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देश के सभी केंद्रों ओर उत्साह से मनाया गया बाटी चोखा डे, 27 साल का हुआ बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वाराणसी : काशी की पहचान सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं है अपितु यह तो अपने खान-पान के लिए भी जाना जाता है। संस्कृति से जुड़े पारंपरिक खानपान के इसी निराले स्वाद को पिछले 27 सालों से बाटी चोखा रेस्टोरेंट लोंगो तक पहुंच रहा है। 25 फरवरी 1999 को बाटी चोखा को रेस्टोरेंट में लाने की शुरुआत हुई। पिछले कई सालों से इस दिन को 'बाटी चोखा डे' के रूप में मनाया जा रहा है।आज यानी 25 फरवरी बुधवार को 'बाटी चोखा डे' है और हम बाटी चोखा रेस्टोरेंट की 27 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। बाटी चोखा डे के इस मौके पर मैनेजमेंट ने अपने बनारस , नोएडा,मिर्जापुर, कलकत्ता , लखनऊ धनबाद स्थित सभी रेस्टोरेंट के बेस्ट इम्प्लाई को उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित भी किया। तेलियाबाग स्थित रेस्टॉरेंट पर बाटी चोखा परिवार के सरंक्षक सरंक्षक श्री ललित मोहन अग्रवाल ने उत्कृष्ट कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने बाटी चोखा रेस्टोरेंट को इस उपलब्धि पर बधाई दी। आसान नही था बाटी चोखा के ठेले से रेस्टोरेन्ट में आने का सफ़र बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होने के बावजूद बाटी चोखा गरीबों के भोजन का अभिप्राय बन गया था। यह व्यंजन बाजार में सिर्फ़ ठेलों तक सीमित रह गया। रेस्टोरेंट और 5 स्टार होटलों के बदलते दौर में इसे वहां स्थान नहीं मिला जबकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और दूसरे देश से आए व्यंजनों को इन रेस्टोरेंट और होटल में बड़ी जगह मिली । यह बात बनारस के कुछ लोगों को बेहद खलती थी और आपस में चर्चा भी करते थे लेकिन इससे चुनौती लेने की ताकत का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। क्योंकि यह एक बड़ा जोखिम भरा काम था। लेकिन सन 1999 में बनारस ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के इस पौष्टिक बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का बीड़ा एक शख्स ने उठाया, जिसका नाम सिद्धार्थ दुबे था।सिद्धार्थ दुबे ने पहले होम डिलेवरी शुरू की,फिर बाटी चोखा के साथ मल्टी कूजीन रेस्टोरेंट खोला. लेकिन कुछ ही दिनों में दूसरे व्यंजनों की चमक में बाटी चोखा दब गया. ऐसा होता देख मैनेजमेंट ने दूसरे सभी व्यंजनों को बंद कर, इसका नाम ही बाटी चोखा रेस्टोरेंट रख दिया. और उसी दिन से बाटी चोखा रेस्टोरेन्ट में सिर्फ़ बाटी चोखा ही परोसा जाता है। शुरुआती दिनों में इसमें कई तरह के चैलेंज आए। बहुत से परिवार के लोग अपने बच्चों के साथ आते थे। जिसमें बड़े बुजुर्गों को तो बाटी चोखा का स्वाद पसंद था लेकिन बच्चे चाऊमीन मोमो और चिली पनीर जैसे व्यंजनों के डिमांड करते थे। अपने सिद्धांत से बंधा बाटी चोखा रेस्टोरेंट उन बच्चों के इस डिमांड को पूरा नहीं कर पाते थे तो पूरा परिवार रेस्टोरेंट से चला जाता था। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से लेकर परिचित मित्र सभी कहते थे की कम से कम बच्चों के लिए तो पाश्चात्य खान-पान के मेल को रख लेना चाहिए। लेकिन उनके मन में तो अपने बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का जज्बा और जुनून था लिहाजा हर तरीके के सलाह और नुकसान को दरकिनार करते हुए वो अपने मिशन में जुटे रहे. सालों से रेस्टोरेंट आर्थिक नुकसान और गुमनामी से जूझता रहा. बाटी चोखा रेस्टोरेंट का पूरी यह स्वाद जब परवान चढ़ा तो बनारस से निकलकर देश के कई शहरों में इसकी शाखाएं खुलने लगी। बनारस में तेलियाबाग, डाफी , कलकत्ता के साल्टलेक, लखनऊ के गोमतीनगर और अलीगंज नोएडा में सेक्टर 104, मिर्जापुर में अहरौरा और अब धनबाद में बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वहां के लोंगो को परंपरा का स्वाद चखायेगा।

2 hrs ago
user_Sapna thakur
Sapna thakur
एतमादपुर, आगरा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

देश के सभी केंद्रों ओर उत्साह से मनाया गया बाटी चोखा डे, 27 साल का हुआ बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वाराणसी : काशी की पहचान सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं है अपितु यह तो अपने खान-पान के लिए भी जाना जाता है। संस्कृति से जुड़े पारंपरिक खानपान के इसी निराले स्वाद को पिछले 27 सालों से बाटी चोखा रेस्टोरेंट लोंगो तक पहुंच रहा है। 25 फरवरी 1999 को बाटी चोखा को रेस्टोरेंट में लाने की शुरुआत हुई। पिछले कई सालों से इस दिन को 'बाटी चोखा डे' के रूप में मनाया जा रहा है।आज यानी 25 फरवरी बुधवार को 'बाटी चोखा डे' है और हम बाटी चोखा रेस्टोरेंट की 27 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। बाटी चोखा डे के इस मौके पर मैनेजमेंट ने अपने बनारस , नोएडा,मिर्जापुर, कलकत्ता , लखनऊ धनबाद स्थित सभी रेस्टोरेंट के बेस्ट इम्प्लाई को उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित भी किया। तेलियाबाग स्थित रेस्टॉरेंट पर बाटी चोखा परिवार के सरंक्षक सरंक्षक श्री ललित मोहन अग्रवाल ने उत्कृष्ट कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने बाटी चोखा रेस्टोरेंट को इस उपलब्धि पर बधाई दी। आसान नही था बाटी चोखा के ठेले से रेस्टोरेन्ट में आने का सफ़र बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होने के बावजूद बाटी चोखा गरीबों के भोजन का अभिप्राय बन गया था। यह व्यंजन बाजार में सिर्फ़ ठेलों तक सीमित रह गया। रेस्टोरेंट और 5 स्टार होटलों के बदलते दौर में इसे वहां स्थान नहीं मिला जबकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और दूसरे देश से आए व्यंजनों को इन रेस्टोरेंट और होटल में बड़ी जगह मिली । यह बात बनारस के कुछ लोगों को बेहद खलती थी और आपस में चर्चा भी करते थे लेकिन इससे चुनौती लेने की ताकत का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। क्योंकि यह एक बड़ा जोखिम भरा काम था। लेकिन सन 1999 में बनारस ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के इस पौष्टिक बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का बीड़ा एक शख्स ने उठाया, जिसका नाम सिद्धार्थ दुबे था।