बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को लेकर अब गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा होने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, टूरिस्ट वाहनों के अलावा अब हाथियों के माध्यम से भी बाघों की स्वच्छंदता पर प्रहार हो रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी कारण बाघ अपना रहवास स्थल छोड़कर गांव की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में ताला जोन में बैठे हुए आराम फरमा रहे बजरंग नामक बाघ को एक महावत द्वारा घास के मैदान से बाहर खदेड़ते हुए दिखाया गया है, जिससे उक्त बाघ काफी परेशान होता हुआ भी दिखाई दे रहा है। जानकारों के अनुसार, ऐसे में टाइगर परेशान होकर अपने वास स्थल से निकल कर जंगल के बाहर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं, जिसके दुखद परिणाम हो सकते हैं। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर जिम्मेदारों से अविलंब दखल और कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को लेकर अब गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा होने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, टूरिस्ट वाहनों के अलावा अब हाथियों के माध्यम से भी बाघों की स्वच्छंदता पर प्रहार हो रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी कारण बाघ अपना रहवास स्थल छोड़कर गांव की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में ताला जोन में बैठे हुए आराम फरमा रहे बजरंग नामक बाघ को एक महावत द्वारा घास के मैदान से बाहर खदेड़ते हुए दिखाया गया है, जिससे उक्त बाघ काफी परेशान होता हुआ भी दिखाई दे रहा है। जानकारों के अनुसार, ऐसे में टाइगर परेशान होकर अपने वास स्थल से निकल कर जंगल के बाहर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं, जिसके दुखद परिणाम हो सकते हैं। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर जिम्मेदारों से अविलंब दखल और कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है।
- आशा, ऊषा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने आज शहडोल के कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने आरोप लगाया है कि उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है और कई स्थानों पर इसमें अनुचित कटौती भी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि प्रोत्साहन राशि का नियमित भुगतान हर माह की 5 तारीख तक बिना किसी कटौती के सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने वेतन पर्ची की व्यवस्था लागू करने, सभी बकाया राशि का एरियर सहित भुगतान करने और भुगतान प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, आशा कार्यकर्ताओं के लिए ₹26,000 न्यूनतम वेतन, राज्य सरकार की ओर से तत्काल ₹10,000 मासिक मानदेय, गैर-विभागीय कार्यों के लिए अतिरिक्त भुगतान, रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति में होने वाली मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन प्रमुख मांगों का शीघ्र और संतोषजनक निराकरण नहीं किया जाता है, तो वे अपने आंदोलन को और भी अधिक तेज करेंगे।2
- मैहर जिले के ग्राम पंचायत बढेरूहा में राजस्व विभाग और पटवारी की लापरवाही के कारण एक किसान अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी भूमि की कई बार नाप कराई जा चुकी है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के बावजूद उसे आज तक मौके पर उसकी वास्तविक जमीन नहीं मिल पाई है। किसान कामता प्रसाद पटेल का कहना है कि उनकी जमीन पर सड़क निर्माण कर दिया गया है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते, कई बार अधिकारियों से शिकायत करने और भूमि की नाप कराने के बावजूद, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसी क्रम में, पीड़ित कामता प्रसाद पटेल ने जिला कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी जमीन पर सड़क का निर्माण हुआ है, तो उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।4
- सतना में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाई गईं "स्मार्ट" जुगनू लाइटें केवल दो दिनों तक ही चमक पाईं और फिर पूरी तरह ठप पड़ गईं। इस विफलता पर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने करोड़ों रुपये का गबन किया है और शहर को अंधेरे में धकेल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये लाइटें सिर्फ उद्घाटन समारोह तक ही रोशन थीं, जिसके बाद अब खंभों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार लटकता हुआ दिखाई दे रहा है।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के समीप स्थित फलाहारी आश्रम के पास एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इसकी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुकी हैं। क्षेत्र के लोग और श्रद्धालुओं का कहना है कि तेंदुए की लगातार मौजूदगी से आसपास के लोगों में दहशत व्याप्त है, जिसके कारण शाम होते ही वे घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। वहीं, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग और रेस्क्यू टीम को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि बार-बार तेंदुए के दिखाई देने से रेस्क्यू अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि किसी बड़े हादसे से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल, वन विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की लगातार मांग कर रहे हैं।