क्रय केंद्र स्थानांतरण के विरोध में सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन किसानों ने कहा—एरा चीनी मिल से जुड़े क्रय केंद्र नानपारा मिल को देना स्वीकार नहीं, जरूरत पड़ी तो कोल क्रेशर पर बेचेंगे गन्ना बहराइच। सहकारी गन्ना विकास समिति नानपारा में दिनांक 24 सितंबर 2026 को आयोजित सुरक्षा बैठक में क्रय केंद्र गुड़ प्रथम सहित एरा चीनी मिल से जुड़े आठ क्रय केंद्रों को नानपारा चीनी मिल को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव/निर्णय का किसानों ने कड़ा विरोध किया है। किसानों का कहना है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना गन्ना नानपारा चीनी मिल को नहीं देंगे। किसानों ने गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं जिला गन्ना अधिकारी, बहराइच को संबोधित ज्ञापन/मांग के माध्यम से कहा है कि क्रय केंद्र गुड़ प्रथम के किसानों का गन्ना पूर्व में एरा चीनी मिल को जाता रहा है। एरा चीनी मिल द्वारा समय से गन्ना भुगतान, गन्ना विकास कार्य, गन्ने का समय पर उठान तथा आगामी फसल की बुवाई के लिए आवश्यक नवीनतम बीज आदि की व्यवस्थाएं की जाती रही हैं। किसानों के अनुसार उनका क्षेत्र जलभराव प्रभावित है, जिसके कारण यहां गन्ने की खेती किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। क्रय केंद्र के स्थानांतरण के विरोध में क्रय केंद्र गुड़ प्रथम के निकट दुर्गा माता मंदिर पर भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों किसान एकत्र हुए और प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गुड़ प्रथम सहित एरा चीनी मिल से जुड़े क्रय केंद्रों को नानपारा चीनी मिल को दिए जाने का निर्णय उन्हें स्वीकार नहीं है। प्रदर्शन के दौरान गन्ना प्रतिनिधि, डायरेक्टर, डेलीगेट एवं प्रधानगण सहित शिव कुमार पांडेय (अध्यक्ष), जगत जीत पांडेय (पूर्व संचालक सदस्य ) संदीप तिवारी, मनीष पांडेय, करण तिवारी, राजकिशोर पांडेय, लौकुश बाजपेयी, उद्धव तिवारी, अमरीश तिवारी, राम पतल तिवारी, नवीन तिवारी, जनमेजय तिवारी एवं महेंद्र शुक्ला समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने आरोप लगाया कि नानपारा चीनी मिल की पेराई क्षमता सीमित होने तथा तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों को गन्ना आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसानों के मुताबिक कई बार गन्ना लदी गाड़ियां क्रय केंद्रों पर चार-पांच दिन तक खड़ी रहती हैं, जिससे गन्ना सूखने और वजन में कमी होने का नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मिल में बार-बार ब्रेकडाउन होने के कारण पेराई व्यवस्था प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि यदि उनके क्रय केंद्र को नानपारा से जोड़ा गया तो हम किसान माननीय मुख्यमंत्री महोदय के पास भी जाएंगे और किसी भी कीमत पर अपने सेंटर को नहीं जाने देंगे इसके लिए रास्ता जाम करना पड़े चक्का जाम करना पड़े सारे कर्म करेंगे किसानों ने कहा कि नानपारा चीनी मिल की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था समय पर गन्ना उठान और भुगतान को लेकर गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने कहा कि वे ऐसी स्थिति में अपना गन्ना नानपारा चीनी मिल को देने के बजाय कोल क्रेशर पर बेचने को मजबूर होंगे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो अगले वर्ष से वे सहकारी व्यवस्था के अंतर्गत गन्ने की खेती से दूरी बनाने पर भी विचार करेंगे। किसानों के अनुसार इससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था एवं ग्रामीण रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