सिद्धार्थ दुबे ने पहले होम डिलेवरी शुरू की,फिर बाटी चोखा के साथ मल्टी कूजीन रेस्टोरेंट खोला. लेकिन कुछ ही दिनों में दूसरे व्यंजनों की चमक में बाटी चोखा दब गया. ऐसा होता देख मैनेजमेंट ने दूसरे सभी व्यंजनों को बंद कर, इसका नाम ही बाटी चोखा रेस्टोरेंट रख दिया. और उसी दिन से बाटी चोखा रेस्टोरेन्ट में सिर्फ़ बाटी चोखा ही परोसा जाता है। शुरुआती दिनों में इसमें कई तरह के चैलेंज आए। बहुत से परिवार के लोग अपने बच्चों के साथ आते थे। जिसमें बड़े बुजुर्गों को तो बाटी चोखा का स्वाद पसंद था लेकिन बच्चे चाऊमीन मोमो और चिली पनीर जैसे व्यंजनों के डिमांड करते थे। अपने सिद्धांत से बंधा बाटी चोखा रेस्टोरेंट उन बच्चों के इस डिमांड को पूरा नहीं कर पाते थे तो पूरा परिवार रेस्टोरेंट से चला जाता था। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से लेकर परिचित मित्र सभी कहते थे की कम से कम बच्चों के लिए तो पाश्चात्य खान-पान के मेल को रख लेना चाहिए। लेकिन उनके मन में तो अपने बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का जज्बा और जुनून था लिहाजा हर तरीके के सलाह और नुकसान को दरकिनार करते हुए वो अपने मिशन में जुटे रहे. सालों से रेस्टोरेंट आर्थिक नुकसान और गुमनामी से जूझता रहा. बाटी चोखा रेस्टोरेंट का पूरी यह स्वाद जब परवान चढ़ा तो बनारस से निकलकर देश के कई शहरों में इसकी शाखाएं खुलने लगी। बनारस में तेलियाबाग, डाफी , कलकत्ता के साल्टलेक, लखनऊ के गोमतीनगर और अलीगंज नोएडा में सेक्टर 104, मिर्जापुर में अहरौरा और अब धनबाद में बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वहां के लोंगो को परंपरा का स्वाद चखायेगा।

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  • वाराणसी : काशी की पहचान सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं है अपितु यह तो अपने खान-पान के लिए भी जाना जाता है। संस्कृति से जुड़े पारंपरिक खानपान के इसी निराले स्वाद को पिछले 27 सालों से बाटी चोखा रेस्टोरेंट लोंगो तक पहुंच रहा है। 25 फरवरी 1999 को बाटी चोखा को रेस्टोरेंट में लाने की शुरुआत हुई। पिछले कई सालों से इस दिन को 'बाटी चोखा डे' के रूप में मनाया जा रहा है।आज यानी 25 फरवरी बुधवार को 'बाटी चोखा डे' है और हम बाटी चोखा रेस्टोरेंट की 27 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। बाटी चोखा डे के इस मौके पर मैनेजमेंट ने अपने बनारस , नोएडा,मिर्जापुर, कलकत्ता , लखनऊ धनबाद स्थित सभी रेस्टोरेंट के बेस्ट इम्प्लाई को उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित भी किया। तेलियाबाग स्थित रेस्टॉरेंट पर बाटी चोखा परिवार के सरंक्षक सरंक्षक श्री ललित मोहन अग्रवाल ने उत्कृष्ट कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने बाटी चोखा रेस्टोरेंट को इस उपलब्धि पर बधाई दी। आसान नही था बाटी चोखा के ठेले से रेस्टोरेन्ट में आने का सफ़र बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होने के बावजूद बाटी चोखा गरीबों के भोजन का अभिप्राय बन गया था। यह व्यंजन बाजार में सिर्फ़ ठेलों तक सीमित रह गया। रेस्टोरेंट और 5 स्टार होटलों के बदलते दौर में इसे वहां स्थान नहीं मिला जबकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और दूसरे देश से आए व्यंजनों को इन रेस्टोरेंट और होटल में बड़ी जगह मिली । यह बात बनारस के कुछ लोगों को बेहद खलती थी और आपस में चर्चा भी करते थे लेकिन इससे चुनौती लेने की ताकत का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। क्योंकि यह एक बड़ा जोखिम भरा काम था। लेकिन सन 1999 में बनारस ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के इस पौष्टिक बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का बीड़ा एक शख्स ने उठाया, जिसका नाम सिद्धार्थ दुबे था।