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के पास स्थित फलाहारी आश्रम के समीप एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस घटना से गहरी दहशत है, खासकर इसलिए क्योंकि तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इसकी वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई हैं। तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण शाम होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं, वहीं माँ शारदा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वन विभाग और रेस्क्यू टीम को इस संबंध में कई बार सूचना दी गई है, लेकिन अभी तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का यह भी कहना है कि बार-बार तेंदुए के दिखाई देने से बचाव अभियान की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जोर दिया है कि किसी बड़े हादसे से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और इलाके में निगरानी बढ़ाई जाए। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, वन विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की गुहार लगा रहे हैं।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के समीप स्थित फलाहारी आश्रम के पास एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इससे संबंधित वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुकी हैं। तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं में भारी दहशत व्याप्त है, जिससे शाम होते ही लोग अपने घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। इसके साथ ही, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस मामले में वन विभाग और रेस्क्यू टीम को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने बार-बार तेंदुए के दिखाई देने के बावजूद वन विभाग के रेस्क्यू अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि किसी बड़ी अनहोनी से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और इलाके में निगरानी बढ़ाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल वन विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की अपील कर रहे हैं।1
- उमरिया जिला मुख्यालय के मानपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत नौगमा में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहाँ सभी निर्माण कार्यों में लगातार गुणवत्ताविहीन कार्य कराया जा रहा है। एक चेक डैम बिना किसी ड्राइंग या नक्शे के बनवाया गया था, जो पहली ही बरसात में बह गया। वहीं, अपने निजी फायदे के लिए घर के पास ही ₹18 से ₹20 लाख का एक और चेक डैम बनवाया गया है। इन निर्माण कार्यों पर आज तक कोई लागत बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, और जल बहाव से दिशा बदल देने के कारण यह चेक डैम पूरी तरह से बेकार हो गया है। इसी कड़ी में, ग्राम पंचायत भवन के पीछे स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने पूर्वजों द्वारा निर्मित तालाब को ग्राम पंचायत नौगमा के प्रभावशाली व्यक्ति, सरपंच और सचिव मिलकर नियमों का उल्लंघन करते हुए लुप्त कर रहे हैं। जल संवर्धन योजना के तहत इस तालाब को सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए मिटाया जा रहा है, जिसकी न तो कोई योजना संबंधी जानकारी उपलब्ध है, न ही कोई कार्य प्रस्ताव है और न ही लागत बोर्ड लगाया गया है। लगातार पाँच दिनों से जेसीबी मशीन लगाकर तालाब के मेड़ को नष्ट किया जा रहा है। यह तालाब खसरा नंबर 363 (रकबा 0.239 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 364/1 के कुछ भाग पर स्थित है, जो आज भी खसरे में मध्य प्रदेश शासन तालाब के रूप में दर्ज है। ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव राम लखन सिंह और उप यंत्री संतोष सिंह की कथित मिलीभगत से मुकेश पटेल ने इस तालाब को पूर्ण रूप से गायब कर दिया है। इस तालाब को बदना पटेल और राम सखी पटेल, जो शिव प्रसाद पटेल के पुत्र थे, ने दान किया था। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण और दानदाताओं के वारिसदार मुख्यालय पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने अपने पूर्वजों की संपत्ति को यथावत रखने की गुहार लगाई है और अपनी पीड़ा व्यक्त की है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीण जनों की इस समस्या पर ध्यान देती है या नहीं।1
- सतना जिला अस्पताल में एक कर्मचारी की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। डॉक्टर को दिखाने आई छात्राओं को ओपीडी के अंदर ही कैद कर लिया गया, जब कर्मचारी ने सारे गेट पर ताला जड़ दिया और खुद गायब हो गया। छात्राओं द्वारा शोर मचाए जाने के बाद, अन्य कर्मचारी ओपीडी पहुंचे और ताला खोलकर उन्हें बाहर निकाला।1
- सतना जिले के रामपुर बघेलान अंतर्गत ग्राम सेमरा में अवैध शराब की बिक्री का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गांव के सेमरा मोड़ समेत कई दुकानों पर बिना लाइसेंस के खुलेआम शराब बेची जा रही है, जिसके चलते सामाजिक माहौल दिन-ब-दिन बिगड़ रहा है। शाम ढलते ही इन दुकानों पर शराब की बिक्री शुरू हो जाती है और देर रात तक नशे में धुत युवकों का जमावड़ा लगा रहता है। इस स्थिति से गांव की शांति और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने बताया है कि शराबखोरी के कारण घरों में विवाद, मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसका बच्चों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि शाम के बाद महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। गांववासियों ने जिला प्रशासन, पुलिस और मध्य प्रदेश आबकारी विभाग से मांग की है कि अवैध शराब बेचने वालों पर तत्काल छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीण फिलहाल संयुक्त कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, ताकि गांव में फिर से सुरक्षित और शांत वातावरण स्थापित हो सके।1