क्रय केंद्र स्थानांतरण के विरोध में सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन किसानों ने कहा—एरा चीनी मिल से जुड़े क्रय केंद्र नानपारा मिल को देना स्वीकार नहीं, जरूरत पड़ी तो कोल क्रेशर पर बेचेंगे गन्ना बहराइच। सहकारी गन्ना विकास समिति नानपारा में दिनांक 24 सितंबर 2026 को आयोजित सुरक्षा बैठक में क्रय केंद्र गुड़ प्रथम सहित एरा चीनी मिल से जुड़े आठ क्रय केंद्रों को नानपारा चीनी मिल को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव/निर्णय का किसानों ने कड़ा विरोध किया है। किसानों का कहना है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना गन्ना नानपारा चीनी मिल को नहीं देंगे। किसानों ने गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं जिला गन्ना अधिकारी, बहराइच को संबोधित ज्ञापन/मांग के माध्यम से कहा है कि क्रय केंद्र गुड़ प्रथम के किसानों का गन्ना पूर्व में एरा चीनी मिल को जाता रहा है। एरा चीनी मिल द्वारा समय से गन्ना भुगतान, गन्ना विकास कार्य, गन्ने का समय पर उठान तथा आगामी फसल की बुवाई के लिए आवश्यक नवीनतम बीज आदि की व्यवस्थाएं की जाती रही हैं। किसानों के अनुसार उनका क्षेत्र जलभराव प्रभावित है, जिसके कारण यहां गन्ने की खेती किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। क्रय केंद्र के स्थानांतरण के विरोध में क्रय केंद्र गुड़ प्रथम के निकट दुर्गा माता मंदिर पर भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों किसान एकत्र हुए और प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गुड़ प्रथम सहित एरा चीनी मिल से जुड़े क्रय केंद्रों को नानपारा चीनी मिल को दिए जाने का निर्णय उन्हें स्वीकार नहीं है। प्रदर्शन के दौरान गन्ना प्रतिनिधि, डायरेक्टर, डेलीगेट एवं प्रधानगण सहित शिव कुमार पांडेय (अध्यक्ष), जगत जीत पांडेय (पूर्व संचालक सदस्य ) संदीप तिवारी, मनीष पांडेय, करण तिवारी, राजकिशोर पांडेय, लौकुश बाजपेयी, उद्धव तिवारी, अमरीश तिवारी, राम पतल तिवारी, नवीन तिवारी, जनमेजय तिवारी एवं महेंद्र शुक्ला समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने आरोप लगाया कि नानपारा चीनी मिल की पेराई क्षमता सीमित होने तथा तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों को गन्ना आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसानों के मुताबिक कई बार गन्ना लदी गाड़ियां क्रय केंद्रों पर चार-पांच दिन तक खड़ी रहती हैं, जिससे गन्ना सूखने और वजन में कमी होने का नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मिल में बार-बार ब्रेकडाउन होने के कारण पेराई व्यवस्था प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि यदि उनके क्रय केंद्र को नानपारा से जोड़ा गया तो हम किसान माननीय मुख्यमंत्री महोदय के पास भी जाएंगे और किसी भी कीमत पर अपने सेंटर को नहीं जाने देंगे इसके लिए रास्ता जाम करना पड़े चक्का जाम करना पड़े सारे कर्म करेंगे किसानों ने कहा कि नानपारा चीनी मिल की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था समय पर गन्ना उठान और भुगतान को लेकर गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने कहा कि वे ऐसी स्थिति में अपना गन्ना नानपारा चीनी मिल को देने के बजाय कोल क्रेशर पर बेचने को मजबूर होंगे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो अगले वर्ष से वे सहकारी व्यवस्था के अंतर्गत गन्ने की खेती से दूरी बनाने पर भी विचार करेंगे। किसानों के अनुसार इससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था एवं ग्रामीण रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- 👉*इलाके में लगातार बारिश से क्या हैं हालात, जानें इस हेडलाइन बुलेटिन में....* _1._ प्रदेश में लगातार चौथे दिन हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, आम लोगों को भारी परेशानी। _2._ जिला मुख्यालय से 120 किमी दूर कतर्नियाघाट जंगल में लगातार बारिश से जलभराव, जंगली जीवों पर मंडराया संकट - आबादी की ओर रुख कर सकते हैं जानवर, वन विभाग ने किया अलर्ट। _3._ शनिवार को बारिश का कहर, चहलवा ग्राम सभा के नई बस्ती मंगलपुरवा में एक दर्जन से अधिक कच्चे मिट्टी के मकान ढहे, ग्रामीणों का भारी नुकसान। _4._ नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ा, बैराज के सभी गेट खोले गए - 2.29 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा जा रहा है। _5._ घाघरा का जलस्तर बढ़ने से सुजौली, जंगल