गया: एलपीजी संकट या सिस्टम की साजिश और 'पैनिक बुकिंग' का चक्रव्यूह" विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार : गया जिले में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी ने एक बार फिर वितरण प्रणाली की खामियों और उपभोक्ता व्यवहार के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर द्वारा समाहरणालय में की गई समीक्षा बैठक केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस संकट का 'अलार्म' है जिसे समय रहते न थामा गया तो यह आम जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर सकता है। आपूर्ति बनाम पैनिक का गणित: जिले के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 14,000 सिलेंडरों की मांग रहती है, वहीं वर्तमान में 60,000 रिफिल पेंडिंग हैं। यह स्पष्ट है कि यह संकट आपूर्ति की कमी से ज्यादा 'पैनिक बुकिंग' (डर की वजह से की गई बुकिंग) की उपज है। जब उपभोक्ता असुरक्षा की भावना में जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने की कोशिश करता है, तो वितरण की पूरी चेन चरमरा जाती है। डिलीवरी का खेल और डिजिटल धोखाधड़ी: बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा 'बिना डिलीवरी ओटीपी मैसेज' का उठा। यह डिजिटल इंडिया के दौर में एक संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। ग्राहक को गैस मिली नहीं और सिस्टम में उसे 'डिलीवर्ड' दिखा दिया गया। जिला पदाधिकारी का वेंडरों पर सीधी कार्रवाई और डिस्ट्रीब्यूटरों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश स्वागत योग्य है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शित के बजाय धोखाधड़ी के लिए हो, तो प्रशासन का 'हंटर' चलना अनिवार्य हो जाता है। संस्थानों की 'खपत' पर नजर: कल्याण विभाग के छात्रावासों में गैस की किल्लत होना संवेदनशील मामला है। वहीं, दूसरी ओर कई संस्थान खपत से अधिक डिमांड कर रहे हैं। जिला प्रशासन का यह निर्णय कि "कम खपत-ज्यादा डिमांड" वाले संस्थानों की आपूर्ति में कटौती की जाए, संसाधनों के उचित आवंटन की दिशा में एक साहसिक कदम है। मुख्य चिंता: क्या छापेमारी दल और नियंत्रण कक्ष केवल शिकायतों के निपटारे तक सीमित रहेंगे, या उन बिचौलियों के नेटवर्क को भी तोड़ेंगे जो इस कृत्रिम किल्लत का लाभ उठा रहे हैं? समाधान की राह: प्रशासन अपनी ओर से 13,030 सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई कर रहा है, जो कि मांग के करीब है। लेकिन जनता को भी यह समझना होगा कि पैनिक बुकिंग करके वे खुद अपने लिए गड्ढा खोद रहे हैं। सख्ती: वेंडरों पर केवल जुर्माना नहीं, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। जागरूकता: उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाना होगा कि स्टॉक पर्याप्त है, ताकि वे अनावश्यक बुकिंग से बचें। निगरानी: जिला नियंत्रण कक्ष (0631-2222253) की सक्रियता ही इस संकट का वास्तविक समाधान है। निष्कर्ष: गया का गैस संकट प्रशासनिक कड़ाई और जन-सहयोग के बीच के संतुलन से ही सुलझेगा। यदि डिजिटल धोखाधड़ी करने वाले वेंडरों को सबक नहीं सिखाया गया, तो आंकड़ों की बाजीगरी में आम आदमी की रसोई ठंडी ही रहेगी।
गया: एलपीजी संकट या सिस्टम की साजिश और 'पैनिक बुकिंग' का चक्रव्यूह" विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार : गया जिले में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी ने एक बार फिर वितरण प्रणाली की खामियों और उपभोक्ता व्यवहार के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर द्वारा समाहरणालय में की गई समीक्षा बैठक केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस संकट का 'अलार्म' है जिसे समय रहते न थामा गया तो यह आम जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर सकता है। आपूर्ति बनाम पैनिक का गणित: जिले के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 14,000 सिलेंडरों की मांग रहती है, वहीं वर्तमान में 60,000 रिफिल पेंडिंग हैं। यह स्पष्ट है कि यह संकट आपूर्ति की कमी से ज्यादा 'पैनिक बुकिंग' (डर की वजह से की गई बुकिंग) की उपज है। जब उपभोक्ता असुरक्षा की भावना में जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने की कोशिश करता है, तो वितरण की पूरी चेन चरमरा जाती है। डिलीवरी का खेल और डिजिटल धोखाधड़ी: बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा 'बिना डिलीवरी ओटीपी मैसेज' का उठा। यह डिजिटल