*मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें क्या हैं? मानदेय से लेकर सेवाभूमि तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे देखिए पूरी खबर पोलखोल पर !* नरसिंहपुर / भोपाल/ 28 अक्टूबर 2026 मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें: मानदेय वृद्धि से सेवाभूमि के अधिकार तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे भोपाल/नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने प्रदेश के कोटवारों की लंबित मांगों के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मानदेय वृद्धि, सेवाभूमि का अधिकार, पदोन्नति, वर्दी की राशि, अनुकंपा सहायता और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक लाभ सहित कई मांगें उठाई गई हैं। संगठन ने प्रदेश के लगभग 38 हजार कोटवारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है। संघ का कहना है कि कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व संबंधी कार्यों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। संगठन ने मांगों का निराकरण नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी है। कोटवार संघ की प्रमुख मांगें 1. योग्यतानुसार पदोन्नति और भर्ती में आरक्षण संघ ने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र कोटवारों को शैक्षणिक योग्यता और कार्यानुभव के आधार पर सहायक पटवारी, भृत्य, वाहन चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक ग्रेड-3, चेनमैन और पटवारी जैसे पदों पर अवसर देने की मांग की है। साथ ही भविष्य की भर्तियों में योग्य कोटवारों के लिए आरक्षण की मांग भी रखी गई है। 2. सेवाभूमि का अधिकार बहाल करने की मांग ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि कई कोटवारों की परंपरागत सेवाभूमि से उनके नाम हटाकर जमीन को शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया है। संघ ने संबंधित पूर्व आदेशों के अनुरूप पात्र कोटवारों के नाम दोबारा भूमि रिकॉर्ड में दर्ज करने और सेवाभूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की है। 3. मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये की वृद्धि संघ के अनुसार, कोटवार पंचायत वर्ष 2023 में प्रतिवर्ष 500 रुपये मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन इसका लाभ केवल भूमिहीन कोटवारों तक सीमित रखने संबंधी आदेश जारी हुआ। संगठन ने भूमिधारी कोटवारों को भी इसका लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा बैलेंस सहित सीयूजी सिम उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। 4. वर्दी की राशि सीधे बैंक खाते में देने की मांग संघ ने कोटवारों को उपलब्ध कराई जा रही वर्दी की गुणवत्ता और माप पर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में मिलने वाली वर्दी कई बार अनुपयोगी साबित होती है। संघ ने वर्दी की राशि सीधे बैंक खातों में जमा कराने, खरीद प्रक्रिया की जांच करने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया गया है। 5. नगरीय क्षेत्रों में पद समाप्त करने के आदेश निरस्त हों संघ ने नगरीय क्षेत्रों में कोटवारों के पद समाप्त करने और एक गांव में एक ही कोटवार रखने संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बढ़ती आबादी और विस्तृत होते कार्यक्षेत्र को देखते हुए कोटवारों की आवश्यकता बनी हुई है। 6. कोटवार के परिवार के पात्र सदस्य को नियुक्ति में प्राथमिकता संगठन ने मांग की है कि पूर्व कोटवार के स्थान पर उसके परिवार के पात्र सदस्य को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग भी की गई है। 7. मृत्यु पर 10 लाख और सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की सहायता ज्ञापन में सेवाकाल के दौरान कोटवार की मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की मांग की गई है। इसके साथ ही सेवामुक्ति पर मिलने वाली राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग भी रखी गई है। चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन के अनुसार, संगठन ने 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक काली पट्टी बांधकर काम करने और तहसील स्तर पर ज्ञापन देने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया था। इसके बाद 22 अक्टूबर से जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। आंदोलन के लिए निर्धारित तिथियां बीत चुकी हैं। ऐसे में संगठन की वर्तमान गतिविधियों, मांगों पर हुई प्रगति और आगे की रणनीति की जानकारी लेना जरूरी है। शासन के रुख पर नजर कोटवार संघ की मांगों पर राज्य शासन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, यह महत्वपूर्ण है। मानदेय, सेवाभूमि, वर्दी और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर संगठन की मांगों के साथ शासन का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना चाहिए। पोलखोल न्यूज़ की खास रिपोर्ट। नोट: यह समाचार संगठन की ओर से उपलब्ध कराए गए ज्ञापन पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोप और मांगें संगठन के पक्ष के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी शामिल किया जाएगा।
*मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें क्या हैं? मानदेय से लेकर सेवाभूमि तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे देखिए पूरी खबर पोलखोल पर !* नरसिंहपुर / भोपाल/ 28 अक्टूबर 2026 मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें: मानदेय वृद्धि से सेवाभूमि के अधिकार तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे भोपाल/नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने प्रदेश के कोटवारों की लंबित मांगों के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मानदेय वृद्धि, सेवाभूमि का अधिकार, पदोन्नति, वर्दी की राशि, अनुकंपा सहायता और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक लाभ सहित कई मांगें उठाई गई हैं। संगठन ने प्रदेश के लगभग 38 हजार कोटवारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है। संघ का कहना है कि कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व संबंधी कार्यों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। संगठन ने मांगों का निराकरण नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी है। कोटवार संघ की प्रमुख मांगें 1. योग्यतानुसार पदोन्नति और भर्ती में आरक्षण संघ ने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र कोटवारों को शैक्षणिक योग्यता और कार्यानुभव के आधार पर सहायक पटवारी, भृत्य, वाहन चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक ग्रेड-3, चेनमैन और पटवारी जैसे पदों पर अवसर देने की मांग की है। साथ ही भविष्य की भर्तियों में योग्य कोटवारों के लिए आरक्षण की मांग भी रखी गई है। 2. सेवाभूमि का अधिकार बहाल करने की मांग ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि कई कोटवारों की परंपरागत सेवाभूमि से उनके नाम हटाकर जमीन को शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया है। संघ ने संबंधित पूर्व आदेशों के अनुरूप पात्र कोटवारों के नाम दोबारा भूमि रिकॉर्ड में दर्ज करने और सेवाभूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की है। 3. मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये की वृद्धि संघ के अनुसार, कोटवार पंचायत वर्ष 2023 में प्रतिवर्ष 500 रुपये मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन इसका लाभ केवल भूमिहीन कोटवारों तक सीमित रखने संबंधी आदेश जारी हुआ। संगठन ने भूमिधारी कोटवारों को भी इसका लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा बैलेंस सहित सीयूजी सिम उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। 4. वर्दी की राशि सीधे बैंक खाते में देने की मांग संघ ने कोटवारों को उपलब्ध कराई जा रही वर्दी की गुणवत्ता और माप पर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में मिलने वाली वर्दी कई बार अनुपयोगी साबित होती है। संघ ने वर्दी की राशि सीधे बैंक खातों में जमा कराने, खरीद प्रक्रिया की जांच करने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया गया है। 5. नगरीय क्षेत्रों में पद समाप्त करने के आदेश निरस्त हों संघ ने नगरीय क्षेत्रों में कोटवारों के पद समाप्त करने और एक गांव में एक ही कोटवार रखने संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बढ़ती आबादी और विस्तृत होते कार्यक्षेत्र को देखते हुए कोटवारों की आवश्यकता बनी हुई है। 6. कोटवार के परिवार के पात्र सदस्य को नियुक्ति में प्राथमिकता संगठन ने मांग की है कि पूर्व कोटवार के स्थान पर उसके परिवार के पात्र सदस्य को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग भी की गई है। 7. मृत्यु पर 10 लाख और सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की सहायता ज्ञापन में सेवाकाल के दौरान कोटवार की मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की मांग की गई है। इसके साथ ही सेवामुक्ति पर मिलने वाली राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग भी रखी गई है। चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन के अनुसार, संगठन ने 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक काली पट्टी बांधकर काम करने और तहसील स्तर पर ज्ञापन देने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया था। इसके बाद 22 अक्टूबर से जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। आंदोलन के लिए निर्धारित तिथियां बीत चुकी हैं। ऐसे में संगठन की वर्तमान गतिविधियों, मांगों पर हुई प्रगति और आगे की रणनीति की जानकारी लेना जरूरी है। शासन के रुख पर नजर कोटवार संघ की मांगों पर राज्य शासन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, यह महत्वपूर्ण है। मानदेय, सेवाभूमि, वर्दी और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर संगठन की मांगों के साथ शासन का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना चाहिए। पोलखोल न्यूज़ की खास रिपोर्ट। नोट: यह समाचार संगठन की ओर से उपलब्ध कराए गए ज्ञापन पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोप और मांगें संगठन के पक्ष के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी शामिल किया जाएगा।
