आनंदपुरी क्षेत्र में एक अनूठी और रोमांचक बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मालीपाड़ा गांव से दूल्हा अपने परिजनों और 50 से अधिक बारातियों के साथ नाव में सवार होकर नदी पार पाड़ोला गांव में दुल्हन से शादी करने पहुंचा। करीब एक किलोमीटर तक पानी पर चली इस बारात को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नदी के बीच पारंपरिक वेशभूषा में सजे बारातियों के लोकगीतों की गूंज ने पूरे माहौल को मंगलमय बना दिया। ग्रामीणों ने इस अनोखी बारात का बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया। बताया गया है कि बैकवॉटर क्षेत्र में बसे कई परिवार आज भी अपने दैनिक जीवन के लिए नाव पर ही निर्भर हैं। स्कूल जाने, राशन लाने या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने, हर काम के लिए उन्हें नदी पार करनी पड़ती है। ऐसे में नाव से निकली यह बारात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
आनंदपुरी क्षेत्र में एक अनूठी और रोमांचक बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मालीपाड़ा गांव से दूल्हा अपने परिजनों और 50 से अधिक बारातियों के साथ नाव में सवार होकर नदी पार पाड़ोला गांव में दुल्हन से शादी करने पहुंचा। करीब एक किलोमीटर तक पानी पर चली इस बारात को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नदी के बीच पारंपरिक वेशभूषा में सजे बारातियों के लोकगीतों की गूंज ने पूरे माहौल को मंगलमय बना दिया। ग्रामीणों ने इस अनोखी बारात का बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया। बताया गया है कि बैकवॉटर क्षेत्र में बसे कई परिवार आज भी अपने दैनिक जीवन के लिए नाव पर ही निर्भर हैं। स्कूल जाने, राशन लाने या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने, हर काम के लिए उन्हें नदी पार करनी पड़ती है। ऐसे में नाव से निकली यह बारात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
- आनंदपुरी क्षेत्र में एक अनूठी और रोमांचक बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मालीपाड़ा गांव से दूल्हा अपने परिजनों और 50 से अधिक बारातियों के साथ नाव में सवार होकर नदी पार पाड़ोला गांव में दुल्हन से शादी करने पहुंचा। करीब एक किलोमीटर तक पानी पर चली इस बारात को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नदी के बीच पारंपरिक वेशभूषा में सजे बारातियों के लोकगीतों की गूंज ने पूरे माहौल को मंगलमय बना दिया। ग्रामीणों ने इस अनोखी बारात का बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया। बताया गया है कि बैकवॉटर क्षेत्र में बसे कई परिवार आज भी अपने दैनिक जीवन के लिए नाव पर ही निर्भर हैं। स्कूल जाने, राशन लाने या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने, हर काम के लिए उन्हें नदी पार करनी पड़ती है। ऐसे में नाव से निकली यह बारात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।2
- Post by Bapulal Ahari1
- मानसून के संबंध में एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसके मद्देनजर यह सवाल उठाया जा रहा है कि लोगों को भीषण गर्मी से आखिर कब राहत मिल पाएगी। इस जानकारी के साथ, पाठकों को अपने क्षेत्र की सभी खबरें देखने और खबरें शेयर करके कमाई करने के लिए शुरू ऐप डाउनलोड करने का सुझाव भी दिया गया है।1
- देश की राजधानी दिल्ली में जनजाति सुरक्षा मंच ने एक विराट गर्जना रैली का आयोजन किया, जिसमें पूरे भारत देश के सभी प्रांतों की कुल 550 जनजातियों से जुड़े दो लाख से अधिक लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। यह रैली रामलीला मैदान से शुरू होकर लाल किले पर पहुंची, जहाँ एक विशाल आमसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान, लाखों की संख्या में पहुंचे जनजाति वर्ग के लोगों ने देश के गृह मंत्री अमित शाह को अपने अधिकारों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तहत देश में हो रहे अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाने, पूरे भारतवर्ष सहित बांसवाड़ा जिले के गाँवों, ढाणियों और मजरों में अवैध रूप से बने चर्चों का सर्वेक्षण कर उन पर रोक लगाने, और अवैध धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गई है। जनजाति वर्ग ने अपने ज्ञापन में 'धर्म संस्कृति सोडेगा, हमारा हक हमारा अधिकार' का संदेश दिया और देश में ईसाई बन चुके लोगों का आरक्षण खत्म करने की भी मांग उठाई। संत नरसिंह गिरी ने बताया कि दिल्ली की इस रैली में जनजाति वर्ग के जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा भी शामिल हुए और दो लाख से अधिक जनजाति के लोग बसों से दिल्ली पहुंचे थे, जिन्होंने दो किलोमीटर तक लंबी कतार बनाई। इस विशाल आयोजन में राजस्थान के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से अनेक लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे।4
- जैन समाज ने रीवा में जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष जांच और विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समाज ने इस मामले में गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि जैन संत की मौत एक दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर SIT या न्यायिक जांच की बात कही गई है। इसके साथ ही, जैन समाज ने संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने, विहार मार्गों पर पुलिस और ट्रैफिक सहयोग प्रदान करने तथा एक “Sant Security Coordination Cell” के गठन की मांग भी रखी है। इस दौरान समाज ने यह स्पष्ट किया कि साधु-संत अहिंसा और संयम का संदेश देते हैं और ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ज्ञापन सौंपते समय नरेंद्र गलालिया, राजेंद्र जैन, राजेंद्र वेड़ा, चंद्रकुमार जैन, संतोष गलालिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।1
- Post by Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा22
- चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक दुर्ग स्थित मल्लिनाथ जैन मंदिर समेत कुल तीन मंदिरों में हुई सनसनीखेज चोरी का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले को सुलझाने में सफलता हासिल की है।1
- कुशलगढ़ में सोमवार, 25 मई 2026 को एक दो दिवसीय निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के पहले दिन कुल 123 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाएँ वितरित की गईं। शिविर प्रभारी डॉक्टर सिद्धार्थ पंचाल ने बताया कि होम्योपैथिक विभाग टीएसपी क्षेत्र में होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम कर रहा है। इस शिविर में राजकीय होम्योपैथिक औषधालय सज्जनगढ़ के चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मुकेश जाटव और राजकीय होम्योपैथिक औषधालय आनंदपुरी के कंपाउंडर श्री रमेश चंद्र जी ने अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। चिकित्सकों ने इस बात पर जोर दिया कि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों, खासकर होम्योपैथी के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा, आयुष्मान भारत मिशन के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इस चिकित्सा पद्धति को सर्वसुलभ, सस्ती और दुष्प्रभाव रहित माना जाता है।2