रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्यवाही करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर ही उठे सवाल आदेश कलेक्टर का, अमल ठेकेदारों की मर्जी से तो नहीं होगा? कागजी घोड़े दौड़ेंगे या सच में बंद होगी पैकारी रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने गांवों में बिकने वाली अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम और आबकारी विभाग को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस कार्रवाई की निगरानी कौन करेगा और कार्रवाई करेगा कौन चर्चा तो यह भी है कि जिन विभागों को अवैध शराब रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हीं के जिम्मेदारों की भूमिका पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ जिम्मेदारों के शराब कारोबार से संबंध हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई का भी जिक्र सामने आता रहा है। ऐसे में निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि गांव-गांव पैकारी का कारोबार किसी से छिपा नहीं है। स्थानीय स्तर पर शराब बेचने वालों की जानकारी और सूची तक जिम्मेदार विभागों के पास होने के दावे किए जाते हैं। अगर इन विभागों के कर्मचारी महज 10 प्रतिशत भी ईमानदारी और इच्छाशक्ति से काम करें, तो अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल नहीं है लेकिन विडंबना देखिए, कार्रवाई के नाम पर अक्सर महुआ लाहन की धरपकड़ सुर्खियां बनती है, जबकि गांवों में खुलेआम बिक रही अंग्रेजी शराब और पैकारी के बड़े नेटवर्क पर सवाल जस के तस बने रहते हैं अब देखना यह है कि कलेक्टर का आदेश जमीन पर उतरेगा या फिर कुछ दिनों तक छापेमारी, खानापूर्ति, कागजी रिपोर्ट और फोटो खिंचवाने का दौर चलेगा। _साहब! जनता को हेल्पलाइन नंबर नहीं, नतीजा चाहिए। सवाल महुआ लाहन पकड़ने का नहीं, गांव-गांव बिक रही अवैध शराब बंद कराने का है।_ कहीं ऐसा न हो कि आदेश कलेक्टर का हो, कार्रवाई कागजों में हो और जश्न शराब ठेकेदार मनाएं.......
रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्यवाही करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर ही उठे सवाल आदेश कलेक्टर का, अमल ठेकेदारों की मर्जी से तो नहीं होगा? कागजी घोड़े दौड़ेंगे या सच में बंद होगी पैकारी रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने गांवों में बिकने वाली अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम और आबकारी विभाग को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस कार्रवाई की निगरानी कौन करेगा और कार्रवाई करेगा कौन चर्चा तो यह भी है कि जिन विभागों को अवैध शराब रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हीं के जिम्मेदारों की भूमिका पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ जिम्मेदारों के शराब कारोबार से संबंध हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई का भी जिक्र सामने आता रहा है। ऐसे में निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि गांव-गांव पैकारी का कारोबार किसी से छिपा नहीं है। स्थानीय स्तर पर शराब बेचने वालों की जानकारी और सूची तक जिम्मेदार विभागों के पास होने के दावे किए जाते हैं। अगर इन विभागों के कर्मचारी महज 10 प्रतिशत भी ईमानदारी और इच्छाशक्ति से काम करें, तो अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल नहीं है लेकिन विडंबना देखिए, कार्रवाई के नाम पर अक्सर महुआ लाहन की धरपकड़ सुर्खियां बनती है, जबकि गांवों में खुलेआम बिक रही अंग्रेजी शराब और पैकारी के बड़े नेटवर्क पर सवाल जस के तस बने रहते हैं अब देखना यह है कि कलेक्टर का आदेश जमीन पर उतरेगा या फिर कुछ दिनों तक छापेमारी, खानापूर्ति, कागजी रिपोर्ट और फोटो खिंचवाने का दौर चलेगा। _साहब! जनता को हेल्पलाइन नंबर नहीं, नतीजा चाहिए। सवाल महुआ लाहन पकड़ने का नहीं, गांव-गांव बिक रही अवैध शराब बंद कराने का है।_ कहीं ऐसा न हो कि आदेश कलेक्टर का हो, कार्रवाई कागजों में हो और जश्न शराब ठेकेदार मनाएं.......
- रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्यवाही करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे रीवा में अवैध शराब पर कलेक्टर का सख्त फरमान, लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका पर ही उठे सवाल आदेश कलेक्टर का, अमल ठेकेदारों की मर्जी से तो नहीं होगा? कागजी घोड़े दौड़ेंगे या सच में बंद होगी पैकारी रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने गांवों में बिकने वाली अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम और आबकारी विभाग को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस कार्रवाई की निगरानी कौन करेगा और कार्रवाई करेगा कौन चर्चा तो यह भी है कि जिन विभागों को अवैध शराब रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हीं के जिम्मेदारों की भूमिका पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ जिम्मेदारों के शराब कारोबार से संबंध हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई का भी जिक्र सामने आता रहा है। ऐसे में निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि गांव-गांव पैकारी का कारोबार किसी से छिपा नहीं है। स्थानीय स्तर पर शराब बेचने वालों की जानकारी और सूची तक जिम्मेदार विभागों के पास होने के दावे किए जाते हैं। अगर इन विभागों के कर्मचारी महज 10 प्रतिशत भी ईमानदारी और इच्छाशक्ति से काम करें, तो अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल नहीं है लेकिन विडंबना देखिए, कार्रवाई के नाम पर अक्सर महुआ लाहन की धरपकड़ सुर्खियां बनती है, जबकि गांवों में खुलेआम बिक रही अंग्रेजी शराब और पैकारी के बड़े नेटवर्क पर सवाल जस के तस बने रहते हैं अब देखना यह है कि कलेक्टर का आदेश जमीन पर उतरेगा या फिर कुछ दिनों तक छापेमारी, खानापूर्ति, कागजी रिपोर्ट और फोटो खिंचवाने का दौर चलेगा। _साहब! जनता को हेल्पलाइन नंबर नहीं, नतीजा चाहिए। सवाल महुआ लाहन पकड़ने का नहीं, गांव-गांव बिक रही अवैध शराब बंद कराने का है।_ कहीं ऐसा न हो कि आदेश कलेक्टर का हो, कार्रवाई कागजों में हो और जश्न शराब ठेकेदार मनाएं.......1
- श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में 14 नवंबर को लगेगा ओरल कैंसर स्क्रीनिंग शिविर, विशेषज्ञ करेंगे मरीजों की जांच तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान से होने वाले खतरों के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक पत्रकार कुंदन सिंह रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में मुख कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक पहचान एवं जनजागरूकता को लेकर 14 नवंबर को विशेष स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर डिपार्टमेंट ऑफ डेंटिस्ट्री एवं डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी के संयुक्त तत्वावधान में डेंटिस्ट्री विभाग में आयोजित होगा। शिविर में बाहर से आमंत्रित विशेषज्ञ ओरल कैंसर चिकित्सक द्वारा मरीजों की जांच एवं स्क्रीनिंग की जाएगी। इसका प्रमुख उद्देश्य मुख कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान करना और लोगों को इसके लक्षणों एवं जोखिम कारकों के प्रति जागरूक करना है, ताकि समय रहते उचित उपचार शुरू किया जा सके। शिविर के दौरान तंबाकू, गुटखा, पान मसाला एवं धूम्रपान के सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी जाएगी। विशेष रूप से तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों तथा मुंह में लंबे समय से घाव, सफेद या लाल धब्बे अथवा अन्य असामान्य लक्षणों से परेशान व्यक्तियों को जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य समाज में ओरल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बीमारी की समय रहते पहचान करना और उचित उपचार के माध्यम से गंभीर जटिलताओं को कम करना है। जनहित में अपील: यदि मुंह में लंबे समय तक घाव, सफेद या लाल धब्बे अथवा अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो लापरवाही न करें और चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में 14 नवंबर को लगेगा ओरल कैंसर स्क्रीनिंग शिविर, विशेषज्ञ करेंगे मरीजों की जांच तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान से होने वाले खतरों