*जगदीशपुर की जलमग्न सड़क ने खोली विकास की पोल, निर्माण के बाद एक ईंट तक नहीं लगी—ग्रामीण पूछ रहे, आखिर किसके भरोसे है गांव?* *प्रधान के विकास कार्यों पर उठे सवाल, सड़क- नाली-जलनिकासी की बदहाली बनी व्यवस्था का आईना; शिकायतों के बीच एसडीएम शिखा शंखवार के संज्ञान से अब शुक्रवार के निरीक्षण पर टिकीं निगाहें* बारा, जसरा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जगदीशपुर में सड़क पर भरा पानी अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि गांव में विकास और जिम्मेदारी के दावों की खुली पड़ताल बन गया है। जिस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आवागमन करते हैं, वही रास्ता इन दिनों पानी से लबालब है। पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों तक को रास्ता पार करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की यह हालत अचानक नहीं बनी, बल्कि लंबे समय से रखरखाव और जलनिकासी की अनदेखी का नतीजा है। ऐसे में अब सवाल सीधे ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है—आखिर प्रधान द्वारा गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, किन समस्याओं का संज्ञान लिया गया और किन समस्याओं को यूं ही छोड़ दिया गया? ग्रामीणों के मुताबिक वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में इसी सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से आज तक सड़क पर मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। यदि यह दावा सही है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि निर्माण के बाद सड़क के रखरखाव की व्यवस्था क्या रही? सड़क की हालत लगातार खराब होती रही तो ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी सुध क्यों नहीं ली गई? आखिर किस स्तर पर इसकी निगरानी होनी थी और अब तक किसी जिम्मेदार ने इसकी वास्तविक स्थिति का संज्ञान क्यों नहीं लिया? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी भरने के पीछे केवल बारिश को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यदि पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होती तो सड़क पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति क्यों बनती? गांव में नाली और जलनिकासी की व्यवस्था किस स्थिति में है?यदि नाली है तो उसकी सफाई कब हुई? यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है तो उसे विकसित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? ये सवाल अब ग्रामीणों की जुबान पर हैं। सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को लेकर भी उठ रहा है। प्रधान द्वारा अब तक गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, उनकी प्राथमिकता क्या रही और जिन रास्तों से बड़ी आबादी गुजरती है, उनकी हालत पर कितनी बार ध्यान दिया गया? ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सड़क, नाली, जलनिकासी और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत जरूरत सामने आती है तो ग्रामीणों को अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि ग्राम पंचायत में विकास का वास्तविक पैमाना क्या है—कागजों पर दर्ज कार्य या जमीन पर दिखाई देने वाली सुविधा? ग्रामीणों के अनुसार समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उनका आरोप है कि न तो स्थानीय स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान कराया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को गंभीरता से देखा। आधी से अधिक आबादी के आवागमन से जुड़े रास्ते का इस तरह पानी में डूबा रहना व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जरूर हलचल दिखाई दी। गुरुवार को मीडिया द्वारा उपजिलाधिकारी बारा शिखा शंखवार से समस्या के संबंध में बातचीत की गई। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराने तथा ग्रामीणों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन अब असली सवाल निरीक्षण के बाद होने वाली कार्रवाई का है। क्या शुक्रवार का निरीक्षण केवल सड़क पर भरे पानी की तस्वीर देखकर लौट आएगा या फिर सड़क निर्माण से लेकर उसके रखरखाव, जलनिकासी और ग्राम पंचायत की भूमिका तक पूरी स्थिति की पड़ताल होगी?क्या यह देखा जाएगा कि वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में कराया गया निर्माण किस स्थिति में है और उसके बाद सड़क के रखरखाव के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या ग्राम पंचायत से यह पूछा जाएगा कि इस महत्वपूर्ण रास्ते की समस्या को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या संज्ञान लिया गया? ग्रामीणों की परेशानी का असली समाधान तभी माना जाएगा जब निरीक्षण के बाद सड़क से पानी हटे, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बने और जरूरत के अनुसार सड़क की मरम्मत कराई जाए। महज पानी निकाल देना समस्या का अंत नहीं होगा, क्योंकि अगली बारिश में यदि वही पानी फिर सड़क पर जमा हो गया तो पूरा मामला वहीं लौट आएगा। जरूरत स्थायी जलनिकासी और मजबूत सड़क व्यवस्था की है। जगदीशपुर की सड़क अब प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल बनकर खड़ी है।