छौंक की गौशाला या गोवंशों की कालकोठरी? वायरल वीडियो ने व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल मौके पर 75–80 गोवंश होने का दावा, अभिलेखों में 100 से अधिक! चारा-भूसे के नाम पर आने वाली रकम पर भी उठे सवाल सरकार गोवंशों के संरक्षण और उनकी बेहतर देखभाल के लिए गौशालाओं पर लगातार धन खर्च कर रही है। लेकिन कालपी क्षेत्र के कदौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत छौंक में संचालित तथाकथित अस्थाई गौशाला से सामने आई तस्वीरें और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित बताई जा रही इस गौशाला की जिम्मेदारी मोहिनी सिंह के पास होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस गौशाला में गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भूसा, हरा चारा और पानी मिलना चाहिए, वहां हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं। वायरल वीडियो ने झकझोर दिया—मृत गोवंश को कचरे की तरह उठाने का आरोप सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक मृत गाय के शव को ट्रैक्टर के आगे लगे लोहे के सूपड़े में लादकर ले जाते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रही तस्वीरें निश्चित तौर पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि गौशाला में गोवंशों की हालत लंबे समय से खराब है और भूख-प्यास तथा पर्याप्त देखभाल न मिलने के कारण गोवंशों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति का है। यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। पसलियां दिखाती तस्वीरें, आखिर गोवंशों को मिल क्या रहा है? स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों के मुताबिक गौशाला में कई गोवंश बेहद कमजोर दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भूसा और हरा चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। सवाल यह है कि यदि गौशाला में गोवंशों की देखभाल के लिए सरकारी धन उपलब्ध कराया जा रहा है, तो फिर धरातल पर उनकी हालत इतनी खराब क्यों दिखाई दे रही है? क्या चारे की खरीद और वितरण का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है? क्या स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मात्रा वास्तव में गौशाला तक पहुंची? क्या गोवंशों को निर्धारित मात्रा में चारा मिल रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कागज और जमीन पर मौजूद गोवंशों की संख्या एक जैसी है? 75–80 जमीन पर, 100 से ज्यादा कागजों में? इस पूरे मामले का सबसे गंभीर आरोप गोवंशों की संख्या में कथित अंतर को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर लगभग 75 से 80 गोवंश ही दिखाई देते हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों अथवा शासन को भेजे जाने वाले विवरण में 100 से अधिक गोवंश दर्ज होने की बात कही जा रही है। यदि जांच में यह अंतर सही पाया जाता है तो सवाल बेहद बड़ा है— जो गोवंश मौके पर हैं ही नहीं, उनके नाम पर चारा-भूसा और अन्य मदों में धनराशि की मांग कैसे की जा रही है? और यदि अभिलेख बिल्कुल सही हैं तो फिर प्रशासन मौके पर गिनती कराकर यह स्पष्ट क्यों नहीं करता कि वास्तविक संख्या कितनी है? यही वह बिंदु है जहां से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ जाती है। कहीं कागजों पर पल तो नहीं रहे गोवंश? स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वास्तविक संख्या से अधिक गोवंश दर्शाकर सरकारी धन का लाभ उठाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अगर यह सिर्फ अफवाह है तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और आरोप निराधार साबित हो जाएंगे। और अगर जांच में रिकॉर्ड और मौके की संख्या में बड़ा अंतर मिलता है, तो फिर यह केवल गौशाला की अव्यवस्था का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और अभिलेखीय गड़बड़ी का गंभीर विषय बन जाएगा। सवाल सिर्फ गायों का नहीं, सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है सरकार का उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित स्थान मिले, उन्हें भोजन और पानी मिले और उनकी उचित देखभाल हो। लेकिन यदि कहीं कागजों पर गोवंशों की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन की मांग की जा रही हो और धरातल पर वही गोवंश भूख-प्यास से जूझते मिलें, तो यह व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति होगी। गौशाला किसी की कमाई का जरिया नहीं, बेजुबान गोवंशों के संरक्षण की जिम्मेदारी है। इसलिए इस मामले में भावनाओं से ज्यादा जरूरी है तथ्यों की जांच। जिला प्रशासन करे तत्काल निष्पक्ष जांच मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को चाहिए कि छौंक गौशाला का अचानक स्थलीय निरीक्षण कर— - मौके पर मौजूद प्रत्येक गोवंश की वास्तविक गिनती कराई जाए। - गौशाला रजिस्टर और दैनिक उपस्थिति का मिलान किया जाए। - भूसा एवं हरा चारा स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाए। - खरीद और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए। - शासन को भेजी गई डिमांड का मौके की संख्या से मिलान कराया जाए। - मृत गोवंशों से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच हो। - वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसकी तारीख/स्थान की पुष्टि कराई जाए। - गौशाला संचालन की जिम्मेदारी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाए। