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राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस के अवसर पर गुमला के चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पल्स पोलियो अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह विशेष अभियान रविवार सुबह दस बजे शुरू हुआ और 28 जून से 30 जून तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शून्य से पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें पोलियो की खुराक पिलाना है। अभियान की शुरुआत जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, चैनपुर मुखिया शोभा देवी, चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा किंडो और डॉ. प्रभात कुमार ने संयुक्त रूप से बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर की। चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा किंडो ने बताया कि 'बूथ डे' के तहत चैनपुर प्रखंड में कुल उनचास बूथ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी बूथ पर लाकर पोलियो की दवा अवश्य पिलाएँ। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जो बच्चे किसी कारणवश आज बूथ तक नहीं पहुँच पाए हैं, उन्हें 29 और 30 जून को सहिया दीदी और एएनएम की टीमें घर-घर जाकर पोलियो की खुराक पिलाएँगी, ताकि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण अभियान से वंचित न रह जाए। जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने भी क्षेत्रवासियों से अनुरोध करते हुए कहा कि सभी अभिभावक अपने शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से पल्स पोलियो की दवा पिलाएँ, क्योंकि बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर स्वास्थ्य केंद्र के अन्य स्वास्थ्यकर्मी, सहिया दीदी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ अपने बच्चों के साथ उपस्थित रहीं।

19 hrs ago
user_चैनपुर अपडेट
चैनपुर अपडेट
Classified ads newspaper publisher चैनपुर, गुमला, झारखंड•
19 hrs ago

राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस के अवसर पर गुमला के चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पल्स पोलियो अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह विशेष अभियान रविवार सुबह दस बजे शुरू हुआ और 28 जून से 30 जून तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शून्य से पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें पोलियो की खुराक पिलाना है। अभियान की शुरुआत जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, चैनपुर मुखिया शोभा देवी, चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा किंडो और डॉ. प्रभात कुमार ने संयुक्त रूप से बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर की। चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा किंडो ने बताया कि 'बूथ डे' के तहत चैनपुर प्रखंड में कुल उनचास बूथ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी बूथ पर लाकर पोलियो की दवा अवश्य पिलाएँ। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जो बच्चे किसी कारणवश आज बूथ तक नहीं पहुँच पाए हैं, उन्हें 29 और 30 जून को सहिया दीदी और एएनएम की टीमें घर-घर जाकर पोलियो की खुराक पिलाएँगी, ताकि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण अभियान से वंचित न रह जाए। जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने भी क्षेत्रवासियों से अनुरोध करते हुए कहा कि सभी अभिभावक अपने शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से पल्स पोलियो की दवा पिलाएँ, क्योंकि बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर स्वास्थ्य केंद्र के अन्य स्वास्थ्यकर्मी, सहिया दीदी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ अपने बच्चों के साथ उपस्थित रहीं।

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  • गोबिंद ग्वाला पशु आहार पशुपालकों के बीच अपनी एक खास जगह बना चुका है, जिसके चलते यह अब उनकी पहली पसंद बन गया है।
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    गोबिंद ग्वाला पशु आहार पशुपालकों के बीच अपनी एक खास जगह बना चुका है, जिसके चलते यह अब उनकी पहली पसंद बन गया है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • गुमला जिले के सिसई प्रखंड में शनिवार शाम केंद्रीय मुहर्रम कमेटी सिसई के तत्वावधान में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम का पर्व अकीदत, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर सिसई कंस नदी तट पर एक भव्य मुहर्रम मेले का आयोजन किया गया, जिसमें मुस्लिम धर्मावलंबियों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रखंड के विभिन्न गांवों से अखाड़ा दल पारंपरिक बाजा-गाजा, ताजिया और विभिन्न हथियारों के साथ जुलूस के रूप में कंस नदी तट पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र संचालन और करतबों का शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद, सभी अखाड़ा दल सिसई बाजार टांड में एकत्रित हुए, जहाँ से एक भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस गाजे-बाजे के साथ झूमते हुए और अपने अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए थाना परिसर पहुँचा। यहाँ हिन्दू समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुटता और भाईचारे का परिचय देते हुए केंद्रीय मुहर्रम कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भगवा अंगवस्त्र देकर स्वागत किया, जिसे पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल और गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बताया गया। मुहर्रम का पर्व पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की कर्बला में दी गई महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। जुलूस थाना परिसर से निकलकर थाना रोड, बसिया रोड मुख्य मार्ग होते हुए मेन रोड बस स्टैंड तक गया, जहाँ देर रात शांतिपूर्ण तरीके से इसका समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। थाना प्रभारी नीरज कुमार पुलिस बल के साथ मेले और जुलूस मार्गों पर लगातार मुस्तैद रहे, वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी रमेश कुमार यादव भी विधि व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। इस पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें केंद्रीय मुहर्रम कमेटी सिसई के अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारियों, सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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    गुमला जिले के सिसई प्रखंड में शनिवार शाम केंद्रीय मुहर्रम कमेटी सिसई के तत्वावधान में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम का पर्व अकीदत, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर सिसई कंस नदी तट पर एक भव्य मुहर्रम मेले का आयोजन किया गया, जिसमें मुस्लिम धर्मावलंबियों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रखंड के विभिन्न गांवों से अखाड़ा दल पारंपरिक बाजा-गाजा, ताजिया और विभिन्न हथियारों के साथ जुलूस के रूप में कंस नदी तट पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र संचालन और करतबों का शानदार प्रदर्शन किया।