इंडिया के दौर में एक संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। ग्राहक को गैस मिली नहीं और सिस्टम में उसे 'डिलीवर्ड' दिखा दिया गया। जिला पदाधिकारी का वेंडरों पर सीधी कार्रवाई और डिस्ट्रीब्यूटरों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश स्वागत योग्य है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शित के बजाय धोखाधड़ी के लिए हो, तो प्रशासन का 'हंटर' चलना अनिवार्य हो जाता है। संस्थानों की 'खपत' पर नजर: कल्याण विभाग के छात्रावासों में गैस की किल्लत होना संवेदनशील मामला है। वहीं, दूसरी ओर कई संस्थान खपत से अधिक डिमांड कर रहे हैं। जिला प्रशासन का यह निर्णय कि "कम खपत-ज्यादा डिमांड" वाले संस्थानों की आपूर्ति में कटौती की जाए, संसाधनों के उचित आवंटन की दिशा में एक साहसिक कदम है। मुख्य चिंता: क्या छापेमारी दल और नियंत्रण कक्ष केवल शिकायतों के निपटारे तक सीमित रहेंगे, या उन बिचौलियों के नेटवर्क को भी तोड़ेंगे जो इस कृत्रिम किल्लत का लाभ उठा रहे हैं? समाधान की राह: प्रशासन अपनी ओर से 13,030 सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई कर रहा है, जो कि मांग के करीब है। लेकिन जनता को भी यह समझना होगा कि पैनिक बुकिंग करके वे खुद अपने लिए गड्ढा खोद रहे हैं। सख्ती: वेंडरों पर केवल जुर्माना नहीं, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। जागरूकता: उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाना होगा कि स्टॉक पर्याप्त है, ताकि वे अनावश्यक बुकिंग से बचें। निगरानी: जिला नियंत्रण कक्ष (0631-2222253) की सक्रियता ही इस संकट का वास्तविक समाधान है। निष्कर्ष: गया का गैस संकट प्रशासनिक कड़ाई और जन-सहयोग के बीच के संतुलन से ही सुलझेगा। यदि डिजिटल धोखाधड़ी करने वाले वेंडरों को सबक नहीं सिखाया गया, तो आंकड़ों की बाजीगरी में आम आदमी की रसोई ठंडी ही रहेगी।
- Post by Hindustan Express News1
- आमस के बुधौल बाजार के पास कंटेनर वाहन साइड करने दौरान हाइ वोल्टेज प्रभावित तार के चपेट आई, चालक गंभीर रूप से घायल गया जिला के आमस थाना क्षेत्र स्थित बुधौल बाजार के पास सोमवार की दोपहर एक कंटेनर वाहन में हाइ वॉल्टेज प्रभावित तार में सटने से चालक गंभीर रूप से घायल हो गया।घायल चालक की पहचान झारखंड के हजारीबाग निवासी कामेश्वर यादव के रूप में की गई। जिसे स्थानीय लोगों के सहयोग से आमस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया गया।जहां उपस्थित चिकित्सकों के द्वारा उपचार किया गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शेरघाटी से औरंगाबाद की ओर जा रही कंटेनर वाहन ने बुधौल बाजार के पास सड़क किनारे साइड करने के दौरान हाइ वोल्टेज प्रभावित तार वाहन के ऊपर हिस्सा में सट गया जिसके चपेट में आने से चालक को दाहिने पैर के एक अंगुली पूरी तरह जल और दाहिने कंधा के पास भी जल गया साथ ही वाहन के टायर भी बलास्ट कर गया।जिसे देखते ही आस पास के लोगों को साफी भीड़ लग गई।जिसे बिजली विभाग को सूचना देखकर बिजली कटवाया गया और ग्रामीणों ने चालक को वाहन से उतार कर आमस सीएचसी में भर्ती करवा दिया।जहां इलाज रत है।1
- नालन्दा जिला के मघड़ा स्थित शितला माँ मंदीर में पुजा के दौरान भगदड़। आठ लोगों की गई जान। बीस से अधिक लोगों की घायल होने की संभावना।1
- गया जंक्शन से लावारिस बैग से भारी मात्रा मे कछुआ बरामद1
- गया शहर के घुघडी ताड़ बाईपास स्थित टेम्पु स्टैंड के पास वाटर सप्लाई पाइप लीकेज होने से हजारों लीटर पानी हो रहा है बर्बाद। पानी रोड पर बहने से रोड जहां तहा ऊबड़ खाबड़ हो गया है। किसी भी समय दुर्घटना होने की संभावना है।1
- Post by जन सेवक1
- उत्क्रमित मध्य विद्यालय पाती में आठवीं कक्षा उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के लिए एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों को फूल-माला पहनाकर, मिठाई खिलाकर और पुरस्कार स्वरूप कलम भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने कहा कि एक शिक्षक के लिए यह अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण होता है, जब छोटे-छोटे बच्चों को प्रथम कक्षा से शिक्षित कर आठवीं तक पहुंचाया जाता है। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार का आयोजन पहले नहीं होता था, लेकिन इस वर्ष प्रधानाचार्य के प्रयास से बच्चों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।1
- Post by Hindustan Express News1