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ होनी चाहिए। और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर जवाब देगा कौन? गोवंशों के नाम पर सरकारी योजनाएं और बजट कागजों पर भले ही मजबूत दिखाई दें, लेकिन असली परीक्षा गौशाला के भीतर मौजूद उन बेजुबानों की हालत से होती है। छौंक की गौशाला से सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या सरकारी अभिलेखों में दर्ज गोवंश और गौशाला में मौजूद गोवंशों की संख्या वास्तव में समान है? अगर हां, तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से सत्यापन कर स्थिति स्पष्ट करे। अगर नहीं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि कागजों पर दर्ज अतिरिक्त गोवंशों के नाम पर होने वाली सरकारी धनराशि का हिसाब कौन देगा? फिलहाल यह खबर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों पर आधारित है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित अधिकारियों अथवा गौशाला संचालक का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। संबंधित पक्ष का बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आपकी क्या राय है? क्या छौंक की अस्थाई गौशाला में गोवंशों की संख्या, चारा-भूसा और सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
छौंक की गौशाला या गोवंशों की कालकोठरी? वायरल वीडियो ने व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल मौके पर 75–80 गोवंश होने का दावा, अभिलेखों में 100 से अधिक! चारा-भूसे के नाम पर आने वाली रकम पर भी उठे सवाल सरकार गोवंशों के संरक्षण और उनकी बेहतर देखभाल के लिए गौशालाओं पर लगातार धन खर्च कर रही है। लेकिन कालपी क्षेत्र के कदौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत छौंक में संचालित तथाकथित अस्थाई गौशाला से सामने आई तस्वीरें और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित बताई जा रही इस गौशाला की जिम्मेदारी मोहिनी सिंह के पास होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस गौशाला में गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भूसा, हरा चारा और पानी मिलना चाहिए, वहां हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं। वायरल वीडियो ने झकझोर दिया—मृत गोवंश को कचरे की तरह उठाने का आरोप सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक मृत गाय के शव को ट्रैक्टर के आगे लगे लोहे के सूपड़े में लादकर ले जाते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रही तस्वीरें निश्चित तौर पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि गौशाला में गोवंशों की हालत लंबे समय से खराब है और भूख-प्यास तथा पर्याप्त देखभाल न मिलने के कारण गोवंशों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति का है। यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। पसलियां दिखाती तस्वीरें, आखिर गोवंशों को मिल क्या रहा है? स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों के मुताबिक गौशाला में कई गोवंश बेहद कमजोर दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भूसा और हरा चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। सवाल यह है कि यदि गौशाला में गोवंशों की देखभाल के लिए सरकारी धन उपलब्ध कराया जा रहा है, तो फिर धरातल पर उनकी हालत इतनी खराब क्यों दिखाई दे रही है? क्या चारे की खरीद और वितरण का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है? क्या स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मात्रा वास्तव में गौशाला तक पहुंची? क्या गोवंशों को निर्धारित मात्रा में चारा मिल रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कागज और जमीन पर मौजूद गोवंशों की संख्या एक जैसी है? 