बिहार के कैमूर जिला परिषद में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिला परिषद के कुल 19 निर्वाचित सदस्यों में से 7 जिला पार्षदों ने जिला पदाधिकारी नितिन कुमार सिंह को आवेदन देकर अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए तुरंत विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। पार्षदों ने अपने आवेदन में बताया है कि 30 जून 2026 को अध्यक्ष के खिलाफ विभिन्न आरोपों के साथ विधिवत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसकी सूचना जिला पदाधिकारी को भी दी गई थी। हालांकि, 4 जुलाई 2026 को जारी आदेश में इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया कि 16 जनवरी 2024 को बुलाई गई विशेष बैठक में कोई सदस्य उपस्थित नहीं हुआ था, जिसके कारण प्रस्ताव पर मतदान नहीं हो सका। साथ ही, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि जिला परिषद के कार्यकाल में केवल एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। पार्षदों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 10 फरवरी 2026 को पारित अंतरिम आदेश (डायरी संख्या 2168/2025) का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं हुआ हो, तो दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिससे 4 जुलाई का आदेश न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। पार्षदों ने जिला पदाधिकारी से बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 70(4)(1) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शीघ्र विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायालय के निर्देशों का सम्मान सुनिश्चित हो सके। जिला पदाधिकारी को सौंपे गए आवेदन पर जिला पार्षद विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, राजकुमार सिंह, गीता देवी और अखिलेश कुमार सहित कुल सात पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। जिला प्रशासन द्वारा आवेदन की आधिकारिक प्राप्ति 7 जुलाई 2026 को दर्ज की गई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आलोक में विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया जाएगा।
बिहार के कैमूर जिला परिषद में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिला परिषद के कुल 19 निर्वाचित सदस्यों में से 7 जिला पार्षदों ने जिला पदाधिकारी नितिन कुमार सिंह को आवेदन देकर अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए तुरंत विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। पार्षदों ने अपने आवेदन में बताया है कि 30 जून 2026 को अध्यक्ष के खिलाफ विभिन्न आरोपों के साथ विधिवत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसकी सूचना जिला पदाधिकारी
को भी दी गई थी। हालांकि, 4 जुलाई 2026 को जारी आदेश में इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया कि 16 जनवरी 2024 को बुलाई गई विशेष बैठक में कोई सदस्य उपस्थित नहीं हुआ था, जिसके कारण प्रस्ताव पर मतदान नहीं हो सका। साथ ही, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि जिला परिषद के कार्यकाल में केवल एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। पार्षदों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 10 फरवरी 2026 को पारित
अंतरिम आदेश (डायरी संख्या 2168/2025) का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं हुआ हो, तो दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिससे 4 जुलाई का आदेश न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। पार्षदों ने जिला पदाधिकारी से बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 70(4)(1) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शीघ्र विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि
लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायालय के निर्देशों का सम्मान सुनिश्चित हो सके। जिला पदाधिकारी को सौंपे गए आवेदन पर जिला पार्षद विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, राजकुमार सिंह, गीता देवी और अखिलेश कुमार सहित कुल सात पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। जिला प्रशासन द्वारा आवेदन की आधिकारिक प्राप्ति 7 जुलाई 2026 को दर्ज की गई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आलोक में विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया जाएगा।