इसके बाद, सभी अखाड़ा दल सिसई बाजार टांड में एकत्रित हुए, जहाँ से एक भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस गाजे-बाजे के साथ झूमते हुए और अपने अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए थाना परिसर पहुँचा। यहाँ हिन्दू समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुटता और भाईचारे का परिचय देते हुए केंद्रीय मुहर्रम कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भगवा अंगवस्त्र देकर स्वागत किया, जिसे पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल और गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बताया गया। मुहर्रम का पर्व पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की कर्बला में दी गई महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है।

जुलूस थाना परिसर से निकलकर थाना रोड, बसिया रोड मुख्य मार्ग होते हुए मेन रोड बस स्टैंड तक गया, जहाँ देर रात शांतिपूर्ण तरीके से इसका समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। थाना प्रभारी नीरज कुमार पुलिस बल के साथ मेले और जुलूस मार्गों पर लगातार मुस्तैद रहे, वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी रमेश कुमार यादव भी विधि व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। इस पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें केंद्रीय मुहर्रम कमेटी सिसई के अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारियों, सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
    user_SHAMBHU. S. CHAUHAN
    SHAMBHU. S. CHAUHAN
    Business Networking Company सिसई, गुमला, झारखंड•
    23 hrs ago
  • झारखंड के लोहरदगा जिले के हिरही नावाटोली में एक पीसीसी सड़क के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह आरोप तब लगे हैं जब सड़क का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले को जांच का विषय बताया है, जिससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसमें हो रही अनियमितताओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
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    झारखंड के लोहरदगा जिले के हिरही नावाटोली में एक पीसीसी सड़क के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह आरोप तब लगे हैं जब सड़क का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले को जांच का विषय बताया है, जिससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसमें हो रही अनियमितताओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • सिमडेगा नगर परिषद अध्यक्ष ओलिभर लकड़ा के नेतृत्व में शीतल छाया ग्रुप के सदस्यों ने देर शाम मुहर्रम जुलूस में शामिल अक़ीदतमंदों का स्वागत किया। नीचे बाजार स्थित खादी भंडार के समीप अक़ीदतमंदों को माला पहनाकर उनका सत्कार किया गया। शीतल छाया ग्रुप के सदस्यों ने भी जुलूस में शामिल लोगों को गर्मजोशी के साथ ठंडा पानी, शरबत, बिस्किट और आइस्क्रीम वितरित किए। इस सहयोग के लिए नगर परिषद अध्यक्ष ओलिभर लकड़ा ने शीतल छाया ग्रुप के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।
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    सिमडेगा नगर परिषद अध्यक्ष ओलिभर लकड़ा के नेतृत्व में शीतल छाया ग्रुप के सदस्यों ने देर शाम मुहर्रम जुलूस में शामिल अक़ीदतमंदों का स्वागत किया। नीचे बाजार स्थित खादी भंडार के समीप अक़ीदतमंदों को माला पहनाकर उनका सत्कार किया गया। शीतल छाया ग्रुप के सदस्यों ने भी जुलूस में शामिल लोगों को गर्मजोशी के साथ ठंडा पानी, शरबत, बिस्किट और आइस्क्रीम वितरित किए। इस सहयोग के लिए नगर परिषद अध्यक्ष ओलिभर लकड़ा ने शीतल छाया ग्रुप के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।
    user_VIKASH KU SAHU
    VIKASH KU SAHU
