बीएसएनएल की केबल विस्तार से जंगल में प्राकृतिक संपदा को हो रहा नुकसान ढीमरखेड़ा क्षेत्र के जंगलों में उखाड़े जा रहे पेड़ राज्य वन विकास निगम के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में बीएसएनएल द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए बिछाई जा रही केबल लाइन से प्राकृतिक संपदा को नुकसान हो रहा है। दादर सिहुडी से महंगवा तक नेटवर्क केबल डालने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए जंगल के बीचों-बीच से जेसीबी जैसी भारी मशीनों द्वारा गहरी नाली खोदी जा रही है। लापरवाही की हद यह है कि लाइन के रास्ते में आने वाले सालों पुराने फलदार और छायादार पेड़ों को बचाने के बजाय, उन्हें मशीनों से सीधा जड़ से उखाड़ फेंका जा रहा है। जिस वृक्ष को तैयार होने में दशकों लग जाते हैं, उन्हें चंद मिनटों की खुदाई में धराशायी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जंगल के अंदर मशीनों से इतनी बड़ी खुदाई हो रही है और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब या तो विभागीय लापरवाही का नतीजा है या फिर इसमें अधिकारियों की मौन सहमति है। वन्यजीवों और वन संपदा की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाला विभाग आखिर इस विनाश को नजरअंदाज कैसे कर सकता है। इस मामले में राज्य वन विकास निगम के रेंजर सैय्यद जुनैद ने कहा कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं था। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, मैं तत्काल टीम भेजकर इसकी जांच करवाता हूं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
बीएसएनएल की केबल विस्तार से जंगल में प्राकृतिक संपदा को हो रहा नुकसान ढीमरखेड़ा क्षेत्र के जंगलों में उखाड़े जा रहे पेड़ राज्य वन विकास निगम के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में बीएसएनएल द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए बिछाई जा रही केबल लाइन से प्राकृतिक संपदा को नुकसान हो रहा है। दादर सिहुडी से महंगवा तक नेटवर्क केबल डालने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए जंगल के बीचों-बीच से जेसीबी जैसी भारी मशीनों द्वारा गहरी नाली खोदी जा रही है। लापरवाही की हद यह है कि लाइन के रास्ते में आने वाले सालों पुराने फलदार और छायादार पेड़ों को बचाने के बजाय, उन्हें मशीनों से सीधा जड़ से उखाड़ फेंका जा रहा है। जिस वृक्ष को तैयार होने में दशकों लग जाते हैं, उन्हें चंद मिनटों की खुदाई में धराशायी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जंगल के अंदर मशीनों से इतनी बड़ी खुदाई हो रही है और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब या तो विभागीय लापरवाही का नतीजा है या फिर इसमें अधिकारियों की मौन सहमति है। वन्यजीवों और वन संपदा की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाला विभाग आखिर इस विनाश को नजरअंदाज कैसे कर सकता है। इस मामले में राज्य वन विकास निगम के रेंजर सैय्यद जुनैद ने कहा कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं था। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, मैं तत्काल टीम भेजकर इसकी जांच करवाता हूं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा पर पथराव हुआ। जवाब में शोभायात्रा में शामिल भीड़ ने पथराव करने वालों को उन्हीं की छतों पर जाकर मुंहतोड़ जवाब दिया।1
- धार्मिक नगरी कुंडलपुर में एक बार फिर भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मां अंबिका माता के दिव्य दरबार में लंबे अंतराल के बाद कुंडलपुर में बहेगी धर्म की गंगा, 17 मई से शुरू होगी भव्य शिव महापुराण कथा पटेरा/कुंडलपुर। धार्मिक नगरी कुंडलपुर में एक बार फिर भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मां अंबिका माता के दिव्य दरबार में लंबे अंतराल के बाद भव्य शिव महापुराण कथा का आयोजन होने जा रहा है। मां अंबा, जिन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है, उन्हीं की पावन नगरी में यह दिव्य आयोजन 17 मई से 24 मई तक संपन्न होगा। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को शिव महापुराण का रसपान कराया जाएगा तथा प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। कथा वाचन का पुण्य लाभ प्रसिद्ध कथावाचक पंडित दीपक उपाध्याय शास्त्री के श्रीमुख से प्राप्त होगा। इसी संबंध में आयोजन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा एवं तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पूर्व जिला अध्यक्ष शिवचरण पटेल, कुंडलपुर सरपंच पुरुषोत्तम कुशवाहा, युवा समाजसेवी पंकज सैनी, नयन खरे, शिक्षक कमलेश शर्मा, नारायण कुशवाहा, सचिव नारायण शर्मा सहित नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। बैठक में पटेरा तहसील के पत्रकार एवं मीडिया बंधुओं की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं से कथा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने एवं कथा के प्रचार-प्रसार में सहयोग करने की अपील की गई है।1
- *थलापति विजय के CM बनते ही छलके पिता की आंख से आंसू!*1
- जबलपुर में एक भक्त ने भगवान भोले भंडारी के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की है। उनका कहना है कि महादेव उनके मन और तन में हर जगह मौजूद हैं, और उनके लिए कोई अन्य धर्म संगठन मायने नहीं रखता। यह संदेश महादेव के प्रति अटूट भक्ति को दर्शाता है।1
- जबलपुर के पाटन में एक भीषण सड़क हादसे में गुजरात जा रही बस ने एंबुलेंस को रौंद दिया। इस दुर्घटना में सौरभ पटेल की मौके पर मौत हो गई और 10 अन्य घायल हुए, जिसके बाद प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।1
- जबलपुर के गौरीघाट में उस समय हड़कंप मच गया जब एक ई-रिक्शा अचानक अनियंत्रित होकर नर्मदा नदी में जा गिरा। इस अप्रत्याशित घटना से तट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।1
- “लाखों की नल-जल योजना बनी शोपीस : बरहटा पंचायत में टंकी सूखी, सिस्टम जंग खा रहा ” ग्राम पंचायत बरहटा में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाई गई नल-जल योजना आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। जिस योजना से हर घर तक पानी पहुंचना था, वहां अब टंकी वीरान खड़ी है, मोटर कचरे और झाड़ियों में दब चुकी है और नया ट्रांसफार्मर कबाड़ में तब्दील होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के तहत ग्राम पंचायत बरहटा में पानी सप्लाई के लिए बोरवेल खनन कराया गया था। इसके साथ हाई क्वालिटी की मोटर भी लगाई गई थी ताकि गांव के लोगों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन आज हालात यह हैं कि मोटर खुले में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। आसपास झाड़ियां और कचरा जमा हो चुका है, जिससे साफ दिखाई देता है कि लंबे समय से इसकी कोई देखरेख नहीं हुई। योजना के संचालन के लिए नया बिजली ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था, लेकिन अब उसकी हालत भी कबाड़ जैसी हो गई है। रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था जर्जर होती जा रही है। ग्रामीणों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिला। पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजना पूरी दिखा रहे हैं। “सरकार ने टंकी तो बनवा दी, लेकिन आज तक पानी नहीं मिला। मोटर और ट्रांसफार्मर खराब हालत में पड़े हैं, कोई देखने वाला नहीं है।” गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना की मरम्मत और संचालन शुरू नहीं किया गया, तो लाखों रुपये की यह परियोजना पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जनता के पैसे से बनी इस योजना की जिम्मेदारी कौन लेगा… और कब बरहटा के ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ मिल पाएगा?1
- मलकजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमति IPS ने आधी रात दिलसुखनगर बस स्टॉप पर आम महिला बनकर छेड़छाड़ झेली। तीन घंटे तक 40 से अधिक पुरुषों के अश्लील कमेंट्स का सामना करने के बाद, उन्होंने अपनी पहचान उजागर कर कार्रवाई की। महिलाओं की सुरक्षा के लिए उनका यह कदम पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।1
- विजय ने चेन्नई स्थित तमिलनाडु सचिवालय में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाल लिया है। राज्य में एक नए राजनीतिक युग का आगाज़ हुआ है, जिस पर पूरे देश की नज़र है।1