75–80 जमीन पर, 100 से ज्यादा कागजों में? इस पूरे मामले का सबसे गंभीर आरोप गोवंशों की संख्या में कथित अंतर को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर लगभग 75 से 80 गोवंश ही दिखाई देते हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों अथवा शासन को भेजे जाने वाले विवरण में 100 से अधिक गोवंश दर्ज होने की बात कही जा रही है। यदि जांच में यह अंतर सही पाया जाता है तो सवाल बेहद बड़ा है— जो गोवंश मौके पर हैं ही नहीं, उनके नाम पर चारा-भूसा और अन्य मदों में धनराशि की मांग कैसे की जा रही है? और यदि अभिलेख बिल्कुल सही हैं तो फिर प्रशासन मौके पर गिनती कराकर यह स्पष्ट क्यों नहीं करता कि वास्तविक संख्या कितनी है? यही वह बिंदु है जहां से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ जाती है। कहीं कागजों पर पल तो नहीं रहे गोवंश? स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वास्तविक संख्या से अधिक गोवंश दर्शाकर सरकारी धन का लाभ उठाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अगर यह सिर्फ अफवाह है तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और आरोप निराधार साबित हो जाएंगे। और अगर जांच में रिकॉर्ड और मौके की संख्या में बड़ा अंतर मिलता है, तो फिर यह केवल गौशाला की अव्यवस्था का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और अभिलेखीय गड़बड़ी का गंभीर विषय बन जाएगा। सवाल सिर्फ गायों का नहीं, सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है सरकार का उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित स्थान मिले, उन्हें भोजन और पानी मिले और उनकी उचित देखभाल हो। लेकिन यदि कहीं कागजों पर गोवंशों की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन की मांग की जा रही हो और धरातल पर वही गोवंश भूख-प्यास से जूझते मिलें, तो यह व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति होगी। गौशाला किसी की कमाई का जरिया नहीं, बेजुबान गोवंशों के संरक्षण की जिम्मेदारी है। इसलिए इस मामले में भावनाओं से ज्यादा जरूरी है तथ्यों की जांच। जिला प्रशासन करे तत्काल निष्पक्ष जांच मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को चाहिए कि छौंक गौशाला का अचानक स्थलीय निरीक्षण कर— - मौके पर मौजूद प्रत्येक गोवंश की वास्तविक गिनती कराई जाए। - गौशाला रजिस्टर और दैनिक उपस्थिति का मिलान किया जाए। - भूसा एवं हरा चारा स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाए। - खरीद और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए। - शासन को भेजी गई डिमांड का मौके की संख्या से मिलान कराया जाए। - मृत गोवंशों से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच हो। - वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसकी तारीख/स्थान की पुष्टि कराई जाए। - गौशाला संचालन की जिम्मेदारी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाए। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ होनी चाहिए। और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर जवाब देगा कौन? गोवंशों के नाम पर सरकारी योजनाएं और बजट कागजों पर भले ही मजबूत दिखाई दें, लेकिन असली परीक्षा गौशाला के भीतर मौजूद उन बेजुबानों की हालत से होती है। छौंक की गौशाला से सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या सरकारी अभिलेखों में दर्ज गोवंश और गौशाला में मौजूद गोवंशों की संख्या वास्तव में समान है? अगर हां, तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से सत्यापन कर स्थिति स्पष्ट करे। अगर नहीं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि कागजों पर दर्ज अतिरिक्त गोवंशों के नाम पर होने वाली सरकारी धनराशि का हिसाब कौन देगा? फिलहाल यह खबर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों पर आधारित है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित अधिकारियों अथवा गौशाला संचालक का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। संबंधित पक्ष का बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आपकी क्या राय है? क्या छौंक की अस्थाई गौशाला में गोवंशों की संख्या, चारा-भूसा और सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
- पिता की हत्या के आरोप में पुत्र बरी, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया फैसला कोंच। पिता की हत्या में दो साल जेल रहाने के बाद पुत्र दोष मुक्त कोतवाली क्षेत्र के ताहरपुरा गांव में वर्ष 2019 में हुई एक व्यक्ति की हत्या के मामले में मंगलवार को अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पुत्र को बरी कर दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद हनुमंत सिंह को पिता की हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। अधिवक्ता विनय चौरसिया ने बताया कि कोंच कोतवाली क्षेत्र के ताहरपुरा गांव निवासी मालती ने वर्ष 2019 में पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पति की हत्या उसके पुत्र हनुमंत सिंह डंडा मर कर हत्या कर दी । तहरीर के आधार पर पुलिस ने हनुमंत सिंह के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए घटना के दिन ही आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बताए गए डंडे को भी बरामद करने का दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच-पड़ताल पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपी करीब दो वर्ष तक जेल में रहा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी मालती समेत अन्य गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर बहस हुई, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनय चौरसिया ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए उसे बरी किए जाने की मांग की। मंगलवार को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी ने फैसला सुनाया। अदालत ने हनुमंत सिंह को पिता की हत्या के आरोप से बरी कर दिया। फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे का निस्तारण हो गया।1
- छौंक की गौशाला या गोवंशों की कालकोठरी? वायरल वीडियो ने व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल मौके पर 75–80 गोवंश होने का दावा, अभिलेखों में 100 से अधिक! चारा-भूसे के नाम पर आने वाली रकम पर भी उठे सवाल सरकार गोवंशों के संरक्षण और उनकी बेहतर देखभाल के लिए गौशालाओं पर लगातार धन खर्च कर रही है। लेकिन कालपी क्षेत्र के कदौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत छौंक में संचालित तथाकथित अस्थाई गौशाला से सामने आई तस्वीरें और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित बताई जा रही इस गौशाला की जिम्मेदारी मोहिनी सिंह के पास होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस गौशाला में गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भूसा, हरा चारा और पानी मिलना चाहिए, वहां हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं। वायरल वीडियो ने झकझोर दिया—मृत गोवंश को कचरे की तरह उठाने का आरोप सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक मृत गाय के शव को ट्रैक्टर के आगे लगे लोहे के सूपड़े में लादकर ले जाते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रही तस्वीरें निश्चित तौर पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि गौशाला में गोवंशों की हालत लंबे समय से खराब है और भूख-प्यास तथा पर्याप्त देखभाल न मिलने के कारण गोवंशों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति का है। यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। पसलियां दिखाती तस्वीरें, आखिर गोवंशों को मिल क्या रहा है? स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों के मुताबिक गौशाला में कई गोवंश बेहद कमजोर दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भूसा और हरा चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। सवाल यह है कि यदि गौशाला में गोवंशों की देखभाल के लिए सरकारी धन उपलब्ध कराया जा रहा है, तो फिर धरातल पर उनकी हालत इतनी खराब क्यों दिखाई दे रही है? क्या चारे की खरीद और वितरण का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है? क्या स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मात्रा वास्तव में गौशाला तक पहुंची? क्या गोवंशों को निर्धारित मात्रा में चारा मिल रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कागज और जमीन पर मौजूद गोवंशों की संख्या एक जैसी है? 75–80 जमीन पर, 100 से ज्यादा कागजों में? इस पूरे मामले का सबसे गंभीर आरोप गोवंशों की संख्या में कथित अंतर को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर लगभग 75 से 80 गोवंश ही दिखाई देते हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों अथवा शासन को भेजे जाने वाले विवरण में 100 से अधिक गोवंश दर्ज होने की बात कही जा रही है। यदि जांच में यह अंतर सही पाया जाता है तो सवाल बेहद बड़ा है— जो गोवंश मौके पर हैं ही नहीं, उनके नाम पर चारा-भूसा और अन्य मदों में धनराशि की मांग कैसे की जा रही है? और यदि अभिलेख बिल्कुल सही हैं तो फिर प्रशासन मौके पर गिनती कराकर यह स्पष्ट क्यों नहीं करता कि वास्तविक संख्या कितनी है? यही वह बिंदु है जहां से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ जाती है। कहीं कागजों पर पल तो नहीं रहे गोवंश? स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वास्तविक संख्या से अधिक गोवंश दर्शाकर सरकारी धन का लाभ उठाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अगर यह सिर्फ अफवाह है तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और आरोप निराधार साबित हो जाएंगे। और अगर जांच में रिकॉर्ड और मौके की संख्या में बड़ा अंतर मिलता है, तो फिर यह केवल गौशाला की अव्यवस्था का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और अभिलेखीय गड़बड़ी का गंभीर विषय बन जाएगा। सवाल सिर्फ गायों का नहीं, सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है