मुंबई, झालावाड़, बूंदी और टोंक की संयुक्त पुलिस कार्रवाई में देह व्यापार में फंसी तीन बालिकाओं को मुक्त कराया गया है। इस अभियान के तहत झालावाड़ से अलीगढ़ क्षेत्र की दो बालिकाओं को दस्तयाब किया गया, जबकि अलीगढ़ क्षेत्र से एक अन्य बालिका को दस्तयाब कर झालावाड़ पुलिस को सौंपा गया। पुलिस उपाधीक्षक आकांक्षा चौधरी ने बताया कि इस मामले में डबलाना थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी बीमा उर्फ बीमा शंकर कंजर (उम्र 28 वर्ष) और डबलाना निवासी राम कन्या (पत्नी रमेश कंजर, उम्र 53 वर्ष) को गिरफ्तार कर झालावाड़ पुलिस के सुपुर्द किया गया है। झालावाड़ से दस्तयाब की गई बालिकाओं में से एक नाबालिग थी, जिसे नारी निकेतन भेज दिया गया है, वहीं दूसरी बालिग बालिका को न्यायालय के आदेश पर उसके परिवारजनों को सौंप दिया गया। पुलिस उपाधीक्षक का कहना है कि टोंक के जिला पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा के निर्देश पर पूरे जिले में देह व्यापार के ऐसे ठिकानों की पहचान कर गुमशुदगी दर्ज बालिकाओं की खोज की जाएगी और उन्हें सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उनियारा में देह व्यापार में लिप्त कुल 10 बालिकाओं को दस्तयाब किया गया है।
मुंबई, झालावाड़, बूंदी और टोंक की संयुक्त पुलिस कार्रवाई में देह व्यापार में फंसी तीन बालिकाओं को मुक्त कराया गया है। इस अभियान के तहत झालावाड़ से अलीगढ़ क्षेत्र की दो बालिकाओं को दस्तयाब किया गया, जबकि अलीगढ़ क्षेत्र से एक अन्य बालिका को दस्तयाब कर झालावाड़
पुलिस को सौंपा गया। पुलिस उपाधीक्षक आकांक्षा चौधरी ने बताया कि इस मामले में डबलाना थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी बीमा उर्फ बीमा शंकर कंजर (उम्र 28 वर्ष) और डबलाना निवासी राम कन्या (पत्नी रमेश कंजर, उम्र 53 वर्ष) को गिरफ्तार कर झालावाड़ पुलिस के सुपुर्द किया गया
है। झालावाड़ से दस्तयाब की गई बालिकाओं में से एक नाबालिग थी, जिसे नारी निकेतन भेज दिया गया है, वहीं दूसरी बालिग बालिका को न्यायालय के आदेश पर उसके परिवारजनों को सौंप दिया गया। पुलिस उपाधीक्षक का कहना है कि टोंक के जिला पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा के
निर्देश पर पूरे जिले में देह व्यापार के ऐसे ठिकानों की पहचान कर गुमशुदगी दर्ज बालिकाओं की खोज की जाएगी और उन्हें सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उनियारा में देह व्यापार में लिप्त कुल 10 बालिकाओं को दस्तयाब किया गया है।
- शुक्रवार सुबह सारसोप गांव में 5 बजे से 7 बजे तक एक प्रभात फेरी निकाली गई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस धार्मिक शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने भगवान के भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ गांव के विभिन्न मोहल्लों और प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया। प्रभात फेरी के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर इसका भव्य स्वागत किया, जिससे पूरे गांव में श्रद्धा और भक्ति का माहौल छा गया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रभात फेरी का मुख्य उद्देश्य धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और समाज में भाईचारे, सद्भाव व सकारात्मक ऊर्जा का संदेश प्रसारित करना है। यह कार्यक्रम सामूहिक प्रार्थना के साथ संपन्न हुआ।1
- आज कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित राज्य स्तरीय विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि प्रकृति संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को एक जनआंदोलन बनाने का प्रबल आह्वान किया गया।1
- गंगापुर सिटी का सरकारी अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि 'यमराज का वेटिंग रूम' बन गया है, जहाँ डॉक्टरों के लिए इंसान की जिंदगी की कोई कीमत नहीं बची है। आरोप है कि बीती रात कॉलेज रोड, सपेरा बस्ती की रहने वाली महिला गफूरी की जान अस्पताल के 'सफेदपोश कसाइयों' और लापरवाह नर्सिंग स्टाफ की मिलीभगत से चली गई। कहा जा रहा है कि महिला को गलत और जानलेवा इंजेक्शन का ऐसा डोज दिया गया, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी सांसें टूट गईं। यह दिल दहला देने वाली घटना तब शुरू हुई जब सुबह करीब 4 बजे तबीयत बिगड़ने पर गफूरी को सरकारी अस्पताल लाया गया और सुबह 6 बजे उसे भर्ती किया गया। