को पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि साक्षात जगज्जननी मानते थे। वे अक्सर माँ काली के साथ बातें करते, शिशु की तरह रोते और आनंद में विभोर होकर नाचते-गाते थे। सर्वोच्च समाधि (Nirvikalpa Samadhi): प्रसिद्ध योगी तोतापुरी के मार्गदर्शन में उन्होंने तीन दिन के भीतर निर्विकल्प समाधि प्राप्त की, जो कई योगियों को जीवनभर में भी नहीं मिलती। कहा जाता है कि इस दौरान उनके शरीर में प्राणों का संचार भी रुक गया था। पतितों और साधुओं में दैवीयता देखना: वे सभी मनुष्यों में, यहाँ तक कि निर्धन और पतित लोगों में भी देवी काली का रूप देखते थे। मानसिक शक्ति और दिव्य दृष्टि: बिना किसी औपचारिक शिक्षा के वे वेदों और शास्त्रों के गूढ़ रहस्य बता देते थे। उन्हें अक्सर दिव्य दर्शन होते थे और वे भावी घटनाओं का पूर्वाभास पा लेते थे। स्वामी विवेकानंद का जीवन बदलना: जब युवा विवेकानंद (नरेंद्र) ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने भगवान को देखा है, तो रामकृष्ण ने कहा, "हां, मैंने उन्हें वैसे ही देखा है जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूं"। उनके अनुयायी उन्हें अवतार (divine incarnation) मानते थे, और उनका जीवन इस बात का उदाहरण था कि कैसे प्रेम और निस्वार्थ सेवा से ईश्वर प्राप्त किए जा सकते हैं। (साभार)1
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