एक नॉर्वे की पत्रकार द्वारा पूछे गए सवालों ने भारत की सत्ता और 'गोदी मीडिया' की असलियत को कैमरे में कैद कर लिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई जब भारत के प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है, पत्रकारों के सीधे सवालों से लगातार बचते रहे हैं, और केवल पहले से तय इंटरव्यू तथा स्क्रिप्टेड बातचीत तक ही सीमित रहे हैं। इस स्थिति के विपरीत, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे लगातार शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जहाँ पत्रकार सवाल पूछने से नहीं डरते और सत्ता जवाब देने से भागती नहीं। वहीं, भारत की रैंकिंग लगातार गिरना यह दर्शाता है कि यहाँ मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सत्ता से सवाल करने के बजाय उसकी छवि चमकाने में व्यस्त है। विडंबना यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करने वाली सरकार अपने ही देश के पत्रकारों के सामने खुलकर आने से बचती है। जब एक विदेशी पत्रकार ने सीधे सवाल पूछने का प्रयास किया, तो जवाब देने के बजाय 'देखते ही देखते रास्ते में क्या से क्या हो गया'। यह पूरी स्थिति देश में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
एक नॉर्वे की पत्रकार द्वारा पूछे गए सवालों ने भारत की सत्ता और 'गोदी मीडिया' की असलियत को कैमरे में कैद कर लिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई जब भारत के प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है, पत्रकारों के सीधे सवालों से लगातार बचते रहे हैं, और केवल पहले से तय इंटरव्यू तथा स्क्रिप्टेड बातचीत तक ही सीमित रहे हैं। इस स्थिति के विपरीत, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे लगातार शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जहाँ पत्रकार सवाल पूछने से नहीं डरते और सत्ता जवाब देने से भागती नहीं। वहीं, भारत की रैंकिंग लगातार गिरना यह दर्शाता है कि यहाँ मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सत्ता से सवाल करने के बजाय उसकी छवि चमकाने में व्यस्त है। विडंबना यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करने वाली सरकार अपने ही देश के पत्रकारों के सामने खुलकर आने से बचती है। जब एक विदेशी पत्रकार ने सीधे सवाल पूछने का प्रयास किया, तो जवाब देने के बजाय 'देखते ही देखते रास्ते में क्या से क्या हो गया'। यह पूरी स्थिति देश में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- Post by Expose sitamarhi1
- एक नॉर्वे की पत्रकार द्वारा पूछे गए सवालों ने भारत की सत्ता और 'गोदी मीडिया' की असलियत को कैमरे में कैद कर लिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई जब भारत के प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है, पत्रकारों के सीधे सवालों से लगातार बचते रहे हैं, और केवल पहले से तय इंटरव्यू तथा स्क्रिप्टेड बातचीत तक ही सीमित रहे हैं। इस स्थिति के विपरीत, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे लगातार शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जहाँ पत्रकार सवाल पूछने से नहीं डरते और सत्ता जवाब देने से भागती नहीं। वहीं, भारत की रैंकिंग लगातार गिरना यह दर्शाता है कि यहाँ मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सत्ता से सवाल करने के बजाय उसकी छवि चमकाने में व्यस्त है। विडंबना यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करने वाली सरकार अपने ही देश के पत्रकारों के सामने खुलकर आने से बचती है। जब एक विदेशी पत्रकार ने सीधे सवाल पूछने का प्रयास किया, तो जवाब देने के बजाय 'देखते ही देखते रास्ते में क्या से क्या हो गया'। यह पूरी स्थिति देश में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में देश के मीडिया पर यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि वह 'मोदी' के सामने 'बिक चुका है'। पोस्ट के अनुसार, इसी वजह से मीडिया अब 'मेलोडी चॉकलेट के ऊपर भाषण' दे रहा है, जो संभवतः महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर सतही बातों पर ध्यान केंद्रित करने का व्यंग्यात्मक तरीका है।1
- मुजफ्फरपुर में एक कारोबारी दंपति पिछले छह दिनों से लापता हैं और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस मामले में दंपति की इकलौती बेटी ने अपने छोटे चाचा पर गहरा शक जताया है, जिससे घटना की गुत्थी और उलझ गई है। इसी बीच, लापता दंपति के घर की छत पर खू/न जैसे निशान मिलने से इलाके में ह/ड़कं/प मच गया है। इन निशानों ने मामले को और भी संगीन बना दिया है, जबकि दंपति का पता लगाने का प्रयास जारी है।1
- सीतामढ़ी जिले के नगर थाना क्षेत्र के रिंग बांध इलाके में एक निजी शिक्षक द्वारा एक व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई का एक वीडियो वायरल हुआ है। बताया जा रहा है कि लड़की छेड़ने के आरोप में उस व्यक्ति को बुरी तरह पीटा गया। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि शिक्षक ने पीड़ित व्यक्ति को डंडे और लाठी से पीटा, उसे थूक चटवाया और भद्दी-भद्दी गालियाँ भी दीं। इस पूरी घटना के दौरान कानून को पूरी तरह से ताक पर रखा गया।1
- मुजफ्फरपुर को महानगर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योजनाएँ प्रगति पर हैं, जिसके तहत शहर की सीमा में 274 गाँवों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इस पहल का उद्देश्य शहर के विस्तार और विकास को गति देना है, जिससे यह एक बड़े शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो सके। हाल ही में, मुजफ्फरपुर में ₹853 करोड़ की लागत वाले कई विकास प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की गई है। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सड़क नेटवर्क का विस्तार और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक नए एयरपोर्ट रनवे प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति मिल गई है, जिससे भविष्य में शहर की हवाई कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत भी शहर में कई सुविधाओं पर काम चल रहा है, जिनमें एक नया ऑडिटोरियम, स्टेडियम और बोटिंग जैसी मनोरंजक सुविधाएँ शामिल हैं।1
- एक चापाकल बीते छह महीने से खराब पड़ा है। इस समस्या के कारण मासूमों की जान लगातार जोखिम में बनी हुई है, जिससे वे खतरे का सामना करने पर मजबूर हैं।1
- एक तीखे संदेश में, देश को 'लॉलीपॉप' और 'मेलोडी' से बहकाने का आरोप लगाते हुए, स्पष्ट रूप से 'देश बचाओ' और 'मोदी भगाओ' का सशक्त आह्वान किया गया है।1