    सिमडेगा, सिमडेगा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • बसिया (गुमला) के केमताटोली में 'छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा' की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में गुमला, खूंटी, सिमडेगा सहित कई अन्य जिलों से आए समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहाँ समाज के भविष्य व अधिकारों को लेकर गंभीर चर्चा की गई। केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग ने झारखंड में परिसीमन (Delimitation) लागू करने की पुरजोर वकालत की, यह कहते हुए कि समस्त तेली समाज और ओबीसी वर्ग इसका पूरी तरह समर्थन करता है। उदाशन नाग ने बताया कि झारखंड में ओबीसी वर्ग जनसंख्या के अनुपात में सबसे बड़ा है, जिसकी आबादी लगभग 60% है। इसके बावजूद, यह वर्ग राजनीतिक, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में अपने अनुपात के अनुसार उचित अधिकारों से वंचित है। उन्होंने परिसीमन को झारखंड के विकास और सामाजिक न्याय के लिए बेहद जरूरी बताया। इसके अतिरिक्त, नाग ने पेसा (पंचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून पर भी गंभीर सवाल खड़े किए, उनका कहना था कि वर्तमान पेसा कानून में ओबीसी और तेली समाज को उनके समुचित अधिकारों से वंचित रखा गया है, और समाज के हितों की रक्षा के लिए इस कानून में तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए। बैठक में उपस्थित सभी जिलों के प्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने एक सुर में हुंकार भरते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि झारखंड में जल्द से जल्द परिसीमन लागू नहीं किया गया, तो तेली समाज और संपूर्ण ओबीसी वर्ग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि परिसीमन के बिना ओबीसी वर्ग को उसका वास्तविक अधिकार मिलना असंभव है। अधिकारों की इस लड़ाई के साथ-साथ, बैठक में सामाजिक समरसता और एकजुटता की भी मिसाल देखने को मिली, जहाँ समाज से जुड़े कुछ आपसी और पारिवारिक विवादों के मामले भी सामने आए। बैठक में मौजूद समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सूझबूझ से काम लेते हुए इन मामलों को आपसी सहमति से सुलझा दिया, जिससे कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया। इस बैठक ने न केवल समाज को अपने राजनैतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए जागरूक किया, बल्कि आपसी एकता को भी और मजबूत करने का संदेश दिया। बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष अरुण साहू, केंद्रीय सचिव दिलीप साहू, सिमडेगा जिला अध्यक्ष जगदीश साहू, खूंटी जिला अध्यक्ष शिवनारायण गंझू, गुमला जिला महासचिव रामेश्वर साहू, भूपेन साहू, बसिया प्रखंड अध्यक्ष भोला साहू और राजू साहू आदि उपस्थित थे।
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    बसिया (गुमला) के केमताटोली में 'छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा' की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में गुमला, खूंटी, सिमडेगा सहित कई अन्य जिलों से आए समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहाँ समाज के भविष्य व अधिकारों को लेकर गंभीर चर्चा की गई। केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग ने झारखंड में परिसीमन (Delimitation) लागू करने की पुरजोर वकालत की, यह कहते हुए कि समस्त तेली समाज और ओबीसी वर्ग इसका पूरी तरह समर्थन करता है।

उदाशन नाग ने बताया कि झारखंड में ओबीसी वर्ग जनसंख्या के अनुपात में सबसे बड़ा है, जिसकी आबादी लगभग 60% है। इसके बावजूद, यह वर्ग राजनीतिक, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में अपने अनुपात के अनुसार उचित अधिकारों से वंचित है। उन्होंने परिसीमन को झारखंड के विकास और सामाजिक न्याय के लिए बेहद जरूरी बताया। इसके अतिरिक्त, नाग ने पेसा (पंचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून पर भी गंभीर सवाल खड़े किए, उनका कहना था कि वर्तमान पेसा कानून में ओबीसी और तेली समाज को उनके समुचित अधिकारों से वंचित रखा गया है, और समाज के हितों की रक्षा के लिए इस कानून में तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए।

