आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम को मिली क्लीन स्वीप की हार के बाद, टीम मैनेजमेंट की रणनीति और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विश्लेषण के अनुसार, टीम ने दो प्रमुख 'कसमों' का पालन किया, जिनमें से पहली यह थी कि टॉस जीतने पर हमेशा पहले गेंदबाज़ी चुनी जाएगी। इस रणनीति की आलोचना करते हुए कहा गया कि टी20 में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी है, जिसमें अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा और श्रेयस अय्यर जैसे धाकड़ खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे में पहले बल्लेबाज़ी करके 200 से अधिक रन बनाने और विरोधी टीम पर दबाव डालने के बजाय, टीम ने पहले गेंदबाज़ी का चुनाव किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सामने वाली टीम ने 150 या उससे अधिक रन बनाए, और फिर स्विंग व सीम वाली परिस्थितियों में वही भारतीय बल्लेबाज़, जो आईपीएल की सपाट पिचों पर आसानी से रन बनाते हैं, संघर्ष करते नज़र आए। टीम मैनेजमेंट की दूसरी 'कसम' वैभव सूर्यवंशी को किसी भी हाल में मौका न देने की थी, जिस पर विशेष रूप से सवाल उठे हैं। यह तर्क दिया गया कि आईपीएल में शानदार फॉर्म दिखाने वाले सूर्यवंशी को टीम में शामिल किया गया था, और भले ही उनके खेलने से जीत सुनिश्चित न होती, फिर भी फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को अवसर मिलना चाहिए था। कमजोर टीम आयरलैंड के खिलाफ भी अगर प्रयोग नहीं किया जाएगा तो फिर कब किया जाएगा, यह सवाल उठाते हुए सुझाव दिया गया कि अभिषेक शर्मा को एक मैच के लिए आराम दिया जा सकता था या संजू सैमसन को बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजकर वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया। इन फैसलों के परिणामस्वरूप, टी20 में नंबर वन टीम भारत को अपने टी20 क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। पोस्ट में कहा गया है कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन टीम चयन, रणनीति और परिस्थितियों के अनुरूप फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उम्मीद जताई गई है कि टीम मैनेजमेंट अगली सीरीज में इन गलतियों से सबक लेकर बेहतर फैसले करेगा। टीम मैनेजमेंट की इन दो 'कसमों' ने 'आईपीएल के सूरमाओं' और 'पट्टा पिचों के औलिया' जैसी विश्व की नंबर एक टीम को आयरलैंड से 'तौलिया पहना' दिया।
आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम को मिली क्लीन स्वीप की हार के बाद, टीम मैनेजमेंट की रणनीति और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विश्लेषण के अनुसार, टीम ने दो प्रमुख 'कसमों' का पालन किया, जिनमें से पहली यह थी कि टॉस जीतने पर हमेशा पहले गेंदबाज़ी चुनी जाएगी। इस रणनीति की आलोचना करते हुए कहा गया कि टी20 में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी है, जिसमें अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा और श्रेयस अय्यर जैसे धाकड़ खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे में पहले बल्लेबाज़ी करके 200 से अधिक रन बनाने और विरोधी टीम पर दबाव डालने के बजाय, टीम ने पहले गेंदबाज़ी का चुनाव किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सामने वाली टीम ने 150 या उससे अधिक रन बनाए, और फिर स्विंग व सीम वाली परिस्थितियों में वही भारतीय बल्लेबाज़, जो आईपीएल की सपाट पिचों पर आसानी से रन बनाते हैं, संघर्ष करते नज़र आए। टीम मैनेजमेंट की दूसरी 'कसम' वैभव सूर्यवंशी को किसी भी हाल में मौका न देने की थी, जिस पर विशेष रूप से सवाल उठे हैं। यह तर्क दिया गया कि आईपीएल में शानदार फॉर्म दिखाने वाले सूर्यवंशी को टीम में शामिल किया गया था, और भले ही उनके खेलने से जीत सुनिश्चित न होती, फिर भी फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को अवसर मिलना चाहिए था। कमजोर टीम आयरलैंड के खिलाफ भी अगर प्रयोग नहीं किया जाएगा तो फिर कब किया जाएगा, यह सवाल उठाते हुए सुझाव दिया गया कि अभिषेक शर्मा को एक मैच के लिए आराम दिया जा सकता था या संजू सैमसन को बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजकर वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया। इन फैसलों के परिणामस्वरूप, टी20 में नंबर वन टीम भारत को अपने टी20 क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। पोस्ट में कहा गया है कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन टीम चयन, रणनीति और परिस्थितियों के अनुरूप फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उम्मीद जताई गई है कि टीम मैनेजमेंट अगली सीरीज में इन गलतियों से सबक लेकर बेहतर फैसले करेगा। टीम मैनेजमेंट की इन दो 'कसमों' ने 'आईपीएल के सूरमाओं' और 'पट्टा पिचों के औलिया' जैसी विश्व की नंबर एक टीम को आयरलैंड से 'तौलिया पहना' दिया।
- आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम को मिली क्लीन स्वीप की हार के बाद, टीम मैनेजमेंट की रणनीति और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विश्लेषण के अनुसार, टीम ने दो प्रमुख 'कसमों' का पालन किया, जिनमें से पहली यह थी कि टॉस जीतने पर हमेशा पहले गेंदबाज़ी चुनी जाएगी। इस रणनीति की आलोचना करते हुए कहा गया कि टी20 में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी है, जिसमें अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा और श्रेयस अय्यर जैसे धाकड़ खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे में पहले बल्लेबाज़ी करके 200 से अधिक रन बनाने और विरोधी टीम पर दबाव डालने के बजाय, टीम ने पहले गेंदबाज़ी का चुनाव किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सामने वाली टीम ने 150 या उससे अधिक रन बनाए, और फिर स्विंग व सीम वाली परिस्थितियों में वही भारतीय बल्लेबाज़, जो आईपीएल की सपाट पिचों पर आसानी से रन बनाते हैं, संघर्ष करते नज़र आए। टीम मैनेजमेंट की दूसरी 'कसम' वैभव सूर्यवंशी को किसी भी हाल में मौका न देने की थी, जिस पर विशेष रूप से सवाल उठे हैं। यह तर्क दिया गया कि आईपीएल में शानदार फॉर्म दिखाने वाले सूर्यवंशी को टीम में शामिल किया गया था, और भले ही उनके खेलने से जीत सुनिश्चित न होती, फिर भी फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को अवसर मिलना चाहिए था। कमजोर टीम आयरलैंड के खिलाफ भी अगर प्रयोग नहीं किया जाएगा तो फिर कब किया जाएगा, यह सवाल उठाते हुए सुझाव दिया गया कि अभिषेक शर्मा को एक मैच के लिए आराम दिया जा सकता था या संजू सैमसन को बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजकर वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया। इन फैसलों के परिणामस्वरूप, टी20 में नंबर वन टीम भारत को अपने टी20 क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। पोस्ट में कहा गया है कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन टीम चयन, रणनीति और परिस्थितियों के अनुरूप फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उम्मीद जताई गई है कि टीम मैनेजमेंट अगली सीरीज में इन गलतियों से सबक लेकर बेहतर फैसले करेगा। टीम मैनेजमेंट की इन दो 'कसमों' ने 'आईपीएल के सूरमाओं' और 'पट्टा पिचों के औलिया' जैसी विश्व की नंबर एक टीम को आयरलैंड से 'तौलिया पहना' दिया।1
- जनपद खीरी में अपराधों की रोकथाम और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना खीरी पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खीरी, डॉ. ख्याति गर्ग और अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) के कुशल निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी सदर के निकट पर्यवेक्षण में की गई। थाना खीरी के प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में थाना खीरी पुलिस और स्वाट/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने थाना खीरी व थाना कोतवाली सदर क्षेत्र में हुई चोरी और नकबजनी की घटनाओं का सफलतापूर्वक अनावरण किया है। पुलिस टीम ने इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान पाँच शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के कब्जे से पुलिस ने चोरी के जेवरात, नगदी और अवैध शस्त्र बरामद किए हैं।1
- लखीमपुर खीरी के सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज में फीस को लेकर एक विवाद का मामला सामने आया है। अभिभावक आशीष कुमार गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2025-26 की पूरी फीस जमा होने के बावजूद उनके बच्चों को कक्षा से बाहर खड़ा किया जा रहा है और उन्हें शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। आशीष कुमार गुप्ता का कहना है कि उन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की पूरी फीस समय पर जमा कर दी थी, जिसकी रसीदें भी उनके पास उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, विद्यालय प्रबंधन उन पर दोबारा फीस जमा करने का दबाव बना रहा है और फीस न देने पर बच्चों का भविष्य खराब करने तक की धमकी दी गई है। अभिभावक ने अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि मामले की जाँच के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा तथ्यों के विपरीत एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिससे उन्हें न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हुई। अभिभावक ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच करने, बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने, खंड शिक्षा अधिकारी की कथित रिपोर्ट की भी निष्पक्ष जाँच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले की जाँच प्रक्रिया अपेक्षित है।3
