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सीतापुर में थाना मछरेहटा पुलिस और एसओजी टीम ने चोरी की एक बड़ी घटना का सनसनीखेज खुलासा किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में 05 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इन अभियुक्तों के पास से चोरी की गई भारी मात्रा में नगदी, जेवरात के साथ-साथ अवैध असलहे और कारतूस भी बरामद किए हैं। इस पूरे मामले के संबंध में क्षेत्राधिकारी मिश्रित द्वारा बाईट दी गई है, जिसमें इस सफलता की जानकारी साझा की गई।

18 hrs ago
user_Sanjeev kumar
Sanjeev kumar
Agricultural Engineer सीतापुर, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
18 hrs ago

सीतापुर में थाना मछरेहटा पुलिस और एसओजी टीम ने चोरी की एक बड़ी घटना का सनसनीखेज खुलासा किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में 05 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इन अभियुक्तों के पास से चोरी की गई भारी मात्रा में नगदी, जेवरात के साथ-साथ अवैध असलहे और कारतूस भी बरामद किए हैं। इस पूरे मामले के संबंध में क्षेत्राधिकारी मिश्रित द्वारा बाईट दी गई है, जिसमें इस सफलता की जानकारी साझा की गई।

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  • केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना), जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना है, विकास खंड मितौली की ग्राम पंचायत बबौना में अपने लक्ष्य से बहुत दूर दिख रही है। वर्ष 2022 में शुरू हुआ ओवरहेड पानी की टंकी का निर्माण कार्य, चार साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, आज भी अधूरा पड़ा है और बांस-बल्लियों के सहारे खड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिससे योजना की गति बेहद धीमी रही है। इस अधूरे कार्य के कारण भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है, और गांव में लगे कई घरेलू नलों से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी और जलापूर्ति व्यवस्था का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता, तो आज उन्हें इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। अब गांव में यह चर्चा तेज है कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत वाली यह योजना चार साल बाद भी अधूरी क्यों है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि 2022 में शुरू हुआ काम अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ, कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई हुई, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा, और क्या निर्माण कार्य और खर्च की जांच कराई जाएगी। इसी विकास खंड की ग्राम पंचायत कस्ता के मजरा रतहरा में भी ऐसी ही स्थिति है, जहाँ कस्ता कॉलोनी पर बनी टंकी से रतहरा गांव को एक लंबे अरसे पहले कुछ दिनों तक पानी की सप्लाई तो हुई, लेकिन उसके बाद से वर्षों से पानी नहीं मिल रहा। ग्रामीण पूछते हैं कि क्या पानी की सप्लाई केवल दिखावा मात्र करने के लिए की गई थी और सालों गुजरने के बाद भी उनके गांव को पानी क्यों नहीं मिल रहा। बबौना और रतहरा दोनों गांवों के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जल निगम के अधिकारियों से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने और गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि "हर घर जल का सपना तभी साकार होगा, जब योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर पूरी होंगी।"
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    केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना), जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना है, विकास खंड मितौली की ग्राम पंचायत बबौना में अपने लक्ष्य से बहुत दूर दिख रही है। वर्ष 2022 में शुरू हुआ ओवरहेड पानी की टंकी का निर्माण कार्य, चार साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, आज भी अधूरा पड़ा है और बांस-बल्लियों के सहारे खड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिससे योजना की गति बेहद धीमी रही है।

इस अधूरे कार्य के कारण भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है, और गांव में लगे कई घरेलू नलों से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी और जलापूर्ति व्यवस्था का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता, तो आज उन्हें इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। अब गांव में यह चर्चा तेज है कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत वाली यह योजना चार साल बाद भी अधूरी क्यों है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि 2022 में शुरू हुआ काम अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ, कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई हुई, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा, और क्या निर्माण कार्य और खर्च की जांच कराई जाएगी।

इसी विकास खंड की ग्राम पंचायत कस्ता के मजरा रतहरा में भी ऐसी ही स्थिति है, जहाँ कस्ता कॉलोनी पर बनी टंकी से रतहरा गांव को एक लंबे अरसे पहले कुछ दिनों तक पानी की सप्लाई तो हुई, लेकिन उसके बाद से वर्षों से पानी नहीं मिल रहा। ग्रामीण पूछते हैं कि क्या पानी की सप्लाई केवल दिखावा मात्र करने के लिए की गई थी और सालों गुजरने के बाद भी उनके गांव को पानी क्यों नहीं मिल रहा। बबौना और रतहरा दोनों गांवों के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जल निगम के अधिकारियों से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने और गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि "हर घर जल का सपना तभी साकार होगा, जब योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर पूरी होंगी।"
    user_Ram Chandra
    Ram Chandra
    Local News Reporter मितौली, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी। मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है। कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया। यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।
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    लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी।

मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है।

कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया।

यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।
    user_Nawaz ahmad Rizvi
    Nawaz ahmad Rizvi
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह खबर ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा द्वारा दी गई है। इसी क्रम में, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 6 जवानों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, NCERT की किताबों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया है।
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    राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह खबर ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा द्वारा दी गई है।

इसी क्रम में, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 6 जवानों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, NCERT की किताबों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया है।
    user_आशीष कुमार मिश्रा
    आशीष कुमार मिश्रा
    Court reporter Misrikh, Sitapur•
    4 hrs ago
  • राम मंदिर चंदा चोरी मामले से संबंधित एक घटनाक्रम में, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चल रही खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एएनआई (ANI) से बात करते हुए आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके पास इन खबरों की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने कहा, "मेरे पास इसकी कोई भी पुष्टि नहीं है, मैं कुछ नहीं कह सकता"।
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    राम मंदिर चंदा चोरी मामले से संबंधित एक घटनाक्रम में, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चल रही खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एएनआई (ANI) से बात करते हुए आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके पास इन खबरों की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने कहा, "मेरे पास इसकी कोई भी पुष्टि नहीं है, मैं कुछ नहीं कह सकता"।
    user_Shoaib Khan
    Shoaib Khan
    Classified ads newspaper publisher लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • सीतापुर के अटरिया में जंक्शन से कसावा तक हाल ही में बनी नई डामर सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के आरोपों के साथ विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल तथा निर्माण मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया है। उनका साफ कहना है कि सड़क के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही दिनों के भीतर इसकी असलियत सामने आने लगी है। सड़क पर डामर की बेहद पतली परत बिछाई गई है, जो आसानी से उखड़ रही है। कई जगहों से तो गिट्टियां भी अभी से बिखरकर सड़क पर फैलने लगी हैं, जिससे राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ गया है। इन शिकायतों ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। इस घोर लापरवाही को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। इसके साथ ही, मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए सड़क का दोबारा सही तरीके से निर्माण कराने की भी मांग की गई है।
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    सीतापुर के अटरिया में जंक्शन से कसावा तक हाल ही में बनी नई डामर सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के आरोपों के साथ विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल तथा निर्माण मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया है। उनका साफ कहना है कि सड़क के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही दिनों के भीतर इसकी असलियत सामने आने लगी है। सड़क पर डामर की बेहद पतली परत बिछाई गई है, जो आसानी से उखड़ रही है। कई जगहों से तो गिट्टियां भी अभी से बिखरकर सड़क पर फैलने लगी हैं, जिससे राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ गया है। इन शिकायतों ने विकास के दावों की पोल खोल दी है।

इस घोर लापरवाही को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। इसके साथ ही, मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए सड़क का दोबारा सही तरीके से निर्माण कराने की भी मांग की गई है।
    user_Naresh Gupta Reporter
    Naresh Gupta Reporter
    सिधौली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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