बैठक में उपस्थित सभी जिलों के प्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने एक सुर में हुंकार भरते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि झारखंड में जल्द से जल्द परिसीमन लागू नहीं किया गया, तो तेली समाज और संपूर्ण ओबीसी वर्ग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि परिसीमन के बिना ओबीसी वर्ग को उसका वास्तविक अधिकार मिलना असंभव है।

अधिकारों की इस लड़ाई के साथ-साथ, बैठक में सामाजिक समरसता और एकजुटता की भी मिसाल देखने को मिली, जहाँ समाज से जुड़े कुछ आपसी और पारिवारिक विवादों के मामले भी सामने आए। बैठक में मौजूद समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सूझबूझ से काम लेते हुए इन मामलों को आपसी सहमति से सुलझा दिया, जिससे कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया। इस बैठक ने न केवल समाज को अपने राजनैतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए जागरूक किया, बल्कि आपसी एकता को भी और मजबूत करने का संदेश दिया।

बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष अरुण साहू, केंद्रीय सचिव दिलीप साहू, सिमडेगा जिला अध्यक्ष जगदीश साहू, खूंटी जिला अध्यक्ष शिवनारायण गंझू, गुमला जिला महासचिव रामेश्वर साहू, भूपेन साहू, बसिया प्रखंड अध्यक्ष भोला साहू और राजू साहू आदि उपस्थित थे।
    user_Niraj kumar Sahu
    Niraj kumar Sahu
    पत्रकार बसिया, गुमला, झारखंड•
    20 hrs ago
  • सिमडेगा जिले के तामड़ा, बीरूगढ़ सहित विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ का पारंपरिक विधि-विधान के साथ शाही स्नान कराया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के गजवेश स्वरूप के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। बीरूगढ़ स्थित जगन्नाथ मंदिर में पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ का देवस्नान कराया। वहीं तामड़ा के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद पवित्र कलशों के जल से अभिषेक किया गया। स्नान के उपरांत महाप्रभु ने गजवेश यानी हाथी स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्ष में केवल देव स्नान पूर्णिमा के दिन ही भगवान जगन्नाथ गजवेश धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को भगवान का स्पर्श करने की अनुमति नहीं होती, लेकिन भक्त स्नान के पवित्र जल को अपने सिर पर लगाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आरती के बाद भगवान को पुनः मंदिर में विराजमान कराया गया तथा श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवस्नान के अगले दिन से भगवान जगन्नाथ 'अनवसर' (अस्वस्थ होने की लीला) में चले जाते हैं। इस दौरान लगभग 15 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। इसके बाद भगवान स्वस्थ होकर भव्य रथयात्रा के दौरान रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस यात्रा को गुंडिचा रथयात्रा के नाम से जाना जाता है।
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    सिमडेगा जिले के तामड़ा, बीरूगढ़ सहित विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ का पारंपरिक विधि-विधान के साथ शाही स्नान कराया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के गजवेश स्वरूप के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।