- अयोध्या के वकीलों ने एक सख्त ऐलान किया है कि वे 'चंदा चोरों' से जुड़े किसी भी मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई वकील इस प्रतिबंध का उल्लंघन कर ऐसे मामलों में पैरवी करता है, तो उस पर ₹5 लाख का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। वकीलों ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को लेकर भी कड़ी मांग की है। उन्होंने कहा है कि ये तीनों व्यक्ति तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़कर चले जाएं, या फिर उन्हें जेल भेजा जाए। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, तो वे पूरे अयोध्या शहर को जाम कर देंगे।1
- लखीमपुर खीरी जिले के पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बेलवापुरवा गांव में एक किसान के घर हुई लाखों रुपये के जेवरात और नकदी की चोरी के मामले में पुलिस कार्रवाई में कथित देरी को लेकर पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित किसान महेश पुत्र दामोदर ने आरोप लगाया है कि नामजद तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, जिससे वह खुद को न्याय से वंचित महसूस कर रहा है। महेश के अनुसार, 21 जून को जब वह अपने परिवार के साथ ससुराल गया हुआ था, तब अज्ञात चोरों ने उसके घर में सेंध लगाकर अलमारी से एक बक्सा निकाला। चोरों ने इस बक्से को घर के पीछे खेत में ले जाकर उसका ताला तोड़ा और उसमें रखी लगभग 40 हजार रुपये की नकदी तथा लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात चुरा लिए। अगली सुबह खेत में खाली बक्सा मिलने पर ग्रामीणों ने परिजनों को इसकी सूचना दी। घर लौटने पर महेश ने गांव के ही पिंकू पुत्र डोरेलाल पर चोरी का संदेह जताते हुए पढ़ुआ पुलिस को एक नामजद तहरीर दी। महेश का कहना है कि ससुराल जाने से पहले पिंकू ने उससे उसके बाहर जाने की जानकारी ली थी, जिससे उसे शक हुआ। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने संदिग्ध से पूछताछ तो की, लेकिन अब तक न तो एफआईआर दर्ज की और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। इस निष्क्रियता से आहत महेश अपनी पत्नी के साथ जिला मुख्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच, मुकदमा दर्ज करने और चोरी का खुलासा करने की मांग की है। इस संबंध में अभी तक पुलिस का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।2
- अयोध्या के वकीलों ने एक कड़ा ऐलान करते हुए चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़कर जाने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा उन्हें जेल भेजने की मांग की है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई तो वे पूरे अयोध्या को जाम कर देंगे। बार एसोसिएशन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी वकील 'चंदा चोरों' से संबंधित किसी भी मामले की पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि कोई वकील इस निर्देश का उल्लंघन करते हुए ऐसे किसी मामले में पैरवी करता है, तो उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।1
- पलिया ब्लाॅक की ग्राम पंचायत पलिया देहात में पानी की टंकी का बोर लगभग 15 दिनों से खराब है, जिसके चलते ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है। बोर से लगातार कीचड़युक्त पानी आने के कारण जलापूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। इस गंभीर समस्या के कारण ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए एक से दो किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि गंदे पानी के कारण पेयजल आपूर्ति बंद कर दी गई है, जिससे भीषण गर्मी के बीच स्वच्छ पानी की किल्लत ने उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। महिलाओं और बच्चों को पानी की व्यवस्था के लिए रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाए हैं। इस संबंध में जानकारी लेने पर मैकेनिकल जेई अरविंद पाण्डेय ने बताया कि बोर उस क्षेत्र में कराया गया था जो बाढ़ग्रस्त और बलुई मिट्टी वाला है, और यदि बोर बाढ़ के पानी में डूब जाए तो उसके खराब होने की पूरी संभावना रहती है। उन्होंने पुष्टि की कि यह बोर भी बाढ़ के पानी के कारण ही खराब हुआ है, और यह भी स्वीकार किया कि उस समय संबंधित जिम्मेदारों की लापरवाही थी जिन्होंने इस स्थान पर बोर कराया था। जेई ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को लिखित रूप में भेज दी गई है। बजट स्वीकृत होते ही नए सिरे से बोर कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नया कार्य पूरी तकनीकी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिसमें कुछ समय लग सकता है। उनका उद्देश्य जल्दबाजी के बजाय ऐसा काम कराना है, जिससे भविष्य में ग्रामीणों को दोबारा ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। उधर, पिछले 15 दिनों से पेयजल संकट झेल रहे ग्रामीणों ने मांग की है कि शीघ्र नया बोर कराकर नियमित जलापूर्ति बहाल की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।4