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दैनिक वीरधरा राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, चित्तौड़गढ़ जिला अपनी शौर्य, त्याग और भक्ति की पहचान के साथ-साथ राजस्थान के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता है, विशेषकर सीमेंट उत्पादन में इसकी अग्रणी भूमिका है। हालाँकि, फैक्ट्रियों के भारी-भरकम टर्नओवर और करोड़ों रुपये के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के बावजूद, स्थानीय विकास की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नियमों के तहत, इन उद्योगों को अपने पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ का 2% स्थानीय क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार पर खर्च करना अनिवार्य है, और हर साल कागजों पर करोड़ों रुपये का सीएसआर फंड जारी भी होता है। मगर, धरातल पर स्थिति बिलकुल उलट है, और जिले का एक बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास के गाँवों और कस्बों में विकास के दावों की सच्चाई उजागर होती है। सीमेंट प्लांटों और मार्बल फैक्टरियों से भारी वाहनों के लगातार आवागमन से स्थानीय सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिसके कारण आए दिन हादसे होते हैं, फिर भी सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर सीएसआर फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा। फैक्ट्रियों से निकलने वाले धूल और धुएं के प्रदूषण के कारण स्थानीय आबादी में श्वास, फेफड़े और त्वचा संबंधी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जाँच, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों वाले अस्पतालों की कमी बनी हुई है। कई औद्योगिक इकाइयों के कारण भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जिससे कई गाँवों में महिलाओं को शुद्ध पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा के आस-पास के ग्रामीण फैक्ट्रियों के प्रदूषण का सबसे बड़ा दंश झेल रहे हैं, जहाँ सीमेंट की धूल से फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है और ग्रीन बेल्ट विकसित करने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उद्योगों की स्थापना के समय स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्हें केवल कम वेतन वाले या संविदा/ठेकाकर्मी आधारित मजदूरी के कामों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि उच्च पदों और तकनीकी कार्यों में बाहरी लोगों को वरीयता मिलती है, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है। इस गंभीर स्थिति के पीछे जवाबदेही और मॉनिटरिंग का अभाव एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कंपनियों के सीएसआर खर्च का कड़ाई से ऑडिट नहीं करते, जिससे कंपनियां अक्सर अपनी मर्जी से ऐसे प्रोजेक्ट चुनती हैं जो जनता की वास्तविक जरूरतों से दूर होते हैं। साथ ही, सीएसआर के तहत कौन से कार्य करवाए जाने हैं, इसमें स्थानीय ग्राम पंचायतों या प्रबुद्ध नागरिकों से बहुत कम राय मशविरा किया जाता है, जिससे जनप्रतिनिधियों और जनता की आवाज की अनदेखी होती है, और आरोप है कि यह फंड प्रशासनिक फाइलों में अटका रहता है या जनप्रतिनिधियों द्वारा बैंक बैलेंस बढ़ाने में उपयोग होता है। चित्तौड़गढ़ जिले को विकास की दौड़ में आगे ले जाने के लिए अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला प्रशासन को सजगता दिखानी होगी। इसके लिए एक पारदर्शी जिला सीएसआर पोर्टल की आवश्यकता बताई गई है, जहाँ हर कंपनी के सीएसआर फंड और स्वीकृत कार्यों की लाइव ट्रैकिंग जनता के सामने हो। साथ ही, उद्योगों के आस-पास के 50 किलोमीटर के दायरे में शिक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता तय की जानी चाहिए। जो कंपनियाँ पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रही हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके सीएसआर का पैसा सीधे प्रभावित गाँवों के विकास में डायवर्ट करने की भी बात कही गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि चित्तौड़गढ़ की जनता विकास की हकदार है, क्योंकि वे उद्योगों की समृद्धि के बदले अपनी जमीन, पानी और स्वच्छ हवा का बलिदान दे रहे हैं। इसलिए, यह समय है कि करोड़ों के इस सीएसआर फंड का हिसाब धरातल पर दिखे, ताकि चित्तौड़गढ़ विकास के मामले में फिसड्डी नहीं, बल्कि अग्रणी जिला बन सके।

15 hrs ago
user_ओम जैन शंभूपुरा
ओम जैन शंभूपुरा
Salesperson चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
15 hrs ago
838bc57a-5b65-4661-860e-7f6f2847540d

