गुना शहर का प्रमुख जज्जी बस स्टैंड इन दिनों यात्रियों की सुविधा के बजाय शराबियों की अड्डेबाजी के लिए चर्चा में है, जहाँ शाम ढलते ही खुलेआम शराबखोरी शुरू हो जाती है। बस स्टैंड परिसर और उसके आसपास चाय-पान की गुमटियों व दुकानों के पास लोगों के समूह खुलेआम जाम छलकाते नजर आते हैं, जिससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को भारी असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बस स्टैंड से प्रतिदिन ग्वालियर, इंदौर, भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों के लिए सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। शाम के समय बसों का इंतजार कर रही महिलाओं, छात्राओं और परिवारों को अक्सर शराब के नशे में धुत लोगों की अभद्र हरकतों और गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण वे विवाद और झगड़े की स्थिति से बचने के लिए चुपचाप वहाँ से हटने को मजबूर हो जाते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि बस स्टैंड परिसर में पुलिस चौकी मौजूद होने के बावजूद, खुलेआम शराब पीने और पिलाने का यह सिलसिला जारी है, जो कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ चाय-पान की गुमटियों और ठेलों के पास शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है, जहाँ शराब की बोतलें और डिस्पोजल गिलास खुलेआम दिखाई देते हैं, जिससे पूरा माहौल असामाजिक तत्वों के कब्जे में नजर आता है। यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बस स्टैंड परिसर और आसपास नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तथा सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बस स्टैंड यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए है, न कि शराबियों के अड्डे के रूप में विकसित होने के लिए। अब यह देखना बाकी है कि पुलिस चौकी के सामने खुलेआम हो रही इस शराबखोरी पर प्रशासन कब तक अंकुश लगा पाता है, क्योंकि यदि प्रमुख सार्वजनिक स्थान पर यह स्थिति है, तो शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
गुना शहर का प्रमुख जज्जी बस स्टैंड इन दिनों यात्रियों की सुविधा के बजाय शराबियों की अड्डेबाजी के लिए चर्चा में है, जहाँ शाम ढलते ही खुलेआम शराबखोरी शुरू हो जाती है। बस स्टैंड परिसर और उसके आसपास चाय-पान की गुमटियों व दुकानों के पास लोगों के समूह खुलेआम जाम छलकाते नजर आते हैं, जिससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को भारी असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बस स्टैंड से प्रतिदिन ग्वालियर, इंदौर, भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों के लिए सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। शाम के समय बसों का इंतजार कर रही महिलाओं, छात्राओं और परिवारों को अक्सर शराब के नशे में धुत लोगों की अभद्र हरकतों और गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण वे विवाद और झगड़े की स्थिति से बचने के लिए चुपचाप वहाँ से हटने को मजबूर हो जाते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि बस स्टैंड परिसर में पुलिस चौकी मौजूद होने के बावजूद, खुलेआम शराब पीने और पिलाने का यह सिलसिला जारी है, जो कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ चाय-पान की गुमटियों और ठेलों के पास शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है, जहाँ शराब की बोतलें और डिस्पोजल गिलास खुलेआम दिखाई देते हैं, जिससे पूरा माहौल असामाजिक तत्वों के कब्जे में नजर आता है। यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बस स्टैंड परिसर और आसपास नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तथा सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बस स्टैंड यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए है, न कि शराबियों के अड्डे के रूप में विकसित होने के लिए। अब यह देखना बाकी है कि पुलिस चौकी के सामने खुलेआम हो रही इस शराबखोरी पर प्रशासन कब तक अंकुश लगा पाता है, क्योंकि यदि प्रमुख सार्वजनिक स्थान पर यह स्थिति है, तो शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
- कोटा में इलाज के दौरान एक गंभीर घायल व्यक्ति की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव को लेकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति के निधन और उसके आरोपी की पहचान करने में पुलिस की विफलता के विरोध में किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस दस दिनों के भीतर भी सड़क हादसे के आरोपी का पता नहीं लगा पाई है, जिसके कारण लोगों में गहरा आक्रोश है।1
- यहां कपालभाति प्राणायाम के विषय में बताया गया है।1
