सबको पता है कि दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत की चोटी है माउंट एवरेस्ट. लेकिन क्या आपको पता है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को सबसे पहले किसने कैलकुलेट किया था? जी... वह थे भारतीय Mathematician राधानाथ सिकदर. राधानाथ जी कलकत्ता में पैदा हुए.... प्रेजिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएट हुए..... उनकी Maths हमेशा से अद्भुत थी....उनकी इन्ही क्षमता के कारण उन्हें जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में हो रहे Great Trigonometric Survey में काम मिला. सिकदर कभी एवरेस्ट नहीं गए.... वह Trigonometric तरीको से पहाड़ो की ऊंचाई नापते थे. उस ज़माने में कंचनजँगा को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता था..... सिकदर ने हमेशा माना कि इससे ऊंची चोटी भी है. एवरेस्ट के पूर्वोत्तर दिशाओं से की गयी Trigonometric गणना के दौरान राधानाथ सिकदर ने पीक XV (उस समय इसका नाम माउंट एवरेस्ट नहीं था) की ऊँचाई ठीक 29,000 फीट (8,839 मीटर) निर्धारित की थी। 1856 में आधिकारिक रूप से माउंट एवरेस्ट कि खोज की घोषणा की गयी और इसका नाम जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया. इसके बाद 1955 तक माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई वही मानी गयी, जो सिकदर ने बताई थी. 1955 में भारतीय सर्वेक्षण द्वारा दोबारा माप किए जाने पर इसकी ऊँचाई 29,029 फीट (8,848 मीटर) निर्धारित की गई। सोचिये सिकदर साहब की गणितीय क्षमता कितनी शानदार होगी.... कि जो ऊंचाई उन्होंने उस ज़माने में बिना किसी बड़े Scientific Equipment के बता दी.... वह असली ऊंचाई के कितना करीब थी.
सबको पता है कि दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत की चोटी है माउंट एवरेस्ट. लेकिन क्या आपको पता है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को सबसे पहले किसने कैलकुलेट किया था? जी... वह थे भारतीय Mathematician राधानाथ सिकदर. राधानाथ जी कलकत्ता में पैदा हुए.... प्रेजिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएट हुए..... उनकी Maths हमेशा से अद्भुत थी....उनकी इन्ही क्षमता के कारण उन्हें जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में हो रहे Great Trigonometric Survey में काम मिला. सिकदर कभी एवरेस्ट नहीं गए.... वह Trigonometric तरीको से पहाड़ो की ऊंचाई नापते थे. उस ज़माने में कंचनजँगा को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता था..... सिकदर ने हमेशा माना कि इससे ऊंची चोटी भी है. एवरेस्ट के पूर्वोत्तर दिशाओं से की गयी Trigonometric गणना के दौरान राधानाथ सिकदर ने पीक XV (उस समय इसका नाम माउंट एवरेस्ट नहीं था) की ऊँचाई ठीक 29,000 फीट (8,839 मीटर) निर्धारित की थी। 1856 में आधिकारिक रूप से माउंट एवरेस्ट कि खोज की घोषणा की गयी और इसका नाम जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया. इसके बाद 1955 तक माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई वही मानी गयी, जो सिकदर ने बताई थी. 1955 में भारतीय सर्वेक्षण द्वारा दोबारा माप किए जाने पर इसकी ऊँचाई 29,029 फीट (8,848 मीटर) निर्धारित की गई। सोचिये सिकदर साहब की गणितीय क्षमता कितनी शानदार होगी.... कि जो ऊंचाई उन्होंने उस ज़माने में बिना किसी बड़े Scientific Equipment के बता दी.... वह असली ऊंचाई के कितना करीब थी.
