राया में प्रीपेड बिजली मीटर पर बवाल, बिजली घर पर हंगामा कर CM के नाम सौंपा ज्ञापन #RPRNEWS #rprnewstv कस्बा राया में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। क्षेत्रीय लोगों ने बिजली घर पहुंचकर जमकर विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। लोगों का आरोप है कि प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटरों में अस्पष्ट कटौती हो रही है, जिससे वास्तविक बिजली खपत का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, बैलेंस खत्म होते ही तुरंत बिजली काट दी जाती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि बार-बार रिचार्ज कराना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बिना सहमति मीटर लगाए जाने और तकनीकी खामियों की भी शिकायत की। उनका कहना है कि रिचार्ज में थोड़ी देरी होने पर भी अनावश्यक कटौती कर दी जाती है। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था की जांच कराई जाए, बिना सहमति मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और गरीब उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
राया में प्रीपेड बिजली मीटर पर बवाल, बिजली घर पर हंगामा कर CM के नाम सौंपा ज्ञापन #RPRNEWS #rprnewstv कस्बा राया में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। क्षेत्रीय लोगों ने बिजली घर पहुंचकर जमकर विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। लोगों का आरोप है कि प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटरों में अस्पष्ट कटौती हो रही है, जिससे वास्तविक बिजली खपत का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, बैलेंस खत्म होते ही तुरंत बिजली काट दी जाती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि बार-बार रिचार्ज कराना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बिना सहमति मीटर लगाए जाने और तकनीकी खामियों की भी शिकायत की। उनका कहना है कि रिचार्ज में थोड़ी देरी होने पर भी अनावश्यक कटौती कर दी जाती है। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था की जांच कराई जाए, बिना सहमति मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और गरीब उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
- Post by Ravinder Dagar1
- गोवर्धन के पैठा बालाजी मंदिर आश्रम में आगजनी जांच में जुटी पुलिस1
- Post by Vinay_creator1121
- #RPRNEWS #rprnewstv कस्बा राया में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। क्षेत्रीय लोगों ने बिजली घर पहुंचकर जमकर विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। लोगों का आरोप है कि प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटरों में अस्पष्ट कटौती हो रही है, जिससे वास्तविक बिजली खपत का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, बैलेंस खत्म होते ही तुरंत बिजली काट दी जाती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि बार-बार रिचार्ज कराना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बिना सहमति मीटर लगाए जाने और तकनीकी खामियों की भी शिकायत की। उनका कहना है कि रिचार्ज में थोड़ी देरी होने पर भी अनावश्यक कटौती कर दी जाती है। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था की जांच कराई जाए, बिना सहमति मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और गरीब उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।1
- Post by Subhash Chand2
- मथुरा।वृंदावन के केशी घाट पर हुई नौका दुर्घटना में दर्शनार्थियों की मौत को लेकर विरोध तेज हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में बुधवार को मथुरा स्थित मथुरा-वृंदावन नगर निगम के भूतेश्वर कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया।धरने को संबोधित करते हुए मुकेश धनगर ने कहा कि यमुना में हुई इस दुखद नौका दुर्घटना के लिए मुख्यमंत्री, प्रशासन, पुलिस और तीर्थ विकास परिषद के साथ-साथ नगर निगम भी बराबर का जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम अपने ही बनाए नियमों का पालन कराने में विफल रहा है, इसलिए नैतिकता के आधार पर मेयर को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि यमुना नदी की बदहाली पर सरकार ने आंखें मूंद रखी हैं और सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। गंदे नालों का पानी सीधे यमुना में डाला जा रहा है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम पर अवैध कब्जों, बढ़े हुए टैक्स और जनता को मूलभूत सुविधाएं न देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने नौका दुर्घटना की न्यायिक जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।जिला कांग्रेस महामंत्री वैद्य मनोज गौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री समय-समय पर दौरे करते हैं, लेकिन यमुना और उसके घाटों की स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। वहीं, पूर्व महानगर अध्यक्ष विक्रम बाल्मीकि ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जलभराव और अवैध स्टीमर संचालन को लेकर प्रशासन को घेरा। धरने के दौरान नगर निगम की भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया।प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।3
- Post by VN NEWS181
- मथुरा नाव हादसे पर निगम की बोर्ड बैठक में हंगामा, कांग्रेस ने कहा- लापरवाही ने ली श्रद्धालुओं की जानें #RPRNEWS #RPRNEWSTV मथुरा। वृंदावन में हुए दर्दनाक नाव हादसे को लेकर बुधवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय का घेराव करते हुए महापौर विनोद अग्रवाल और अधिकारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हादसे के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कहा कि सितंबर 2025 में नगर निगम की बोर्ड बैठक में मोटरबोट पंजीकरण का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते उसे अब तक लागू नहीं किया गया। यदि समय रहते इस प्रस्ताव पर अमल किया जाता, तो नावों का पंजीकरण, सुरक्षा मानकों की जांच और संचालन व्यवस्था बेहतर होती, जिससे इस तरह की दुर्घटना टाली जा सकती थी। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। इसी लापरवाही के कारण मासूम लोगों की जानें चली गईं। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की। इस मौके पर दर्जनभर महिलाएं भी प्रदर्शन में शामिल रहीं। उन्होंने भी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। नगर निगम कार्यालय के बाहर काफी देर तक हंगामा चलता रहा। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर शांत कराया। अब इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है और हादसे को लेकर प्रशासन पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।1