सरकार का उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित स्थान मिले, उन्हें भोजन और पानी मिले और उनकी उचित देखभाल हो। लेकिन यदि कहीं कागजों पर गोवंशों की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन की मांग की जा रही हो और धरातल पर वही गोवंश भूख-प्यास से जूझते मिलें, तो यह व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति होगी। गौशाला किसी की कमाई का जरिया नहीं, बेजुबान गोवंशों के संरक्षण की जिम्मेदारी है। इसलिए इस मामले में भावनाओं से ज्यादा जरूरी है तथ्यों की जांच। जिला प्रशासन करे तत्काल निष्पक्ष जांच मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को चाहिए कि छौंक गौशाला का अचानक स्थलीय निरीक्षण कर— - मौके पर मौजूद प्रत्येक गोवंश की वास्तविक गिनती कराई जाए। - गौशाला रजिस्टर और दैनिक उपस्थिति का मिलान किया जाए। - भूसा एवं हरा चारा स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाए। - खरीद और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए। - शासन को भेजी गई डिमांड का मौके की संख्या से मिलान कराया जाए। - मृत गोवंशों से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच हो। - वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसकी तारीख/स्थान की पुष्टि कराई जाए। - गौशाला संचालन की जिम्मेदारी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाए। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ होनी चाहिए। और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर जवाब देगा कौन? गोवंशों के नाम पर सरकारी योजनाएं और बजट कागजों पर भले ही मजबूत दिखाई दें, लेकिन असली परीक्षा गौशाला के भीतर मौजूद उन बेजुबानों की हालत से होती है। छौंक की गौशाला से सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या सरकारी अभिलेखों में दर्ज गोवंश और गौशाला में मौजूद गोवंशों की संख्या वास्तव में समान है? अगर हां, तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से सत्यापन कर स्थिति स्पष्ट करे। अगर नहीं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि कागजों पर दर्ज अतिरिक्त गोवंशों के नाम पर होने वाली सरकारी धनराशि का हिसाब कौन देगा? फिलहाल यह खबर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आरोपों पर आधारित है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित अधिकारियों अथवा गौशाला संचालक का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। संबंधित पक्ष का बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आपकी क्या राय है? क्या छौंक की अस्थाई गौशाला में गोवंशों की संख्या, चारा-भूसा और सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।1
- जालौन जालौन में अपनों का छूटा साथ, पेट की मार के जालौन जालौन में अपनों का छूटा साथ, पेट की मार के बीच 6 बहने बेसहारा, बेसहारा हुई 6 नाबालिग बहनों के जिंदगी की जद्दोजहद, माता-पिता के बाद अब दादी का भी मासूमों से सिर से उठा साया, माता-पिता के गुजरने के बाद दादी के भरोसे रह रहीं थीं 6 सगी बहनें, कच्चे मकान में हो रही थी गुजर बसर, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे रिश्तेदार, नाबालिग बच्ची अंजली ने जिला प्रशासन से वीडियो के जरिए लगाई मदद की गुहार, ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर किया वायरल, जालौन तहसील क्षेत्र के सींगपुरा गांव का मामला।1
- खाद्य तेल में मिलावट का खेल कानपुर देहात के रनिया में चल रहा कारोबार कानपुर देहात के रनिया थाना क्षेत्र में खाद्य तेल के कथित अवैध कारोबार का मामला सामने आया है। मंटोरा चौराहे के आसपास एक संदिग्ध बाड़े में टैंकर से तेल उतारने का वीडियो वायरल हो रहा है। आरोप है कि हाईवे से गुजरने वाले टैंकरों से तेल उतारकर उसे दूसरे कंटेनरों में भरा जाता है और कथित तौर पर मिलावट के बाद स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है। वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है। स्थानीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।1