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर जितेंद्र मीणा अपनी वातानुकूलित कुर्सी पर गहरी नींद में सो रहे थे, जिससे अस्पताल की कमान 'नौसिखिये और गैर-जिम्मेदार' कंपाउंडरों व नर्सिंग स्टाफ के हाथों में थी। परिजनों ने दावा किया है कि बिना किसी जांच या सीनियर डॉक्टर की देखरेख के, कर्मचारियों ने गफूरी के शरीर में गलत दवाइयों और इंजेक्शन का 'जहर' उतार दिया, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। गैंग्रीन और गलत दवा के रिएक्शन से गफूरी दर्द से कराहती रही और अंततः बाथरूम में बेहोश होकर गिर पड़ी, जहाँ उसके शरीर ने दम तोड़ दिया। बदहवास परिजनों की मिन्नतों के बावजूद स्टाफ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालता रहा, और जब डॉक्टर मीणा को जगाया गया तो उन्होंने मानवता को शर्मसार करते हुए कहा कि वे अस्पताल में बात नहीं करेंगे, फीस लेकर उनके घर आने पर ही इलाज बताएँगे। यह अस्पताल में लापरवाही का पहला मामला नहीं है; हाल ही में एक कंपाउंडर का नशे में मरीजों से बदतमीजी करने का वीडियो वायरल हुआ था। गंगापुर सिटी की जनता में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और वे पूछ रहे हैं कि इन 'काले कोट और सफेद एप्रन' वाले 'हत्यारों' को प्रशासन कब तक बचाएगा। लोगों का यह भी सवाल है कि क्या सरकार की मुफ्त दवा और इलाज योजना सिर्फ कागजों पर लोगों को मारने के लिए चल रही है। जब खोजी पत्रकारों ने डॉक्टर जितेंद्र मीणा से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने अपने फोन बंद कर लिए और अस्पताल प्रशासन के पास भी इस 'मर्डर' का कोई जवाब नहीं था। जनता अब मांग कर रही है कि दोषियों को सिर्फ निलंबित नहीं, बल्कि सीधे जेल भेजा जाए।1
- लालसोट उपखंड के शाहजहांनपुरा में मनरेगा कार्यों को लेकर मिली शिकायतों के बाद एक टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान विकास अधिकारी योगेश कुमार मीणा के निर्देश पर एक जांच कमेटी का गठन किया गया, जिसने स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण करने वाली इस कमेटी में सहायक विकास अधिकारी (प्रशासन) शंभू दयाल मीणा, कनिष्ठ अभियंता रेशु गुर्जर, कनिष्ठ तकनीकी सहायक विनोद कुमार मीणा और ग्राम विकास अधिकारी विशाल शर्मा शामिल रहे। ग्रामीणों ने इस निरीक्षण के दौरान अपना विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद मौके पर ही मेट को बदलने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने फर्जी जॉब कार्डों की जांच की भी मांग उठाई। अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।4
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र में आदिवासी परिवार एक अधूरी सड़क के कारण प्रतिदिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इस अधूरे निर्माण से इन परिवारों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।1
- सोमनाथ मंदिर को हमारी आस्था, सनातन चेतना और सांस्कृतिक गौरव का एक शाश्वत प्रतीक बताया गया है। इस बात पर जोर दिया गया है कि सदियों के आक्रमण भी इस आस्था को डिगा नहीं सके, जो इसकी अटूट प्रकृति को दर्शाता है। सोमनाथ मंदिर हमें यह प्रेरणा देता है कि भारत हर चुनौती का सामना करते हुए और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़ता है।1
- सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के पुराने शहर स्थित रैगर मोहल्ले में देर रात आकाशीय बिजली गिरने से दो मकानों की छतें भरभराकर ढह गईं। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। सौभाग्य से, हादसे के समय परिवार के सभी सदस्य घर के पिछले कमरों में सो रहे थे, जिसके कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, देर रात मौसम में अचानक बदलाव आया, जिसके बाद तेज गर्जना और बिजली की चमक के बीच आकाशीय बिजली रैगर मोहल्ला निवासी रमेश चंद रैगर और कल्याणमल रैगर के मकानों पर आ गिरी। बिजली गिरने के साथ ही जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते दोनों मकानों के आगे के हिस्से की छतें गिर गईं। पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे सभी घर के पिछले कमरों में सो रहे थे, जब अचानक तेज गड़गड़ाहट और मलबा गिरने की आवाज सुनकर उनकी नींद खुली। परिवार के सदस्य घबराकर बाहर की ओर दौड़े तो देखा कि मकान का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। जिस हिस्से की छत गिरी, वहां उस समय कोई मौजूद नहीं था, जिससे सभी लोग मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। इस घटना के बाद परिवारों में पूरी रात दहशत का माहौल रहा और भय के कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी। आकाशीय बिजली गिरने से दोनों मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है, छतों के ढहने से घरों में रखा घरेलू सामान भी मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। सुबह होते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाया। पीड़ित परिवारों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षति का आकलन कर उन्हें शीघ्र उचित मुआवजा एवं राहत उपलब्ध कराई जाए।1