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शमीम उर्फ सामो ने दिया समर्थन,Ward No-22 आशीर्वाद जन सेवा मंच के सदर शमीम उर्फ सामो का वार्ड-22 से पार्षद पद के प्रत्याशी अनवर हुसैन को समर्थन, चुनाव चिन्ह अलमारी छाप, क्रम संख्या-1
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शमीम उर्फ सामो ने दिया समर्थन,Ward No-22 आशीर्वाद जन सेवा मंच के सदर शमीम उर्फ सामो का वार्ड-22 से पार्षद पद के प्रत्याशी अनवर हुसैन को समर्थन, चुनाव चिन्ह अलमारी छाप, क्रम संख्या-1
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- बिरसा मुंडा park इस अँधेरी भारी शाम में एक चमकता हुआ सितारा झारखण्ड में कलाकारों की कमी ही #राँची1
- प्रखंड के बंसिया गांव में शहीदों के सम्मान में कारगिल मेला का आयोजन किया गया। मेला में शहीद सैनिकों के सम्मान में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई, साथ ही पूरे प्रखंड क्षेत्र के शहीद परिवार और भूतपूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया ।मेला में नागपुरी के प्रसिद्ध कलाकार नितेश कश्यप,सुनैना आदि की टीम ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम कर लोगों को नाचने पर विवश कर दिया। विधायक अमित महतो भी मेला में उपस्थित रहे।1
- सोनाहातू। 1 फरवरी से लगातार हो रहे 9 दिवसीय अखंड हरिनाम संकीर्तन का आज आखिरी दिन है। बहुत दूर-दूर से भजन कीर्तन सुनने श्रद्धालु आ रहे हैं। पूरा क्षेत्र भक्ति में हो गया है। सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में आकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। बता दें कि आज 9 दिवसीय अखंड हरिनाम संकीर्तन का आज 9 फरवरी को आखिरी दिन है।1
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- रामगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष पद के प्रत्याशी कुसुमलता मुंडा के नामांकन कार्यक्रम में सामिल हुए रामगढ़ विधायक1
- सिसई (गुमला)। पुराना ब्लॉक परिसर में स्थित तेलंगा खड़िया पुस्तकालय भवन में बड़े ही धूमधाम से वीर शहीद तेलंगा खड़िया जी की 220 वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर समाजसेवी रोहित शर्मा, प्रीतम कुमार तथा पुस्तकालय कर्मी सहित विद्यार्थियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर वीर शहीद तेलंगा खड़िया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रीतम कुमार ने वीर तेलंगा खड़िया के जीवन संघर्ष एवं उनके बलिदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि वीर तेलंगा खड़िया का जन्म 09 फरवरी 1806 ई को सिसई क्षेत्र के मुर्गू गांव में एक साधारण गरीब किसान परिवार में हुआ था। वे एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे उन्होंने सन् 1850 से 1860 के दौरान छोटानागपुर क्षेत्र में ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह् का नेतृत्व किया था। यह विद्रोह् मुख्य रूप से आदिवासी लोगों के साथ अन्याय, अत्याचार और भूमि हस्तांतरण के खिलाफ था जो ब्रिटिश शासन का परिणाम था। उन्होंने गोलियों का मुकाबला तीर धनुष से किया उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जूझते हुए जूरी पंचायत का गठन किया। उनकी हत्या सन् 1880 में सरना पूजा स्थल पर ही कर दी गयी थी। देश व समाज के प्रति उनके इसी समर्पण भाव को अपनाते हुए उनके बताये मार्ग पर चलना है यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर समाजसेवी रोहित शर्मा, सचिव विराज उरांव, लाईब्रेनियन सलोनी कुमारी, शिखा कुमारी, राहुल कुमार, कार्तिक उरांव, प्रीतम कुमार सहित पुस्तकालय के सभी विद्यार्थ मौजूद रहे।4
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