सिद्धार्थ दुबे ने पहले होम डिलेवरी शुरू की,फिर बाटी चोखा के साथ मल्टी कूजीन रेस्टोरेंट खोला. लेकिन कुछ ही दिनों में दूसरे व्यंजनों की चमक में बाटी चोखा दब गया. ऐसा होता देख मैनेजमेंट ने दूसरे सभी व्यंजनों को बंद कर, इसका नाम ही बाटी चोखा रेस्टोरेंट रख दिया. और उसी दिन से बाटी चोखा रेस्टोरेन्ट में सिर्फ़ बाटी चोखा ही परोसा जाता है। शुरुआती दिनों में इसमें कई तरह के चैलेंज आए। बहुत से परिवार के लोग अपने बच्चों के साथ आते थे। जिसमें बड़े बुजुर्गों को तो बाटी चोखा का स्वाद पसंद था लेकिन बच्चे चाऊमीन मोमो और चिली पनीर जैसे व्यंजनों के डिमांड करते थे। अपने सिद्धांत से बंधा बाटी चोखा रेस्टोरेंट उन बच्चों के इस डिमांड को पूरा नहीं कर पाते थे तो पूरा परिवार रेस्टोरेंट से चला जाता था। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से लेकर परिचित मित्र सभी कहते थे की कम से कम बच्चों के लिए तो पाश्चात्य खान-पान के मेल को रख लेना चाहिए। लेकिन उनके मन में तो अपने बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का जज्बा और जुनून था लिहाजा हर तरीके के सलाह और नुकसान को दरकिनार करते हुए वो अपने मिशन में जुटे रहे. सालों से रेस्टोरेंट आर्थिक नुकसान और गुमनामी से जूझता रहा. बाटी चोखा रेस्टोरेंट का पूरी यह स्वाद जब परवान चढ़ा तो बनारस से निकलकर देश के कई शहरों में इसकी शाखाएं खुलने लगी। बनारस में तेलियाबाग, डाफी , कलकत्ता के साल्टलेक, लखनऊ के गोमतीनगर और अलीगंज नोएडा में सेक्टर 104, मिर्जापुर में अहरौरा और अब धनबाद में बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वहां के लोंगो को परंपरा का स्वाद चखायेगा।
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    वाराणसी : काशी की पहचान सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं है अपितु यह तो अपने खान-पान के लिए भी जाना जाता है। संस्कृति से जुड़े पारंपरिक खानपान के इसी निराले स्वाद को पिछले 27 सालों से बाटी चोखा रेस्टोरेंट लोंगो तक पहुंच रहा है। 25 फरवरी 1999 को बाटी चोखा को रेस्टोरेंट में लाने की शुरुआत हुई। पिछले कई सालों से इस दिन को 'बाटी चोखा डे' के रूप में मनाया जा रहा है।आज यानी 25 फरवरी बुधवार को 'बाटी चोखा डे' है और हम बाटी चोखा रेस्टोरेंट की 27 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।  बाटी चोखा डे के इस मौके पर मैनेजमेंट ने अपने बनारस , नोएडा,मिर्जापुर, कलकत्ता , लखनऊ धनबाद  स्थित सभी रेस्टोरेंट के बेस्ट इम्प्लाई  को उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित भी किया। तेलियाबाग स्थित  रेस्टॉरेंट पर बाटी चोखा परिवार के सरंक्षक सरंक्षक श्री ललित मोहन अग्रवाल ने उत्कृष्ट  कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने बाटी चोखा रेस्टोरेंट को इस उपलब्धि पर बधाई दी। 
आसान नही था बाटी चोखा के ठेले से रेस्टोरेन्ट में आने का सफ़र 
बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होने के बावजूद बाटी चोखा गरीबों के भोजन का अभिप्राय बन गया था। यह व्यंजन बाजार में सिर्फ़ ठेलों तक सीमित रह गया। रेस्टोरेंट और 5 स्टार होटलों के बदलते दौर में इसे वहां स्थान नहीं मिला जबकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और दूसरे देश से आए व्यंजनों को इन रेस्टोरेंट और होटल में बड़ी जगह मिली । यह बात बनारस के कुछ लोगों को बेहद खलती थी और आपस में चर्चा भी करते थे लेकिन इससे चुनौती लेने की ताकत का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। क्योंकि यह एक बड़ा जोखिम भरा काम था। लेकिन सन 1999 में बनारस ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के इस पौष्टिक बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का बीड़ा एक शख्स ने उठाया, जिसका नाम सिद्धार्थ दुबे था।सिद्धार्थ दुबे ने पहले होम डिलेवरी शुरू की,फिर बाटी चोखा के साथ मल्टी कूजीन रेस्टोरेंट खोला. लेकिन कुछ ही दिनों में दूसरे व्यंजनों की चमक में बाटी चोखा दब गया. ऐसा होता देख मैनेजमेंट ने दूसरे सभी व्यंजनों को बंद कर, इसका नाम ही बाटी चोखा रेस्टोरेंट रख दिया. और उसी दिन से बाटी चोखा रेस्टोरेन्ट में सिर्फ़ बाटी चोखा ही परोसा जाता है। शुरुआती दिनों में इसमें कई तरह के चैलेंज आए। बहुत से परिवार के लोग अपने बच्चों के साथ आते थे। जिसमें बड़े बुजुर्गों को तो बाटी चोखा का स्वाद पसंद था लेकिन बच्चे चाऊमीन मोमो और चिली पनीर जैसे व्यंजनों के डिमांड करते थे। अपने सिद्धांत से बंधा बाटी चोखा रेस्टोरेंट उन बच्चों के इस डिमांड को पूरा नहीं कर पाते थे तो पूरा परिवार रेस्टोरेंट से चला जाता था। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से लेकर परिचित मित्र सभी कहते थे की कम से कम बच्चों के लिए तो पाश्चात्य खान-पान के मेल को रख लेना चाहिए। लेकिन उनके मन में तो अपने बाटी चोखा के स्वाद को बड़े फलक तक ले जाने का जज्बा और जुनून था लिहाजा हर तरीके के सलाह और नुकसान को दरकिनार करते हुए वो अपने मिशन में जुटे रहे. सालों से रेस्टोरेंट आर्थिक नुकसान और गुमनामी से जूझता रहा. 
बाटी चोखा रेस्टोरेंट का पूरी  यह स्वाद जब परवान चढ़ा तो बनारस से निकलकर देश के कई शहरों में इसकी शाखाएं खुलने लगी। बनारस में तेलियाबाग, डाफी , कलकत्ता के साल्टलेक, लखनऊ के गोमतीनगर और अलीगंज  नोएडा में सेक्टर 104, मिर्जापुर में अहरौरा और अब धनबाद में बाटी चोखा रेस्टॉरेंट वहां के लोंगो को परंपरा का स्वाद चखायेगा।
    user_Sapna thakur
    Sapna thakur
    एतमादपुर, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • नामचीन जय हॉस्पिटल ने CMO व पुलिस के साथ मिलकर कथित रूप से कराया था मुस्लिम डॉक्टर का क्लीनिक जबरन खाली ll UP: आगरा के नामचीन जय हॉस्पिटल ने CMO व पुलिस के साथ मिलकर कथित रूप से कराया था मुस्लिम डॉक्टर का क्लीनिक जबरन खाली! उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान. CMO ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुलिस को आदेश दिया था. वीडियो 1 महीने पूर्व पुलिस कार्यवाही का जय हॉस्पिटल (Jai Hospital & Research Centre) , जो आगरा के बाईपास रोड/नेहरू नगर क्षेत्र में स्थित है, उसी के परिसर में डॉ. यूनुस खान (Dr. Yunus Khan) का डेंटल क्लीनिक
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    नामचीन जय हॉस्पिटल ने CMO व पुलिस के साथ मिलकर कथित रूप से कराया था मुस्लिम डॉक्टर का क्लीनिक जबरन खाली ll
UP: आगरा के नामचीन जय हॉस्पिटल ने CMO व पुलिस के साथ मिलकर कथित रूप से कराया था मुस्लिम डॉक्टर का क्लीनिक जबरन खाली!
उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान. CMO ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुलिस को आदेश दिया था. वीडियो 1 महीने पूर्व पुलिस कार्यवाही का
जय हॉस्पिटल (Jai Hospital & Research Centre)
, जो आगरा के बाईपास रोड/नेहरू नगर क्षेत्र में स्थित है, उसी के परिसर में डॉ. यूनुस खान (Dr. Yunus Khan) का डेंटल क्लीनिक
    user_MAKKI TV
    MAKKI TV
    Mediation service Etmadpur, Agra•
    4 hrs ago
  • 👉 दक्षिणी बायपास के रायभा टोल की घटना 👉 सोशल मीडिया पर वायरल हुई विधायक पुत्र की गुंडागर्दी 👉 पीड़ित ने लिखित में दिया- वह नहीं चाहता कानूनी कार्यवाही आगरा के दक्षिणी बाइपास के रायभा टोल प्लाजा पर मंगलवार दोपहर 12 बजे शुल्क मांगने से नाराज विधायक पुत्र का टोलकर्मी से विवाद हो गया। इसके बाद विधायक पुत्र ने थप्पड़ मार दिए। मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया। विधायक पुत्र ने भी टोलकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया। रात को टोलकर्मी ने पुलिस को समझौता पत्र दे दिया। इसके बाद मामले का पटाक्षेप हो गया। दक्षिणी बाइपास के रायभा टोल प्लाजा पर फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल के बेटे सुरेश चौधरी अपने साथी संग मथुरा की ओर से 'विधायक' लिखी काले रंग की गाड़ी में सवार होकर लौट रहे थे। टोल प्लाजा पर पहुंचते ही कर्मचारी ने बूम बैरियर गिरा दिया। गाड़ी पर फास्टैग न होने और सत्यापन के लिए रोके जाने पर विधायक पुत्र का विवाद हो गया। वे गाड़ी से उतरे और टोलकर्मी को थप्पड़ लगाए। इस बीच वाहन से दूसरा व्यक्ति उतरा उसने बीचबचाव की कोशिश की। घटना होते ही अन्य टोलकर्मी भी पहुंच गए। प्रबंधक ने पहुंचकर मामला शांत किराया। इसके बाद विधायक पुत्र गाड़ी लेकर निकल गए। इसके दो वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। पहला 42 सेकेंड और दूसरा 56 सेकेंड का है। दोनों ही वीडियो टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरे के लग रहे हैं। डीसीपी पश्चिमी आदित्य 3 का कहना है कि टोलकर्मी की ओर क से कोई तहरीर नहीं मिली थी। पुलिस ने रात में उससे संपर्क किया तो उसने समझौता पत्र लिखकर दिया ट है। इसमें उसने कहा है कि सत्यापन के दौरान विधायक पुत्र सुरेश चौधरी से विवाद हो गया था। वे उनके रिश्तेदार हैं। आपस में समझौता हो गया है। वे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
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    👉 दक्षिणी बायपास के रायभा टोल की घटना
👉 सोशल मीडिया पर वायरल हुई विधायक पुत्र की गुंडागर्दी
👉 पीड़ित ने लिखित में दिया- वह नहीं चाहता कानूनी कार्यवाही
आगरा के दक्षिणी बाइपास के रायभा टोल प्लाजा पर मंगलवार दोपहर 12 बजे शुल्क मांगने से नाराज विधायक पुत्र का टोलकर्मी से विवाद हो गया। इसके बाद विधायक पुत्र ने थप्पड़ मार दिए। मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया। विधायक पुत्र ने भी टोलकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया। रात को टोलकर्मी ने पुलिस को समझौता पत्र दे दिया। इसके बाद मामले का पटाक्षेप हो गया।
दक्षिणी बाइपास के रायभा टोल प्लाजा पर फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल के बेटे सुरेश चौधरी अपने साथी संग मथुरा की ओर से 'विधायक' लिखी काले रंग की गाड़ी में सवार होकर लौट रहे थे। टोल प्लाजा पर पहुंचते ही कर्मचारी ने बूम बैरियर गिरा दिया। गाड़ी पर फास्टैग न होने और सत्यापन के लिए रोके जाने पर विधायक पुत्र का विवाद हो गया। वे गाड़ी से उतरे और टोलकर्मी को थप्पड़ लगाए। इस बीच वाहन से दूसरा व्यक्ति उतरा उसने बीचबचाव की कोशिश की। घटना होते ही अन्य टोलकर्मी भी पहुंच गए। प्रबंधक ने पहुंचकर मामला शांत किराया। इसके बाद विधायक पुत्र गाड़ी लेकर निकल गए। इसके दो वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। पहला 42 सेकेंड और दूसरा 56 सेकेंड का है। दोनों ही वीडियो टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरे के लग रहे हैं। डीसीपी पश्चिमी आदित्य 3 का कहना है कि टोलकर्मी की ओर क से कोई तहरीर नहीं मिली थी। पुलिस ने रात में उससे संपर्क किया तो उसने समझौता पत्र लिखकर दिया ट है। इसमें उसने कहा है कि सत्यापन के दौरान विधायक पुत्र सुरेश चौधरी से विवाद हो गया था। वे उनके रिश्तेदार हैं। आपस में समझौता हो गया है। वे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
    user_किशोर लवी
    किशोर लवी
    एतमादपुर, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • ##Lucknow dubagga jeta road #
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    ##Lucknow dubagga jeta road #
    user_Mohdsaeed Saeed
    Mohdsaeed Saeed
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणिपश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्योगीआदित्यनाथ माननीय योगी आदित्यनाथ
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    सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणिपश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्योगीआदित्यनाथ माननीय योगी आदित्यनाथ
    user_NO1 BN NEWS LIVE
    NO1 BN NEWS LIVE
    Media company आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Sakim Khan
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    Post by Sakim Khan
    user_Sakim Khan
    Sakim Khan
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 8 पर स्थित कृष्ण फूड के नाम से संचालित आज सुबह एक स्टॉल पर रेलवे के द्वारा स्वीकृत वेंडर कार्य कर रहा था इस स्टॉल पर जीआरपी के स्टाफ सूरज चौहान के द्वारा चाय के लिए बोला गया इंद्र द्वारा कहा गया कि सफाई के बाद आपकी चाय बना दूंगा इसी बात पर उत्तेजित होकर सूरज चौहान ने वेंडर के साथ गाली गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट कर दी जिससे कि वेंडर के मामूली चोट भी आई है वेंडर बहुत अधिक भयभीत है वह इस प्रकार की आचरण सी बहुत दुखी है और आत्महत्या करने की चेतावनी भी दे रहा है....
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    मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 8 पर स्थित कृष्ण फूड के नाम से संचालित आज सुबह एक स्टॉल पर रेलवे के द्वारा स्वीकृत वेंडर कार्य कर रहा था इस स्टॉल पर जीआरपी के स्टाफ सूरज चौहान के द्वारा चाय के लिए बोला गया इंद्र द्वारा कहा गया कि सफाई  के बाद आपकी चाय बना दूंगा इसी बात पर उत्तेजित होकर सूरज चौहान ने वेंडर के साथ गाली गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट कर दी जिससे कि वेंडर के मामूली चोट भी आई है वेंडर बहुत अधिक भयभीत है वह इस प्रकार की आचरण सी बहुत दुखी है और आत्महत्या करने की चेतावनी भी दे रहा है....
    user_राहुल अग्रवाल क्राइम रिपोर्टर
    राहुल अग्रवाल क्राइम रिपोर्टर
    Court reporter आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • डरकर, मरकर कब तक व्यक्ति जिएगा... उसे सुरक्षित वातावरण देना किसी भी लोकप्रिय सरकार का काम होना चाहिए और यही हम लोगों ने उत्तर प्रदेश में किया है। — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी
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    डरकर, मरकर कब तक व्यक्ति जिएगा... उसे सुरक्षित वातावरण देना किसी भी लोकप्रिय सरकार का काम होना चाहिए और यही हम लोगों ने उत्तर प्रदेश में किया है। 
— मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी
    user_Sapna thakur
    Sapna thakur
    एतमादपुर, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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