- सबको पता है कि दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत की चोटी है माउंट एवरेस्ट. लेकिन क्या आपको पता है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को सबसे पहले किसने कैलकुलेट किया था? जी... वह थे भारतीय Mathematician राधानाथ सिकदर. राधानाथ जी कलकत्ता में पैदा हुए.... प्रेजिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएट हुए..... उनकी Maths हमेशा से अद्भुत थी....उनकी इन्ही क्षमता के कारण उन्हें जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में हो रहे Great Trigonometric Survey में काम मिला. सिकदर कभी एवरेस्ट नहीं गए.... वह Trigonometric तरीको से पहाड़ो की ऊंचाई नापते थे. उस ज़माने में कंचनजँगा को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता था..... सिकदर ने हमेशा माना कि इससे ऊंची चोटी भी है. एवरेस्ट के पूर्वोत्तर दिशाओं से की गयी Trigonometric गणना के दौरान राधानाथ सिकदर ने पीक XV (उस समय इसका नाम माउंट एवरेस्ट नहीं था) की ऊँचाई ठीक 29,000 फीट (8,839 मीटर) निर्धारित की थी। 1856 में आधिकारिक रूप से माउंट एवरेस्ट कि खोज की घोषणा की गयी और इसका नाम जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया. इसके बाद 1955 तक माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई वही मानी गयी, जो सिकदर ने बताई थी. 1955 में भारतीय सर्वेक्षण द्वारा दोबारा माप किए जाने पर इसकी ऊँचाई 29,029 फीट (8,848 मीटर) निर्धारित की गई। सोचिये सिकदर साहब की गणितीय क्षमता कितनी शानदार होगी.... कि जो ऊंचाई उन्होंने उस ज़माने में बिना किसी बड़े Scientific Equipment के बता दी.... वह असली ऊंचाई के कितना करीब थी.1
- pura video dekhne ke liye YouTube channel mein chahie pura video dekhiae1
- लोध फॉल से सरना धाम 51 किलोमीटर सावन कावर यात्रा का आयोजन बुधवार की सुबह 9:00 किया गया। जहां सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु लोध फॉल से कावर में जल कलश लेकर पैदल 51 किलोमीटर का यात्रा करते हुए मानस मणि दीप सेवा संस्थान सरना धाम मायापुर पहुंचे और शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक अर्पण किया। यह आयोजन मानस मणि दीप सेवा संस्थान हिंदू महासभा एवं बजरंग दल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था। आयोजन के दौरान महुआडार एवं बारेसार थाना पुलिस के द्वारा सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम रखे गए थे।1
- ranchi flay over me thora maze karte hue ,, ranchi flay over me thora maze Ranchi1
- बुढ़मू में श्री गणेश पूजा महोत्सव के लिए समिति का गठन.. बुढ़मू बजार रोड के प्रांगण में आयोजित बैठक में ग्रामीणों की व्यापक उपस्थिति में आगामी श्री गणेश पूजा महोत्सव के सुचारु आयोजन के लिए समिति का गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता पूर्व मुखिया गोवर्धन लोहरा ने की। समिति के मुख्य सदस्य इस प्रकार हैं: (मुख्य संरक्षक) श्री हरदेव साहू; संरक्षक श्री जय साहू, श्री लग्नु साहू; उप संरक्षक श्री गोवर्धन लोहरा व श्री जगेश्वर सिंह; अध्यक्ष जयपाल साहू; उपाध्यक्ष श्री सुरज ठाकुर व श्री विष्णु साहू। सभा में आयोजन के कार्यक्रम, पूजा सामग्री एवं सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा कर त्वरित कार्य विभाजन किया गया। ग्राम वासियों ने एकजुटता से सहयोग का संकल्प लिया और कहा कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शांतिपूर्ण एवं भव्य महोत्सव मनाया जाएगा।1
- आरोग्य ग्राम संगठन का भव्य कार्यक्रम..🙏🏻 #shorts #shortvideo #short #shortsfeed #viralvideo #road1
- पलामू पांकी पंचायत रतनपुर पो चंपी कला ( बाजार टांड़ में बाबू लाला मरांडी कल 12 बजे आगे सभी पहुंचे और सगलदीप के मुस्लिम ने हिंदू दलित परिवार को शोषण किया झारखंड के जितने भरी संख्या में पहुंचे संग्लदीप के मुस्लिम ने हिंदू दलित परिवार किया शोषण हमारे बाबू लाला मरांडी चंपी कला बाजार टांड़ में पहुंच रहे है ( शोषण करनेवाला को होना चाही फंसी के सजा कमेन्ट करके बताया किया हो चाही2