सभी मासों में वैशाख मास श्रेष्ठ है,इस संक्रांति पर संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य दस गुणा फल देने वाला होता है: संत सुभाष शास्त्री - वैशाख संक्रांति पर नौनाथ आश्रम में आयोजित सत्संग में उमड़ी संगत - कठुआ के शिवानगर में हर साल की तरह संत सुभाष शास्त्री महाराज ने बाबा बड़भाग सिंह के स्थान पर चढ़ाया निशान साहब कठुआ/नौनाथ,14 अप्रैल 2026 *जम्मू संभाग के प्रसिद्ध कथा वाचक संत सुभाष शास्त्री ने बैसाखी के पावन पर्व पर प्रत्येक भारतीय को शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई दी है। बैशाख संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित एक दिवसीय सत्संग में उपस्थित संगत को संत ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा है कि यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं है बल्कि इस पर्व से इतिहास के पल भी जुड़े हुए हैं, इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, जो त्याग और समर्पण का गौरवशाली प्रतीक है। संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि बैसाखी का यह पावन पर्व हमें महान गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने और दीन दुखियों की सहायता करने हेतु प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि खालसा पंथ की स्थापना का यह इतिहास हमें स्वाभिमान और वीरता से जीने का संदेश प्रदान करता है। शास्त्री ने सभी देशवासियों को आपसी भेदभाव मिटाकर इंसानियत को अपना धर्म मानते हुए अपना जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इसी में प्रभु भक्ति और देशभक्ति भी अपने आप ही सम्मिलित हो जाती है। उन्होंने वैशाख मास के महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि प्रत्येक मास के महत्व को भगवान विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा कि इनमें कार्तिक, माघ व वैशाख मास प्रिये है लेकिन वैशाख का महीना मुझे अति प्रिय है। जैसे विद्याओं में वेद श्रेष्ठ, है, मन्त्रों में ॐ (प्रणव)श्रेष्ठ है, वृक्षों में कल्पवृक्ष, गो में कामधेनु,नागों में शेषनाग पक्षियों में गरुड़, देव्ताओं में विष्णों,वर्णों में ब्राह्मण,नदियों में गंगा। तेज धारियों में सूर्य, धातुओं में स्वर्ण, मणियों में कौस्तुभमणी... इसी प्रकार मासों में -वैशाख मास श्रेष्ठ है। प्राणियों की अभिलाषाएं पूरी करने वाला है। स्नान-दान स्नान--आदि का महत्व है। बन्धुओ। इस समय आप सत्संगरूपी त्रिवेणी का स्नान कर रहे हो, अपने पापों को और मन की मैल को भी धो रहे हो। सौभाग्यशाली हैं जिन्हें सत्संग का अवसर मिलता है। संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य दस गुणा फल देने वाला होता है। आगे गर्मी के दिन आ रहे हैं। किसी जरूरतमंद को जल, छाता, जूता, पंखा, वस्त्र व अन्न आदि का दान करना चाहिये। कहीं अपदा हो तो उसे अवसर में बदलना चाहिये। आज से गेहूँ (गन्दम्-कनक) फसल की कटाई शुरू हो रही है। जो बीज 6 मास पूर्व बोय थे, उनका फल हमारे सामने है। अच्छी फसल किसान की मेहनत और कुदरत की कृपा से ही होती है। वैशाखी खुशियों का पर्व है और मनुष्य को परिश्रम करने की प्रेरणा भी देता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। कारण कि पूर्व जन्म में अच्छे-बुरे कर्म किये हैं,उसका फल सुख-- दुःख मनुष्य बन कर भोग रहे हैं। - पूर्व जन्म में यदि हमने पुण्य (अच्छे कर्म) ही किये होते तो देवता बन कर सुख भोगते और यदि हमने पाप किये होते तो राक्षस, पशु-पक्षी अथवा कीटें आदि बन कर दुःख भोगते। गत वर्ष हमने जो गेहूं बीजे थे,उसकी रोटियां आज खा रहे हैं। अब जो बीज (फसल) बोये हैं, उसके फल (रोटियां) आगे खाएँगे। अब हमें जीवन रूपी खेत में धर्म-कर्मरूपी बीज बीजने चाहिये। परमात्मा का स्मरण और ज्ञानी संतों का सत्संग करना चाहिये ताकि हमारा कल्याण हो सके। हमारे देश में प्रेम, प्रगति, सुख-शांति व समृद्धि हो। ऐसी ही शुभ कामनाओं के साथ हमारा संदेश है। हम पापों-अपराधों, नशों और बुराई से बचें। मन, वाणी व शरीर से किसी को (अपने स्वार्थ हेतु) दुःख न दें। इससे पहले सुबह कठुआ के शिवानगर में बाबा बडभाग सिंह जी के स्थान पर हर साल की तरह निशान साहब चढ़ाया।