- पीड़ित महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार। कानपुर देहात। महिला ने पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार। दरअसल पूरा मामला उत्तर प्रदेश कानपुर देहात के भोगनीपुर थाना क्षेत्र का है जहां पर प्रार्थिनी इरम फातिमा पत्नी शाहरुख अली निवासी ग्राम भोगनीपुर थाना भोगनीपुर ने बताया कि मेरा विवाह 1.6. 2020 को मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार शाहरुख अली पुत्र साकिर अली के साथ हुआ था विवाह के बाद से ही प्रार्थिनी के ससुराल जन पति शाहरुख अली साथ आसमा बेगम जेठ शाकिर अली सलमान अली वह देवर अदनान अली कम दहेज का थाना देकर हमारे साथ गाली-गलौज कर मारपीट करते थे वह शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते वह अत्यधिक दहेज के रूप में एक कार की मांग करते थें मांग पूरी न होने पर सभी ससुराली जनों ने मेरे साथ मारपीट की जेट शाकिर अली मौका पाकर कई बार मेरे के साथ छेड़खानी कर चुका है वह गलत कार्य करने का प्रयास कर चुका है प्रार्थिनी व उसके पति के संघर्ष से दो पुत्रिया भी हैं और वही दहेज का ताना देकर प्रार्थिनी को बुरी तरह मारपीट व समस्त स्त्री धन छीन कर घर से धक्के देकर भगा दिया दिनांक 20. 5 .2025 को हमारे पति ने हमको को तीन तलाक कहते हुए तीन तलाक दे दिया और हमारे पति ने सभी के सहयोग व षड्यंत्र से दूसरा विवाह सिमरन पुत्री उमर निवासी उमरिया थाना भोगनीपुर से कर लिया है। वहीं महिला पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।1
- Badi.. Mush.. Kilshe.. Mila.. Bidio... Md.. Anish.. Kuraishi.. Fattepur.. Mushangar.. Kanpur.. Dihat.. U. P.1
- पिता की हत्या के आरोप में दो साल जेल में रहा पुत्र, अदालत ने किया बरी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद अपर जिला जज प्रथम की अदालत का फैसला कोंच। ताहरपुरा गांव में वर्ष 2019 में हुई पिता की हत्या के मामले में आरोपी पुत्र को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। मंगलवार को अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए हनुमंत सिंह को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। आरोपी करीब दो वर्ष तक जेल में रहा था। अधिवक्ता विनय चौरसिया के अनुसार, कोंच कोतवाली क्षेत्र के ताहरपुरा गांव निवासी मालती ने वर्ष 2019 में पुलिस को तहरीर देकर अपने पति की हत्या का आरोप उनके पुत्र हनुमंत सिंह पर लगाया था। आरोप था कि डंडे से हमला कर हत्या की गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने हनुमंत सिंह के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर उसे घटना के दिन ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त बताए गए डंडे की बरामदगी का भी दावा किया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी मालती सहित अन्य गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनय चौरसिया ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने, गवाहों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी ने फैसला सुनाया। अदालत ने हनुमंत सिंह को पिता की हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। फैसले के साथ ही वर्ष 2019 से चल रहे इस मुकदमे का न्यायिक स्तर पर निस्तारण हो गया।1
- *➡️थाना रसूलाबाद पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना कारित करने वाले वांछित 01 अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार ।* जनपद कानपुर देहात में अपराध नियन्त्रण की दिशा में घटनाओं की रोकथाम व अभियुक्त की गिरफ्तारी हेतु चलाये जा रहे विशेष अभियान के क्रम में, दिनांक 08.09.2026 को थाना रसूलाबाद पर वादी द्वारा दी गयी तहरीर बावत वादी की पुत्री से अभियुक्त ताज मोहम्मद द्वारा जबरदस्ती इन्स्टाग्राम पर बातचीत करना व उसकी पुत्री द्वारा बातचीत से मना करने पर फोटो व वीडियो को वायरल करने आदि के सम्बन्ध में दी गयी। जिसके आधार पर थाना स्थानीय पर मु0अ0सं0 345/2026 धारा 351(2)/351(3) बीएनएस व धारा 66 ई सूचना प्रोद्योगिकी ( संशोधन ) अधिनियम बनाम ताज मोहम्मद पुत्र ताजउद्दीन निवासी ग्राम दहेली थाना रसूलाबाद जनपद कानपुर देहात के विरुद्ध पंजीकृत किया गया । थाना रसूलाबाद पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए बयान पीड़िता धारा 180/183 बीएनएसएस व अन्य साक्ष्य संकलन से मुकदमा उपरोक्त में धारा 64(2)ड बीएनएस व धारा 5ठ/6 पॉक्सो एक्ट की बढोत्तरी की गयी । आज दिनांक 15.09.2026 को थाना रसूलाबाद पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए मुखबिर की सूचना के आधार पर मुकदमा उपरोक्त में वांछित अभियुक्त ताज मोहम्मद पुत्र ताजुद्दीन निवासी ग्राम दहेली, थाना रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात को मलखानपुर पुलिया के पास थाना क्षेत्र रसूलाबाद से गिरफ्तार किया गया । गिरफ्तारशुदा अभियुक्त को नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। *गिरफ्तारशुदा अभियुक्त का विवरण –* 1. ताज मोहम्मद उम्र करीब 21 वर्ष पुत्र ताजउद्दीन निवासी ग्राम दहेली, थाना रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात । *अभियुक्त ताज मोहम्मद उपरोक्त का अपराधिक इतिहास-* 1. मु0अ0सं0 0345/2026 धारा 64(2)ड/351(2)/351(3) बीएनएस व 5ठ/6 पॉक्सो एक्ट व धारा 66ई आईटी एक्ट, थाना रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात। *गिरफ्तारी करने वाली थाना रसूलाबाद पुलिस टीम-* 1. अतिरिक्त निरीक्षक राजपाल सिंह, 2. का0 विनोद पुरी, 3. रि0का0 रोहित कुमार ।1