- बिहार के कैमूर जिला परिषद में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिला परिषद के कुल 19 निर्वाचित सदस्यों में से 7 जिला पार्षदों ने जिला पदाधिकारी नितिन कुमार सिंह को आवेदन देकर अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए तुरंत विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। पार्षदों ने अपने आवेदन में बताया है कि 30 जून 2026 को अध्यक्ष के खिलाफ विभिन्न आरोपों के साथ विधिवत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसकी सूचना जिला पदाधिकारी को भी दी गई थी। हालांकि, 4 जुलाई 2026 को जारी आदेश में इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया कि 16 जनवरी 2024 को बुलाई गई विशेष बैठक में कोई सदस्य उपस्थित नहीं हुआ था, जिसके कारण प्रस्ताव पर मतदान नहीं हो सका। साथ ही, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि जिला परिषद के कार्यकाल में केवल एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। पार्षदों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 10 फरवरी 2026 को पारित अंतरिम आदेश (डायरी संख्या 2168/2025) का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं हुआ हो, तो दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिससे 4 जुलाई का आदेश न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। पार्षदों ने जिला पदाधिकारी से बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 70(4)(1) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अध्यक्ष के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शीघ्र विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायालय के निर्देशों का सम्मान सुनिश्चित हो सके। जिला पदाधिकारी को सौंपे गए आवेदन पर जिला पार्षद विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, राजकुमार सिंह, गीता देवी और अखिलेश कुमार सहित कुल सात पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। जिला प्रशासन द्वारा आवेदन की आधिकारिक प्राप्ति 7 जुलाई 2026 को दर्ज की गई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आलोक में विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया जाएगा।4
- चैनपुर प्रखंड के बियूर में एक शिविर सहयोग का आयोजन किया गया। इस शिविर में बीडीओ, अंचलाधिकारी और मुखिया प्रतिनिधि सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।2
- लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक रोड शो के दौरान हनुमान जी के वेश में एक कलाकार को नचाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके बाद इसे लेकर काफी बवाल और हंगामा मच गया है।1
- एक शिकायतकर्ता ने जिले के सभी अधिकारियों को उनके व्हाट्सएप नंबरों और ईमेल पर वीडियो भेजे थे, लेकिन उनका आरोप है कि अधिकारी इस पर मौन हैं। उसने यह भी बताया कि 11 जून, 2026 को उसने जनसुनवाई पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि अधिकारी पैसा लेकर अपनी जेब भर रहे हैं।3
- वाराणसी (लखनऊ) के पंचायती राज उप निदेशक ने सिकंदरपुर ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न 'ऐतिहासिक कार्यों' का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पंचायत भवन, मुर्दा स्थल, कंपोजिट विद्यालय, अन्नपूर्णा भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक शौचालय सहित अन्य कई विकास कार्यों का जायजा लिया। इस निरीक्षण के समय ग्रामीणों के साथ ग्राम प्रधान सिकंदरपुर की सीमा गुप्ता, जो सत्य प्रकाश गुप्ता की पत्नी हैं, भी उपस्थित रहीं।1
- चंदौली मुख्यालय स्थित आलोक विद्यालय की गली में संचालित यादव डेयरी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डेयरी से फैल रही गंदगी और प्रदूषण के कारण गली की स्थिति बेहद खराब हो गई है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि इससे पहले भी इस डेयरी पर मिलावटी खोया और पनीर के मामले में एसडीएम द्वारा छापेमारी की गई थी। उस कार्रवाई के बाद डेयरी कुछ दिनों तक बंद रही थी, लेकिन बाद में इसका संचालन फिर से शुरू हो गया। इस मामले की जानकारी मिलने पर India Live News के संवाददाता पंकज तिवारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी धीरेन्द्र सिंह ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या फिर पहले की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? India Live News की इस जनहित से जुड़े मुद्दे पर पड़ताल जारी है और हमारी नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।1
- थाना अलीनगर क्षेत्र के तहत गोधना नहर में एक युवती का शव बरामद किया गया है। इस घटना के संबंध में पीडीडीयू नगर के क्षेत्राधिकारी श्री अरुण कुमार सिंह ने एक आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है।1
- भारतीय सेना की ट्रेनिंग को देश की सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक बताया गया है, जहाँ कठोरता और दर्द के माध्यम से भारत माँ के सच्चे और साहसी वीर तैयार होते हैं। यह अथक प्रशिक्षण ही हमारे वीर सैनिकों को राष्ट्र के रक्षक के रूप में हर चुनौती का सामना करने के लिए सशक्त बनाता है।1