सभी मासों में वैशाख मास श्रेष्ठ है,इस संक्रांति पर संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य दस गुणा फल देने वाला होता है: संत सुभाष शास्त्री - वैशाख संक्रांति पर नौनाथ आश्रम में आयोजित सत्संग में उमड़ी संगत - कठुआ के शिवानगर में हर साल की तरह संत सुभाष शास्त्री महाराज ने बाबा बड़भाग सिंह के स्थान पर चढ़ाया निशान साहब कठुआ/नौनाथ,14 अप्रैल 2026 *जम्मू संभाग के प्रसिद्ध कथा वाचक संत सुभाष शास्त्री ने बैसाखी के पावन पर्व पर प्रत्येक भारतीय को शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई दी है। बैशाख संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित एक दिवसीय सत्संग में उपस्थित संगत को संत ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा है कि यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं है बल्कि इस पर्व से इतिहास के पल भी जुड़े हुए हैं, इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, जो त्याग और समर्पण का गौरवशाली प्रतीक है। संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि बैसाखी का यह पावन पर्व हमें महान गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने और दीन दुखियों की सहायता करने हेतु प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि खालसा पंथ की स्थापना का यह इतिहास हमें स्वाभिमान और वीरता से जीने का संदेश प्रदान करता है। शास्त्री ने सभी देशवासियों को आपसी भेदभाव मिटाकर
इंसानियत को अपना धर्म मानते हुए अपना जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इसी में प्रभु भक्ति और देशभक्ति भी अपने आप ही सम्मिलित हो जाती है। उन्होंने वैशाख मास के महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि प्रत्येक मास के महत्व को भगवान विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा कि इनमें कार्तिक, माघ व वैशाख मास प्रिये है लेकिन वैशाख का महीना मुझे अति प्रिय है। जैसे विद्याओं में वेद श्रेष्ठ, है, मन्त्रों में ॐ (प्रणव)श्रेष्ठ है, वृक्षों में कल्पवृक्ष, गो में कामधेनु,नागों में शेषनाग पक्षियों में गरुड़, देव्ताओं में विष्णों,वर्णों में ब्राह्मण,नदियों में गंगा। तेज धारियों में सूर्य, धातुओं में स्वर्ण, मणियों में कौस्तुभमणी... इसी प्रकार मासों में -वैशाख मास श्रेष्ठ है। प्राणियों की अभिलाषाएं पूरी करने वाला है। स्नान-दान स्नान--आदि का महत्व है। बन्धुओ। इस समय आप सत्संगरूपी त्रिवेणी का स्नान कर रहे हो, अपने पापों को और मन की मैल को भी धो रहे हो। सौभाग्यशाली हैं जिन्हें सत्संग का अवसर मिलता है। संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य दस गुणा फल देने वाला होता है। आगे गर्मी के दिन आ रहे हैं। किसी जरूरतमंद को जल, छाता, जूता, पंखा, वस्त्र व अन्न आदि का दान करना चाहिये। कहीं अपदा हो तो उसे अवसर में बदलना चाहिये। आज से गेहूँ (गन्दम्-कनक) फसल की कटाई
शुरू हो रही है। जो बीज 6 मास पूर्व बोय थे, उनका फल हमारे सामने है। अच्छी फसल किसान की मेहनत और कुदरत की कृपा से ही होती है। वैशाखी खुशियों का पर्व है और मनुष्य को परिश्रम करने की प्रेरणा भी देता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। कारण कि पूर्व जन्म में अच्छे-बुरे कर्म किये हैं,उसका फल सुख-- दुःख मनुष्य बन कर भोग रहे हैं। - पूर्व जन्म में यदि हमने पुण्य (अच्छे कर्म) ही किये होते तो देवता बन कर सुख भोगते और यदि हमने पाप किये होते तो राक्षस, पशु-पक्षी अथवा कीटें आदि बन कर दुःख भोगते। गत वर्ष हमने जो गेहूं बीजे थे,उसकी रोटियां आज खा रहे हैं। अब जो बीज (फसल) बोये हैं, उसके फल (रोटियां) आगे खाएँगे। अब हमें जीवन रूपी खेत में धर्म-कर्मरूपी बीज बीजने चाहिये। परमात्मा का स्मरण और ज्ञानी संतों का सत्संग करना चाहिये ताकि हमारा कल्याण हो सके। हमारे देश में प्रेम, प्रगति, सुख-शांति व समृद्धि हो। ऐसी ही शुभ कामनाओं के साथ हमारा संदेश है। हम पापों-अपराधों, नशों और बुराई से बचें। मन, वाणी व शरीर से किसी को (अपने स्वार्थ हेतु) दुःख न दें। इससे पहले सुबह कठुआ के शिवानगर में बाबा बडभाग सिंह जी के स्थान पर हर साल की तरह निशान साहब चढ़ाया।