- *मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें क्या हैं? मानदेय से लेकर सेवाभूमि तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे देखिए पूरी खबर पोलखोल पर !* नरसिंहपुर / भोपाल/ 28 अक्टूबर 2026 मध्यप्रदेश के 38 हजार कोटवारों की मांगें: मानदेय वृद्धि से सेवाभूमि के अधिकार तक, आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने उठाए मुद्दे भोपाल/नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने प्रदेश के कोटवारों की लंबित मांगों के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मानदेय वृद्धि, सेवाभूमि का अधिकार, पदोन्नति, वर्दी की राशि, अनुकंपा सहायता और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक लाभ सहित कई मांगें उठाई गई हैं। संगठन ने प्रदेश के लगभग 38 हजार कोटवारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है। संघ का कहना है कि कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व संबंधी कार्यों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। संगठन ने मांगों का निराकरण नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी है। कोटवार संघ की प्रमुख मांगें 1. योग्यतानुसार पदोन्नति और भर्ती में आरक्षण संघ ने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र कोटवारों को शैक्षणिक योग्यता और कार्यानुभव के आधार पर सहायक पटवारी, भृत्य, वाहन चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक ग्रेड-3, चेनमैन और पटवारी जैसे पदों पर अवसर देने की मांग की है। साथ ही भविष्य की भर्तियों में योग्य कोटवारों के लिए आरक्षण की मांग भी रखी गई है। 2. सेवाभूमि का अधिकार बहाल करने की मांग ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि कई कोटवारों की परंपरागत सेवाभूमि से उनके नाम हटाकर जमीन को शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया है। संघ ने संबंधित पूर्व आदेशों के अनुरूप पात्र कोटवारों के नाम दोबारा भूमि रिकॉर्ड में दर्ज करने और सेवाभूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की है। 3. मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये की वृद्धि संघ के अनुसार, कोटवार पंचायत वर्ष 2023 में प्रतिवर्ष 500 रुपये मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन इसका लाभ केवल भूमिहीन कोटवारों तक सीमित रखने संबंधी आदेश जारी हुआ। संगठन ने भूमिधारी कोटवारों को भी इसका लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा बैलेंस सहित सीयूजी सिम उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। 4. वर्दी की राशि सीधे बैंक खाते में देने की मांग संघ ने कोटवारों को उपलब्ध कराई जा रही वर्दी की गुणवत्ता और माप पर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में मिलने वाली वर्दी कई बार अनुपयोगी साबित होती है। संघ ने वर्दी की राशि सीधे बैंक खातों में जमा कराने, खरीद प्रक्रिया की जांच करने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया गया है। 5. नगरीय क्षेत्रों में पद समाप्त करने के आदेश निरस्त हों संघ ने नगरीय क्षेत्रों में कोटवारों के पद समाप्त करने और एक गांव में एक ही कोटवार रखने संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बढ़ती आबादी और विस्तृत होते कार्यक्षेत्र को देखते हुए कोटवारों की आवश्यकता बनी हुई है। 6. कोटवार के परिवार के पात्र सदस्य को नियुक्ति में प्राथमिकता संगठन ने मांग की है कि पूर्व कोटवार के स्थान पर उसके परिवार के पात्र सदस्य को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग भी की गई है। 