- बारां जिले के हरनावदा शाहजी में एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हरनावदाशाहजी थाने का घेराव किया और दोषी ट्रैक्टर चालक की पहचान कर उसकी तत्काल गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई की मांग की। जानकारी के अनुसार, अर्जुनपुरा निवासी राकेश मीणा को 19 जून को मनोहरथाना मार्ग पर बाइक से जाते समय एक सड़क हादसे में गंभीर चोटें आई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कोटा रेफर किया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के वक्त मौके से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजर रही थी, जिसका दृश्य सीसीटीवी कैमरे में कैद है। इसके बावजूद पुलिस अब तक ट्रैक्टर चालक की पहचान नहीं कर सकी है और न ही मामले में कोई ठोस कार्रवाई की गई है। पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते हुए थाने का घेराव किया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ट्रैक्टर चालक की पहचान कर उसकी शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। इस पर पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।3
- यहाँ सड़क की सुविधा उपलब्ध नहीं है, साथ ही लाइट का भी अभाव है। यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि यहाँ सड़क नहीं है।1
- रविवार सुबह 11 बजे मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती गौ तस्करी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग को लेकर भंवरगढ़ थाना प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है। यह ज्ञापन जिला पुलिस अधीक्षक के नाम पर दिया गया है। इस ज्ञापन में गौ तस्करों के खिलाफ प्रभावी एवं सख्त कार्रवाई करने, अवैध पशु परिवहन पर तत्काल अंकुश लगाने और रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वाले लोगों ने बताया कि गौ तस्करी की लगातार बढ़ती घटनाओं से क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश है, जिससे कानून-व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस गंभीर मामले में शीघ्र कार्रवाई करते हुए दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।1
- एक यूक्रेनी लड़की के वीडियो में वह अपने देश की गंभीर स्थिति का जिक्र कर रही है, जहाँ उसके अनुसार, हर दूसरी लड़की अकेली है। लड़की ने विशेष रूप से यह चिंता व्यक्त की है कि उसके देश में अरबी और मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में, उसने भारतीयों (हिन्दुओं) से भावुक अपील की है। वह उनसे पूछती है कि वे कहाँ हैं और आग्रह करती है कि वे यूक्रेन आकर उनकी आबादी को संभालने में मदद करें। लड़की ने सीधे शब्दों में कहा है, "भारतीयों, तुम सब कहाँ हो? कम से कम तुम ही आकर हमें बचाओ, समझ रहे हो ना? जनसांख्यिकीय संकट को सुधारो।" वीडियो में भारत की एक विशिष्ट स्थिति का भी उल्लेख किया गया है कि भले ही रूस और यूक्रेन दोनों युद्धरत देश हैं, फिर भी दोनों देशों के लोग आज भी भारत में घूमते हुए मिल जाते हैं।1
- बारां जिले के छिपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में कपालभाति हुई।1
- देहरादून स्थित उत्तरांचल कॉलेज की प्रिंसिपल अल्फोंसा मैथ्यू ने हिंदू छात्रों के माथे से तिलक मिटाने का निर्देश दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने तिलक लगाए हुए छात्रों की तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुप में भेजीं और उन्हें अनुपस्थित भी घोषित करवा दिया। इस घटना पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा रोष फैल गया। कॉलेज प्रशासन के इस कदम की आलोचना की जा रही है क्योंकि इसी संस्थान में बुर्का पहनने की पूरी छूट दी गई थी, जबकि हिंदू छात्रों के माथे पर एक छोटा सा तिलक भी बर्दाश्त नहीं किया गया। इस कथित दोहरे मापदंड के खिलाफ बजरंग दल ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। बजरंग दल के विरोध के बाद, प्रिंसिपल अल्फोंसा मैथ्यू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस निलंबन के बाद, कॉलेज के हिंदू छात्रों ने खुशी-खुशी अपने माथे पर तिलक लगाया और 'जय श्री राम' के नारे लगाए।1
- झालावाड़ जिले के अर्जुनपुरा निवासी 46 वर्षीय राकेश मीणा की करीब दस दिन पहले सड़क हादसे में घायल होने के बाद इलाज के दौरान शनिवार को कोटा में मृत्यु हो गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को हरनावदाशाहजी थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में देरी हुई है और दोषी ट्रैक्टर चालक की पहचान नहीं की गई, जबकि दुर्घटना के समय की एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई है। ग्रामीणों ने मृतक राकेश मीणा का शव थाने के सामने रखकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। वे दोषी ट्रैक्टर चालक की शीघ्र पहचान और गिरफ्तारी के साथ-साथ निष्पक्ष कार्रवाई और आश्रित परिवार को उचित सहायता की मांग कर रहे थे। इस दौरान थानाधिकारी दीनदयाल वैष्णव को भी ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर डीएसपी ताराचंद और उपखंड अधिकारी अभिमन्यु सिंह कुंतल के साथ नरेश मीणा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों और प्रमुख लोगों के साथ बैठक कर नियमानुसार हरसंभव न्यायोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शव को वहां से हटाने और अर्जुनपुरा में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार करने को राजी हुए। मृतक राकेश मीणा असनावर क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक के पद पर कार्यरत था और उसके एक बेटा अध्ययनरत है, जिससे परिवार पर गहरा आर्थिक संकट आ गया है।4