के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक पत्रकार कुंदन सिंह रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में मुख कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक पहचान एवं जनजागरूकता को लेकर 14 नवंबर को विशेष स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर डिपार्टमेंट ऑफ डेंटिस्ट्री एवं डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी के संयुक्त तत्वावधान में डेंटिस्ट्री विभाग में आयोजित होगा। शिविर में बाहर से आमंत्रित विशेषज्ञ ओरल कैंसर चिकित्सक द्वारा मरीजों की जांच एवं स्क्रीनिंग की जाएगी। इसका प्रमुख उद्देश्य मुख कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान करना और लोगों को इसके लक्षणों एवं जोखिम कारकों के प्रति जागरूक करना है, ताकि समय रहते उचित उपचार शुरू किया जा सके। शिविर के दौरान तंबाकू, गुटखा, पान मसाला एवं धूम्रपान के सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी जाएगी। विशेष रूप से तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों तथा मुंह में लंबे समय से घाव, सफेद या लाल धब्बे अथवा अन्य असामान्य लक्षणों से परेशान व्यक्तियों को जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य समाज में ओरल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बीमारी की समय रहते पहचान करना और उचित उपचार के माध्यम से गंभीर जटिलताओं को कम करना है। जनहित में अपील: यदि मुंह में लंबे समय तक घाव, सफेद या लाल धब्बे अथवा अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो लापरवाही न करें और चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं।1
- *NN81 रीवा टीम परिवार की ओर से सभी देशवासियों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें. ..* NN81 रीवा परिवार की ओर से सभी देशवासियों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें. ..*1
- चित्रकूट मे डॉ मोहन यादव के आगमन की तैयारियां तेज, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कर रहें निरीक्षण।1
- वक्त बदलता है निगाहें बदलती हैं राहें बदलती हैं मुलाकातें बदलती हैं सिर्फ बदलता नहीं तो यह वक्त का हिसाब ! वक्त बदलता है निगाहें बदलती हैं राहें बदलती हैं मुलाकातें बदलती हैं सिर्फ बदलता नहीं तो यह वक्त का हिसाब !1
- सतना नागौद अस्पताल का वीडियो वायरल,पैसे की मांग करते दिखी नर्स सतना नागौद अस्पताल का वीडियो वायरल,पैसे की मांग करते दिखी नर्स1
- गुढ़ नगर की सफाई व्यवस्था की खुली पोल! गांधी प्रतिमा के बगल में कचरे का अंबार, जिम्मेदार अधिकारी मौन? मुख्य बाजार में सड़क पर फैला कचरा, आवारा गौवंश के स्वास्थ्य पर खतरा, राहगीर परेशान ✍️ पत्रकार कुंदन सिंह रीवा। गुढ़ नगर परिषद की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर के मुख्य बाजार में रात के समय सड़क पर कचरे का भारी ढेर लगा रहता है। हालात ऐसे हैं कि आवारा गौवंश इसी कचरे को खाने के लिए मजबूर हैं। इससे उनके बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है। वहीं सड़क पर फैले कचरे के कारण आम नागरिकों और राहगीरों को भी आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर के नागरिक नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के करों का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब जनता अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है, तो नगर परिषद प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे क्यों है? गांधी प्रतिमा के बगल में कचरे का ढेर, स्वच्छता के दावों पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक स्थिति राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक बगल में देखने को मिल रही है, जहां कचरे का भारी ढेर लगा रहता है। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए पूरे देश को स्वच्छता का संदेश दिया था, लेकिन उनकी प्रतिमा के पास ही गंदगी का अंबार लगा होना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। CMO का ध्यान कब जाएगा? नगर के मुख्य बाजार जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर यदि नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो बाकी मोहल्लों और सड़कों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) इस समस्या पर कब संज्ञान लेंगे? