“लाखों की नल-जल योजना बनी शोपीस : बरहटा पंचायत में टंकी सूखी, सिस्टम जंग खा रहा ” ग्राम पंचायत बरहटा में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाई गई नल-जल योजना आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। जिस योजना से हर घर तक पानी पहुंचना था, वहां अब टंकी वीरान खड़ी है, मोटर कचरे और झाड़ियों में दब चुकी है और नया ट्रांसफार्मर कबाड़ में तब्दील होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के तहत ग्राम पंचायत बरहटा में पानी सप्लाई के लिए बोरवेल खनन कराया गया था। इसके साथ हाई क्वालिटी की मोटर भी लगाई गई थी ताकि गांव के लोगों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन आज हालात यह हैं कि मोटर खुले में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। आसपास झाड़ियां और कचरा जमा हो चुका है, जिससे साफ दिखाई देता है कि लंबे समय से इसकी कोई देखरेख नहीं हुई। योजना के संचालन के लिए नया बिजली ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था, लेकिन अब उसकी हालत भी कबाड़ जैसी हो गई है। रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था जर्जर होती जा रही है। ग्रामीणों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिला। पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजना पूरी दिखा रहे हैं। “सरकार ने टंकी तो बनवा दी, लेकिन आज तक पानी नहीं मिला। मोटर और ट्रांसफार्मर खराब हालत में पड़े हैं, कोई देखने वाला नहीं है।” गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना की मरम्मत और संचालन शुरू नहीं किया गया, तो लाखों रुपये की यह परियोजना पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जनता के पैसे से बनी इस योजना की जिम्मेदारी कौन लेगा… और कब बरहटा के ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ मिल पाएगा?
“लाखों की नल-जल योजना बनी शोपीस : बरहटा पंचायत में टंकी सूखी, सिस्टम जंग खा रहा ” ग्राम पंचायत बरहटा में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाई गई नल-जल योजना आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। जिस योजना से हर घर तक पानी पहुंचना था, वहां अब टंकी वीरान खड़ी है, मोटर कचरे और झाड़ियों में दब चुकी है और नया ट्रांसफार्मर कबाड़ में तब्दील होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के तहत ग्राम पंचायत बरहटा में पानी सप्लाई के लिए बोरवेल खनन कराया गया था। इसके साथ हाई क्वालिटी की मोटर भी लगाई गई थी ताकि गांव के लोगों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन आज हालात यह हैं कि मोटर खुले में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। आसपास झाड़ियां और कचरा जमा हो चुका है, जिससे साफ दिखाई देता है कि लंबे समय से इसकी कोई देखरेख नहीं हुई। योजना के संचालन के लिए नया बिजली ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था, लेकिन अब उसकी हालत भी कबाड़ जैसी हो गई है। रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था जर्जर होती जा रही है। ग्रामीणों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिला। पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजना पूरी दिखा रहे हैं। “सरकार ने टंकी तो बनवा दी, लेकिन आज तक पानी नहीं मिला। मोटर और ट्रांसफार्मर खराब हालत में पड़े हैं, कोई देखने वाला नहीं है।” गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना की मरम्मत और संचालन शुरू नहीं किया गया, तो लाखों रुपये की यह परियोजना पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जनता के पैसे से बनी इस योजना की जिम्मेदारी कौन लेगा… और कब बरहटा के ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ मिल पाएगा?
- बीएसएनएल की केबल विस्तार से जंगल में प्राकृतिक संपदा को हो रहा नुकसान ढीमरखेड़ा क्षेत्र के जंगलों में उखाड़े जा रहे पेड़ राज्य वन विकास निगम के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में बीएसएनएल द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए बिछाई जा रही केबल लाइन से प्राकृतिक संपदा को नुकसान हो रहा है। दादर सिहुडी से महंगवा तक नेटवर्क केबल डालने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए जंगल के बीचों-बीच से जेसीबी जैसी भारी मशीनों द्वारा गहरी नाली खोदी जा रही है। लापरवाही की हद यह है कि लाइन के रास्ते में आने वाले सालों पुराने फलदार और छायादार पेड़ों को बचाने के बजाय, उन्हें मशीनों से सीधा जड़ से उखाड़ फेंका जा रहा है। जिस वृक्ष को तैयार होने में दशकों लग जाते हैं, उन्हें चंद मिनटों की खुदाई में धराशायी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जंगल के अंदर मशीनों से इतनी बड़ी खुदाई हो रही है और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब या तो विभागीय लापरवाही का नतीजा है या फिर इसमें अधिकारियों की मौन सहमति है। वन्यजीवों और वन संपदा की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाला विभाग आखिर इस विनाश को नजरअंदाज कैसे कर सकता है। इस मामले में राज्य वन विकास निगम के रेंजर सैय्यद जुनैद ने कहा कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं था। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, मैं तत्काल टीम भेजकर इसकी जांच करवाता हूं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा पर उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की। इसके जवाब में, हिंदुओं ने छतों पर चढ़कर पत्थर फेंकने वालों को करारा जवाब दिया।1
- कटनी के पत्रकार राकेश निषाद ने मातृ दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए मातृ शक्ति के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मां सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की शक्ति, संस्कार और प्रेरणा का आधार होती हैं। निषाद ने सभी से अपने माता-पिता का सम्मान करने और उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की।4
- कटनी के मुक्तिधाम मोड़ नदीपार मार्ग पर स्पीड ब्रेकर न होने से लगातार सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से घायल हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल स्पीड ब्रेकर बनाने और चेतावनी संकेतक लगाने की मांग की है।1
- दमोह जिले के खर्राघाट पटनयायू के पास ब्यारमा नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन जारी है। जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर यह गोरखधंधा बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है।1
- जबलपुर के पनगढ़ में नर्मदा नदी तट पर यात्रियों से भरा एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर नदी में गिर गया। ब्रेक फेल होने से हुए इस हादसे में सभी यात्रियों की जान बाल-बाल बची।1
- आज के मुख्य समाचार दो गाड़ी का टक्कर हुआ और एक महिला गंभीर बताई जा रही है chalane wale ka hath pair tuta hai1
- स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों बिजली जाने से हो रही बेहद परेशानी कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में बिजली जाने से आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है स्थानीय रहवासियों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यहां पर विगत कई दिनों से सुबह बिजली कटौती से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह परेशानी इन दिनों बंधी, मटवारा सहित अन्य स्थानों में बन रही है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कब बिजली जाए कहा नहीं जा सकता है। इस वजह से लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। बिजली जाने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली की ट्रिपिंग के से लोग बेहद परेशान हो रहे हैं। इससे कई कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। कई बार ऐसा होता कि कोई फेस गुल हो जाता है। इससे कई नागरिकों के घरों की बिजली भी बंद हो जाती है। घंटों के इंतजार करते रह जाते हैं। नागरिकों ने सुधार की मांग की है। लोगों ने बताया कि मोबाइल चार्जिंग, आटा पिसवाई सहित अन्य काम बिजली के भरोसे ही चलते हैं लेकिन बिजली जाने से इन पर असर हो रहा है।1