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गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो। OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं। स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है। इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है। हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। फिलहाल, गाज़ियाबाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।

2 hrs ago
user_Pawan k Suryavansi
Pawan k Suryavansi
Advertising agency Ghaziabad, Uttar Pradesh•
2 hrs ago

गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है,

निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो। OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं। स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते

हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है। इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है। हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता

है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। फिलहाल, गाज़ियाबाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।

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  • Post by MOHD Ahsan. 9540623826
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  • बुलंदशहर- भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने तहसील खुर्जा के अधिकारियों पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप। तहसील अधिकारियों के लिए सड़कों पर भीख मांगते नजर आए भाकियू युवा प्रदेश महासचिव बब्बन चौधरी। भीख मांगकर पैसा इकट्ठा कर तहसील प्रशासन को सौंपेंगे भाकियू के कार्यकर्ता। सालों से लंबित पड़े मामलों को बिना पैसे काम न करने का तहसील खुर्जा का अधिकारियों पर लगा आरोप। सड़कों पर भीख मांगते भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं का वीडियो वायरल। तहसील खुर्जा क्षेत्र के दाताराम चौक का मामला। बाइट बब्बन चौधरी ,भाकियू युवा प्रदेश महासचिव *मौहम्मद इरफ़ान*
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    बुलंदशहर- भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने तहसील खुर्जा के अधिकारियों पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप।
तहसील अधिकारियों के लिए सड़कों पर भीख मांगते नजर आए भाकियू युवा प्रदेश महासचिव बब्बन चौधरी।
भीख मांगकर पैसा इकट्ठा कर तहसील प्रशासन को सौंपेंगे भाकियू के कार्यकर्ता।
सालों से लंबित पड़े मामलों को बिना पैसे काम न करने का तहसील खुर्जा का अधिकारियों पर लगा आरोप।
सड़कों पर भीख मांगते भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं का वीडियो वायरल।
तहसील खुर्जा क्षेत्र के दाताराम चौक का मामला।
बाइट बब्बन चौधरी ,भाकियू युवा प्रदेश महासचिव
*मौहम्मद इरफ़ान*
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    2 hrs ago
  • *लोनी में भव्य श्रीराम कथा का हुआ आयोजन, सिर पर रामचरितमानस और नंगे पैर चले लोनी से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ​गाजियाबाद का लोनी आज 'जय श्री राम' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा आयोजित भव्य श्री राम कथा का आज धूमधाम से शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन निकाली गई भव्य कलश यात्रा में भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची। ​कलश यात्रा की सबसे विशेष बात विधायक नंदकिशोर गुर्जर का समर्पण रहा। विधायक नंदकिशोर गुर्जर पूरी यात्रा के दौरान नंगे पैर चले और पवित्र रामचरितमानस को अपने सिर पर धारण कर आगे-आगे चलते रहे। उनकी इस श्रद्धा को देखकर क्षेत्रवासी भाव-विभोर हो गए। ​लोनी की राम पार्क कॉलोनी में आयोजित इस कथा के पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई। लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मंगल कलश लिए शामिल हुईं। डीजे पर चल रहे धार्मिक भजनों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को राममय कर दिया। यात्रा पर स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। ​ ​यात्रा की भव्यता और भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। राम पार्क कॉलोनी और यात्रा मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। *फरमान अली* बाइट - लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर
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    *लोनी में भव्य श्रीराम कथा का हुआ आयोजन, सिर पर रामचरितमानस और नंगे पैर चले लोनी से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर
​गाजियाबाद का लोनी आज 'जय श्री राम' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा आयोजित भव्य श्री राम कथा का आज धूमधाम से शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन निकाली गई भव्य कलश यात्रा में भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची।
​कलश यात्रा की सबसे विशेष बात विधायक नंदकिशोर गुर्जर का समर्पण रहा। विधायक नंदकिशोर गुर्जर पूरी यात्रा के दौरान नंगे पैर चले और पवित्र रामचरितमानस को अपने सिर पर धारण कर आगे-आगे चलते रहे। उनकी इस श्रद्धा को देखकर क्षेत्रवासी भाव-विभोर हो गए।
​लोनी की राम पार्क कॉलोनी में आयोजित इस कथा के पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई। लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मंगल कलश लिए शामिल हुईं। डीजे पर चल रहे धार्मिक भजनों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को राममय कर दिया। यात्रा पर स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।
​
​यात्रा की भव्यता और भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। राम पार्क कॉलोनी और यात्रा मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। 
*फरमान अली*
बाइट - लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर
    user_News 22 India
    News 22 India
    TV News Anchor करावल नगर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
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