7. मृत्यु पर 10 लाख और सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की सहायता ज्ञापन में सेवाकाल के दौरान कोटवार की मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की मांग की गई है। इसके साथ ही सेवामुक्ति पर मिलने वाली राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग भी रखी गई है। चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन के अनुसार, संगठन ने 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक काली पट्टी बांधकर काम करने और तहसील स्तर पर ज्ञापन देने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया था। इसके बाद 22 अक्टूबर से जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। आंदोलन के लिए निर्धारित तिथियां बीत चुकी हैं। ऐसे में संगठन की वर्तमान गतिविधियों, मांगों पर हुई प्रगति और आगे की रणनीति की जानकारी लेना जरूरी है। शासन के रुख पर नजर कोटवार संघ की मांगों पर राज्य शासन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, यह महत्वपूर्ण है। मानदेय, सेवाभूमि, वर्दी और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर संगठन की मांगों के साथ शासन का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना चाहिए। पोलखोल न्यूज़ की खास रिपोर्ट। नोट: यह समाचार संगठन की ओर से उपलब्ध कराए गए ज्ञापन पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोप और मांगें संगठन के पक्ष के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी शामिल किया जाएगा।1
- प्रदीप शर्मा एसीएन भारत समाचार करेली 9977447750 नरसिंहपुर जिले के थाना सालीचौका में महिला और उसके पति के साथ मारपीट, लूटपाट का मामला आया सामने थाना सालीचौका (सहावन टोला) क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। पीड़िता बबीता लोधी (पति प्रीतम लोधी, उम्र 30 वर्ष) ने पुलिस अधीक्षक (SP) नरसिंहपुर को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। 1
- महुआखेड़ा के पास 5 किलो गांजे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार 50 हजार रुपये कीमत का गांजा और मोटरसाइकिल जब्त, एक आरोपी के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज बनखेड़ी। अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बनखेड़ी पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 5 किलो अवैध गांजा और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त गांजे की कीमत करीब 50 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस द्वारा मंगलवार को जारी प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम साई कृष्णा एस. थोटा (आईपीएस) एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के निर्देश पर एसडीओपी पिपरिया आशीष पंवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी बनखेड़ी निरीक्षक विजय सनस के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। टीम को अवैध मादक पदार्थों की तस्करी एवं बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगाया गया था। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 25 सितंबर 2026 की रात ग्राम महुआखेड़ा के पास मोटरसाइकिल से जा रहे दो व्यक्तियों को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद थैले से करीब 5 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने गांजा और मोटरसाइकिल जब्त कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भगवानदास पिता विश्राम सिंह पटवा (43), निवासी छातेर, उदयपुरा, थाना बरेली, जिला रायसेन तथा राजेश पिता रामसिंह नौरिया (33), निवासी खेतोघान, थाना बरेली, जिला रायसेन के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ थाना बनखेड़ी में अपराध क्रमांक 301/2026 के तहत धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी भगवानदास के खिलाफ पूर्व में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सनस, उपनिरीक्षक मनमोहन सिंह ठाकुर, प्रधान आरक्षक बद्रीप्रसाद करोचे, आरक्षक नीलेश कौरव, अभिषेक सोनी, कीरत रघुवंशी, विकास मेहरा, सुनील कुमार एवं केतन प्रजापति तथा साइबर सेल नर्मदापुरम के आरक्षक प्रशांत सिंह राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- भेंरुदा- नगर में निकाला पद संचलन कदमताल करते हुए निकले संघ कार्यकर्त्ता1
- बाइक पर 5किलोग्राम गांजा के साथ दो गिरफ्तार,महुआ खेड़ा के पास बनखेड़ी पुलिस ने पकड़ा बनखेड़ी पुलिस ने बाइक से 5 किलो गांजा लेजा रहे हैं दो युवकों को पकड़ा है दोनों एक रायसेन के रहने वाले हैं एक पर पहले से भी एनटीपीसी एक्ट के केस दर्ज है ।1
- शहर भर में फैला अवैध कॉलोनियों का मायाजाल, जनसुनवाई में रहवासियों ने दिया आवेदन नर्मदापुरम - जिले के पिपरिया अनुविभाग में अवैध कालोनाइजरों का मायाजाल बीजनबाडा, हथवास, राईखेड़ी रोड, सिलारी, बनवारी सहित शहर भर में इस कदर फैला है कि उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, हर बार आमजन द्वारा आवेदन दिया जाता है और फिर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय द्वारा इन कालोनाइजरों को नोटिस भी जारी किया जाता है लेकिन सही कार्यवाही देखने को आज तक नहीं मिली । इन अवैध कालोनाइजरों आम आदमी को मनलुभावन वादे जैसे बिजली, पानी, पक्की सड़को, नाली का सपना दिखाकर महंगे दामो पर प्लॉट बेच दिए जाते है लेकिन प्लॉट खरीदने के बाद नाही इन कॉलोनियों में पक्की सड़क बनवायी जाती है नाही नालियों को बनवाया जाता है और नाही बिजली, पानी जैसी अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है । आज जनसुनवाई