दैनिक वीरधरा राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, चित्तौड़गढ़ जिला अपनी शौर्य, त्याग और भक्ति की पहचान के साथ-साथ राजस्थान के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता है, विशेषकर सीमेंट उत्पादन में इसकी अग्रणी भूमिका है। हालाँकि, फैक्ट्रियों के भारी-भरकम टर्नओवर और करोड़ों रुपये के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के बावजूद, स्थानीय विकास की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नियमों के तहत, इन उद्योगों को अपने पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ का 2% स्थानीय क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार पर खर्च करना अनिवार्य है, और हर साल कागजों पर करोड़ों रुपये का सीएसआर फंड जारी भी होता है। मगर, धरातल पर स्थिति बिलकुल उलट है, और जिले का एक बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास के गाँवों और कस्बों में विकास के दावों की सच्चाई उजागर होती है। सीमेंट प्लांटों और मार्बल फैक्टरियों से भारी वाहनों के लगातार आवागमन से स्थानीय सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिसके कारण आए दिन हादसे होते हैं, फिर भी सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर सीएसआर फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा। फैक्ट्रियों से निकलने वाले धूल और धुएं के प्रदूषण के कारण स्थानीय आबादी में श्वास, फेफड़े और त्वचा संबंधी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जाँच, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों वाले अस्पतालों की कमी बनी हुई है। कई औद्योगिक इकाइयों के कारण भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जिससे कई गाँवों में महिलाओं को शुद्ध पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा के आस-पास के ग्रामीण फैक्ट्रियों के प्रदूषण का सबसे बड़ा दंश झेल रहे हैं, जहाँ सीमेंट की धूल से फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है और ग्रीन बेल्ट विकसित करने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उद्योगों की स्थापना के समय स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्हें केवल कम वेतन वाले या संविदा/ठेकाकर्मी आधारित मजदूरी के कामों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि उच्च पदों और तकनीकी कार्यों में बाहरी लोगों को वरीयता मिलती है, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है। इस गंभीर स्थिति के पीछे जवाबदेही और मॉनिटरिंग का अभाव एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कंपनियों के सीएसआर खर्च का कड़ाई से ऑडिट नहीं करते, जिससे कंपनियां अक्सर अपनी मर्जी से ऐसे प्रोजेक्ट चुनती हैं जो जनता की वास्तविक जरूरतों से दूर होते हैं। साथ ही, सीएसआर के तहत कौन से कार्य करवाए जाने हैं, इसमें स्थानीय ग्राम पंचायतों या प्रबुद्ध नागरिकों से बहुत कम राय मशविरा किया जाता है, जिससे जनप्रतिनिधियों और जनता की आवाज की अनदेखी होती है, और आरोप है कि यह फंड प्रशासनिक फाइलों में अटका रहता है या जनप्रतिनिधियों द्वारा बैंक बैलेंस बढ़ाने में उपयोग होता है। चित्तौड़गढ़ जिले को विकास की दौड़ में आगे ले जाने के लिए अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला प्रशासन को सजगता दिखानी होगी। इसके लिए एक पारदर्शी जिला सीएसआर पोर्टल की आवश्यकता बताई गई है, जहाँ हर कंपनी के सीएसआर फंड और स्वीकृत कार्यों की लाइव ट्रैकिंग जनता के सामने हो। साथ ही, उद्योगों के आस-पास के 50 किलोमीटर के दायरे में शिक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता तय की जानी चाहिए। जो कंपनियाँ पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रही हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके सीएसआर का पैसा सीधे प्रभावित गाँवों के विकास में डायवर्ट करने की भी बात कही गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि चित्तौड़गढ़ की जनता विकास की हकदार है, क्योंकि वे उद्योगों की समृद्धि के बदले अपनी जमीन, पानी और स्वच्छ हवा का बलिदान दे रहे हैं। इसलिए, यह समय है कि करोड़ों के इस सीएसआर फंड का हिसाब धरातल पर दिखे, ताकि चित्तौड़गढ़ विकास के मामले में फिसड्डी नहीं, बल्कि अग्रणी जिला बन सके।

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  • आज 21.06.26 को चित्तौड़गढ़, राजस्थान में स्थित श्रीसांवलिया सेठ मंडफिया मंदिर से प्रभु सेठ साँवरा के लाइव श्रंगार दर्शन कराए गए हैं। इन दर्शनों को 'जय हो मेरे प्रभु सेठ साँवरा' के उद्घोष के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसमें भक्तों को भगवान के भव्य और अलौकिक रूप के दर्शन प्राप्त हुए। यह सीधा प्रसारण मंदिर से किया गया, जिससे सभी भक्त इस पवित्र अवसर का साक्षी बन सके।
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    आज 21.06.26 को चित्तौड़गढ़, राजस्थान में स्थित श्रीसांवलिया सेठ मंडफिया मंदिर से प्रभु सेठ साँवरा के लाइव श्रंगार दर्शन कराए गए हैं। इन दर्शनों को 'जय हो मेरे प्रभु सेठ साँवरा' के उद्घोष के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसमें भक्तों को भगवान के भव्य और अलौकिक रूप के दर्शन प्राप्त हुए। यह सीधा प्रसारण मंदिर से किया गया, जिससे सभी भक्त इस पवित्र अवसर का साक्षी बन सके।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    12 min ago
  • चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने जिले की जनता से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों से यह महत्वपूर्ण संदेश हर व्यक्ति तक पहुँचाने का आग्रह किया है।
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    चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने जिले की जनता से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों से यह महत्वपूर्ण संदेश हर व्यक्ति तक पहुँचाने का आग्रह किया है।
    user_DS7NEWS NETWORK
    DS7NEWS NETWORK
    News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    36 min ago
  • महिला T20 विश्व कप में एक रोमांचक फाइनल मुकाबले को लेकर दर्शकों से यह जानने की उत्सुकता व्यक्त की गई है कि उनकी राय में कौन सी टीम विजयी होगी। पाठकों को अपने विचार कमेंट्स में साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, साथ ही स्पोर्ट्स न्यूज़ के लिए तुरंत सब्सक्राइब कर जुड़ने का आग्रह भी किया गया है।
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    महिला T20 विश्व कप में एक रोमांचक फाइनल मुकाबले को लेकर दर्शकों से यह जानने की उत्सुकता व्यक्त की गई है कि उनकी राय में कौन सी टीम विजयी होगी। पाठकों को अपने विचार कमेंट्स में साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, साथ ही स्पोर्ट्स न्यूज़ के लिए तुरंत सब्सक्राइब कर जुड़ने का आग्रह भी किया गया है।
    user_Neeraj Sharma
    Neeraj Sharma
    Content Creator (YouTuber) चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड के मूंगा का खेड़ा गांव में शनिवार को एक अनोखी रेस्क्यू कार्रवाई देखने को मिली। यहाँ, एक कुएं से 35 वर्षीय कालू किर का शव निकालने के दौरान, शव के पास तीन सांप मौजूद थे, जिससे सीधे तौर पर शव को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही गंगरार पुलिस और सिविल डिफेंस टीम मौके पर पहुँची। कुएं में सांपों को देखकर वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को भी बुलाया गया। पीयूष कांबले, राम कुमार साहू, मुबारिक खान और मयूर गोसावी ने रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर तीनों सांपों को सुरक्षित रूप से ज़िंदा पकड़ा। इसके बाद सिविल डिफेंस टीम ने मृतक का शव कुएं से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। पुलिस, सिविल डिफेंस और वन्यजीव टीम के इस संयुक्त प्रयास से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड के मूंगा का खेड़ा गांव में शनिवार को एक अनोखी रेस्क्यू कार्रवाई देखने को मिली। यहाँ, एक कुएं से 35 वर्षीय कालू किर का शव निकालने के दौरान, शव के पास तीन सांप मौजूद थे, जिससे सीधे तौर पर शव को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था।

घटना की सूचना मिलते ही गंगरार पुलिस और सिविल डिफेंस टीम मौके पर पहुँची। कुएं में सांपों को देखकर वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को भी बुलाया गया। पीयूष कांबले, राम कुमार साहू, मुबारिक खान और मयूर गोसावी ने रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर तीनों सांपों को सुरक्षित रूप से ज़िंदा पकड़ा। इसके बाद सिविल डिफेंस टीम ने मृतक का शव कुएं से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। पुलिस, सिविल डिफेंस और वन्यजीव टीम के इस संयुक्त प्रयास से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा।
    user_Lucky sukhwal
    Lucky sukhwal
    Priest चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक BPSC अध्यापिका ने अपने ही 13 साल के बेटे को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक वारदात का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि बेटा अपनी माँ के कथित अवैध संबंधों का लगातार विरोध करता था, जिसके बाद यह भीषण कदम उठाया गया।