गुलरिया और चहलवा के दो दर्जन गांवों पर फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, प्रशासन अलर्ट मोड पर। _6._ शनिवार को कई स्थानों पर पेड़ गिरने के मामले सामने आए - बिछिया-मिहींपुरवा मार्ग पर पेड़ गिरने से दो घंटे तक आवागमन बाधित रहा, वहीं बिछिया-सुजौली मार्ग पर जमुनिया मोड़ के पास और कारीकोट चौराहे पर पेड़ गिरने से यातायात करीब दो घंटे प्रभावित रहा, जबकि बिछिया रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर गिरे पेड़ को ट्रैकमैन की टीम ने तत्काल काटकर हटा दिया, हालांकि फिलहाल ट्रेन संचालन बंद है। _7._ रविवार को लगातार आज चौथे दिन भी बारिश का दौर जारी है, अगर यही हाल रहा और बारिश थमती नहीं है तो लोगों के लिए मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। ✍️ रिपोर्टर_राजू, खान पत्रकार जिला संवाददाता बहराइच1
- बहराइच-श्रावस्ती तूफान ने मचाई तबाही, NH पर गिरे पेड़—आवागमन प्रभावित 🚨 HV TV BREAKING NEWS | बहराइच-श्रावस्ती तूफान ने मचाई तबाही, NH पर गिरे पेड़—आवागमन प्रभावित बहराइच-श्रावस्ती में तेज आंधी-तूफान के चलते कई जगह पेड़ गिरने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित रहा, वहीं जनजीवन भी अस्त-व्यस्त नजर आया। तेज हवाओं से लोगों में दहशत का माहौल है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश में मौसम का यह कहर कब तक जारी रहता है और प्रशासन की ओर से प्रभावित मार्गों पर यातायात बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। HV TV NEWS — खबर वही जो हो सही #Bahraich #Shravasti #Storm #तूफान #आंधी #BreakingNews #HVTVNEWS #UPNews #RoadAccident #TrafficUpdate #weatheralertday1
- गोरखपुर को ‘स्पेन’ बनाने का दावा, बारिश में सांसद रवि किशन का घर ही पानी में डूबा! यूपी के गोरखपुर से सांसद रवि किशन के उस दावे पर अब सवाल उठ रहे हैं, जिसमें उन्होंने गोरखपुर को स्पेन जैसा विकसित बनाने की बात कही थी। बारिश के बाद उनके घर में पानी भरने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं—जब सांसद के अपने घर के आसपास जलभराव की स्थिति है, तो शहर को जलभराव से कब राहत मिलेगी? हालांकि, वायरल तस्वीरों और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।1
- नानपारा बहराइच हाइवे पर बरसात और तेज हवा के कारण गिरा पेड़ कुछ लोग घायल तथा गाडिय़ों में ज्यादा ना नुकसान बाल बाल बचे लोग।1
- : रात 11 बजे भी सड़कों पर डटी रहीं नगर पालिका EO प्रमिता सिंह, बहराइच में 24 घंटे से आंधी-बारिश जारी बहराइच। जिले में पिछले 24 घंटे से तेज आंधी और बारिश लगातार हो रही है। रात के 11 बजे भी नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आ रहा है। रात 11 बजे नगर पालिका अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह खुद नगर क्षेत्र में निकलकर सभी सड़कों का जायजा ले रही हैं। उन्होंने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी तरह से जाम की समस्या न आने पाए। EO प्रमिता सिंह सड़क किनारे गिरे हुए पेड़ों को हटवाने और सफाई करवाने में खुद लगी हुई हैं। पूरा दिन नगर पालिका की पूरी टीम जेसीबी और तमाम मशीनों की मदद से पेड़ों को हटाने और सड़क किनारे भरे पानी की निकासी का काम करवा रही है। नौशाद पत्रकार की खास रिपोर्ट।1
- *ब्रेकिंग न्यूज़ बहराइच - नानपारा रोड पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित, पुलिस ने हटवाया* बहराइच से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है, जहां नानपारा रोड पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। *-* मामला थाना रामगांव क्षेत्र के अंतर्गत हाईवे पुलिस चौकी स्थित नानपारा रोड का है, जहां अचानक पेड़ गिरने से आवागमन ठप हो गया और लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गनीमत रही कि पेड़ गिरने से किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई। सूचना पर थाना अध्यक्ष रामगांव दिवाकर तिवारी, हाईवे चौकी प्रभारी हेमंत कुमार सिंह और वन विभाग के बहराइच रेंजर साकिब अंसारी