निर्माण हुआ तो उसके बाद रखरखाव क्यों नहीं हुआ? सड़क खराब हुई तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई? पानी भरता रहा तो जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? ग्रामीण शिकायत करते रहे तो संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? और यदि ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए हैं तो उनका असर जमीन पर कहां दिखाई दे रहा है? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। शुक्रवार का स्थलीय निरीक्षण यह तय करेगा कि जगदीशपुर की शिकायत सिर्फ एक और शिकायत बनकर फाइलों में दबती है या फिर मौके की हकीकत देखकर जिम्मेदारी और समाधान दोनों की दिशा में ठोस कदम उठता है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए; निरीक्षण नहीं, समाधान चाहिए; और कागजी विकास नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
*जगदीशपुर की जलमग्न सड़क ने खोली विकास की पोल, निर्माण के बाद एक ईंट तक नहीं लगी—ग्रामीण पूछ रहे, आखिर किसके भरोसे है गांव?* *प्रधान के विकास कार्यों पर उठे सवाल, सड़क- नाली-जलनिकासी की बदहाली बनी व्यवस्था का आईना; शिकायतों के बीच एसडीएम शिखा शंखवार के संज्ञान से अब शुक्रवार के निरीक्षण पर टिकीं निगाहें* बारा, जसरा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जगदीशपुर में सड़क पर भरा पानी अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि गांव में विकास और जिम्मेदारी के दावों की खुली पड़ताल बन गया है। जिस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आवागमन करते हैं, वही रास्ता इन दिनों पानी से लबालब है। पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों तक को रास्ता पार करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की यह हालत अचानक नहीं बनी, बल्कि लंबे समय से रखरखाव और जलनिकासी की अनदेखी का नतीजा है। ऐसे में अब सवाल सीधे ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है—आखिर प्रधान द्वारा गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, किन समस्याओं का संज्ञान लिया गया और किन समस्याओं को यूं ही छोड़ दिया गया? ग्रामीणों के मुताबिक वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में इसी सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से आज तक सड़क पर मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। यदि यह दावा सही है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि निर्माण के बाद सड़क के रखरखाव की व्यवस्था क्या रही? सड़क की हालत लगातार खराब होती रही तो ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी सुध क्यों नहीं ली गई? आखिर किस स्तर पर इसकी निगरानी होनी थी और अब तक किसी जिम्मेदार ने इसकी वास्तविक स्थिति का संज्ञान क्यों नहीं लिया? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी भरने के पीछे केवल बारिश को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यदि पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होती तो सड़क पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति क्यों बनती? गांव में नाली और जलनिकासी की व्यवस्था किस स्थिति में है?यदि नाली है तो उसकी सफाई कब हुई? यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है तो उसे विकसित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? ये सवाल अब ग्रामीणों की जुबान पर हैं। सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को लेकर भी उठ रहा है। प्रधान द्वारा अब तक गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, उनकी प्राथमिकता क्या रही और जिन रास्तों से बड़ी आबादी गुजरती है, उनकी हालत पर कितनी बार ध्यान दिया गया? ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सड़क, नाली, जलनिकासी और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत जरूरत सामने आती है तो ग्रामीणों को अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि ग्राम पंचायत में विकास का वास्तविक पैमाना क्या है—कागजों पर दर्ज कार्य या जमीन पर दिखाई देने वाली सुविधा? ग्रामीणों के अनुसार समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उनका आरोप है कि न तो स्थानीय स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान कराया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को गंभीरता से देखा। आधी से अधिक आबादी के आवागमन से जुड़े रास्ते का इस तरह पानी में डूबा रहना व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जरूर हलचल दिखाई दी। गुरुवार को मीडिया द्वारा उपजिलाधिकारी बारा शिखा शंखवार से समस्या के संबंध में बातचीत की गई। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराने तथा ग्रामीणों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन अब असली सवाल निरीक्षण के बाद होने वाली कार्रवाई का है। क्या शुक्रवार का निरीक्षण केवल सड़क पर भरे पानी की तस्वीर देखकर लौट आएगा या फिर सड़क निर्माण से लेकर उसके रखरखाव, जलनिकासी और ग्राम पंचायत की भूमिका तक पूरी स्थिति की पड़ताल होगी?क्या यह देखा जाएगा कि वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में कराया गया निर्माण किस स्थिति में है और उसके बाद सड़क के रखरखाव के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या ग्राम पंचायत से यह पूछा जाएगा कि इस महत्वपूर्ण रास्ते की समस्या को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या संज्ञान लिया गया? ग्रामीणों की परेशानी का असली समाधान तभी माना जाएगा जब निरीक्षण के बाद सड़क से पानी हटे, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बने और जरूरत के अनुसार सड़क की मरम्मत कराई जाए। महज पानी निकाल देना समस्या का अंत नहीं होगा, क्योंकि अगली बारिश में यदि वही पानी फिर सड़क पर जमा हो गया तो पूरा मामला वहीं लौट आएगा। जरूरत स्थायी जलनिकासी और मजबूत सड़क व्यवस्था की है। जगदीशपुर की सड़क अब प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल बनकर खड़ी है।निर्माण हुआ तो उसके बाद रखरखाव क्यों नहीं हुआ? सड़क खराब हुई तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई? पानी भरता रहा तो जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? ग्रामीण शिकायत करते रहे तो संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? और यदि ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए हैं तो उनका असर जमीन पर कहां दिखाई दे रहा है? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। शुक्रवार का स्थलीय निरीक्षण यह तय करेगा कि जगदीशपुर की शिकायत सिर्फ एक और शिकायत बनकर फाइलों में दबती है या फिर मौके की हकीकत देखकर जिम्मेदारी और समाधान दोनों की दिशा में ठोस कदम उठता है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए; निरीक्षण नहीं, समाधान चाहिए; और कागजी विकास नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
- प्रयागराज- जलभराव को लेकर जिलाधिकारी ने प्रयागराजवासियों से की अपील प्रयागराज। लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी प्रयागराज ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने तथा प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है। जिलाधिकारी ने अपील की कि जलभराव की स्थिति में लोग धैर्य बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। निचले इलाकों में रहने वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों पर नजर रखने तथा जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। जिलाधिकारी ने प्रयागराजवासियों से अपील की कि प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी आपात स्थिति में संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दें।1
- प्रयागराज अंतर्गत बारा थाना के तहत हर्रों टोल प्लाजा के पास शुरवल साहनी जाते समय एक व्यक्ति की मोटरसाइकिल से गिर जाने के कारण ट्रैक्टर डिसबैलेंस हो गया जिससे पीछे चल रहे ट्रेक्टर डिवाइडर से टकराकर पलट जाने से एक महिला की मृत्यु हो गई1
- शंकरगढ़ थाना क्षेत्र मे हुए सड़क हादसे के संबंध में एसीपी बारा वेद व्यास मिश्रा का बयान.. प्रयागराज : यमुनानगर के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र मे हुए सड़क हादसे के संबंध में एसीपी बारा वेद व्यास मिश्रा का बयान..1
- प्रयागराज नारीबारी चौकी क्षेत्र में भीषण सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो महिला मजदूरों की मौत प्रयागराज नारीबारी चौकी क्षेत्र में भीषण सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो महिला मजदूरों की मौत । सूचना मिलते ही नारीबारी चौकी पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंच गया तथा राहत-बचाव कार्य शुरू किया। मोटरसाइकिल सवार के अचानक रुक जाने से ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया जिससे ट्राली पलट गई और बड़ा हादसा हो गया।घायल मजदूरों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया जहां उनका इलाज चल रहा है।1
- जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील1
- जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील1
- *लखनऊ ब्रेकिंग न्यूज़* *टावर पर चढ़ी महिला को पुलिस ने समझाकर नीचे उतारा* थाना बाजार खाला क्षेत्र में टावर पर चढ़ी महिला सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थाना प्रभारी बृजेश सिंह ने महिला को समझाकर शांत कराया काफी समझाने-बुझाने के बाद महिला टावर से नीचे उतरी महिला के टावर पर चढ़ने की वजह जमीनी विवाद बताई जा रही है पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी1
- जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील जिलाधिकारी प्रयागराज का प्रयागराज वासियों से जलभराव को लेकर अपील1