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- जम्मू बस सटेनड मे पकडा गया एक चोर और लोगो ने ज़म कर की पीटाई1
- सुजानपुर जिला हमीरपुर के सुजानपुर क्षेत्र के कक्कड़ गांव में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां साउथ अफ्रीका से आया दूल्हा हिमाचल की बेटी रुक्मिणी देवी संग पारंपरिक हिमाचली रीति-रिवाजों में सात फेरों के साथ विवाह बंधन में बंधा। हजारों किलोमीटर दूर से पहुंचे दूल्हे ने स्थानीय संस्कृति को अपनाते हुए पूरे विधि-विधान से शादी कर एक खास मिसाल पेश की।जानकारी के अनुसार दोनों की मुलाकात चंडीगढ़ के एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। पढ़ाई के दौरान शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे गहरे प्रेम में बदल गई और अंततः दोनों ने इस रिश्ते को शादी के पवित्र बंधन में बांधने का निर्णय लिया। दोनों परिवारों की सहमति के बाद यह विवाह संपन्न हुआ। रुक्मिणी देवी कक्कड़ गांव, तहसील बमसन की निवासी हैं। उनके पिता सूबेदार प्रीथी सिंह और माता सविता देवी ने इस रिश्ते को खुले दिल से स्वीकार किया। शादी समारोह पूरी तरह पारंपरिक हिमाचली रीति-रिवाजों के अनुसार धूमधाम से आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों की भी अच्छी भागीदारी रही।विशेष बात यह रही कि साउथ अफ्रीका से आए दूल्हे ने हिमाचली वेशभूषा धारण कर सभी रस्मों को पूरे सम्मान के साथ निभाया। नाटी नृत्य में भाग लेते हुए वह पूरी तरह हिमाचली रंग में रंगा नजर आया। सात फेरों के साथ दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का वचन लिया।यह विवाह न केवल दो दिलों का मिलन है, बल्कि दो देशों और संस्कृतियों का सुंदर संगम भी है। इसने यह साबित कर दिया कि सच्चा प्यार सरहदों का मोहताज नहीं होता और दूरियां भी रिश्तों को मजबूत बनने से नहीं रोक पाती !2
- कुटलैहड़ के जोगी पंगा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बाबा साहेब की जीवनी और योगदान को किया याद बंगाणा, भारत के संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के अवसर पर कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के जोगी पंगा स्थित कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विधायक विवेक शर्मा ने विशेष रूप से शिरकत करते हुए बाबा साहेब को श्रद्धांजलि सुमन अर्पित किए और उनके जीवन एवं योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान विधायक विवेक शर्मा ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया भारतीय संविधान आज पूरे देश में जनसेवा का सबसे मजबूत आधार बनकर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान ने देश के हर नागरिक को समान अधिकार प्रदान किए हैं, लोकतंत्र को मजबूत बनाने में इसकी अहम भूमिका रही है। विवेक शर्मा ने अपने संबोधन में बाबा साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के मऊ में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही अनेक कठिनाइयों और सामाजिक भेदभाव का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया। उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया विश्व विद्यालय और इंग्लैंड के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की,इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल कीं, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि बाबा साहेब ने समाज में समानता स्थापित करने और दलित एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की ओर बढ़ रहा था, उस समय बाबा साहेब को भारतीय संविधान निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने अथक परिश्रम और गहन अध्ययन के बाद ऐसा संविधान तैयार किया, जिसमें सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार सुनिश्चित किया गया। यही कारण है कि उन्हें भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार कहा जाता है। विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि बाबा साहेब का मानना था कि किसी भी समाज की उन्नति का आधार शिक्षा होती है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया और कहा कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने अधिकारों को पहचान सकता है और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब केवल एक महान विधिवेत्ता और संविधान निर्माता ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता भी थे। उन्होंने देश के विकास के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां तैयार कीं, जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है।विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन हमें शिक्षा, संगठन और संघर्ष का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि हम उनके बताए मार्ग पर चलें, तो समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता को समाप्त किया जा सकता है और एक सशक्त एवं समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।उन्होंने कहा कि आज देश में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत दिखाई दे रही है, उसका श्रेय बाबा साहेब को ही जाता है। उनके द्वारा बनाए गए संविधान ने देश को एक मजबूत आधार प्रदान किया है, जिसके कारण भारत विश्व में एक सशक्त लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ है। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी बाबा साहेब के जीवन और उनके संघर्षों को याद किया तथा उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी कांग्रेस वक्ताओं ने बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने और समाज में समानता, भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय गणमान्य व्यक्ति तथा क्षेत्र के लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी जयंती को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया,कार्यक्रम का वातावरण पूरे समय श्रद्धा और सम्मान से भरा रहा तथा बाबा साहेब के आदर्शों को समाज में अपनाने का संदेश दिया गया। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष राम आसरा शर्मा विवेक मिंका, केवल कृष्ण शर्मा,राम किशन शर्मा जगदीश शर्मा के सी शर्मा सहित अन्य सेकंडों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।1
- जिला ऊना में लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़े रामपुर पुल के निर्माण को लेकर अब प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा पुल निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा के बाद लोक निर्माण विभाग ने कार्य को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को ऊना सदर के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ रामपुर पुल स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल मौजूदा स्थिति का जायजा लिया, बल्कि निर्माण से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि पुल का डिजाइन आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी पुल सुरक्षित रह सके। रायजादा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया ऊना दौरे के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। मुख्यमंत्री ने जनहित को देखते हुए तुरंत संज्ञान लेते हुए रामपुर पुल के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की, जिसके बाद अब विभागीय स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया, सर्वेक्षण और डिजाइनिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पूर्व विधायक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कागजी औपचारिकताओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि आगामी बरसात से पहले निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।2
- रिवालसर बैसाखी मेला 2026 | बाबा भूतनाथ मठ का 2 दिवसीय लंगर शुरू | Free Langar Rivalsar Mandi1
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