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दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में एक भीषण आग लगने से करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ है। इस भयावह घटना के कारण हर तरफ हड़कंप मच गया है, और लोग इस बड़ी क्षति को लेकर स्तब्ध हैं।
Faizan khan
दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में एक भीषण आग लगने से करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ है। इस भयावह घटना के कारण हर तरफ हड़कंप मच गया है, और लोग इस बड़ी क्षति को लेकर स्तब्ध हैं।
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- उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री कार्यालयों के निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं का धरना लगातार जारी है। अधिवक्ता इस निजीकरण के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।1
- दिल्ली के सेंट्रल जिले के राजेंद्र नगर थाने की टीम ने ऑनलाइन ठगी के एक मामले में कार्रवाई करते हुए दो अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ एक शिकायत मिली थी, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। इसी जांच के परिणामस्वरूप, दोनों अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली।1
- कतर के रास लफ्फान एलएनजी कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण धमाके में भारतीयों सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 66 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना पर भारतीय दूतावास ने गहरी चिंता व्यक्त की है। कतर के अधिकारियों ने इस हादसे को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक 'टेक्निकल एक्सीडेंट' करार दिया है। यह सुविधा देश के सबसे बड़े एलएनजी उत्पादन और निर्यात हब, रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था। दरअसल, ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना उत्पादन रोक दिया था, जिसका वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा था और कतर अपने ग्राहकों को एलएनजी शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था। युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद, निर्यात टर्मिनल को फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा था। सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के अनुसार, रविवार रात को बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान यह धमाका हुआ और उसके बाद आग लग गई। दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने घायलों की संख्या और कुछ लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आने पर चिंता जताई है। कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इसे एक औद्योगिक हादसा बताया। कतर दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस उत्पादक देशों में से एक है, और रास लफ्फान जैसे बड़े एलएनजी हब में हुई इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।2
- भारतीय किसान यूनियन चदूनी ने केंद्र सरकार को एक बड़ी और स्पष्ट चेतावनी जारी की है। यूनियन ने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई ट्रेड डील आता है, तो उसके विरोध में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।1
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- महाराष्ट्र में जारी सियासी खींचतान के बीच उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है, जहां शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसद अब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे खेमे में शामिल होने वाले इन सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, पाटिल-अष्टिकर और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर प्रमुख हैं। इन सांसदों ने बीते 17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (UBT) पार्लियामेंट्री पार्टी की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, जिसके बाद से ही उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। इस दल-बदल को लेकर, बागी शिवसेना (UBT) सांसद ओमप्रकाश राजेनिंबालकर ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यदि लोग पावर की तरफ खिंच रहे हैं, तो वह सिर्फ ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों को डेवलपमेंट फंड न मिलने की बात भी कही। वहीं, विधायक मुरजी पटेल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शिवसेना UBT अपने MPs को संभाल नहीं पाई। इन सांसदों के अपनी पार्टी में शामिल होने का ऐलान खुद एकनाथ शिंदे ने किया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि "अब मेरे पास तीन संजय हैं" और इसे "बगावत का दूसरा चरण" बताया। शिंदे ने 2022 के विद्रोह को याद करते हुए कहा कि तब 40 विधायकों ने उनका साथ दिया था, जबकि इस बार उन्होंने "सिक्सर मारा है" क्योंकि उनके साथ "असली शिवसेना" में 6 टाइगर मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी बालासाहेब ठाकरे की आइडियोलॉजी को बचाने के लिए हमेशा संघर्ष करती रही है और हिंदुत्व उनकी प्राथमिकता है। शिंदे ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने विचारधारा छोड़ दी और वोटरों को धोखा दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि शामिल हुए सभी सांसदों की मांगों और उनके चुनाव क्षेत्रों में विकास कार्यों को पूरा करने की पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि उनकी पार्टी में कोई मास्टर नहीं है, बल्कि सभी मातहत हैं।1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी संदर्भ में, अभिजीत दीपके के साथ एक खास बातचीत की गई।1
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