में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आकीप खान को आवेदन देकर शिकायत दर्ज करायी है कि उन्हें पक्की सड़को, नालियों का वादा कर प्लॉट बेचे गए लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी इन मूलभूत सुविधाओं के लिए हम कॉलोनीवासी तरस रहे है । कॉलोनी वासियों ने बताया कि सिंधी गुरुद्वारा बनवारी रोड के पीछे स्थित कॉलोनी में उन्होंने सात साल पहले 2019 में प्लाट खरीदे थे उन्हें 15 फ़ीट चौड़ी पक्की सड़क, नालियां बनाकर देने का बोला गया था और इसका जिक्र रजिस्ट्री में किया गया था लेकिन सात साल बीत जाने के बावजूद ना ही पक्की सड़के बनवाई गई ना ही नालियां, जब इस बात की शिकायत की गई तो चंदा कर सड़क, नाली बनवाने की बात कही गयी, इस कॉलोनी में करीब 30 से 35 परिवार निवासरत है । इस कॉलोनी में जल निकासी हेतु नाली ना होने से जगह जगह जल भराव की स्थिति बनी रहती है जिससे गंदा पानी भरा होने से मक्खी, मच्छर के साथ बीमारियों का खतरा बना रहता है, पक्की सड़क ना होने से बरसात में जगह जगह कीचड़ हो जाने से रहवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । अब देखना होगा इस खबर के बाद शहर भर में फैला इन अवैध कालोनाइजरों के मायाजाल को प्रशासन कैसे ध्वस्त कर कार्यवाही करता है ।4
- बेहर में मां नर्मदा, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर और ऐतिहासिक बावड़ी के उन्नयन को लेकर नागरिकों ने दी प्रतिक्रिया करेली/नरसिंहपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के समीप करेली-बरमान मार्ग पर लिंगा ग्राम पंचायत के अंतर्गत स्थित ग्राम बेहर धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां मां नर्मदा नदी के तट के साथ शिव मंदिर, हनुमान मंदिर और ऐतिहासिक बावड़ी स्थित हैं। इन धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहर के उन्नयन को लेकर क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। नागरिकों का मानना है कि इन स्थलों का उचित विकास और संरक्षण किया जाना चाहिए, ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को भी संरक्षित किया जा सके। उन्नयन होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं तथा बेहर को एक नई पहचान मिल सकती है।2
- *नरसिंहपुर: मेरठ की ट्रांसपोर्ट कंपनी पर ठगी का आरोप, ₹5 हजार ट्रांसफर करने के बाद भी नहीं उठा माल! गूगल से निकाला नंबर रिंकू चडार ने पोल खोल पर सुनाई आपबीती!* नरसिंहपुर/ 28 अक्टूबर 2026 ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट बुकिंग के नाम पर कथित ठगी का एक मामला सामने आया है। नरसिंहपुर निवासी रिंकू चडार (30 वर्ष) ने मेरठ की लक्ष्मी ट्रांसपोर्ट कंपनी पर पैसे लेने के बाद माल नहीं उठाने और फोन नहीं उठाने का आरोप लगाया है। रिंकू ने पोल खोल न्यूज़ को पूरी घटना बताते हुए अपनी आपबीती साझा की। रिंकू के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2026 को उन्होंने मेरठ जिले के सरधना से खरीदी गई दो टन चादर (माल) को नरसिंहपुर तक लाने के लिए गूगल के माध्यम से ट्रांसपोर्ट की तलाश की और संबंधित ट्रांसपोर्ट सेवा से संपर्क किया। तीन बार में भेजे ₹5 हजार रिंकू का आरोप है कि ट्रांसपोर्ट बुकिंग के दौरान उनसे पहले ₹2,000, फिर ₹500 और इसके बाद ₹2,500 ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह उन्होंने कुल ₹5,000 की राशि भेजी। उनके अनुसार, भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति का नाम अनमोल कुमार बताया गया। रिंकू ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने व्हाट्सऐप पर एक ट्रक और उसकी आरसी (रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र) की फोटो भी भेजी थी और कहा था कि उनका माल इसी ट्रक से पहुंचेगा। लेकिन पैसे ट्रांसफर करने के बाद भी माल नहीं उठाया गया। रिंकू का कहना है कि अब संबंधित व्यक्ति फोन भी नहीं उठा रहा है। पोल खोल न्यूज़ पर बताई पूरी घटना रिंकू चडार ने पोल खोल न्यूज़ के माध्यम से अपनी परेशानी साझा करते हुए मामले को सामने रखा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी रिंकू के आरोपों और उनके बताए घटनाक्रम पर आधारित है। मामले में संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनी और भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति का पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट बुक करते समय भुगतान करने से पहले कंपनी की पहचान, कार्यालय का पता, वाहन संबंधी दस्तावेज और भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। यदि किसी के साथ ऐसी धोखाधड़ी होती है, तो उसे ऑनलाइन भुगतान के प्रमाण, व्हाट्सऐप चैट और कॉल की जानकारी सुरक्षित रखकर संबंधित साइबर अपराध शिकायत माध्यम या पुलिस से संपर्क करना चाहिए। देखिए पोल खोल न्यूज़ पर - रिंकू चडार की जुबानी, कथित ठगी की पूरी कहानी। नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।1