मौके पर पहुंचे और तत्काल पेड़ को हटवाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू कराया। *ब्रेकिंग न्यूज़ बहराइच - नानपारा रोड पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित, पुलिस ने हटवाया* बहराइच से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है, जहां नानपारा रोड पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। *-* मामला थाना रामगांव क्षेत्र के अंतर्गत हाईवे पुलिस चौकी स्थित नानपारा रोड का है, जहां अचानक पेड़ गिरने से आवागमन ठप हो गया और लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गनीमत रही कि पेड़ गिरने से किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई। सूचना पर थाना अध्यक्ष रामगांव दिवाकर तिवारी, हाईवे चौकी प्रभारी हेमंत कुमार सिंह और वन विभाग के बहराइच रेंजर साकिब अंसारी मौके पर पहुंचे और तत्काल पेड़ को हटवाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू कराया।1
- बहराइच के रेलवे स्टेशन पर लगा लंबा पेड़ जब गिरा तो दुकाने हो गई नष्ट लाईव वीडियो देखे ,,,,, #animeedits #highlightseveryonefollowers2024 #viralreels #viralvideos #highlight बहराइच के रेलवे स्टेशन पर लगा लंबा पेड़ जब गिरा तो दुकाने हो गई नष्ट लाईव वीडियो देखे ,,,,, #animeedits #highlightseveryonefollowers2024 #viralreels #viralvideos #highlight1
- 40 लाख के अमृत सरोवर पर गंभीर सवाल: गरीब की जमीन से लेकर जांच रिपोर्ट तक उठे प्रश्न उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में करीब 40 लाख रुपये की लागत से बनाए गए एक अमृत सरोवर को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि सरकारी धन से निर्मित यह अमृत सरोवर गांव के एक गरीब दलित व्यक्ति की उस जमीन पर बनाया गया, जो उसे करीब 40 वर्ष पूर्व पट्टे के रूप में आवंटित हुई थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन वास्तव में पट्टाधारक के नाम थी, तो आखिर सरकारी अभिलेखों में इस भूमि का सत्यापन किस आधार पर हुआ? लेखपाल की रिपोर्ट में इस जमीन को अमृत सरोवर के निर्माण के लिए उपयुक्त कैसे माना गया? क्या निर्माण से पहले भूमि के स्वामित्व और पट्टे से संबंधित अभिलेखों की विधिवत जांच की गई थी? इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन एसडीएम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक जांच से ही सामने आ सकता है। बताया जाता है कि जमीन से जुड़े इस विवाद को लेकर संबंधित गरीब व्यक्ति पिछले करीब सात वर्षों से अधिकारियों के कार्यालयों और न्याय की चौखट के चक्कर लगा रहा है। बावजूद इसके, अब तक उसे अपने अधिकार और जमीन को लेकर स्पष्ट न्याय मिल पाया है या नहीं, यह भी जांच का विषय है। मामले में बलहा विधायक सरोज सोनकर और उनके प्रतिनिधि आलोक जिंदल से भी कई महत्वपूर्ण सवाल जुड़े हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि मौके के निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य को मानक के अनुरूप न पाए जाने के बाद अमृत सरोवर के उद्घाटन से इनकार किया गया था। यदि ऐसा हुआ था, तो सवाल यह है कि उस समय गठित जांच समिति की रिपोर्ट कहां है? जांच किस स्तर तक पहुंची? उसकी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए? यदि निर्माण कार्य में कमियां पाई गई थीं, तो उसके बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि जांच के बाद इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा क्यों नहीं कराई गई? करीब 40 लाख रुपये के सरकारी धन से बने इस अमृत सरोवर की भूमि, निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी मानक, भुगतान, लेखपाल की रिपोर्ट और जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। अब सवाल सिर्फ एक अमृत सरोवर का नहीं, बल्कि एक गरीब व्यक्ति के कथित भूमि अधिकार, सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही का है। संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इन सवालों का स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।1