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    एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक BPSC अध्यापिका ने अपने ही 13 साल के बेटे को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक वारदात का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि बेटा अपनी माँ के कथित अवैध संबंधों का लगातार विरोध करता था, जिसके बाद यह भीषण कदम उठाया गया।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • भदेसर क्षेत्र के पीपलवास गांव और आसपास के इलाकों में किसानों ने बुधवार को हुई प्री-मानसून की तेज बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। बुधवार देर रात से सुबह तक हुई इस बारिश से उत्साहित होकर, कई किसानों ने शुक्रवार से ही जोखिम उठाते हुए बुवाई का कार्य प्रारंभ किया, जबकि कुछ अन्य गांवों में शनिवार से यह कार्य शुरू हुआ। पीपलवास निवासी प्रकाश सोलंकी के अनुसार, बारिश के बाद भूमि बुवाई के लिए उपयुक्त हो गई है। किसानों का मानना है कि यदि अगले 10-15 दिनों तक बारिश न भी हो, तो भी मिट्टी में मौजूद वर्तमान नमी अंकुरण के लिए पर्याप्त रहेगी। पीपलवास पंचायत के आसपास के किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में यह जोखिम भरा फैसला ले रहे हैं। इसके विपरीत, मौसम पूर्वानुमान मंच और कृषि विशेषज्ञ किसानों को बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दे रहे हैं। उनका तर्क है कि प्री-मानसून बारिश पर बड़े पैमाने पर बुवाई करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि आगे पर्याप्त वर्षा न होने की स्थिति में फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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    भदेसर क्षेत्र के पीपलवास गांव और आसपास के इलाकों में किसानों ने बुधवार को हुई प्री-मानसून की तेज बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। बुधवार देर रात से सुबह तक हुई इस बारिश से उत्साहित होकर, कई किसानों ने शुक्रवार से ही जोखिम उठाते हुए बुवाई का कार्य प्रारंभ किया, जबकि कुछ अन्य गांवों में शनिवार से यह कार्य शुरू हुआ। पीपलवास निवासी प्रकाश सोलंकी के अनुसार, बारिश के बाद भूमि बुवाई के लिए उपयुक्त हो गई है।

किसानों का मानना है कि यदि अगले 10-15 दिनों तक बारिश न भी हो, तो भी मिट्टी में मौजूद वर्तमान नमी अंकुरण के लिए पर्याप्त रहेगी। पीपलवास पंचायत के आसपास के किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में यह जोखिम भरा फैसला ले रहे हैं। इसके विपरीत, मौसम पूर्वानुमान मंच और कृषि विशेषज्ञ किसानों को बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दे रहे हैं। उनका तर्क है कि प्री-मानसून बारिश पर बड़े पैमाने पर बुवाई करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि आगे पर्याप्त वर्षा न होने की स्थिति में फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
    user_PRAKASH SOLANKI CHITTOR
    PRAKASH SOLANKI CHITTOR
    पत्रकार भादेसर, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। इस नई जानकारी पर पाठकों से उनकी राय और प्रतिक्रिया पूछी जा रही है। मंच लोगों से आग्रह कर रहा है कि वे ऐसी ही रोज़ाना स्पोर्ट्स न्यूज़ जानने के लिए तुरंत सब्सक्राइब करें और उनके साथ जुड़ जाएं।
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    इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। इस नई जानकारी पर पाठकों से उनकी राय और प्रतिक्रिया पूछी जा रही है। मंच लोगों से आग्रह कर रहा है कि वे ऐसी ही रोज़ाना स्पोर्ट्स न्यूज़ जानने के लिए तुरंत सब्सक्राइब करें और उनके साथ जुड़ जाएं।
    user_Neeraj Sharma
    Neeraj Sharma
    Content Creator (YouTuber) चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड स्थित मूंगा खेड़ा गांव में खेत पर काम करते समय किसान कालू कीर एक कुएं में गिर गए। इस घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस, पुलिस और हिन्दुस्तान जिंक की बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य के दौरान कुएं में सांपों की मौजूदगी सामने आई, जिससे अभियान प्रभावित हुआ और उसमें बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद, वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने कुएं से तीन जहरीले सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें जंगल में छोड़ा। सांपों का खतरा टलने के बाद, बचाव दल ने किसान कालू कीर के शव को कुएं से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए गंगरार चिकित्सालय पहुंचाया।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड स्थित मूंगा खेड़ा गांव में खेत पर काम करते समय किसान कालू कीर एक कुएं में गिर गए। इस घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस, पुलिस और हिन्दुस्तान जिंक की बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।

बचाव कार्य के दौरान कुएं में सांपों की मौजूदगी सामने आई, जिससे अभियान प्रभावित हुआ और उसमें बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद, वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने कुएं से तीन जहरीले सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें जंगल में छोड़ा। सांपों का खतरा टलने के बाद, बचाव दल ने किसान कालू कीर के शव को कुएं से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए गंगरार चिकित्सालय पहुंचाया।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    11 hrs ago
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