बीरूगढ़ स्थित जगन्नाथ मंदिर में पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ का देवस्नान कराया। वहीं तामड़ा के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद पवित्र कलशों के जल से अभिषेक किया गया। स्नान के उपरांत महाप्रभु ने गजवेश यानी हाथी स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्ष में केवल देव स्नान पूर्णिमा के दिन ही भगवान जगन्नाथ गजवेश धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को भगवान का स्पर्श करने की अनुमति नहीं होती, लेकिन भक्त स्नान के पवित्र जल को अपने सिर पर लगाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आरती के बाद भगवान को पुनः मंदिर में विराजमान कराया गया तथा श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवस्नान के अगले दिन से भगवान जगन्नाथ 'अनवसर' (अस्वस्थ होने की लीला) में चले जाते हैं। इस दौरान लगभग 15 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। इसके बाद भगवान स्वस्थ होकर भव्य रथयात्रा के दौरान रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस यात्रा को गुंडिचा रथयात्रा के नाम से जाना जाता है।
    user_VIKASH KU SAHU
    VIKASH KU SAHU
    सिमडेगा, सिमडेगा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • एक 50 साल पुरानी कंपनी अपना प्राकृतिक उत्पाद, गोविंद ग्वाला पशु आहार, प्रस्तुत करती है। कंपनी के अनुसार, यह पशु आहार 100% ऑर्गेनिक है और इसमें 0% यूरिया है, जो इसकी प्राकृतिक गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
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    एक 50 साल पुरानी कंपनी अपना प्राकृतिक उत्पाद, गोविंद ग्वाला पशु आहार, प्रस्तुत करती है। कंपनी के अनुसार, यह पशु आहार 100% ऑर्गेनिक है और इसमें 0% यूरिया है, जो इसकी प्राकृतिक गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • जशपुर जिले के ग्राम गोढ़ी (बागबहार) में एक आदिवासी परिवार अपनी भूमि को लेकर गंभीर विवादों में उलझा हुआ है। परिवार का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनकी लगभग 1.15 एकड़ जमीन को कम कर दिया गया है। पीड़ित परिवार का दावा है कि इस मामले में हुई राजस्व जांच में त्रुटि स्वीकार की गई थी और उनकी जमीन वापस करने के लिए एक प्रतिवेदन भी तैयार किया गया था। इसके बावजूद, उन्हें बेदखली का नोटिस जारी कर दिया गया है, जिससे परिवार मानसिक तनाव में है। बताया गया है कि यह पूरा मामला वर्तमान में जिला न्यायालय में विचाराधीन है। आदिवासी परिवार ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है; संबंधित अधिकारियों और दूसरे पक्ष का मत प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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    जशपुर जिले के ग्राम गोढ़ी (बागबहार) में एक आदिवासी परिवार अपनी भूमि को लेकर गंभीर विवादों में उलझा हुआ है। परिवार का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनकी लगभग 1.15 एकड़ जमीन को कम कर दिया गया है।

पीड़ित परिवार का दावा है कि इस मामले में हुई राजस्व जांच में त्रुटि स्वीकार की गई थी और उनकी जमीन वापस करने के लिए एक प्रतिवेदन भी तैयार किया गया था। इसके बावजूद, उन्हें बेदखली का नोटिस जारी कर दिया गया है, जिससे परिवार मानसिक तनाव में है। बताया गया है कि यह पूरा मामला वर्तमान में जिला न्यायालय में विचाराधीन है।

आदिवासी परिवार ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है; संबंधित अधिकारियों और दूसरे पक्ष का मत प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house Kansabel, Jashpur•
    1 hr ago
  • जशपुर जिले के पत्थलगांव स्थित बालाझार गाँव में एक सनसनीखेज ज़मीन विवाद सामने आया है। पीड़ित ग्रामीण उग्रेसन यादव ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी केवल 1 एकड़ ज़मीन बेची थी, लेकिन उसकी अशिक्षित स्थिति का फायदा उठाते हुए, उसकी पूरी 0.717 हेक्टेयर (लगभग 1.77 एकड़) ज़मीन की रजिस्ट्री धोखे से करवा ली गई। यादव के मुताबिक, इस विवाद के दौरान उनका मकान भी जेसीबी से ढहा दिया गया और उनके परिवार को धमकियाँ दी गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें डायल 112 की सहायता लेनी पड़ी। फ़िलहाल, परिवार किसी और के घर में शरण लेने पर मजबूर है। मामले की जाँच के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है।
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    जशपुर जिले के पत्थलगांव स्थित बालाझार गाँव में एक सनसनीखेज ज़मीन विवाद सामने आया है। पीड़ित ग्रामीण उग्रेसन यादव ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी केवल 1 एकड़ ज़मीन बेची थी, लेकिन उसकी अशिक्षित स्थिति का फायदा उठाते हुए, उसकी पूरी 0.717 हेक्टेयर (लगभग 1.77 एकड़) ज़मीन की रजिस्ट्री धोखे से करवा ली गई।

यादव के मुताबिक, इस विवाद के दौरान उनका मकान भी जेसीबी से ढहा दिया गया और उनके परिवार को धमकियाँ दी गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें डायल 112 की सहायता लेनी पड़ी। फ़िलहाल, परिवार किसी और के घर में शरण लेने पर मजबूर है।

मामले की जाँच के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है।
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house Kansabel, Jashpur•
    1 hr ago
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