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे? नगर परिषद प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों की समस्या को देखते हुए नगर परिषद प्रशासन से मांग है कि मुख्य बाजार में नियमित सफाई कराई जाए, कचरा संग्रहण की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और गांधी प्रतिमा के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए। स्वच्छता केवल नारों, पोस्टरों और अभियानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसकी असली परीक्षा सड़कों और बाजारों में दिखाई देनी चाहिए। अब देखना होगा कि गुढ़ नगर परिषद प्रशासन इस समस्या पर कब तक कार्रवाई करता है। गुढ़ नगर की सफाई व्यवस्था की खुली पोल! गांधी प्रतिमा के बगल में कचरे का अंबार, जिम्मेदार अधिकारी मौन? मुख्य बाजार में सड़क पर फैला कचरा, आवारा गौवंश के स्वास्थ्य पर खतरा, राहगीर परेशान ✍️ पत्रकार कुंदन सिंह रीवा। गुढ़ नगर परिषद की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर के मुख्य बाजार में रात के समय सड़क पर कचरे का भारी ढेर लगा रहता है। हालात ऐसे हैं कि आवारा गौवंश इसी कचरे को खाने के लिए मजबूर हैं। इससे उनके बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है। वहीं सड़क पर फैले कचरे के कारण आम नागरिकों और राहगीरों को भी आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर के नागरिक नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के करों का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब जनता अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है, तो नगर परिषद प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे क्यों है? गांधी प्रतिमा के बगल में कचरे का ढेर, स्वच्छता के दावों पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक स्थिति राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक बगल में देखने को मिल रही है, जहां कचरे का भारी ढेर लगा रहता है। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए पूरे देश को स्वच्छता का संदेश दिया था, लेकिन उनकी प्रतिमा के पास ही गंदगी का अंबार लगा होना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। CMO का ध्यान कब जाएगा? नगर के मुख्य बाजार जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर यदि नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो बाकी मोहल्लों और सड़कों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) इस समस्या पर कब संज्ञान लेंगे? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे? नगर परिषद प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों की समस्या को देखते हुए नगर परिषद प्रशासन से मांग है कि मुख्य बाजार में नियमित सफाई कराई जाए, कचरा संग्रहण की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और गांधी प्रतिमा के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए। स्वच्छता केवल नारों, पोस्टरों और अभियानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसकी असली परीक्षा सड़कों और बाजारों में दिखाई देनी चाहिए। अब देखना होगा कि गुढ़ नगर परिषद प्रशासन इस समस्या पर कब तक कार्रवाई करता है।1
- "नागौद (सतना) | 6 नवंबर 2026,, "सिविल अस्पताल में अटेंडर का पद ही नहीं: सरकार ने की ही नहीं व्यवस्था, 112 से आए घायल को प्राइवेट ड्राइवरों ने उतारा,, नागौद के सिविल अस्पताल में आज इंसानियत की एक मिसाल देखने को मिली, जिसने अस्पताल की व्यवस्था की पोल भी खोल दी। आज एक एक्सीडेंट का घायल मरीज 112 की गाड़ी से सिविल अस्पताल नागौद लाया गया। लेकिन 112 से मरीज को उतारकर इमरजेंसी तक ले जाने के लिए अस्पताल परिसर में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था।इसका कारण ये है कि मरीज अटेंडर नाम का कोई भी कर्मचारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। इसकी सरकार ने कोई व्यवस्था ही नहीं की है,इसकी जानकारी बीएमओ के द्वारा दी गई। ऐसे में वहां मौजूद प्राइवेट गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवरों ने आगे आकर नेक काम किया। उन ड्राइवरों ने खुद 112 की गाड़ी से घायल मरीज को उतारा और उसे इमरजेंसी डॉक्टर तक पहुंचाया।2