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विदिशा के बस स्टैंड क्षेत्र में भीषण सड़क हादसा चार लोग गंभीर रूप से घायल बस स्टैंड क्षेत्र में देर रात भीषण सड़क हादसा विदिशा के बस स्टैंड क्षेत्र में बीती रात लगभग 2 बजे के आसपास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की मदद से घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अधिक गंभीर रूप से घायल लोगों को भोपाल रेफर किया गया है। हादसे की सूचना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।
Vinod Mehra
विदिशा के बस स्टैंड क्षेत्र में भीषण सड़क हादसा चार लोग गंभीर रूप से घायल बस स्टैंड क्षेत्र में देर रात भीषण सड़क हादसा विदिशा के बस स्टैंड क्षेत्र में बीती रात लगभग 2 बजे के आसपास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की मदद से घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अधिक गंभीर रूप से घायल लोगों को भोपाल रेफर किया गया है। हादसे की सूचना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।
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- जिनसे नगरीय निकायों की सड़कों के गड्ढे तक नहीं भरा पा रहे वो गणित के विशेषज्ञ बनकर बता रहे की 99 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते1
- नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी का तांडव: भीषण बाढ़ में सड़कें और पुल बहे, भारी तबाही की आशंका नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। पहाड़ी ढलानों से तेज रफ्तार में उतरे मटमैले पानी के सैलाब ने कई निचले रिहाइशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बाढ़ का मंजर इतना भयावह था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तबाही का प्रमुख ब्योरा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान: सैलाब के तेज बहाव में कई पक्के मकान, संपर्क सड़कें और स्थानीय नदियों पर बने पुल ताश के पत्तों की तरह बह गए। यातायात और संपर्क पूरी तरह ठप्प: मुख्य मार्गों के बह जाने से रसुवा जिले के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और राजधानी काठमांडू से पूरी तरह कट गया है। व्यापक जन-जीवन प्रभावित: बाढ़ प्रभावित इलाकों से सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है, जबकि कई लोग अब भी ऊंचे इलाकों में फंसे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य में चुनौतियाँ नेपाल सेना, सशस्त्रा प्रहरी बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। हालांकि, लगातार खराब मौसम और टूट चुके संपर्क मार्गों के कारण दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक बयान: "जलस्तर बेहद तेज गति से बढ़ा, जिससे नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। हमारी पहली प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और अस्थाई राहत पहुंचाना है। वास्तविक आर्थिक और भौतिक नुकसान का सटीक आकलन जलस्तर कम होने के बाद ही संभव हो पाएगा।" अस्थाई स्थिति और आगे का जोखिम भोटेकोशी नदी का बेसिन भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील और तीव्र ढलान वाला माना जाता है। भूस्खलन या ऊपरी इलाकों में बादल फटने जैसी स्थितियों में यह नदी बेहद आक्रामक रूप ले लेती है। मौसम विभाग ने तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की सख्त चेतावनी जारी की है।1
- गंजबासौदा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ ? गंजबासौदा रेलवे स्टेशन पर रेलवे की अनाउंसमेंट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले ट्रेन के लिए प्लेटफॉर्म नंबर-01 का अनाउंसमेंट किया जाता है और ट्रेन के आने के ऐन वक्त पर अचानक प्लेटफॉर्म नंबर-02 का अनाउंसमेंट कर दिया जाता है। ऐसे में यात्री अफरातफरी में अपना सामान लेकर प्लेटफॉर्म बदलने के लिए दौड़ पड़ते हैं। अब जरा सोचिए, अगर इसी दौरान मेन लाइन से कोई तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन गुजर रही हो, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा ? सबसे गंभीर बात यह है कि यात्रियों के मुताबिक ऐसी स्थिति आए दिन देखने को मिलती है, लेकिन रेलवे प्रबंधन इस समस्या को गंभीरता से लेता नजर नहीं आ रहा। सवाल यह है कि रेलवे किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है? अनाउंसमेंट व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। हादसा होने के बाद जांच से बेहतर है कि उससे पहले व्यवस्था सुधारी जाए। सचिन लोधी गंजबासौदा1
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- रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 157 पहुंच गया है। सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें नेपाल सहित 25 देशों के 403 लोग हैं। सबसे ज्यादा 133 भारतीय लापता हैं। सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे, जिनका अब तक कुछ पता नहीं चला है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों में 80 सुरक्षा कर्मी भी लापता हैं। इनमें 44 नेपाल आर्मी के जवान शामिल हैं। बाढ़ से रसुवा और धादिंग के अलावा नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी ईस्ट तक के इलाके प्रभावित हुए हैं। बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाले लोगों, घरों, गाड़ियों और सरकारी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। देश के 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, 19 मोटरेबल पुल तबाह हो गए। नेपाल-चीन को जोड़ने वाले 42 किलोमीटर लंबा बेट्रावती-रासुवागढ़ी हाईवे भी बह गया। चीन सीमा के कस्टम चेकपोस्ट पर खड़े 300 से ज्यादा वाहन रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 157 पहुंच गया है। सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें नेपाल सहित 25 देशों के 403 लोग हैं। सबसे ज्यादा 133 भारतीय लापता हैं। सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे, जिनका अब तक कुछ पता नहीं चला है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों में 80 सुरक्षा कर्मी भी लापता हैं। इनमें 44 नेपाल आर्मी के जवान शामिल हैं। बाढ़ से रसुवा और धादिंग के अलावा नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी ईस्ट तक के इलाके प्रभावित हुए हैं। बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाले लोगों, घरों, गाड़ियों और सरकारी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। देश के 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, 19 मोटरेबल पुल तबाह हो गए। नेपाल-चीन को जोड़ने वाले 42 किलोमीटर लंबा बेट्रावती-रासुवागढ़ी हाईवे भी बह गया। चीन सीमा के कस्टम चेकपोस्ट पर खड़े 300 से ज्यादा वाहन1
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